CSS 134अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 134 · कुछ मामलों में पिछली सजा के बाद सजा को बढ़ाया जा सकता है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी इस संहिता के तहत दंडनीय अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया हो और फिर वही अपराध दोबारा करता है, तो उसे दूसरे या उसके बाद के प्रत्येक अपराध के लिए दो वर्ष तक के कारावास और दो लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि ऐसा दूसरा या उसके बाद का अपराध नियोक्ता द्वारा किसी अंशदान, शुल्क, उपकर, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी या मुआवजे का भुगतान करने में विफलता के लिए है, जिसका भुगतान इस संहिता के तहत उसे करना अनिवार्य है, तो ऐसे दूसरे या उसके बाद के अपराध के लिए उसे तीन वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा, जो दो वर्ष से कम नहीं होगा, और उस पर तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
बशर्ते कि यदि ऐसा दूसरा या उसके बाद का अपराध नियोक्ता द्वारा किसी अंशदान, शुल्क, उपकर, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी या मुआवजे का भुगतान करने में विफलता के लिए है, जिसका भुगतान इस संहिता के तहत उसे करना अनिवार्य है, तो ऐसे दूसरे या उसके बाद के अपराध के लिए उसे तीन वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा, जो दो वर्ष से कम नहीं होगा, और उस पर तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- ₹3,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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