CSS 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,---
(1) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में प्रयुक्त "एजेंट" से तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति से है, चाहे उसे इस रूप में नियुक्त किया गया हो या नहीं, जो स्वामी की ओर से कार्य करते हुए या कार्य करने का आशय रखते हुए, ऐसे प्रतिष्ठान या उसके किसी भाग के प्रबंधन, नियंत्रण, पर्यवेक्षण या निर्देशन में भाग लेता है;
(2) "एग्रीगेटर" का अर्थ है किसी सेवा के खरीदार या उपयोगकर्ता के लिए विक्रेता या सेवा प्रदाता से जुड़ने हेतु एक डिजिटल मध्यस्थ या बाज़ार;
(3) "उपयुक्त" सरकार से तात्पर्य है---
(क) केंद्र सरकार द्वारा या उसके अधिकार के अधीन संचालित किसी प्रतिष्ठान के संबंध में, या केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किसी नियंत्रित उद्योग के संबंध में, या रेलवे (मेट्रो रेलवे सहित), खानों, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाहों, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी, या किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा स्थापित निगम या अन्य प्राधिकरण, या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों, प्रमुख उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों, या केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्वायत्त निकायों, जिनमें ऐसे प्रतिष्ठान, निगम या अन्य प्राधिकरण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सहायक कंपनियों या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों के प्रतिष्ठान शामिल हैं, या कोई भी कंपनी जिसमें कम से कम इक्यावन प्रतिशत चुकता शेयर पूंजी केंद्र सरकार के पास है, जैसा भी मामला हो, या एक से अधिक राज्यों में विभागों या शाखाओं वाले प्रतिष्ठान के संबंध में, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार; और
(ख) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, राज्य सरकार।
स्पष्टीकरण 1--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, मेट्रो रेलवे अभिव्यक्ति का अर्थ मेट्रो रेलवे है जैसा कि मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 (2002 का 60) की धारा 2 के खंड (1) के उपखंड (i) में परिभाषित है।
स्पष्टीकरण 2.--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए केंद्र सरकार उपयुक्त सरकार बनी रहेगी, भले ही इस संहिता के प्रारंभ होने के बाद उस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी पचास प्रतिशत से कम हो जाए;
(4) "श्रव्य-दृश्य उत्पादन" से तात्पर्य भारत में पूर्णतः या आंशिकतः निर्मित श्रव्य-दृश्य से है और इसमें शामिल हैं---
(i) एनीमेशन, कार्टून चित्रण, ऑडियो-विजुअल विज्ञापन;
(ii) डिजिटल उत्पादन या उससे संबंधित कोई भी गतिविधि; और
(iii) फीचर फिल्में, नॉन-फीचर फिल्में, टेलीविजन, वेब आधारित धारावाहिक, टॉक शो, रियलिटी शो और खेल शो;
(5) "अधिकृत अधिकारी" से तात्पर्य केंद्रीय बोर्ड के ऐसे अधिकारी से है, या जैसा भी मामला हो, निगम के ऐसे अधिकारी से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया हो;
(6) "भवन या अन्य निर्माण कार्य" से तात्पर्य भवनों, सड़कों, रेलमार्गों, ट्रामवे, हवाई अड्डों, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध और नौवहन कार्यों, बाढ़ नियंत्रण कार्यों (तूफान जल निकासी कार्यों सहित), बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण, जल कार्यों (जल वितरण के लिए चैनलों सहित), तेल और गैस प्रतिष्ठानों, विद्युत लाइनों, इंटरनेट टावरों, वायरलेस, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीग्राफ और विदेशी संचार, बांधों, नहरों, जलाशयों, जलमार्गों, सुरंगों, पुलों, वायडक्टों, एक्वाडक्टों, पाइपलाइनों, टावरों, शीतलन टावरों, पारेषण टावरों और ऐसे अन्य कार्यों से है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट किया जा सकता है, लेकिन इसमें कोई भी भवन या अन्य निर्माण कार्य शामिल नहीं है जो किसी कारखाने या खान से संबंधित हो या कोई भी भवन या अन्य निर्माण कार्य जिसमें पिछले बारह महीनों में दस से कम श्रमिक कार्यरत हों या जहां ऐसा कार्य किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के अपने आवासीय उद्देश्यों के लिए हो और ऐसे कार्य की कुल लागत पचास लाख रुपये या ऐसी उच्च राशि से अधिक न हो। उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित की गई संख्या से अधिक श्रमिकों को नियोजित करना;
(7) "भवन निर्माण श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसे किसी भवन या अन्य निर्माण कार्य के संबंध में वेतन या पारिश्रमिक के लिए कोई कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, तकनीकी या लिपिकीय कार्य करने के लिए नियोजित किया जाता है, चाहे ऐसे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित हों, लेकिन इसमें ऐसा कोई व्यक्ति शामिल नहीं है जिसे मुख्य रूप से प्रबंधकीय या पर्यवेक्षी या प्रशासनिक क्षमता में नियोजित किया जाता है;
(8) "भवन निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड" से तात्पर्य धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड से है;
(9) कैरियर केंद्र से तात्पर्य किसी ऐसे कार्यालय (रोजगार विनिमय, स्थान या पोर्टल सहित) से है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से स्थापित और अनुरक्षित किया गया हो, ताकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कैरियर सेवाएं (पंजीकरण, सूचना संग्रह और प्रस्तुत करना, चाहे रजिस्टर रखकर या किसी अन्य माध्यम से, मैन्युअल रूप से, डिजिटल रूप से, आभासी रूप से या किसी अन्य माध्यम से) प्रदान की जा सकें, जो अन्य बातों के अलावा , सामान्यतः या विशिष्ट रूप से संबंधित हो सकती हैं।
(i) वे व्यक्ति जो कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहते हैं;
(ii) रोजगार चाहने वाले व्यक्ति;
(iii) रिक्तियों का उत्पन्न होना; और
(iv) वे व्यक्ति जो व्यावसायिक मार्गदर्शन और कैरियर परामर्श या स्वरोजगार शुरू करने के लिए मार्गदर्शन चाहते हैं;
(10) "केंद्रीय बोर्ड" से तात्पर्य धारा 4 के अधीन गठित कर्मचारी भविष्य निधि के न्यासी बोर्ड से है;
(11) "केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त" से तात्पर्य धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त केंद्रीय बोर्ड के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त से है;
(12) अध्याय VI के प्रयोजनों के लिए "बच्चा" में मृत शिशु भी शामिल है;
