MS Act 242अध्याय I · Wreck
धारा 242 · मलबे को हटाने में सुविधा प्रदान करने के उपाय।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब यह निर्धारित हो जाए कि मलबा एक खतरा है, तो मलबा प्राप्त करने वाला केंद्र सरकार को खतरे की विस्तृत जानकारी ऐसे तरीके से देगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत सूचना प्राप्त होने पर केंद्र सरकार निम्नलिखित कार्य करेगी:---
(क) उस राज्य की सरकार को सूचित करना जिसमें जहाज पंजीकृत है तथा पंजीकृत जहाज मालिक को भी; और
(ख) ऐसे राज्य और दुर्घटना से प्रभावित किसी भी राज्य से ऐसी दुर्घटना के संबंध में उठाए जाने वाले उपायों के बारे में परामर्श करना।
(3) पंजीकृत जहाज मालिक या जहाज संचालक ऐसे मलबे को हटाएगा जिसे खतरा माना जाता है: बशर्ते कि यदि इस बात पर कोई विवाद उत्पन्न होता है कि मलबा खतरा है या नहीं, तो केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होगा।
(4) जब किसी जहाज़ के मलबे को खतरा माना जाता है, तो पंजीकृत जहाज मालिक या कोई भी इच्छुक व्यक्ति केंद्र सरकार या मलबे के प्राप्तकर्ता को इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उसके द्वारा बनाए गए बीमा या अन्य वित्तीय सुरक्षा का प्रमाण प्रस्तुत करेगा।
(5) जहाज़ के मलबे को प्राप्त करने वाला या जहाज़ का मालिक या जहाज़ का संचालक मलबे को हटाने की योजना केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगा।
(6) केंद्र सरकार उपधारा ( 5 ) के अधीन उसके समक्ष प्रस्तुत योजना को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगी या कुछ संशोधनों के साथ स्वीकृत करेगी तथा खतरे की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, मामले-दर-मामले के आधार पर वह समय निर्दिष्ट करेगी जिसके भीतर जहाज मालिक या संचालक मलबे को हटाएगा।
(7) यदि जहाज मालिक या संचालक उपधारा ( 6 ) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर मलबे को नहीं हटाते हैं, तो केंद्र सरकार ऐसे जहाज मालिक या संचालक के खर्च पर, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के विचारों के अनुरूप, उपलब्ध सबसे व्यावहारिक और शीघ्र साधनों द्वारा मलबे को हटा सकती है और मलबा या ऐसे मलबे से प्राप्त कोई भी बिक्री आय केंद्र सरकार की संपत्ति बन जाएगी।
(8) जहाँ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता हो और मलबे के प्राप्तकर्ता ने जहाज के मालिक या संचालक को तदनुसार सूचित कर दिया हो, तो वह ऐसे जहाज के मालिक या संचालक के खर्च पर, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के विचारों के अनुरूप, उपलब्ध सबसे व्यावहारिक और शीघ्र साधनों द्वारा मलबे को हटा सकता है।
(9) जहाँ इस धारा के अंतर्गत लिया गया कोई उपाय बचाव उपाय समझा जाए, वहाँ इस भाग के अध्याय II के बचाव संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
(2) उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत सूचना प्राप्त होने पर केंद्र सरकार निम्नलिखित कार्य करेगी:---
(क) उस राज्य की सरकार को सूचित करना जिसमें जहाज पंजीकृत है तथा पंजीकृत जहाज मालिक को भी; और
(ख) ऐसे राज्य और दुर्घटना से प्रभावित किसी भी राज्य से ऐसी दुर्घटना के संबंध में उठाए जाने वाले उपायों के बारे में परामर्श करना।
(3) पंजीकृत जहाज मालिक या जहाज संचालक ऐसे मलबे को हटाएगा जिसे खतरा माना जाता है: बशर्ते कि यदि इस बात पर कोई विवाद उत्पन्न होता है कि मलबा खतरा है या नहीं, तो केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होगा।
(4) जब किसी जहाज़ के मलबे को खतरा माना जाता है, तो पंजीकृत जहाज मालिक या कोई भी इच्छुक व्यक्ति केंद्र सरकार या मलबे के प्राप्तकर्ता को इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उसके द्वारा बनाए गए बीमा या अन्य वित्तीय सुरक्षा का प्रमाण प्रस्तुत करेगा।
(5) जहाज़ के मलबे को प्राप्त करने वाला या जहाज़ का मालिक या जहाज़ का संचालक मलबे को हटाने की योजना केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगा।
(6) केंद्र सरकार उपधारा ( 5 ) के अधीन उसके समक्ष प्रस्तुत योजना को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगी या कुछ संशोधनों के साथ स्वीकृत करेगी तथा खतरे की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, मामले-दर-मामले के आधार पर वह समय निर्दिष्ट करेगी जिसके भीतर जहाज मालिक या संचालक मलबे को हटाएगा।
(7) यदि जहाज मालिक या संचालक उपधारा ( 6 ) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर मलबे को नहीं हटाते हैं, तो केंद्र सरकार ऐसे जहाज मालिक या संचालक के खर्च पर, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के विचारों के अनुरूप, उपलब्ध सबसे व्यावहारिक और शीघ्र साधनों द्वारा मलबे को हटा सकती है और मलबा या ऐसे मलबे से प्राप्त कोई भी बिक्री आय केंद्र सरकार की संपत्ति बन जाएगी।
(8) जहाँ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता हो और मलबे के प्राप्तकर्ता ने जहाज के मालिक या संचालक को तदनुसार सूचित कर दिया हो, तो वह ऐसे जहाज के मालिक या संचालक के खर्च पर, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के विचारों के अनुरूप, उपलब्ध सबसे व्यावहारिक और शीघ्र साधनों द्वारा मलबे को हटा सकता है।
(9) जहाँ इस धारा के अंतर्गत लिया गया कोई उपाय बचाव उपाय समझा जाए, वहाँ इस भाग के अध्याय II के बचाव संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
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