MS Act 289अध्याय XIV · Penalties and Procedures
धारा 289 · किसी विदेशी पोत को, जिसने क्षति पहुंचाई हो, हिरासत में लेने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब भी दुनिया के किसी भी हिस्से में सरकार या भारत के किसी नागरिक या किसी कंपनी की संपत्ति को किसी ऐसे जहाज द्वारा नुकसान पहुंचाया गया हो जो भारतीय जहाज न हो और वह जहाज भारतीय अधिकार क्षेत्र में पाया जाता हो, तो ऐसे जहाज को उच्च न्यायालय के आदेश द्वारा उस आवेदन पर रोक दिया जाएगा जिसमें यह आरोप लगाया गया हो कि नुकसान उस जहाज के कप्तान या किसी अन्य नाविक के दुर्व्यवहार या कौशल की कमी के कारण हुआ था।
(2) उपधारा ( 1 ) के तहत निरोध का आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक कि जहाज मालिक, कप्तान या माल प्राप्तकर्ता ने क्षति के संबंध में किसी दावे को पूरा नहीं कर दिया हो या उच्च न्यायालय की संतुष्टि के लिए सभी लागतों और हर्जाने का भुगतान करने के लिए सुरक्षा नहीं दे दी हो।
(3) जब भी ऐसा प्रतीत हो कि इस धारा के अंतर्गत आवेदन किए जाने से पहले पोत भारत या भारत के प्रादेशिक जलक्षेत्र से प्रस्थान कर चुका होगा, तो कोई भी उचित अधिकारी आवेदन किए जाने तक पोत को रोक सकता है और वह अधिकारी हिरासत के संबंध में किसी भी लागत या क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि हिरासत उचित आधारों के बिना की गई है।
(4) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी क्षति के संबंध में किसी कानूनी कार्यवाही में, सुरक्षा देने वाले व्यक्ति को प्रतिवादी बनाया जाएगा और ऐसी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए उसे उस पोत का स्वामी माना जाएगा जिसने क्षति पहुंचाई है।
(2) उपधारा ( 1 ) के तहत निरोध का आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक कि जहाज मालिक, कप्तान या माल प्राप्तकर्ता ने क्षति के संबंध में किसी दावे को पूरा नहीं कर दिया हो या उच्च न्यायालय की संतुष्टि के लिए सभी लागतों और हर्जाने का भुगतान करने के लिए सुरक्षा नहीं दे दी हो।
(3) जब भी ऐसा प्रतीत हो कि इस धारा के अंतर्गत आवेदन किए जाने से पहले पोत भारत या भारत के प्रादेशिक जलक्षेत्र से प्रस्थान कर चुका होगा, तो कोई भी उचित अधिकारी आवेदन किए जाने तक पोत को रोक सकता है और वह अधिकारी हिरासत के संबंध में किसी भी लागत या क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि हिरासत उचित आधारों के बिना की गई है।
(4) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी क्षति के संबंध में किसी कानूनी कार्यवाही में, सुरक्षा देने वाले व्यक्ति को प्रतिवादी बनाया जाएगा और ऐसी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए उसे उस पोत का स्वामी माना जाएगा जिसने क्षति पहुंचाई है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
