CSS 81अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 81 · मुआवजे का वितरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी कर्मचारी की चोट के परिणामस्वरूप मृत्यु होने पर मुआवजे का कोई भुगतान, तथा किसी महिला या कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति को मुआवजे के रूप में एकमुश्त राशि का भुगतान, सक्षम प्राधिकारी के पास जमा करने के अलावा किसी अन्य तरीके से नहीं किया जाएगा, और नियोक्ता द्वारा सीधे किया गया ऐसा कोई भुगतान मुआवजे का भुगतान नहीं माना जाएगा।
बशर्ते कि, किसी मृत कर्मचारी के मामले में, नियोक्ता किसी आश्रित को मुआवजे के रूप में उस कर्मचारी के तीन महीने के वेतन के बराबर राशि अग्रिम रूप से दे सकता है और ऐसी राशि का उतना हिस्सा जो उस आश्रित को देय मुआवजे से अधिक न हो, सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसे मुआवजे में से काटकर नियोक्ता को वापस कर दिया जाएगा।
(2) कोई अन्य राशि जो पाँच हजार रुपये से कम न हो, जो मुआवजे के रूप में देय हो, उसे हकदार व्यक्ति की ओर से सक्षम प्राधिकारी के पास जमा किया जा सकता है।
(3) सक्षम प्राधिकारी की रसीद उसके पास जमा किए गए किसी भी मुआवजे के संबंध में पर्याप्त मुक्ति होगी।
(4) (क) मृतक कर्मचारी के संबंध में मुआवजे के रूप में उप-धारा (1) के तहत किसी धन के जमा होने पर, सक्षम प्राधिकारी, यदि वह आवश्यक समझे, तो प्रत्येक आश्रित को ऐसे तरीके से सूचना प्रकाशित करवाएगा या तामील करवाएगा जैसा वह उचित समझे, जिसमें आश्रितों को मुआवजे के वितरण का निर्धारण करने के लिए उसके समक्ष ऐसी तिथि पर उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा जो वह निर्धारित करे।
(ख) यदि सक्षम प्राधिकारी किसी भी जांच के बाद, जिसे वह आवश्यक समझे, संतुष्ट हो जाता है कि कोई आश्रित मौजूद नहीं है, तो वह उस नियोक्ता को शेष राशि लौटा देगा जिसके द्वारा इसका भुगतान किया गया था।
(ग) सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता द्वारा आवेदन किए जाने पर किए गए सभी भुगतानों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेगा।
(5) मृतक कर्मचारी के संबंध में जमा की गई क्षतिपूर्ति, उप-धारा (1) के तहत की गई किसी कटौती के अधीन रहते हुए, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश द्वारा मृतक कर्मचारी के आश्रितों या उनमें से किसी एक के बीच ऐसे अनुपात में विभाजित की जाएगी जैसा सक्षम प्राधिकारी उचित समझे, या सक्षम प्राधिकारी के विवेक पर किसी एक आश्रित को आवंटित की जा सकती है।
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी आश्रितों की सुनवाई किए बिना इस उपधारा के अंतर्गत कोई आदेश नहीं देगा और आश्रितों या उनमें से किसी एक के बीच मुआवजे के बंटवारे के संबंध में आदेश में कारण दर्ज करेगा।
(6) जहां सक्षम प्राधिकारी के पास जमा किया गया कोई मुआवजा किसी महिला या कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को देय है, तो सक्षम प्राधिकारी उस मुआवजे का भुगतान उस व्यक्ति को कर सकता है जो उसका हकदार है।
(7) यदि सक्षम प्राधिकारी के पास जमा की गई कोई एकमुश्त राशि किसी महिला या कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति को देय है, तो ऐसी राशि को सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्देशित तरीके से महिला या ऐसे व्यक्ति की अक्षमता के दौरान उसके लाभ के लिए निवेश, उपयोग या अन्य तरीके से उपयोग किया जा सकता है; और यदि किसी कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति को अर्धमासिक भुगतान देय है, तो सक्षम प्राधिकारी स्वयं या इस संबंध में किए गए आवेदन पर यह आदेश दे सकता है कि अक्षमता के दौरान भुगतान कर्मचारी के किसी आश्रित या किसी अन्य व्यक्ति को किया जाए, जिसे सक्षम प्राधिकारी कर्मचारी के कल्याण के लिए उपयुक्त समझता है।
