The Cantonments Act, 2006 347अध्याय XVI · Rules and Bye-laws
धारा 347 · नियमों से संबंधित पूरक प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 346 के अंतर्गत नियम या तो सभी छावनियों के लिए सामान्यतः बनाया जा सकता है या किसी एक या अधिक छावनियों के पूरे या किसी भाग के लिए बनाया जा सकता है।
(2) धारा 346 की उपधारा (2) के खंड (सी) के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति में किसी नियम या उनमें से किसी को छावनी अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्वव्यापी प्रभाव देने की शक्ति शामिल होगी, परन्तु किसी नियम को इस प्रकार पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं दिया जाएगा जिससे किसी ऐसे व्यक्ति के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े जिस पर वह नियम लागू होता हो।
बशर्ते कि जहां किसी नियम को पूर्वव्यापी प्रभाव देना हो, तो उसके कारण और ऐसे पूर्वव्यापी प्रभाव देने का प्रभाव नियमों के मसौदे के साथ प्रकाशित किया जाएगा, जब धारा 346 की उपधारा (1) के तहत जनमत जानने के लिए ऐसा मसौदा प्रकाशित किया जाता है।
(3) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम आधिकारिक राजपत्र में और ऐसे अन्य तरीके से, यदि कोई हो, जैसा केंद्र सरकार निर्देश दे, प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर वे इस अधिनियम में अधिनियमित किए गए नियमों के समान प्रभावी होंगे।
(4) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) धारा 346 की उपधारा (2) के खंड (सी) के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति में किसी नियम या उनमें से किसी को छावनी अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्वव्यापी प्रभाव देने की शक्ति शामिल होगी, परन्तु किसी नियम को इस प्रकार पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं दिया जाएगा जिससे किसी ऐसे व्यक्ति के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े जिस पर वह नियम लागू होता हो।
बशर्ते कि जहां किसी नियम को पूर्वव्यापी प्रभाव देना हो, तो उसके कारण और ऐसे पूर्वव्यापी प्रभाव देने का प्रभाव नियमों के मसौदे के साथ प्रकाशित किया जाएगा, जब धारा 346 की उपधारा (1) के तहत जनमत जानने के लिए ऐसा मसौदा प्रकाशित किया जाता है।
(3) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम आधिकारिक राजपत्र में और ऐसे अन्य तरीके से, यदि कोई हो, जैसा केंद्र सरकार निर्देश दे, प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर वे इस अधिनियम में अधिनियमित किए गए नियमों के समान प्रभावी होंगे।
(4) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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