CSS 122अध्याय XI · Authorities, Assessment, Compliance and Recovery
धारा 122 · निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ताओं की नियुक्ति और उनकी शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार अध्याय III और अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के उन अध्यायों से संबंधित प्रावधानों के लिए तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता नियुक्त कर सकती है, जो इस संहिता के अधीन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तथा उपधारा (2) में निर्दिष्ट निरीक्षण योजना के अनुसार उपधारा (6) के अधीन उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे।
(2) केंद्र सरकार अध्याय III और अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के उन अध्यायों से संबंधित प्रावधानों के लिए तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा निरीक्षण योजना निर्धारित कर सकती है, जिसमें वेब आधारित निरीक्षण तैयार करने और इस संहिता के अंतर्गत निरीक्षण से संबंधित सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त करने का प्रावधान हो, और ऐसी योजना में, अन्य बातों के अलावा, निरीक्षण सौंपने तथा प्रतिष्ठान या किसी अन्य व्यक्ति से सूचना प्राप्त करने के लिए विशेष परिस्थितियों का ध्यान रखने के प्रावधान होंगे।
(3) उपधारा (2) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार अध्याय III और अध्याय IV तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए निरीक्षण के यादृच्छिक चयन का ऐसा अधिकार निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को प्रदान कर सकती है, जैसा कि ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट किया जाए।
(4) इस धारा के अधीन केंद्र सरकार या उपयुक्त सरकार की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निरीक्षण योजना निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा सकती है, अर्थात्:—
(क) प्रत्येक प्रतिष्ठान (जो उस प्रतिष्ठान को आवंटित पंजीकरण संख्या के समान होगी), प्रत्येक निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता और प्रत्येक निरीक्षण को एक विशिष्ट संख्या का आवंटन, ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि अध्याय III और अध्याय IV तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है, और इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;
(ख) अध्याय तृतीय और अध्याय चतुर्थ तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों हेतु केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित तरीके से तथा ऐसी शर्तों के अधीन निरीक्षण रिपोर्टों को समय पर अपलोड करना;
(ग) अध्याय III और अध्याय IV तथा इन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों हेतु केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले मापदंडों के आधार पर विशेष निरीक्षणों के प्रावधान; और
(घ) रोजगार संबंधों की विशेषताएं, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थलों की विशेषताएं, ऐसे मापदंडों के आधार पर, जिन्हें अध्याय III और अध्याय IV तथा इस संहिता के उन अध्यायों से संबंधित अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
(5) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता निम्नलिखित कार्य कर सकता है—
(क) नियोक्ताओं और कर्मचारियों को इस संहिता के प्रावधानों के अनुपालन के संबंध में सलाह देना; और
(ख) समय-समय पर उपयुक्त सरकार द्वारा जारी निर्देशों या दिशा-निर्देशों के अधीन रहते हुए, इस संहिता के प्रावधानों के तहत उसे सौंपे गए प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करना।
(6) उपधारा (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता निम्नलिखित कार्य कर सकता है:—
(क) प्रतिष्ठान के किसी भी परिसर में पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति की जांच करना, जिसके बारे में निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह मानने का उचित कारण हो कि वह प्रतिष्ठान का कर्मचारी है;
(ख) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह मानने का उचित कारण हो कि कोई व्यक्ति प्रतिष्ठान का नियोक्ता है, तो ऐसे किसी व्यक्ति से कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने या कोई जानकारी देने की अपेक्षा करना, जो निरीक्षण किए जाने के किसी उद्देश्य के संबंध में उसके अधिकार क्षेत्र में हो;
(ग) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा इस संहिता के अंतर्गत किसी अपराध के संबंध में प्रासंगिक समझे जाने वाले ऐसे रजिस्टर, वेतन अभिलेख या नोटिस या उनके अंशों की खोज करना, जब्त करना या उनकी प्रतियां लेना, तथा जिसके बारे में निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह विश्वास करने का कारण हो कि वह नियोक्ता द्वारा किया गया है;
(घ) किसी भी लागू कानून के अंतर्गत न आने वाली कमियों या दुर्व्यवहारों को उपयुक्त सरकार के संज्ञान में लाना; और
(ई) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना जो उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं।
(7) उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा मांगे गए किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने या कोई जानकारी देने के लिए बाध्य कोई भी व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 175 और धारा 176 के अर्थ में ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य माना जाएगा।