(13) "कमीशनिंग मदर" से तात्पर्य एक जैविक माँ से है जो किसी अन्य महिला में प्रत्यारोपित भ्रूण बनाने के लिए अपने अंडे का उपयोग करती है;
(14) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (20) में परिभाषित कंपनी से है;
(15) "मुआवजा" से तात्पर्य अध्याय VII के अधीन प्रदान किए गए मुआवजे से है;
(16) "सक्षम प्राधिकारी" से तात्पर्य अध्याय V के प्रयोजनों के लिए धारा 58 के अधीन नियुक्त प्राधिकारी, या अध्याय VI के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित प्राधिकारी, या अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए धारा 91 के अधीन उपयुक्त सरकार या राज्य सरकार द्वारा सक्षम प्राधिकारी के रूप में नियुक्त प्राधिकारी से है;
(17) "सेवा का पूर्ण वर्ष" से तात्पर्य बारह माह की निरंतर सेवा से है;
(18) "प्रसव" का अर्थ है जीवित बच्चे के जन्म के परिणामस्वरूप होने वाला प्रसव, या गर्भावस्था के छब्बीस सप्ताह के बाद होने वाला प्रसव जिसके परिणामस्वरूप बच्चा जीवित हो या मृत;
(19) "अनुबंध श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे श्रमिक से है जिसे किसी प्रतिष्ठान के कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियोजित माना जाएगा, जब उसे किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से, प्रधान नियोक्ता की जानकारी के साथ या उसके बिना, ऐसे कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियुक्त किया जाता है, और इसमें अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, लेकिन इसमें ऐसा कर्मचारी (अंशकालिक कर्मचारी के अलावा) शामिल नहीं है जो ठेकेदार द्वारा उसके प्रतिष्ठान की किसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से नियोजित है और उसका रोजगार रोजगार की शर्तों के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानकों (स्थायी आधार पर नियुक्ति सहित) द्वारा शासित होता है, और ऐसे रोजगार में उस समय लागू कानून के अनुसार वेतन में आवधिक वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और अन्य कल्याणकारी लाभ प्राप्त करता है;
(20) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में "ठेकेदार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो
(i) संविदा श्रम के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठान को माल या निर्मित वस्तुओं की मात्र आपूर्ति के अलावा, प्रतिष्ठान के लिए कोई निश्चित परिणाम उत्पन्न करने का कार्य करता है; या
(ii) प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए मात्र मानव संसाधन के रूप में संविदा श्रम की आपूर्ति करता है, और इसमें उप-ठेकेदार शामिल है;
(21) "अंश" का अर्थ है नियोक्ता द्वारा इस संहिता के अंतर्गत केंद्रीय बोर्ड और निगम को देय धनराशि, जैसा भी मामला हो, और इसमें इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी द्वारा या उसकी ओर से देय कोई भी राशि शामिल है;
(22) "निगम" से तात्पर्य धारा 5 के अधीन गठित कर्मचारी राज्य बीमा निगम से है;
(23) प्रसव का अर्थ है बच्चे का जन्म;
(24) "आश्रित" से तात्पर्य मृतक कर्मचारी के निम्नलिखित संबंधियों से है, अर्थात्:
(क) विधवा, नाबालिग वैध या दत्तक पुत्र, अविवाहित वैध या दत्तक पुत्री या विधवा माता:
बशर्ते कि अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, एक वैध दत्तक पुत्र, जिसने पच्चीस वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की है, मृतक कर्मचारी का आश्रित होगा;
(ख) यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय वह पूरी तरह से उसकी कमाई पर आश्रित हो, तो वह वैध या दत्तक पुत्र या पुत्री हो सकती है जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो और जो दुर्बल हो; अध्याय चतुर्थ के प्रयोजनों के लिए छोड़कर, जिसमें इस उपखंड में प्रयुक्त शब्द अठारह को शब्द पच्चीस से प्रतिस्थापित माना जाएगा;
(ग) यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय वह पूरी तरह या आंशिक रूप से उसकी कमाई पर निर्भर हो,
(i) एक विधुर;
(ii) विधवा माता के अलावा कोई अन्य अभिभावक;
(iii) एक नाबालिग नाजायज पुत्र, एक अविवाहित नाजायज पुत्री या वैध या नाजायज या गोद ली हुई पुत्री, यदि विवाहित और नाबालिग हो या यदि विधवा और नाबालिग हो;
(iv) नाबालिग भाई या अविवाहित बहन या विधवा बहन, यदि नाबालिग हो;
(v) विधवा बहू;
(vi) पूर्व-मृत पुत्र का नाबालिग बच्चा;
(vii) किसी पूर्व-मृत पुत्री का नाबालिग बच्चा, जहाँ बच्चे का कोई भी माता-पिता जीवित न हो, या;
(viii) यदि कर्मचारी का कोई माता-पिता जीवित नहीं है तो दादा-दादी।
स्पष्टीकरण.--- उप-खंड (ख) और उप-खंड (ग) के मद (छठी) और (सातवीं) के प्रयोजनों के लिए, पुत्र, पुत्री या बच्चे के संदर्भ में दत्तक पुत्र, पुत्री या बच्चा क्रमशः शामिल होगा;
(25) "डॉक वर्क" से तात्पर्य किसी बंदरगाह में या उसके आसपास माल की लोडिंग, अनलोडिंग, आवागमन या भंडारण से संबंधित, या उसके लिए आवश्यक, या उससे जुड़े किसी भी कार्य से है, जो जहाज या अन्य पोत, बंदरगाह, डॉक, भंडारण स्थान या लैंडिंग स्थान में या उससे माल की लोडिंग, अनलोडिंग, आवागमन या भंडारण से संबंधित हो, और इसमें शामिल है
(i) माल की प्राप्ति या निर्वहन के लिए जहाजों या अन्य जलयानों की तैयारी या बंदरगाह छोड़ने से संबंधित कार्य;
(ii) जहाज पर या गोदी में स्थित किसी भी भंडारण क्षेत्र, टैंक संरचना या उठाने वाली मशीनरी या किसी अन्य भंडारण क्षेत्र से संबंधित सभी मरम्मत और रखरखाव प्रक्रियाएं; और
(iii) जहाज पर या गोदी में स्थित किसी भी होल्ड, टैंक, संरचना या लिफ्टिंग मशीनरी या किसी अन्य भंडारण क्षेत्र की चिपिंग, पेंटिंग या सफाई करना;
(26) "कर्मचारी" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान द्वारा वेतन पर नियोजित किसी भी व्यक्ति (शिक्षु अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) के अधीन नियुक्त प्रशिक्षु के अलावा) से है, जो प्रत्यक्ष या ठेकेदार के माध्यम से किसी कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, परिचालन, पर्यवेक्षणीय, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी, लिपिकीय या किसी अन्य कार्य को करने के लिए नियोजित है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें उपयुक्त सरकार द्वारा कर्मचारी घोषित किया गया व्यक्ति भी शामिल है, लेकिन इसमें संघ के सशस्त्र बलों का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है:
