CSS 84अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 84 · चिकित्सा परीक्षण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी कर्मचारी ने दुर्घटना की सूचना दी है, तो यदि नियोक्ता सूचना दिए जाने के तीन दिन के भीतर उसे किसी चिकित्सक द्वारा निशुल्क जांच कराने की पेशकश करता है, तो वह स्वयं ऐसी जांच के लिए उपस्थित होगा, और इस अध्याय के अंतर्गत अर्धमासिक भुगतान प्राप्त करने वाला कोई भी कर्मचारी, यदि आवश्यक हो, तो समय-समय पर ऐसी जांच के लिए उपस्थित होगा।
बशर्ते कि किसी कर्मचारी को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अंतराल से अधिक बार किसी चिकित्सक से जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
(2) यदि कोई कर्मचारी, नियोक्ता द्वारा उपधारा (1) के अधीन या सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी भी समय ऐसा करने के लिए कहे जाने पर, किसी चिकित्सक द्वारा जांच कराने से इनकार करता है या किसी भी तरह से उसमें बाधा डालता है, तो ऐसे इनकार या बाधा के जारी रहने की अवधि के दौरान मुआवजे का उसका अधिकार निलंबित रहेगा, सिवाय इसके कि इनकार के मामले में, उसे किसी पर्याप्त कारण से ऐसा करने से रोका गया हो।
(3) यदि कोई कर्मचारी, उपधारा (1) के अधीन चिकित्सा परीक्षा के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी अवधि की समाप्ति से पहले, स्वेच्छा से उस स्थान के परिसर को छोड़ देता है जहाँ वह कार्यरत था, बिना ऐसी परीक्षा कराए, तो मुआवजे का उसका अधिकार तब तक निलंबित रहेगा जब तक वह वापस आकर ऐसी परीक्षा के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करता।
बशर्ते कि यदि ऐसा कर्मचारी चिकित्सक के समक्ष यह सिद्ध कर दे कि वह अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण चिकित्सा परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं हो सका और वह लिखित रूप में ऐसी जानकारी देने में भी असमर्थ था, तो चिकित्सक लिखित रूप में ऐसे कारणों को दर्ज करने के बाद विलंब को क्षमा कर सकता है और मुआवजे का उसका अधिकार इस प्रकार पुनर्जीवित हो जाएगा मानो कोई निलंबन हुआ ही न हो।
(4) जहाँ कोई कर्मचारी, जिसका मुआवज़े का अधिकार उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत निलंबित कर दिया गया है, उन उपधाराओं में से किसी के अनुसार चिकित्सा परीक्षण के लिए स्वयं को प्रस्तुत किए बिना मर जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी, यदि वह उचित समझे, तो मृतक कर्मचारी के आश्रितों को मुआवज़ा देने का निर्देश दे सकता है।
(5) जहां उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत मुआवजे का अधिकार निलंबित किया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए कोई मुआवजा देय नहीं होगा, और यदि निलंबन की अवधि धारा 76 की उपधारा (4) के खंड (ii) में निर्दिष्ट प्रतीक्षा अवधि की समाप्ति से पहले शुरू होती है, तो प्रतीक्षा अवधि उस अवधि से बढ़ा दी जाएगी जिसके दौरान निलंबन जारी रहता है।
(6) यदि किसी घायल कर्मचारी ने नियोक्ता द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए चिकित्सक से उपचार कराने से इनकार कर दिया है, या ऐसा प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद जानबूझकर चिकित्सक के निर्देशों की अवहेलना की है, तो यदि यह सिद्ध हो जाता है कि कर्मचारी ने इसके बाद नियमित रूप से चिकित्सक से उपचार नहीं कराया है, या उपचार कराने के बाद भी जानबूझकर उनके निर्देशों का पालन नहीं किया है, और यह इनकार, अवहेलना या विफलता मामले की परिस्थितियों में अनुचित थी, और इससे चोट और बढ़ गई है, तो चोट और परिणामस्वरूप होने वाली विकलांगता को उसी प्रकृति और अवधि का माना जाएगा, जैसा कि उचित रूप से अपेक्षित होता यदि कर्मचारी नियमित रूप से चिकित्सक से उपचार कराता, जिसके निर्देशों का उसने पालन किया होता, और तदनुसार मुआवजा, यदि कोई हो, देय होगा।
