CSS 136अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 136 · अपराधों का संज्ञान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस संहिता के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान कोई न्यायालय तब तक नहीं लेगा, जब तक कि पीड़ित व्यक्ति या केंद्र सरकार द्वारा अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और इस संहिता के तहत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए, तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों और उनके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं से संबंधित अपराधों के प्रयोजनों के लिए, उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी द्वारा शिकायत न की गई हो।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस संहिता के अंतर्गत कोई अभियोग तब तक शुरू नहीं किया जाएगा, जब तक कि अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं से संबंधित अपराधों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा या उसकी पूर्व स्वीकृति से अभियोग शुरू न किया जाए; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों और उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं से संबंधित अपराधों के प्रयोजनों के लिए, उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा अभियोग शुरू न किया जाए।
(3) मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से नीचे का कोई न्यायालय इस अध्याय के अंतर्गत दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा।
(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, उस उपधारा के अंतर्गत एक से अधिक पीड़ित व्यक्तियों द्वारा एक ही शिकायत दर्ज की जा सकती है, यदि वे न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में किसी स्थान या विभिन्न स्थानों पर किए गए एक ही या समान अपराध से पीड़ित हों।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस संहिता के अंतर्गत कोई अभियोग तब तक शुरू नहीं किया जाएगा, जब तक कि अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं से संबंधित अपराधों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा या उसकी पूर्व स्वीकृति से अभियोग शुरू न किया जाए; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों और उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं से संबंधित अपराधों के प्रयोजनों के लिए, उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा अभियोग शुरू न किया जाए।
(3) मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से नीचे का कोई न्यायालय इस अध्याय के अंतर्गत दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा।
(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, उस उपधारा के अंतर्गत एक से अधिक पीड़ित व्यक्तियों द्वारा एक ही शिकायत दर्ज की जा सकती है, यदि वे न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में किसी स्थान या विभिन्न स्थानों पर किए गए एक ही या समान अपराध से पीड़ित हों।
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