बशर्ते कि अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और अध्याय IV को छोड़कर, कर्मचारी शब्द का अर्थ ऐसे कर्मचारी से होगा जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वेतन सीमा से कम या उसके बराबर वेतन प्राप्त करता हो, और इसमें ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग भी शामिल होगा जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा उन अध्यायों के प्रयोजनों के लिए कर्मचारी निर्दिष्ट कर सकती है।
इसके अलावा, अध्याय III और अध्याय IV के अंतर्गत किसी प्रतिष्ठान के अंतर्गत कर्मचारियों की गणना करते समय, उन कर्मचारियों को भी ध्यान में रखा जाएगा जिनका वेतन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वेतन सीमा से अधिक है।
इसके अलावा, अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए, कर्मचारी शब्द का अर्थ केवल ऐसे व्यक्ति होंगे जो द्वितीय अनुसूची में निर्दिष्ट हैं और ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग जिन्हें केंद्र सरकार, या जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार उक्त अनुसूची में अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के प्रयोजनों के लिए जोड़ सकती है;
(27) "नियोक्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो प्रत्यक्ष रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से, या उसकी ओर से, या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से, अपने प्रतिष्ठान में एक या अधिक कर्मचारियों को नियोजित करता है, और जहाँ प्रतिष्ठान केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग द्वारा संचालित होता है, वहाँ ऐसे विभाग के प्रमुख द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहाँ कोई प्राधिकारी निर्दिष्ट नहीं है, वहाँ विभाग का प्रमुख, और स्थानीय प्राधिकारी द्वारा संचालित प्रतिष्ठान के संबंध में, उस प्राधिकारी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और इसमें शामिल हैं,---
(क) किसी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में जो कारखाना है, कारखाने का अधिभोगी;
(ख) खान के संबंध में, खान का स्वामी या एजेंट या प्रबंधक, जिसके पास उस समय लागू कानून के तहत आवश्यक योग्यता हो और जिसे खान के स्वामी या एजेंट द्वारा इस रूप में नियुक्त किया गया हो;
(ग) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसे प्रतिष्ठान के मामलों पर अंतिम नियंत्रण प्राप्त है और जहां उक्त मामले किसी प्रबंधक या प्रबंध निदेशक को सौंपे गए हैं, तो ऐसा प्रबंधक या प्रबंध निदेशक;
(घ) ठेकेदार; और
(ई) मृतक नियोक्ता का कानूनी प्रतिनिधि;
(28) "रोजगार चोट" से तात्पर्य किसी कर्मचारी को दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हुई व्यक्तिगत चोट से है, जो उसके रोजगार के दौरान और उसके कारण उत्पन्न हुई हो,---
(i) अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, यदि कर्मचारी धारा 28 के अंतर्गत बीमित या बीमा योग्य कर्मचारी है, चाहे ऐसी दुर्घटना भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर घटित हो या व्यावसायिक रोग भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर हो; और
(ii) अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए, चाहे ऐसी दुर्घटना भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर घटित हो या व्यावसायिक रोग भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर हो;
(29) "संस्थान" से तात्पर्य है---
(क) ऐसा स्थान जहाँ कोई उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, विनिर्माण या पेशा चलाया जाता हो; या
(ख) कारखाना, मोटर परिवहन उपक्रम, समाचार पत्र प्रतिष्ठान, ऑडियोविजुअल उत्पादन, भवन एवं अन्य निर्माण कार्य या वृक्षारोपण; या
(ग) कोई खान, बंदरगाह या बंदरगाह के आसपास का क्षेत्र जहाँ गोदी का काम किया जाता है।
स्पष्टीकरण.--- अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, जहाँ किसी प्रतिष्ठान में विभिन्न विभाग हों या शाखाएँ हों, चाहे वे एक ही स्थान पर स्थित हों या अलग-अलग स्थानों पर, ऐसे सभी विभागों या शाखाओं को एक ही प्रतिष्ठान के भाग माना जाएगा;
(30) "कार्यकारी अधिकारी" से तात्पर्य उपयुक्त सरकार के ऐसे अधिकारी से है जिसे उस सरकार द्वारा अध्याय XIII के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित किया जा सकता है या ऐसे कार्यकारी अधिकारी द्वारा उस अध्याय के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए लिखित रूप में अधिकृत अधिकारी से है;
(31) अध्याय III के प्रयोजनों के लिए "छूट प्राप्त कर्मचारी" से तात्पर्य ऐसे कर्मचारी से है जिस पर धारा 15 में निर्दिष्ट योजनाओं में से कोई भी योजना, इस संहिता के तहत दी गई छूट के कारण, लागू होती और अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, ऐसे कर्मचारी से तात्पर्य है, जिसका वेतन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना में निर्दिष्ट है और जो कर्मचारी अंशदान का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है;
(32) "कारखाना" से तात्पर्य किसी भी परिसर से है, जिसमें उसका परिसर भी शामिल है---
(क) जहाँ दस या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, या पिछले बारह महीनों के किसी भी दिन कार्यरत थे, और जिसके किसी भाग में विद्युत सहायता से विनिर्माण प्रक्रिया चल रही है, या सामान्यतः इसी प्रकार चलती है, या
(ख) जहाँ बीस या अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, या पिछले बारह महीनों के किसी भी दिन काम कर रहे थे, और जिसके किसी भी हिस्से में बिजली की सहायता के बिना विनिर्माण प्रक्रिया चल रही है, या सामान्यतः इसी तरह चलती है, लेकिन इसमें खान, या संघ के सशस्त्र बलों से संबंधित मोबाइल इकाई, रेलवे रनिंग शेड या होटल, रेस्तरां या भोजनालय शामिल नहीं है।
स्पष्टीकरण 1.--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए कर्मचारियों की संख्या की गणना करने हेतु, एक दिन में (विभिन्न समूहों और रिले में) सभी कर्मचारियों को ध्यान में रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2. ---इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी परिसर या उसके किसी भाग में इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग यूनिट या कंप्यूटर यूनिट की स्थापना मात्र को कारखाना नहीं माना जाएगा, यदि ऐसे परिसर या उसके किसी भाग में कोई विनिर्माण प्रक्रिया नहीं चल रही हो;
(33) "परिवार" से तात्पर्य किसी कर्मचारी या असंगठित श्रमिक के निम्नलिखित सभी या कोई भी संबंधी हैं, जैसा भी मामला हो, अर्थात्:---
(क) पति/पत्नी;
