MS Act 170अध्याय II · Limitation of Liability for Maritime Claims
धारा 170 · निधि का वितरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 165 और 166 के अधीन देयता की सीमाओं के अधीन रहते हुए, निधि को दावेदारों के बीच उनके स्थापित दावों के अनुपात में वितरित किया जाएगा।
(2) किसी पोत या संपत्ति के संबंध में कोई ग्रहणाधिकार या अन्य अधिकार इस धारा के अंतर्गत अनेक दावेदारों के बीच निधि के वितरण के अनुपात को प्रभावित नहीं करेगा।
(3) यदि निधि वितरित होने से पहले, उत्तरदायी व्यक्ति या उसके बीमाकर्ता ने निधि के विरुद्ध किसी दावे का निपटारा कर दिया है, तो ऐसा व्यक्ति, उसके द्वारा भुगतान की गई राशि तक, प्रतिस्थापन द्वारा उन अधिकारों को प्राप्त कर लेगा जो इस अध्याय के अंतर्गत उस व्यक्ति को प्राप्त होते जिसे मुआवजा दिया गया होता।
(4) उपधारा ( 3 ) के अधीन प्रतिस्थापन का अधिकार उत्तरदायी व्यक्ति या उसके बीमाकर्ताओं के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भी मुआवजे की किसी राशि के संबंध में प्रयोग किया जा सकता है, जो उस व्यक्ति ने भुगतान किया हो।
(5) जहां उत्तरदायी व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति यह सिद्ध कर दे कि उसे बाद में किसी ऐसी राशि का पूर्ण या आंशिक भुगतान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है, जिसके संबंध में निधि के वितरण से पहले मुआवजा दिए जाने पर उस व्यक्ति को इस धारा के तहत प्रतिस्थापन का अधिकार प्राप्त होता, तो उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार, जहां निधि का गठन किया गया है, यह आदेश दे सकती है कि ऐसी पर्याप्त राशि अस्थायी रूप से अलग रखी जाए जिससे वह व्यक्ति बाद में निधि के विरुद्ध अपना दावा लागू कर सके।
(2) किसी पोत या संपत्ति के संबंध में कोई ग्रहणाधिकार या अन्य अधिकार इस धारा के अंतर्गत अनेक दावेदारों के बीच निधि के वितरण के अनुपात को प्रभावित नहीं करेगा।
(3) यदि निधि वितरित होने से पहले, उत्तरदायी व्यक्ति या उसके बीमाकर्ता ने निधि के विरुद्ध किसी दावे का निपटारा कर दिया है, तो ऐसा व्यक्ति, उसके द्वारा भुगतान की गई राशि तक, प्रतिस्थापन द्वारा उन अधिकारों को प्राप्त कर लेगा जो इस अध्याय के अंतर्गत उस व्यक्ति को प्राप्त होते जिसे मुआवजा दिया गया होता।
(4) उपधारा ( 3 ) के अधीन प्रतिस्थापन का अधिकार उत्तरदायी व्यक्ति या उसके बीमाकर्ताओं के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भी मुआवजे की किसी राशि के संबंध में प्रयोग किया जा सकता है, जो उस व्यक्ति ने भुगतान किया हो।
(5) जहां उत्तरदायी व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति यह सिद्ध कर दे कि उसे बाद में किसी ऐसी राशि का पूर्ण या आंशिक भुगतान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है, जिसके संबंध में निधि के वितरण से पहले मुआवजा दिए जाने पर उस व्यक्ति को इस धारा के तहत प्रतिस्थापन का अधिकार प्राप्त होता, तो उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार, जहां निधि का गठन किया गया है, यह आदेश दे सकती है कि ऐसी पर्याप्त राशि अस्थायी रूप से अलग रखी जाए जिससे वह व्यक्ति बाद में निधि के विरुद्ध अपना दावा लागू कर सके।
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