The Cantonments Act, 2006 37अध्याय III · Employees
धारा 37 · किसी व्यक्ति की बोर्ड के कर्मचारी के रूप में अयोग्यता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति, जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं या अपने साझेदार द्वारा किसी बोर्ड के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी अनुबंध में, या किसी बोर्ड के अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी रोजगार में, बोर्ड के कर्मचारी के रूप में न होकर कोई हिस्सा या हित हो, ऐसे बोर्ड का कर्मचारी नहीं बनेगा या बना नहीं रहेगा।
(2) बोर्ड का कोई कर्मचारी जो जानबूझकर स्वयं या अपने साझेदार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बोर्ड के साथ, बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से किसी अनुबंध में, या बोर्ड के अधीन, बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से किसी रोजगार में, बोर्ड के कर्मचारी के रूप में न होकर, कोई हिस्सा या हित प्राप्त करता है या बनाए रखता है, तो उसे भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 168 के तहत अपराध करने वाला माना जाएगा।
(3) इस धारा की कोई बात किसी बोर्ड के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी अनुबंध में, या उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी रोजगार में किसी शेयर या हित पर लागू नहीं होगी, यदि वह शेयर या हित बोर्ड के साथ अनुबंध करने वाली, या बोर्ड द्वारा नियोजित, या उसकी ओर से नियोजित किसी कंपनी में है, या बोर्ड को भूमि या भवन के किसी पट्टे या बिक्री में, या बोर्ड द्वारा खरीद में, या इसके लिए किसी समझौते में, कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की अनुमति से प्राप्त या बरकरार रखा गया है।
(4) बोर्ड के कर्मचारी के रूप में रोजगार के लिए आवेदन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, यदि वह बोर्ड के किसी सदस्य या बोर्ड से पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले किसी ऐसे व्यक्ति से रक्त या विवाह द्वारा संबंधित है जो निम्न श्रेणी का कर्मचारी नहीं है, तो नियुक्ति किए जाने से पहले नियुक्ति प्राधिकारी को ऐसे संबंध की सूचना और प्रकृति देगा, और यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो उसकी नियुक्ति अमान्य होगी, परन्तु उसके द्वारा पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(2) बोर्ड का कोई कर्मचारी जो जानबूझकर स्वयं या अपने साझेदार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बोर्ड के साथ, बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से किसी अनुबंध में, या बोर्ड के अधीन, बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से किसी रोजगार में, बोर्ड के कर्मचारी के रूप में न होकर, कोई हिस्सा या हित प्राप्त करता है या बनाए रखता है, तो उसे भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 168 के तहत अपराध करने वाला माना जाएगा।
(3) इस धारा की कोई बात किसी बोर्ड के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी अनुबंध में, या उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी रोजगार में किसी शेयर या हित पर लागू नहीं होगी, यदि वह शेयर या हित बोर्ड के साथ अनुबंध करने वाली, या बोर्ड द्वारा नियोजित, या उसकी ओर से नियोजित किसी कंपनी में है, या बोर्ड को भूमि या भवन के किसी पट्टे या बिक्री में, या बोर्ड द्वारा खरीद में, या इसके लिए किसी समझौते में, कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की अनुमति से प्राप्त या बरकरार रखा गया है।
(4) बोर्ड के कर्मचारी के रूप में रोजगार के लिए आवेदन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, यदि वह बोर्ड के किसी सदस्य या बोर्ड से पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले किसी ऐसे व्यक्ति से रक्त या विवाह द्वारा संबंधित है जो निम्न श्रेणी का कर्मचारी नहीं है, तो नियुक्ति किए जाने से पहले नियुक्ति प्राधिकारी को ऐसे संबंध की सूचना और प्रकृति देगा, और यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो उसकी नियुक्ति अमान्य होगी, परन्तु उसके द्वारा पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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