(ख) कर्मचारी या असंगठित श्रमिक पर आश्रित कोई नाबालिग वैध या दत्तक बच्चा, जैसा भी मामला हो;
(ग) वह बच्चा जो कर्मचारी या असंगठित श्रमिक की कमाई पर पूरी तरह से निर्भर है, जैसा भी मामला हो, और जो---
(i) इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त करने तक शिक्षा प्राप्त करना; और
(ii) अविवाहित पुत्री;
(घ) कोई बच्चा जो किसी शारीरिक या मानसिक असामान्यता या चोट के कारण दुर्बल है और जब तक दुर्बलता बनी रहती है, तब तक वह कर्मचारी या असंगठित श्रमिक की कमाई पर पूरी तरह से निर्भर है;
(ई) आश्रित माता-पिता (महिला कर्मचारी के ससुर और सास सहित), जिनकी सभी स्रोतों से होने वाली आय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित आय से अधिक नहीं है;
(f) यदि कर्मचारी या असंगठित श्रमिक, जैसा भी मामला हो, अविवाहित है और उसके माता-पिता जीवित नहीं हैं, तो बीमित व्यक्ति की कमाई पर पूर्णतः आश्रित नाबालिग भाई या बहन;
(34) “निश्चित अवधि का रोजगार” से तात्पर्य किसी कर्मचारी को एक निश्चित अवधि के लिए लिखित रोजगार अनुबंध के आधार पर नियुक्त करना है:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) उसके काम के घंटे, वेतन, भत्ते और अन्य लाभ उसी काम या समान प्रकृति के काम करने वाले स्थायी कर्मचारी से कम नहीं होंगे; और
(ख) वह किसी भी लागू कानून के तहत स्थायी कर्मचारी को उपलब्ध सभी लाभों के लिए पात्र होगा, जो उसके द्वारा प्रदत्त सेवा अवधि के अनुसार आनुपातिक रूप से दिए जाते हैं, भले ही उसकी रोजगार अवधि आवश्यक अर्हता अवधि तक न हो;
(35) "गिग वर्कर" का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो काम करता है या किसी कार्य व्यवस्था में भाग लेता है और पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बाहर ऐसी गतिविधियों से कमाता है;
(36) "घर-आधारित कार्यकर्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो नियोक्ता के कार्यस्थल के अलावा अपने घर या अपनी पसंद के किसी अन्य परिसर में नियोक्ता के लिए माल या सेवाओं के उत्पादन में लगा हुआ है, पारिश्रमिक के लिए, चाहे नियोक्ता उपकरण, सामग्री या अन्य इनपुट प्रदान करता हो या नहीं;
(37) "निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता" से तात्पर्य धारा 122 के अधीन नियुक्त निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता से है;
(38) "बीमा निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अधीन स्थापित जमा-संबद्ध बीमा निधि से है;
(39) "बीमाकृत व्यक्ति" से तात्पर्य धारा 28 में निर्दिष्ट बीमाकृत व्यक्ति से है;
(40) "बीमा योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अधीन गठित जमा-संबद्ध बीमा योजना से है;
(41) "अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी प्रतिष्ठान में कार्यरत है और जो
(i) किसी राज्य में नियोक्ता द्वारा सीधे या ठेकेदार के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से भर्ती किया गया हो, और उसे दूसरे राज्य में स्थित ऐसे प्रतिष्ठान में रोजगार के लिए नियुक्त किया गया हो; या
(ii) किसी एक राज्य से स्वयं आकर दूसरे राज्य (जिसे इसके बाद गंतव्य राज्य कहा जाएगा) के किसी प्रतिष्ठान में रोजगार प्राप्त कर लिया हो या बाद में गंतव्य राज्य के भीतर किसी समझौते या अन्य व्यवस्था के तहत ऐसे रोजगार के लिए प्रतिष्ठान बदल लिया हो और प्रति माह अठारह हजार रुपये से अधिक वेतन या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाने वाली ऐसी उच्च राशि प्राप्त कर रहा हो;
(42) "विनिर्माण प्रक्रिया" से तात्पर्य किसी भी प्रक्रिया से है---
(i) किसी वस्तु या पदार्थ का उपयोग, बिक्री, परिवहन, वितरण या निपटान के उद्देश्य से उसका निर्माण, परिवर्तन, मरम्मत, अलंकरण, परिष्करण, तेल लगाना, धोना, साफ करना, तोड़ना, नष्ट करना, परिष्कृत करना, या अन्यथा उपचार करना या उसे अनुकूलित करना; या
(ii) तेल, पानी, मलजल या किसी अन्य पदार्थ को पंप करना; या
(iii) बिजली उत्पन्न करना, रूपांतरित करना या संचारित करना; या
(iv) रचना, ऑफसेट प्रिंटिंग, लेटर प्रेस द्वारा प्रिंटिंग, लिथोग्राफी, फोटोग्राव्योर स्क्रीन प्रिंटिंग, त्रि-आयामी या चार-आयामी प्रिंटिंग, प्रोटोटाइपिंग, फ्लेक्सोग्राफी या अन्य प्रकार की प्रिंटिंग प्रक्रिया या पुस्तक बाइंडिंग; या
(v) जहाजों या जलयानों का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण, परिष्करण या तोड़ना; या
(vi) किसी वस्तु को शीत भंडारण में संरक्षित करना या संग्रहित करना; या
(vii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली अन्य गतिविधियाँ;
(43) अध्याय VI के संदर्भ में "मातृत्व लाभ" से तात्पर्य धारा 60 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट भुगतान से है;
(44) "चिकित्सक" से तात्पर्य किसी भी कानून के तहत पंजीकृत व्यक्ति से है जो उस समय लागू हो, या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संहिता के प्रयोजनों के लिए चिकित्सक के रूप में योग्य घोषित किए गए किसी भी व्यक्ति से है:
बशर्ते कि विशिष्ट योग्यता रखने वाले चिकित्सा चिकित्सकों के विभिन्न वर्ग या वर्ग केंद्र सरकार द्वारा अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के अन्य अध्यायों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किए जा सकते हैं;
(45) "गर्भावस्था का चिकित्सकीय समापन" से तात्पर्य गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (34 ऑफ 1971) के प्रावधानों के तहत अनुमेय गर्भावस्था के समापन से है;
(46) "खान" का वही अर्थ होगा जो खान अधिनियम, 1952 (35 ऑफ 1952) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (जे) में दिया गया है;
(47) "नाबालिग" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की है;
(48) "गर्भपात" का अर्थ गर्भावस्था के छब्बीसवें सप्ताह से पहले या उसके दौरान किसी भी अवधि में गर्भवती गर्भाशय की सामग्री का निष्कासन है, लेकिन इसमें कोई भी गर्भपात शामिल नहीं है, जिसके कारण भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के तहत दंडनीय है;
(49) "राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड" से तात्पर्य धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन गठित असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड से है;
(50) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र या किसी राज्य के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, जैसा भी मामला हो, और "अधिसूचित करना" शब्द को उसके व्याकरणिक भेदों और संबंधित अभिव्यक्तियों के साथ तदनुसार समझा जाएगा;
