CSS 83अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 83 · भारतीय क्षेत्र के बाहर होने वाली दुर्घटनाओं से संबंधित विशेष प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस धारा के प्रावधान, इस धारा में निर्दिष्ट संशोधनों के अधीन रहते हुए, उन कर्मचारियों के मामले में लागू होंगे जो—
(क) जहाजों के स्वामी या नाविक; या
(ख) विमान के कप्तान और चालक दल के अन्य सदस्य;
(ग) भारत में पंजीकृत कंपनियों द्वारा भर्ती किए गए और विदेश में इस प्रकार कार्यरत व्यक्ति;
(घ) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के तहत पंजीकृत मोटर वाहनों के साथ ड्राइवर, हेल्पर, मैकेनिक, क्लीनर या अन्य कर्मचारियों के रूप में विदेश में काम के लिए भेजे गए व्यक्ति।
(2) दुर्घटना की सूचना और घायल व्यक्ति द्वारा मुआवजे के दावे की सूचना निम्नलिखित व्यक्तियों को इस प्रकार दी जा सकती है, मानो वे नियोक्ता हों—
(क) दुर्घटना की स्थिति में जहां घायल व्यक्ति नाविक है, लेकिन जहाज का कप्तान नहीं है, तो जहाज के कप्तान पर;
(ख) दुर्घटना की स्थिति में जहां घायल व्यक्ति विमान के चालक दल का सदस्य है, लेकिन विमान का कप्तान नहीं है, तो विमान के कप्तान पर मुकदमा चलाया जाएगा;
(ग) भारत में पंजीकृत कंपनियों द्वारा भर्ती किए गए और विदेश में इस प्रकार कार्यरत व्यक्तियों के मामले में, कंपनी के स्थानीय एजेंट के माध्यम से;
(घ) यदि किसी व्यक्ति को मोटर वाहनों के साथ चालक, सहायक, मैकेनिक, सफाईकर्मी या अन्य कर्मचारी के रूप में विदेश में काम के लिए भेजा जाता है, तो दुर्घटना वाले देश में मोटर वाहन के मालिक के स्थानीय एजेंट के माध्यम से:
बशर्ते कि यदि दुर्घटना घटी हो और खराबी जहाज या विमान पर ही शुरू हुई हो, तो किसी भी नाविक या विमान के चालक दल के सदस्यों के लिए दुर्घटना की कोई सूचना देना आवश्यक नहीं होगा।
(3) मुआवजे का दावा किया जाएगा—
(क) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, दावेदार को मृत्यु की सूचना प्राप्त होने के एक वर्ष बाद;
(ख) यदि जहाज या विमान, जैसा भी मामला हो, अपने सभी चालक दल सहित खो गया हो या खो गया माना जाता हो, तो जहाज या विमान के खो जाने की तिथि से अठारह महीने की अवधि:
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी किसी भी मामले में मुआवजे के दावे पर विचार कर सकता है, भले ही दावा इस उपधारा में दिए गए प्रावधान के अनुसार उचित समय पर प्रस्तुत न किया गया हो, यदि वह संतुष्ट है कि दावा प्रस्तुत करने में विफलता पर्याप्त कारण से हुई थी।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट घायल कर्मचारी को भारत के किसी भाग में या किसी विदेशी देश में सेवामुक्त कर दिया जाता है या उसे पीछे छोड़ दिया जाता है, तो उस भाग में किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा या विदेशी देश में किसी कांसुलर अधिकारी द्वारा लिए गए और जिनके द्वारा वे लिए गए हैं उनके द्वारा केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार को भेजे गए कोई भी बयान, दावे को लागू करने की किसी भी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होंगे।
(क) यदि बयान उस न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट या कांसुलर अधिकारी के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किया जाता है जिसके समक्ष यह दिया गया है;
(ख) यदि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को, जैसा भी मामला हो, स्वयं या अपने प्रतिनिधि द्वारा गवाह से जिरह करने का अवसर मिला हो; और
(ग) यदि बयान किसी आपराधिक कार्यवाही के दौरान लिया गया था, तो इस बात के प्रमाण पर कि बयान आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया था,
और किसी भी स्थिति में ऐसे किसी भी बयान पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर या आधिकारिक पद को साबित करना आवश्यक नहीं होगा, और ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को गवाह से जिरह करने का अवसर दिया गया था और यदि बयान किसी आपराधिक कार्यवाही में दिया गया था तो वह आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में दिया गया था, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत होगा कि उसे वह अवसर दिया गया था और बयान उसी प्रकार दिया गया था।
(5) उस अवधि के दौरान कोई अर्धमासिक भुगतान देय नहीं होगा, जिस दौरान जहाज का स्वामी, व्यापारिक जहाजरानी से संबंधित किसी भी लागू कानून के तहत, घायल मास्टर या नाविक के भरण-पोषण के खर्चों को वहन करने के लिए उत्तरदायी है।
(6) इस धारा द्वारा निर्धारित समय के भीतर सूचना न देना, दावा न करना या कार्यवाही प्रारंभ न करना, किसी व्यक्तिगत चोट के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही चलाने में बाधक नहीं होगा, यदि इस अध्याय के अंतर्गत ऐसी कार्यवाही उस तिथि से एक माह के भीतर प्रारंभ की जाती है जिस तिथि को राज्य सरकार द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र कार्यवाही प्रारंभ करने वाले व्यक्ति को दिया गया था।
