CSS 87अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 87 · नियोक्ता का दिवालियापन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी नियोक्ता ने इस अध्याय के अंतर्गत किसी कर्मचारी के प्रति किसी दायित्व के संबंध में किसी बीमाकर्ता के साथ अनुबंध किया है, तो नियोक्ता के दिवालिया हो जाने या अपने लेनदारों के साथ समझौता या व्यवस्था करने की स्थिति में, या यदि नियोक्ता एक कंपनी है, तो कंपनी के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति में, उस दायित्व के संबंध में बीमाकर्ताओं के विरुद्ध नियोक्ता के अधिकार, दिवालियापन या कंपनियों के परिसमापन से संबंधित किसी भी कानून में किसी भी प्रावधान के होते हुए भी, कर्मचारी को हस्तांतरित हो जाएंगे और कर्मचारी में निहित हो जाएंगे, और ऐसे किसी भी हस्तांतरण पर बीमाकर्ताओं के पास वही अधिकार और उपाय होंगे और वे उन्हीं दायित्वों के अधीन होंगे जैसे कि वे नियोक्ता हों, यद्यपि बीमाकर्ता कर्मचारी के प्रति नियोक्ता के प्रति अपने दायित्व से अधिक उत्तरदायी नहीं होंगे।
(2) यदि कर्मचारी के प्रति बीमाकर्ताओं की देयता कर्मचारी के प्रति नियोक्ता की देयता से कम है, तो दिवालियापन कार्यवाही या परिसमापन में शेष राशि के लिए सबूत का भार कर्मचारी पर होगा।
(3) यदि किसी मामले में, जैसा कि उप-धारा (1) में निर्दिष्ट है, नियोक्ता द्वारा अनुबंध की किसी शर्त या नियम (प्रीमियम के भुगतान के प्रावधान के अलावा) का पालन न करने के कारण नियोक्ता का बीमाकर्ताओं के साथ अनुबंध शून्य या शून्यकरणीय हो, तो उस उपधारा के प्रावधान इस प्रकार लागू होंगे मानो अनुबंध शून्य या शून्यकरणीय न हो, और बीमाकर्ता दिवालियापन कार्यवाही या परिसमापन में कर्मचारी को भुगतान की गई राशि को साबित करने के हकदार होंगे।
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान किसी भी ऐसे मामले में लागू नहीं होंगे जिसमें कर्मचारी दिवालियापन या परिसमापन कार्यवाही शुरू होने की जानकारी प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र दुर्घटना होने और उसके परिणामस्वरूप होने वाली किसी भी विकलांगता की सूचना बीमाकर्ताओं को देने में विफल रहता है।
(4) दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के प्रावधानों के तहत दिवालिया व्यक्ति की संपत्ति के वितरण में या परिसमापन की जा रही कंपनी की संपत्ति के वितरण में अन्य सभी ऋणों से पहले प्राथमिकता से भुगतान किए जाने वाले ऋणों में, किसी भी मुआवजे के संबंध में देय राशि, दिवालिया घोषित करने के आदेश की तिथि से पहले या परिसमापन की शुरुआत की तिथि से पहले उत्पन्न देयता, जैसा भी मामला हो, शामिल मानी जाएगी, और उस संहिता और अधिनियम के प्रावधान तदनुसार प्रभावी होंगे।
(5) जहां मुआवजा अर्धमासिक भुगतान है, वहां इस धारा के प्रयोजनों के लिए देय राशि को उस एकमुश्त राशि के बराबर माना जाएगा जिसके लिए अर्धमासिक भुगतान, यदि भुनाया जा सकता है, तो धारा 80 के तहत उस प्रयोजन के लिए आवेदन किए जाने पर भुनाया जा सकता है, और सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी राशि के संबंध में दिया गया प्रमाण पत्र इसका निर्णायक प्रमाण होगा।