(51) "व्यावसायिक रोग" से तात्पर्य तीसरी अनुसूची में कर्मचारी के रोजगार से संबंधित विशिष्ट रोग के रूप में निर्दिष्ट रोग से है;
(52) "कारखाने के संबंध में अधिभोगी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसका कारखाने के मामलों पर अंतिम नियंत्रण होता है:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) किसी फर्म या व्यक्तियों के अन्य संघ के मामले में, उसके व्यक्तिगत साझेदारों या सदस्यों में से कोई एक;
(ख) किसी कंपनी के मामले में, कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 149 की उपधारा (6) के अर्थ में किसी स्वतंत्र निदेशक को छोड़कर, कोई भी निदेशक;
(ग) केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण के स्वामित्व या नियंत्रण वाले कारखाने के मामले में, केंद्र सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा कारखाने के मामलों का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त व्यक्ति या व्यक्तियों को।
उसे कब्जेदार माना जाएगा:
इसके अलावा, यदि कोई जहाज किराए पर उपलब्ध ड्राई डॉक में मरम्मत या रखरखाव कार्य के लिए रखा गया है, तो डॉक के मालिक को सभी प्रयोजनों के लिए अधिभोगी माना जाएगा, सिवाय उन मामलों के जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं और जो जहाज की स्थिति से सीधे संबंधित हैं, जिनके लिए जहाज के मालिक को अधिभोगी माना जाएगा;
(53) "तेलक्षेत्र" का वही अर्थ होगा जो तेलक्षेत्र (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 1948 (1948 का 53) की धारा 3 के खंड (ई) में दिया गया है;
(54) "संगठित क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है जो असंगठित क्षेत्र नहीं है;
(55) "स्थायी आंशिक विकलांगता" से तात्पर्य ऐसी विकलांगता से है, जहाँ विकलांगता स्थायी प्रकृति की हो, जिससे किसी कर्मचारी की कमाई की क्षमता उन सभी रोजगारों में कम हो जाती है जिन्हें वह विकलांगता उत्पन्न करने वाली दुर्घटना के समय करने में सक्षम था।
बशर्ते कि चौथी अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट प्रत्येक चोट को स्थायी आंशिक विकलांगता का परिणाम माना जाएगा;
(56) "स्थायी पूर्ण विकलांगता" से तात्पर्य ऐसी स्थायी विकलांगता से है जो किसी कर्मचारी को उस सभी कार्य के लिए अक्षम कर देती है जिसे वह ऐसी विकलांगता उत्पन्न करने वाली दुर्घटना के समय करने में सक्षम था:
बशर्ते कि स्थायी पूर्ण विकलांगता चौथी अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट प्रत्येक चोट या उसके भाग II में निर्दिष्ट चोटों के किसी भी संयोजन से उत्पन्न मानी जाएगी, जहाँ उक्त भाग II में निर्दिष्ट चोटों के विरुद्ध अर्जित क्षमता की हानि का कुल प्रतिशत सौ प्रतिशत हो।
(57) "पेंशन निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन स्थापित पेंशन निधि से है;
(58) "पेंशन योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन गठित कर्मचारी पेंशन योजना से है;
(59) वृक्षारोपण का अर्थ है---
(क) कोई भी भूमि जिसका उपयोग किया जाता है या जिसका उपयोग करने का इरादा है
(i) चाय, कॉफी, रबर, सिंकोना या इलायची की खेती जो पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में की जाती हो;
(ii) कोई अन्य संयंत्र उगाना, जिसका क्षेत्रफल पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक हो और जिसमें दस या अधिक व्यक्ति कार्यरत हों या पिछले बारह महीनों में किसी भी दिन कार्यरत रहे हों, यदि केंद्र सरकार की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसा निर्देश देती है।
स्पष्टीकरण.--- जहाँ इस उपखंड में निर्दिष्ट किसी पौधे को उगाने के लिए उपयोग की जाने वाली कोई भूमि पाँच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल की हो और किसी अन्य भूमि से सटी हुई हो जिसका इस प्रकार उपयोग नहीं किया जा रहा हो, परन्तु जिसका इस प्रकार उपयोग किया जा सकता हो, और ऐसी दोनों भूमियाँ एक ही नियोक्ता के प्रबंधन में हों, तो इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, पहले उल्लिखित भूमि को वृक्षारोपण माना जाएगा, यदि ऐसी दोनों भूमियों का कुल क्षेत्रफल पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक हो;
(ख) कोई भी भूमि जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा घोषित करे और जिसका उपयोग उप-खंड (क) में निर्दिष्ट किसी पौधे को उगाने के लिए किया जाता हो या किया जाना अभिप्रेत हो, भले ही उसका क्षेत्रफल पांच हेक्टेयर से कम हो:
बशर्ते कि इस संहिता के प्रारंभ होने से ठीक पहले पाँच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाली किसी भी भूमि के संबंध में ऐसी कोई घोषणा नहीं की जाएगी; और
(ग) कार्यालय, अस्पताल, औषधालयाँ, विद्यालय और उप-खंड (क) और उप-खंड (ख) के अर्थ में किसी भी वृक्षारोपण से संबंधित किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले कोई अन्य परिसर; लेकिन परिसर में स्थित कारखाना इसमें शामिल नहीं है;
(60) "प्लेटफ़ॉर्म कार्य" से तात्पर्य पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर की कार्य व्यवस्था से है जिसमें संगठन या व्यक्ति विशिष्ट समस्याओं को हल करने या विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली ऐसी अन्य गतिविधियों के लिए भुगतान के बदले में अन्य संगठनों या व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते हैं;
(61) "प्लेटफ़ॉर्म कार्यकर्ता" से तात्पर्य प्लेटफ़ॉर्म कार्य में लगे या प्लेटफ़ॉर्म कार्य करने वाले व्यक्ति से है; (62) "बंदरगाह" का वही अर्थ होगा जो भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 (15 ऑफ 1908) की धारा 3 के खंड (4) में दिया गया है;
(63) "भविष्य निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन स्थापित कर्मचारी भविष्य निधि से है;
(64) "भविष्य निधि योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन गठित कर्मचारी भविष्य निधि योजना से है;
(65) "निर्धारित" से तात्पर्य इस संहिता के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(66) "रेलवे" का वही अर्थ होगा जो रेल अधिनियम, 1989 (24 ऑफ 1989) की धारा 2 के खंड (31) में दिया गया है;
(67) "रेलवे कंपनी" में निगमित या गैर-निगमित कोई भी व्यक्ति शामिल है, जो रेलवे के मालिक या पट्टेदार हैं या रेलवे के संचालन के लिए किसी समझौते के पक्षकार हैं;