(क) जहाजों के स्वामी या नाविक; या
(ख) विमान के कप्तान और चालक दल के अन्य सदस्य;
(ग) भारत में पंजीकृत कंपनियों द्वारा भर्ती किए गए और विदेश में इस प्रकार कार्यरत व्यक्ति;
(घ) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के तहत पंजीकृत मोटर वाहनों के साथ ड्राइवर, हेल्पर, मैकेनिक, क्लीनर या अन्य कर्मचारियों के रूप में विदेश में काम के लिए भेजे गए व्यक्ति।
(2) दुर्घटना की सूचना और घायल व्यक्ति द्वारा मुआवजे के दावे की सूचना निम्नलिखित व्यक्तियों को इस प्रकार दी जा सकती है, मानो वे नियोक्ता हों—
(क) दुर्घटना की स्थिति में जहां घायल व्यक्ति नाविक है, लेकिन जहाज का कप्तान नहीं है, तो जहाज के कप्तान पर;
(ख) दुर्घटना की स्थिति में जहां घायल व्यक्ति विमान के चालक दल का सदस्य है, लेकिन विमान का कप्तान नहीं है, तो विमान के कप्तान पर मुकदमा चलाया जाएगा;
(ग) भारत में पंजीकृत कंपनियों द्वारा भर्ती किए गए और विदेश में इस प्रकार कार्यरत व्यक्तियों के मामले में, कंपनी के स्थानीय एजेंट के माध्यम से;
(घ) यदि किसी व्यक्ति को मोटर वाहनों के साथ चालक, सहायक, मैकेनिक, सफाईकर्मी या अन्य कर्मचारी के रूप में विदेश में काम के लिए भेजा जाता है, तो दुर्घटना वाले देश में मोटर वाहन के मालिक के स्थानीय एजेंट के माध्यम से:
बशर्ते कि यदि दुर्घटना घटी हो और खराबी जहाज या विमान पर ही शुरू हुई हो, तो किसी भी नाविक या विमान के चालक दल के सदस्यों के लिए दुर्घटना की कोई सूचना देना आवश्यक नहीं होगा।
(3) मुआवजे का दावा किया जाएगा—
(क) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, दावेदार को मृत्यु की सूचना प्राप्त होने के एक वर्ष बाद;
(ख) यदि जहाज या विमान, जैसा भी मामला हो, अपने सभी चालक दल सहित खो गया हो या खो गया माना जाता हो, तो जहाज या विमान के खो जाने की तिथि से अठारह महीने की अवधि:
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी किसी भी मामले में मुआवजे के दावे पर विचार कर सकता है, भले ही दावा इस उपधारा में दिए गए प्रावधान के अनुसार उचित समय पर प्रस्तुत न किया गया हो, यदि वह संतुष्ट है कि दावा प्रस्तुत करने में विफलता पर्याप्त कारण से हुई थी।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट घायल कर्मचारी को भारत के किसी भाग में या किसी विदेशी देश में सेवामुक्त कर दिया जाता है या उसे पीछे छोड़ दिया जाता है, तो उस भाग में किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा या विदेशी देश में किसी कांसुलर अधिकारी द्वारा लिए गए और जिनके द्वारा वे लिए गए हैं उनके द्वारा केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार को भेजे गए कोई भी बयान, दावे को लागू करने की किसी भी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होंगे।
(क) यदि बयान उस न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट या कांसुलर अधिकारी के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किया जाता है जिसके समक्ष यह दिया गया है;
(ख) यदि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को, जैसा भी मामला हो, स्वयं या अपने प्रतिनिधि द्वारा गवाह से जिरह करने का अवसर मिला हो; और
(ग) यदि बयान किसी आपराधिक कार्यवाही के दौरान लिया गया था, तो इस बात के प्रमाण पर कि बयान आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में लिया गया था,
और किसी भी स्थिति में ऐसे किसी भी बयान पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर या आधिकारिक पद को साबित करना आवश्यक नहीं होगा, और ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि प्रतिवादी या आरोपी व्यक्ति को गवाह से जिरह करने का अवसर दिया गया था और यदि बयान किसी आपराधिक कार्यवाही में दिया गया था तो वह आरोपी व्यक्ति की उपस्थिति में दिया गया था, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत होगा कि उसे वह अवसर दिया गया था और बयान उसी प्रकार दिया गया था।
(5) उस अवधि के दौरान कोई अर्धमासिक भुगतान देय नहीं होगा, जिस दौरान जहाज का स्वामी, व्यापारिक जहाजरानी से संबंधित किसी भी लागू कानून के तहत, घायल मास्टर या नाविक के भरण-पोषण के खर्चों को वहन करने के लिए उत्तरदायी है।
(6) इस धारा द्वारा निर्धारित समय के भीतर सूचना न देना, दावा न करना या कार्यवाही प्रारंभ न करना, किसी व्यक्तिगत चोट के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही चलाने में बाधक नहीं होगा, यदि इस अध्याय के अंतर्गत ऐसी कार्यवाही उस तिथि से एक माह के भीतर प्रारंभ की जाती है जिस तिथि को राज्य सरकार द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र कार्यवाही प्रारंभ करने वाले व्यक्ति को दिया गया था।
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