(8) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) के प्रावधान, उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए तलाशी या जब्ती पर, जहाँ तक संभव हो, उसी प्रकार लागू होंगे जैसे उक्त संहिता की धारा 94 के तहत जारी वारंट के अधिकार के तहत की गई तलाशी या जब्ती पर लागू होते हैं।
(2) केंद्र सरकार अध्याय III और अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के उन अध्यायों से संबंधित प्रावधानों के लिए तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा निरीक्षण योजना निर्धारित कर सकती है, जिसमें वेब आधारित निरीक्षण तैयार करने और इस संहिता के अंतर्गत निरीक्षण से संबंधित सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त करने का प्रावधान हो, और ऐसी योजना में, अन्य बातों के अलावा, निरीक्षण सौंपने तथा प्रतिष्ठान या किसी अन्य व्यक्ति से सूचना प्राप्त करने के लिए विशेष परिस्थितियों का ध्यान रखने के प्रावधान होंगे।
(3) उपधारा (2) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार अध्याय III और अध्याय IV तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए निरीक्षण के यादृच्छिक चयन का ऐसा अधिकार निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को प्रदान कर सकती है, जैसा कि ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट किया जाए।
(4) इस धारा के अधीन केंद्र सरकार या उपयुक्त सरकार की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निरीक्षण योजना निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा सकती है, अर्थात्:—
(क) प्रत्येक प्रतिष्ठान (जो उस प्रतिष्ठान को आवंटित पंजीकरण संख्या के समान होगी), प्रत्येक निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता और प्रत्येक निरीक्षण को एक विशिष्ट संख्या का आवंटन, ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि अध्याय III और अध्याय IV तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है, और इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;
(ख) अध्याय तृतीय और अध्याय चतुर्थ तथा उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों हेतु केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित तरीके से तथा ऐसी शर्तों के अधीन निरीक्षण रिपोर्टों को समय पर अपलोड करना;
(ग) अध्याय III और अध्याय IV तथा इन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों हेतु केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले मापदंडों के आधार पर विशेष निरीक्षणों के प्रावधान; और
(घ) रोजगार संबंधों की विशेषताएं, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थलों की विशेषताएं, ऐसे मापदंडों के आधार पर, जिन्हें अध्याय III और अध्याय IV तथा इस संहिता के उन अध्यायों से संबंधित अन्य प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा तथा इस संहिता के अन्य प्रावधानों के संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
(5) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता निम्नलिखित कार्य कर सकता है—
(क) नियोक्ताओं और कर्मचारियों को इस संहिता के प्रावधानों के अनुपालन के संबंध में सलाह देना; और
(ख) समय-समय पर उपयुक्त सरकार द्वारा जारी निर्देशों या दिशा-निर्देशों के अधीन रहते हुए, इस संहिता के प्रावधानों के तहत उसे सौंपे गए प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करना।
(6) उपधारा (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता निम्नलिखित कार्य कर सकता है:—
(क) प्रतिष्ठान के किसी भी परिसर में पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति की जांच करना, जिसके बारे में निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह मानने का उचित कारण हो कि वह प्रतिष्ठान का कर्मचारी है;
(ख) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह मानने का उचित कारण हो कि कोई व्यक्ति प्रतिष्ठान का नियोक्ता है, तो ऐसे किसी व्यक्ति से कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने या कोई जानकारी देने की अपेक्षा करना, जो निरीक्षण किए जाने के किसी उद्देश्य के संबंध में उसके अधिकार क्षेत्र में हो;
(ग) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा इस संहिता के अंतर्गत किसी अपराध के संबंध में प्रासंगिक समझे जाने वाले ऐसे रजिस्टर, वेतन अभिलेख या नोटिस या उनके अंशों की खोज करना, जब्त करना या उनकी प्रतियां लेना, तथा जिसके बारे में निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता को यह विश्वास करने का कारण हो कि वह नियोक्ता द्वारा किया गया है;
(घ) किसी भी लागू कानून के अंतर्गत न आने वाली कमियों या दुर्व्यवहारों को उपयुक्त सरकार के संज्ञान में लाना; और
(ई) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना जो उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं।
(7) उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा मांगे गए किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने या कोई जानकारी देने के लिए बाध्य कोई भी व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 175 और धारा 176 के अर्थ में ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य माना जाएगा।
(8) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) के प्रावधान, उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए तलाशी या जब्ती पर, जहाँ तक संभव हो, उसी प्रकार लागू होंगे जैसे उक्त संहिता की धारा 94 के तहत जारी वारंट के अधिकार के तहत की गई तलाशी या जब्ती पर लागू होते हैं।
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