(68) "वसूली अधिकारी" से तात्पर्य केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्रीय बोर्ड या निगम के किसी भी अधिकारी से है, जिसे केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना द्वारा इस संहिता के अंतर्गत वसूली अधिकारी के कार्यों का निर्वहन करने और शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया जा सकता है;
(69) "विनियम" से तात्पर्य इस संहिता के अंतर्गत निगम द्वारा बनाए गए विनियमों से है;
(70) "सेवानिवृत्ति" से तात्पर्य किसी कर्मचारी की सेवा की समाप्ति से है, जो कि अधिवर्षिता के अलावा किसी अन्य कारण से हो;
(71) "बिक्री संवर्धन कर्मचारी" से तात्पर्य बिक्री संवर्धन कर्मचारी अधिनियम, 1976 (11 ऑफ 1976) की धारा 2 के खंड (घ) में परिभाषित बिक्री संवर्धन कर्मचारियों से है;
(72) "अनुसूची" से तात्पर्य इस संहिता की अनुसूची से है;
(73) "नाविक" से तात्पर्य किसी जहाज के चालक दल का हिस्सा बनने वाले किसी भी व्यक्ति से है, लेकिन इसमें जहाज का स्वामी शामिल नहीं है;
(74) "मौसमी कारखाना" से तात्पर्य ऐसे कारखाने से है जो विशेष रूप से निम्नलिखित विनिर्माण प्रक्रियाओं में से एक या अधिक में लगा हुआ है, अर्थात् कपास की ओटाई, कपास या जूट की पेराई, मूंगफली का छिलका उतारना, नील, लाख, चीनी (गुड़ सहित) का निर्माण या कोई भी विनिर्माण प्रक्रिया जो उपरोक्त प्रक्रियाओं में से किसी से संबंधित या उससे जुड़ी हुई है और इसमें ऐसा कारखाना भी शामिल है जो एक वर्ष में सात महीने से अधिक की अवधि के लिए ऐसी विनिर्माण प्रक्रिया में लगा हुआ है जिसे केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;
(75) "स्व-नियोजित श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे किसी व्यक्ति से है जो किसी नियोक्ता द्वारा नियोजित नहीं है, परन्तु असंगठित क्षेत्र में किसी व्यवसाय में संलग्न है, जिसकी मासिक आय केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि के अधीन है, या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सीमा के अधीन कृषि योग्य भूमि धारण करता है;
(76) किसी राज्य के संबंध में "दुकान" का अर्थ उस राज्य में दुकान से संबंधित किसी भी कानून में परिभाषित दुकान है;
(77) "बीमारी" से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है जिसके लिए चिकित्सा उपचार और देखभाल की आवश्यकता होती है और जिसके लिए चिकित्सा कारणों से काम से परहेज करना आवश्यक होता है;
(78) "सामाजिक सुरक्षा" से तात्पर्य कर्मचारियों, असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करने और आय सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से है, विशेष रूप से वृद्धावस्था, बेरोजगारी, बीमारी, विकलांगता, कार्य चोट, मातृत्व या परिवार के मुखिया की मृत्यु के मामलों में, इस संहिता के तहत उन्हें प्रदत्त अधिकारों और बनाई गई योजनाओं के माध्यम से;
(79) "सामाजिक सुरक्षा संगठन" से तात्पर्य इस संहिता के अधीन स्थापित निम्नलिखित संगठनों से है, अर्थात्:---
(क) धारा 4 के तहत गठित कर्मचारी भविष्य निधि का केंद्रीय न्यासी बोर्ड;
(ख) धारा 5 के अधीन गठित कर्मचारी राज्य बीमा निगम;
(ग) धारा 6 के अधीन गठित असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड;
(घ) धारा 6 के अधीन गठित राज्य असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड;
(ई) धारा 7 के अधीन गठित राज्य भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड; एवं
(f) केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा संगठन घोषित किया गया कोई अन्य संगठन या विशेष प्रयोजन वाहन;
(80) "राज्य सरकार" में शामिल है---
(क) विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, केंद्र शासित प्रदेश की सरकार; और
(ख) विधानमंडलविहीन केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त प्रशासक को उसका प्रशासक नियुक्त किया जाएगा;
(81) "राज्य असंगठित श्रमिक बोर्ड" से तात्पर्य धारा 6 की उपधारा (9) के अधीन गठित राज्य असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड से है;
(82) किसी कर्मचारी के संबंध में "सेवानिवृत्ति" का अर्थ है कर्मचारी द्वारा ऐसी आयु प्राप्त करना जो सेवा अनुबंध या शर्तों में निर्धारित की गई हो, जिस आयु को प्राप्त करने पर कर्मचारी को रोजगार छोड़ना होगा।
बशर्ते कि अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, सेवानिवृत्ति की आयु अट्ठावन वर्ष होगी;
(83) "अस्थायी अक्षमता" का अर्थ रोजगार चोट के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली ऐसी स्थिति है जिसके लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है और जो किसी कर्मचारी को, ऐसी चोट के परिणामस्वरूप, उस काम को करने में अस्थायी रूप से असमर्थ बना देती है जो वह चोट से पहले या चोट के समय कर रहा था;
(84) "ट्रिब्यूनल" से तात्पर्य औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 7ए के तहत उपयुक्त सरकार द्वारा गठित औद्योगिक ट्रिब्यूनल से है;
(85) "असंगठित" क्षेत्र का अर्थ है व्यक्तियों या स्व-नियोजित श्रमिकों के स्वामित्व वाला कोई उद्यम तथा किसी भी प्रकार के माल के उत्पादन या बिक्री तथा सेवा प्रदान करने में संलग्न उद्यम तथा जहां उद्यम श्रमिकों को नियोजित करता है, वहां ऐसे श्रमिकों की संख्या दस से कम होती है;
(86) "असंगठित श्रमिक" से तात्पर्य असंगठित क्षेत्र में घर पर काम करने वाले श्रमिक, स्व-नियोजित श्रमिक या दिहाड़ी श्रमिक से है तथा इसमें संगठित क्षेत्र का वह श्रमिक भी शामिल है जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 या इस संहिता के अध्याय III से VII के अंतर्गत नहीं आता है;
(87) अध्याय XIII के प्रयोजनों के लिए, "रिक्ति" का अर्थ किसी व्यक्ति को नियोजित करने और पारिश्रमिक प्रदान करने के उद्देश्य से किसी कैडर या व्यवसाय में रिक्त पद (जिसमें नवनिर्मित पद, प्रशिक्षु का पद, प्रशिक्षु के माध्यम से भरा जाने वाला पद या किसी अन्य माध्यम से किसी प्रतिष्ठान में सृजित कोई रिक्त पद शामिल है) है;
(88) "मजदूरी" से तात्पर्य सभी पारिश्रमिक से है, चाहे वह वेतन, भत्ते या किसी अन्य रूप में हो, जो धन के रूप में व्यक्त किया गया हो या इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता हो, जो रोजगार की शर्तों (स्पष्ट या निहित) के पूरा होने पर, किसी नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार या ऐसे रोजगार में किए गए कार्य के संबंध में देय होगा, और इसमें शामिल है,---
(क) मूल वेतन;
(ख) महंगाई भत्ता; और
(सी) यदि कोई हो तो प्रतिधारण भत्ता,
लेकिन इसमें शामिल नहीं है---
(क) किसी भी कानून के तहत देय कोई बोनस, जो रोजगार की शर्तों के तहत देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं है;