बशर्ते कि किसी कर्मचारी को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अंतराल से अधिक बार किसी चिकित्सक से जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
(2) यदि कोई कर्मचारी, नियोक्ता द्वारा उपधारा (1) के अधीन या सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी भी समय ऐसा करने के लिए कहे जाने पर, किसी चिकित्सक द्वारा जांच कराने से इनकार करता है या किसी भी तरह से उसमें बाधा डालता है, तो ऐसे इनकार या बाधा के जारी रहने की अवधि के दौरान मुआवजे का उसका अधिकार निलंबित रहेगा, सिवाय इसके कि इनकार के मामले में, उसे किसी पर्याप्त कारण से ऐसा करने से रोका गया हो।
(3) यदि कोई कर्मचारी, उपधारा (1) के अधीन चिकित्सा परीक्षा के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी अवधि की समाप्ति से पहले, स्वेच्छा से उस स्थान के परिसर को छोड़ देता है जहाँ वह कार्यरत था, बिना ऐसी परीक्षा कराए, तो मुआवजे का उसका अधिकार तब तक निलंबित रहेगा जब तक वह वापस आकर ऐसी परीक्षा के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करता।
बशर्ते कि यदि ऐसा कर्मचारी चिकित्सक के समक्ष यह सिद्ध कर दे कि वह अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण चिकित्सा परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं हो सका और वह लिखित रूप में ऐसी जानकारी देने में भी असमर्थ था, तो चिकित्सक लिखित रूप में ऐसे कारणों को दर्ज करने के बाद विलंब को क्षमा कर सकता है और मुआवजे का उसका अधिकार इस प्रकार पुनर्जीवित हो जाएगा मानो कोई निलंबन हुआ ही न हो।
(4) जहाँ कोई कर्मचारी, जिसका मुआवज़े का अधिकार उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत निलंबित कर दिया गया है, उन उपधाराओं में से किसी के अनुसार चिकित्सा परीक्षण के लिए स्वयं को प्रस्तुत किए बिना मर जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी, यदि वह उचित समझे, तो मृतक कर्मचारी के आश्रितों को मुआवज़ा देने का निर्देश दे सकता है।
(5) जहां उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत मुआवजे का अधिकार निलंबित किया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए कोई मुआवजा देय नहीं होगा, और यदि निलंबन की अवधि धारा 76 की उपधारा (4) के खंड (ii) में निर्दिष्ट प्रतीक्षा अवधि की समाप्ति से पहले शुरू होती है, तो प्रतीक्षा अवधि उस अवधि से बढ़ा दी जाएगी जिसके दौरान निलंबन जारी रहता है।
(6) यदि किसी घायल कर्मचारी ने नियोक्ता द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए चिकित्सक से उपचार कराने से इनकार कर दिया है, या ऐसा प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद जानबूझकर चिकित्सक के निर्देशों की अवहेलना की है, तो यदि यह सिद्ध हो जाता है कि कर्मचारी ने इसके बाद नियमित रूप से चिकित्सक से उपचार नहीं कराया है, या उपचार कराने के बाद भी जानबूझकर उनके निर्देशों का पालन नहीं किया है, और यह इनकार, अवहेलना या विफलता मामले की परिस्थितियों में अनुचित थी, और इससे चोट और बढ़ गई है, तो चोट और परिणामस्वरूप होने वाली विकलांगता को उसी प्रकृति और अवधि का माना जाएगा, जैसा कि उचित रूप से अपेक्षित होता यदि कर्मचारी नियमित रूप से चिकित्सक से उपचार कराता, जिसके निर्देशों का उसने पालन किया होता, और तदनुसार मुआवजा, यदि कोई हो, देय होगा।
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