(8) जहां, इस संबंध में या अन्यथा उसे किए गए आवेदन पर, सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट हो कि, माता-पिता द्वारा बच्चों की उपेक्षा के कारण या किसी आश्रित की परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण या किसी अन्य पर्याप्त कारण से, सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुआवजे के रूप में भुगतान की गई किसी राशि के वितरण के संबंध में या किसी आश्रित को देय किसी राशि के निवेश, उपयोग या अन्यथा निपटान के तरीके के संबंध में दिए गए आदेश में परिवर्तन किया जाना चाहिए, तो सक्षम प्राधिकारी पूर्व आदेश में परिवर्तन के लिए ऐसे आदेश दे सकता है जैसा वह मामले की परिस्थितियों में उचित समझे।
बशर्ते कि किसी व्यक्ति के हित में प्रतिकूल कोई भी आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को यह बताने का अवसर न दिया गया हो कि आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए, या ऐसा कोई आदेश किसी ऐसे मामले में नहीं दिया जाएगा जिसमें आश्रित द्वारा उसे पहले से भुगतान की गई किसी राशि की वापसी शामिल हो।
(9) जहाँ सक्षम प्राधिकारी उप-धारा (8) के तहत किसी आदेश में इस तथ्य के कारण परिवर्तन करता है कि किसी व्यक्ति को मुआवजे का भुगतान धोखाधड़ी, प्रतिरूपण या अन्य अनुचित साधनों द्वारा प्राप्त किया गया है, तो ऐसे व्यक्ति को या उसकी ओर से भुगतान की गई कोई भी राशि उप-धारा (10) में निर्दिष्ट तरीके से वसूल की जा सकती है।
(10) सक्षम प्राधिकारी उपधारा (9) में निर्दिष्ट किसी राशि को भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल कर सकता है, और ऐसे प्रयोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी को राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 (1 ऑफ 1890) की धारा 5 के अर्थ में लोक अधिकारी माना जाएगा।
बशर्ते कि, किसी मृत कर्मचारी के मामले में, नियोक्ता किसी आश्रित को मुआवजे के रूप में उस कर्मचारी के तीन महीने के वेतन के बराबर राशि अग्रिम रूप से दे सकता है और ऐसी राशि का उतना हिस्सा जो उस आश्रित को देय मुआवजे से अधिक न हो, सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसे मुआवजे में से काटकर नियोक्ता को वापस कर दिया जाएगा।
(2) कोई अन्य राशि जो पाँच हजार रुपये से कम न हो, जो मुआवजे के रूप में देय हो, उसे हकदार व्यक्ति की ओर से सक्षम प्राधिकारी के पास जमा किया जा सकता है।
(3) सक्षम प्राधिकारी की रसीद उसके पास जमा किए गए किसी भी मुआवजे के संबंध में पर्याप्त मुक्ति होगी।
(4) (क) मृतक कर्मचारी के संबंध में मुआवजे के रूप में उप-धारा (1) के तहत किसी धन के जमा होने पर, सक्षम प्राधिकारी, यदि वह आवश्यक समझे, तो प्रत्येक आश्रित को ऐसे तरीके से सूचना प्रकाशित करवाएगा या तामील करवाएगा जैसा वह उचित समझे, जिसमें आश्रितों को मुआवजे के वितरण का निर्धारण करने के लिए उसके समक्ष ऐसी तिथि पर उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा जो वह निर्धारित करे।
(ख) यदि सक्षम प्राधिकारी किसी भी जांच के बाद, जिसे वह आवश्यक समझे, संतुष्ट हो जाता है कि कोई आश्रित मौजूद नहीं है, तो वह उस नियोक्ता को शेष राशि लौटा देगा जिसके द्वारा इसका भुगतान किया गया था।
(ग) सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता द्वारा आवेदन किए जाने पर किए गए सभी भुगतानों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेगा।