(ख) किसी आवास का मूल्य, या प्रकाश, पानी, चिकित्सा सेवा या अन्य सुविधा की आपूर्ति का मूल्य, या किसी ऐसी सेवा का मूल्य जिसे उपयुक्त सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा मजदूरी की गणना से बाहर रखा गया हो;
(ग) नियोक्ता द्वारा किसी पेंशन या भविष्य निधि में भुगतान किया गया कोई अंशदान और उस पर अर्जित ब्याज;
(घ) कोई परिवहन भत्ता या किसी यात्रा रियायत का मूल्य;
(ई) नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार की प्रकृति के कारण उस पर लगने वाले विशेष खर्चों को पूरा करने के लिए भुगतान की गई कोई भी राशि;
(f) मकान किराया भत्ता;
(जी) पक्षों के बीच किसी पुरस्कार या समझौते या न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश के तहत देय पारिश्रमिक;
(h) कोई भी ओवरटाइम भत्ता;
(i) कर्मचारी को देय कोई कमीशन;
(j) रोजगार की समाप्ति पर देय कोई भी ग्रेच्युटी;
(k) किसी भी कानून के तहत कर्मचारी को देय कोई छंटनी मुआवजा या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ या रोजगार की समाप्ति पर उसे किया गया कोई अनुग्रह भुगतान:
इस खंड के अंतर्गत मजदूरी की गणना करते समय, यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपखंड (क) से (i) के अंतर्गत किया गया भुगतान, इस खंड के अंतर्गत परिकलित कुल पारिश्रमिक के आधे या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य प्रतिशत से अधिक हो, तो ऐसे आधे या अधिसूचित प्रतिशत से अधिक की राशि को पारिश्रमिक माना जाएगा और तदनुसार इस खंड के अंतर्गत मजदूरी में जोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा, सभी लिंगों को समान वेतन देने के उद्देश्य से और वेतन भुगतान के उद्देश्य से, उप-खंड (घ), (च), (छ) और (ह) में निर्दिष्ट पारिश्रमिकों को वेतन की गणना के लिए लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.--- जहाँ किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा देय संपूर्ण या आंशिक वेतन के बदले में कोई वस्तुगत पारिश्रमिक दिया जाता है, तो ऐसे वस्तुगत पारिश्रमिक का वह मूल्य जो उसे देय कुल वेतन के पंद्रह प्रतिशत से अधिक न हो, उस कर्मचारी के वेतन का हिस्सा माना जाएगा;
(89) "मजदूरी सीमा" से तात्पर्य मजदूरी की ऐसी राशि से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अध्याय III और अध्याय IV के अंतर्गत सदस्य बनने के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित किया जा सकता है;
(90) "मजदूर" से तात्पर्य असंगठित क्षेत्र में पारिश्रमिक के लिए नियोजित व्यक्ति से है, जो सीधे नियोक्ता द्वारा या किसी ठेकेदार के माध्यम से, कार्यस्थल की परवाह किए बिना, चाहे वह विशेष रूप से एक नियोक्ता के लिए हो या एक या अधिक नियोक्ताओं के लिए, चाहे नकद में हो या वस्तु के रूप में, चाहे वह घर-आधारित श्रमिक हो, या अस्थायी या आकस्मिक श्रमिक हो, या प्रवासी श्रमिक हो, या घरेलू कामगारों सहित घरों द्वारा नियोजित श्रमिक हों, जिनका मासिक वेतन केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित राशि के बराबर हो, जैसा भी मामला हो;
(91) "महिला" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान में मजदूरी के लिए प्रत्यक्ष रूप से या किसी ठेकेदार के माध्यम से नियोजित महिला से है:
बशर्ते कि अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, वह महिला जो कर्मचारी है या थी, जिसके संबंध में उक्त अध्याय के अंतर्गत अंशदान देय है या था, और जो इसके कारण उक्त अध्याय के अंतर्गत प्रदान किए गए किसी भी लाभ की हकदार है, उसे बीमित महिला कहा जाएगा और इसमें निम्नलिखित शामिल होंगे:
(i) एक ऐसी गर्भवती माँ जो जैविक माँ के रूप में बच्चा चाहती है और किसी अन्य महिला में भ्रूण प्रत्यारोपण करवाना पसंद करती है;
(ii) वह महिला जो तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेती है।
(1) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में प्रयुक्त "एजेंट" से तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति से है, चाहे उसे इस रूप में नियुक्त किया गया हो या नहीं, जो स्वामी की ओर से कार्य करते हुए या कार्य करने का आशय रखते हुए, ऐसे प्रतिष्ठान या उसके किसी भाग के प्रबंधन, नियंत्रण, पर्यवेक्षण या निर्देशन में भाग लेता है;
(2) "एग्रीगेटर" का अर्थ है किसी सेवा के खरीदार या उपयोगकर्ता के लिए विक्रेता या सेवा प्रदाता से जुड़ने हेतु एक डिजिटल मध्यस्थ या बाज़ार;
(3) "उपयुक्त" सरकार से तात्पर्य है---
(क) केंद्र सरकार द्वारा या उसके अधिकार के अधीन संचालित किसी प्रतिष्ठान के संबंध में, या केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किसी नियंत्रित उद्योग के संबंध में, या रेलवे (मेट्रो रेलवे सहित), खानों, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाहों, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी, या किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा स्थापित निगम या अन्य प्राधिकरण, या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों, प्रमुख उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों, या केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्वायत्त निकायों, जिनमें ऐसे प्रतिष्ठान, निगम या अन्य प्राधिकरण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सहायक कंपनियों या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों के प्रतिष्ठान शामिल हैं, या कोई भी कंपनी जिसमें कम से कम इक्यावन प्रतिशत चुकता शेयर पूंजी केंद्र सरकार के पास है, जैसा भी मामला हो, या एक से अधिक राज्यों में विभागों या शाखाओं वाले प्रतिष्ठान के संबंध में, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार; और
(ख) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, राज्य सरकार।
स्पष्टीकरण 1--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, मेट्रो रेलवे अभिव्यक्ति का अर्थ मेट्रो रेलवे है जैसा कि मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 (2002 का 60) की धारा 2 के खंड (1) के उपखंड (i) में परिभाषित है।
स्पष्टीकरण 2.--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए केंद्र सरकार उपयुक्त सरकार बनी रहेगी, भले ही इस संहिता के प्रारंभ होने के बाद उस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी पचास प्रतिशत से कम हो जाए;
(4) "श्रव्य-दृश्य उत्पादन" से तात्पर्य भारत में पूर्णतः या आंशिकतः निर्मित श्रव्य-दृश्य से है और इसमें शामिल हैं---
(i) एनीमेशन, कार्टून चित्रण, ऑडियो-विजुअल विज्ञापन;
