MS Act 288अध्याय XIV · Penalties and Procedures
धारा 288 · जब गवाह को पेश नहीं किया जा सकता है, तो गवाही को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां इस अधिनियम के तहत किसी न्यायालय, अधिकारी या प्राधिकरण के समक्ष किसी कानूनी कार्यवाही के संबंध में किसी गवाह की गवाही की आवश्यकता हो, और प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति गवाह को पेश न करे, तो उसी विषय के संबंध में भारत में किसी न्यायालय के समक्ष या कहीं और किसी भारतीय राजदूत के समक्ष गवाह द्वारा पहले दिया गया कोई भी बयान साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा---
(क) यदि बयान उस न्यायालय के पीठासीन अधिकारी या राजदूत के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किया जाता है, जिसके समक्ष यह बयान दिया गया है;
(ख) यदि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से गवाह से जिरह करने का अवसर मिला हो;
(ग) यदि कार्यवाही आपराधिक है, तो इस बात के प्रमाण पर कि बयान आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया था।
(2) किसी भी मामले में ऐसे बयान पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर या आधिकारिक पद को साबित करना आवश्यक नहीं होगा, और ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को गवाह से जिरह करने का अवसर दिया गया था, और यह कि बयान, यदि किसी आपराधिक कार्यवाही में दिया गया है, तो आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में दिया गया था, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत होगा कि उसे वह अवसर दिया गया था और बयान उसी प्रकार दिया गया था।
(क) यदि बयान उस न्यायालय के पीठासीन अधिकारी या राजदूत के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किया जाता है, जिसके समक्ष यह बयान दिया गया है;
(ख) यदि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से गवाह से जिरह करने का अवसर मिला हो;
(ग) यदि कार्यवाही आपराधिक है, तो इस बात के प्रमाण पर कि बयान आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया था।
(2) किसी भी मामले में ऐसे बयान पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर या आधिकारिक पद को साबित करना आवश्यक नहीं होगा, और ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को गवाह से जिरह करने का अवसर दिया गया था, और यह कि बयान, यदि किसी आपराधिक कार्यवाही में दिया गया है, तो आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में दिया गया था, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत होगा कि उसे वह अवसर दिया गया था और बयान उसी प्रकार दिया गया था।
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