(5) मृतक कर्मचारी के संबंध में जमा की गई क्षतिपूर्ति, उप-धारा (1) के तहत की गई किसी कटौती के अधीन रहते हुए, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश द्वारा मृतक कर्मचारी के आश्रितों या उनमें से किसी एक के बीच ऐसे अनुपात में विभाजित की जाएगी जैसा सक्षम प्राधिकारी उचित समझे, या सक्षम प्राधिकारी के विवेक पर किसी एक आश्रित को आवंटित की जा सकती है।
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी आश्रितों की सुनवाई किए बिना इस उपधारा के अंतर्गत कोई आदेश नहीं देगा और आश्रितों या उनमें से किसी एक के बीच मुआवजे के बंटवारे के संबंध में आदेश में कारण दर्ज करेगा।
(6) जहां सक्षम प्राधिकारी के पास जमा किया गया कोई मुआवजा किसी महिला या कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को देय है, तो सक्षम प्राधिकारी उस मुआवजे का भुगतान उस व्यक्ति को कर सकता है जो उसका हकदार है।
(7) यदि सक्षम प्राधिकारी के पास जमा की गई कोई एकमुश्त राशि किसी महिला या कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति को देय है, तो ऐसी राशि को सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्देशित तरीके से महिला या ऐसे व्यक्ति की अक्षमता के दौरान उसके लाभ के लिए निवेश, उपयोग या अन्य तरीके से उपयोग किया जा सकता है; और यदि किसी कानूनी रूप से अक्षम व्यक्ति को अर्धमासिक भुगतान देय है, तो सक्षम प्राधिकारी स्वयं या इस संबंध में किए गए आवेदन पर यह आदेश दे सकता है कि अक्षमता के दौरान भुगतान कर्मचारी के किसी आश्रित या किसी अन्य व्यक्ति को किया जाए, जिसे सक्षम प्राधिकारी कर्मचारी के कल्याण के लिए उपयुक्त समझता है।
(8) जहां, इस संबंध में या अन्यथा उसे किए गए आवेदन पर, सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट हो कि, माता-पिता द्वारा बच्चों की उपेक्षा के कारण या किसी आश्रित की परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण या किसी अन्य पर्याप्त कारण से, सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुआवजे के रूप में भुगतान की गई किसी राशि के वितरण के संबंध में या किसी आश्रित को देय किसी राशि के निवेश, उपयोग या अन्यथा निपटान के तरीके के संबंध में दिए गए आदेश में परिवर्तन किया जाना चाहिए, तो सक्षम प्राधिकारी पूर्व आदेश में परिवर्तन के लिए ऐसे आदेश दे सकता है जैसा वह मामले की परिस्थितियों में उचित समझे।
बशर्ते कि किसी व्यक्ति के हित में प्रतिकूल कोई भी आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को यह बताने का अवसर न दिया गया हो कि आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए, या ऐसा कोई आदेश किसी ऐसे मामले में नहीं दिया जाएगा जिसमें आश्रित द्वारा उसे पहले से भुगतान की गई किसी राशि की वापसी शामिल हो।
(9) जहाँ सक्षम प्राधिकारी उप-धारा (8) के तहत किसी आदेश में इस तथ्य के कारण परिवर्तन करता है कि किसी व्यक्ति को मुआवजे का भुगतान धोखाधड़ी, प्रतिरूपण या अन्य अनुचित साधनों द्वारा प्राप्त किया गया है, तो ऐसे व्यक्ति को या उसकी ओर से भुगतान की गई कोई भी राशि उप-धारा (10) में निर्दिष्ट तरीके से वसूल की जा सकती है।
(10) सक्षम प्राधिकारी उपधारा (9) में निर्दिष्ट किसी राशि को भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल कर सकता है, और ऐसे प्रयोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी को राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 (1 ऑफ 1890) की धारा 5 के अर्थ में लोक अधिकारी माना जाएगा।
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