(6) उपधारा (4) के प्रावधान किसी ऐसी राशि के मामले में लागू होंगे जिसके लिए बीमाकर्ता उपधारा (3) के तहत दावा करने का हकदार है, लेकिन अन्यथा वे प्रावधान लागू नहीं होंगे जहां दिवालिया या परिसमाप्त की जा रही कंपनी ने बीमाकर्ताओं के साथ ऐसा अनुबंध किया है जैसा कि उपधारा (1) में संदर्भित है।
(7) इस धारा के प्रावधान वहां लागू नहीं होंगे जहां किसी कंपनी का स्वैच्छिक परिसमापन केवल पुनर्गठन या किसी अन्य कंपनी के साथ विलय के उद्देश्य से किया जाता है।
(2) यदि कर्मचारी के प्रति बीमाकर्ताओं की देयता कर्मचारी के प्रति नियोक्ता की देयता से कम है, तो दिवालियापन कार्यवाही या परिसमापन में शेष राशि के लिए सबूत का भार कर्मचारी पर होगा।
(3) यदि किसी मामले में, जैसा कि उप-धारा (1) में निर्दिष्ट है, नियोक्ता द्वारा अनुबंध की किसी शर्त या नियम (प्रीमियम के भुगतान के प्रावधान के अलावा) का पालन न करने के कारण नियोक्ता का बीमाकर्ताओं के साथ अनुबंध शून्य या शून्यकरणीय हो, तो उस उपधारा के प्रावधान इस प्रकार लागू होंगे मानो अनुबंध शून्य या शून्यकरणीय न हो, और बीमाकर्ता दिवालियापन कार्यवाही या परिसमापन में कर्मचारी को भुगतान की गई राशि को साबित करने के हकदार होंगे।
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान किसी भी ऐसे मामले में लागू नहीं होंगे जिसमें कर्मचारी दिवालियापन या परिसमापन कार्यवाही शुरू होने की जानकारी प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र दुर्घटना होने और उसके परिणामस्वरूप होने वाली किसी भी विकलांगता की सूचना बीमाकर्ताओं को देने में विफल रहता है।
(4) दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के प्रावधानों के तहत दिवालिया व्यक्ति की संपत्ति के वितरण में या परिसमापन की जा रही कंपनी की संपत्ति के वितरण में अन्य सभी ऋणों से पहले प्राथमिकता से भुगतान किए जाने वाले ऋणों में, किसी भी मुआवजे के संबंध में देय राशि, दिवालिया घोषित करने के आदेश की तिथि से पहले या परिसमापन की शुरुआत की तिथि से पहले उत्पन्न देयता, जैसा भी मामला हो, शामिल मानी जाएगी, और उस संहिता और अधिनियम के प्रावधान तदनुसार प्रभावी होंगे।
(5) जहां मुआवजा अर्धमासिक भुगतान है, वहां इस धारा के प्रयोजनों के लिए देय राशि को उस एकमुश्त राशि के बराबर माना जाएगा जिसके लिए अर्धमासिक भुगतान, यदि भुनाया जा सकता है, तो धारा 80 के तहत उस प्रयोजन के लिए आवेदन किए जाने पर भुनाया जा सकता है, और सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी राशि के संबंध में दिया गया प्रमाण पत्र इसका निर्णायक प्रमाण होगा।
(6) उपधारा (4) के प्रावधान किसी ऐसी राशि के मामले में लागू होंगे जिसके लिए बीमाकर्ता उपधारा (3) के तहत दावा करने का हकदार है, लेकिन अन्यथा वे प्रावधान लागू नहीं होंगे जहां दिवालिया या परिसमाप्त की जा रही कंपनी ने बीमाकर्ताओं के साथ ऐसा अनुबंध किया है जैसा कि उपधारा (1) में संदर्भित है।
(7) इस धारा के प्रावधान वहां लागू नहीं होंगे जहां किसी कंपनी का स्वैच्छिक परिसमापन केवल पुनर्गठन या किसी अन्य कंपनी के साथ विलय के उद्देश्य से किया जाता है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
