MS Act 168अध्याय II · Limitation of Liability for Maritime Claims
धारा 168 · परिसीमा निधि का गठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति जिस पर उत्तरदायी होने का आरोप है, वह केंद्र सरकार या उच्च न्यायालय के साथ एक निधि का गठन कर सकता है जिसमें उन दावों के संबंध में कानूनी कार्यवाही शुरू की जाती है या शुरू किए जाने की उम्मीद है जिन्हें इस अध्याय के तहत सीमित किया जा सकता है।
(2) निधि का गठन धारा 165 या धारा 166, धारा 167 के प्रावधानों के अनुसार परिकलित राशियों के योग से किया जाएगा, जो उन दावों पर लागू होती हैं जिनके लिए देयता की सीमा लागू की जाती है और जो एक ही विशिष्ट अवसर से उत्पन्न होते हैं, साथ ही उस पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित दर से ब्याज, देयता उत्पन्न होने की तिथि से निधि के गठन की तिथि तक।
(3) उपधारा ( 2 ) के अनुसार परिकलित मूल्य की या उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य की परिसीमन निधि का गठन निम्नलिखित द्वारा किया जाएगा:
(क) राशि जमा करना; या
(ख) किसी भी लागू कानून के तहत स्वीकार्य गारंटी प्रस्तुत करना जिसे उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त माना जाता हो।
(4) इस प्रकार गठित निधि केवल उन दावों के भुगतान के लिए उपलब्ध होगी जिनके संबंध में देयता की सीमा लागू की जा सकती है।
(5) धारा 167 में निर्दिष्ट व्यक्तियों या जहाज मालिकों या बचावकर्ताओं में से किसी एक द्वारा या उसके बीमाकर्ता द्वारा गठित निधि को ऐसे सभी व्यक्तियों या जहाज मालिकों या बचावकर्ताओं या उनके बीमाकर्ताओं द्वारा गठित माना जाएगा।
(2) निधि का गठन धारा 165 या धारा 166, धारा 167 के प्रावधानों के अनुसार परिकलित राशियों के योग से किया जाएगा, जो उन दावों पर लागू होती हैं जिनके लिए देयता की सीमा लागू की जाती है और जो एक ही विशिष्ट अवसर से उत्पन्न होते हैं, साथ ही उस पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित दर से ब्याज, देयता उत्पन्न होने की तिथि से निधि के गठन की तिथि तक।
(3) उपधारा ( 2 ) के अनुसार परिकलित मूल्य की या उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य की परिसीमन निधि का गठन निम्नलिखित द्वारा किया जाएगा:
(क) राशि जमा करना; या
(ख) किसी भी लागू कानून के तहत स्वीकार्य गारंटी प्रस्तुत करना जिसे उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त माना जाता हो।
(4) इस प्रकार गठित निधि केवल उन दावों के भुगतान के लिए उपलब्ध होगी जिनके संबंध में देयता की सीमा लागू की जा सकती है।
(5) धारा 167 में निर्दिष्ट व्यक्तियों या जहाज मालिकों या बचावकर्ताओं में से किसी एक द्वारा या उसके बीमाकर्ता द्वारा गठित निधि को ऐसे सभी व्यक्तियों या जहाज मालिकों या बचावकर्ताओं या उनके बीमाकर्ताओं द्वारा गठित माना जाएगा।
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