(ii) डिजिटल उत्पादन या उससे संबंधित कोई भी गतिविधि; और
(iii) फीचर फिल्में, नॉन-फीचर फिल्में, टेलीविजन, वेब आधारित धारावाहिक, टॉक शो, रियलिटी शो और खेल शो;
(5) "अधिकृत अधिकारी" से तात्पर्य केंद्रीय बोर्ड के ऐसे अधिकारी से है, या जैसा भी मामला हो, निगम के ऐसे अधिकारी से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया हो;
(6) "भवन या अन्य निर्माण कार्य" से तात्पर्य भवनों, सड़कों, रेलमार्गों, ट्रामवे, हवाई अड्डों, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध और नौवहन कार्यों, बाढ़ नियंत्रण कार्यों (तूफान जल निकासी कार्यों सहित), बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण, जल कार्यों (जल वितरण के लिए चैनलों सहित), तेल और गैस प्रतिष्ठानों, विद्युत लाइनों, इंटरनेट टावरों, वायरलेस, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीग्राफ और विदेशी संचार, बांधों, नहरों, जलाशयों, जलमार्गों, सुरंगों, पुलों, वायडक्टों, एक्वाडक्टों, पाइपलाइनों, टावरों, शीतलन टावरों, पारेषण टावरों और ऐसे अन्य कार्यों से है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट किया जा सकता है, लेकिन इसमें कोई भी भवन या अन्य निर्माण कार्य शामिल नहीं है जो किसी कारखाने या खान से संबंधित हो या कोई भी भवन या अन्य निर्माण कार्य जिसमें पिछले बारह महीनों में दस से कम श्रमिक कार्यरत हों या जहां ऐसा कार्य किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के अपने आवासीय उद्देश्यों के लिए हो और ऐसे कार्य की कुल लागत पचास लाख रुपये या ऐसी उच्च राशि से अधिक न हो। उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित की गई संख्या से अधिक श्रमिकों को नियोजित करना;
(7) "भवन निर्माण श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसे किसी भवन या अन्य निर्माण कार्य के संबंध में वेतन या पारिश्रमिक के लिए कोई कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, तकनीकी या लिपिकीय कार्य करने के लिए नियोजित किया जाता है, चाहे ऐसे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित हों, लेकिन इसमें ऐसा कोई व्यक्ति शामिल नहीं है जिसे मुख्य रूप से प्रबंधकीय या पर्यवेक्षी या प्रशासनिक क्षमता में नियोजित किया जाता है;
(8) "भवन निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड" से तात्पर्य धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड से है;
(9) कैरियर केंद्र से तात्पर्य किसी ऐसे कार्यालय (रोजगार विनिमय, स्थान या पोर्टल सहित) से है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से स्थापित और अनुरक्षित किया गया हो, ताकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कैरियर सेवाएं (पंजीकरण, सूचना संग्रह और प्रस्तुत करना, चाहे रजिस्टर रखकर या किसी अन्य माध्यम से, मैन्युअल रूप से, डिजिटल रूप से, आभासी रूप से या किसी अन्य माध्यम से) प्रदान की जा सकें, जो अन्य बातों के अलावा , सामान्यतः या विशिष्ट रूप से संबंधित हो सकती हैं।
(i) वे व्यक्ति जो कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहते हैं;
(ii) रोजगार चाहने वाले व्यक्ति;
(iii) रिक्तियों का उत्पन्न होना; और
(iv) वे व्यक्ति जो व्यावसायिक मार्गदर्शन और कैरियर परामर्श या स्वरोजगार शुरू करने के लिए मार्गदर्शन चाहते हैं;
(10) "केंद्रीय बोर्ड" से तात्पर्य धारा 4 के अधीन गठित कर्मचारी भविष्य निधि के न्यासी बोर्ड से है;
(11) "केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त" से तात्पर्य धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त केंद्रीय बोर्ड के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त से है;
(12) अध्याय VI के प्रयोजनों के लिए "बच्चा" में मृत शिशु भी शामिल है;
(13) "कमीशनिंग मदर" से तात्पर्य एक जैविक माँ से है जो किसी अन्य महिला में प्रत्यारोपित भ्रूण बनाने के लिए अपने अंडे का उपयोग करती है;
(14) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (20) में परिभाषित कंपनी से है;
(15) "मुआवजा" से तात्पर्य अध्याय VII के अधीन प्रदान किए गए मुआवजे से है;
(16) "सक्षम प्राधिकारी" से तात्पर्य अध्याय V के प्रयोजनों के लिए धारा 58 के अधीन नियुक्त प्राधिकारी, या अध्याय VI के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित प्राधिकारी, या अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए धारा 91 के अधीन उपयुक्त सरकार या राज्य सरकार द्वारा सक्षम प्राधिकारी के रूप में नियुक्त प्राधिकारी से है;
(17) "सेवा का पूर्ण वर्ष" से तात्पर्य बारह माह की निरंतर सेवा से है;
(18) "प्रसव" का अर्थ है जीवित बच्चे के जन्म के परिणामस्वरूप होने वाला प्रसव, या गर्भावस्था के छब्बीस सप्ताह के बाद होने वाला प्रसव जिसके परिणामस्वरूप बच्चा जीवित हो या मृत;
(19) "अनुबंध श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे श्रमिक से है जिसे किसी प्रतिष्ठान के कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियोजित माना जाएगा, जब उसे किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से, प्रधान नियोक्ता की जानकारी के साथ या उसके बिना, ऐसे कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियुक्त किया जाता है, और इसमें अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, लेकिन इसमें ऐसा कर्मचारी (अंशकालिक कर्मचारी के अलावा) शामिल नहीं है जो ठेकेदार द्वारा उसके प्रतिष्ठान की किसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से नियोजित है और उसका रोजगार रोजगार की शर्तों के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानकों (स्थायी आधार पर नियुक्ति सहित) द्वारा शासित होता है, और ऐसे रोजगार में उस समय लागू कानून के अनुसार वेतन में आवधिक वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और अन्य कल्याणकारी लाभ प्राप्त करता है;
(20) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में "ठेकेदार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो
(i) संविदा श्रम के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठान को माल या निर्मित वस्तुओं की मात्र आपूर्ति के अलावा, प्रतिष्ठान के लिए कोई निश्चित परिणाम उत्पन्न करने का कार्य करता है; या
(ii) प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए मात्र मानव संसाधन के रूप में संविदा श्रम की आपूर्ति करता है, और इसमें उप-ठेकेदार शामिल है;
(21) "अंश" का अर्थ है नियोक्ता द्वारा इस संहिता के अंतर्गत केंद्रीय बोर्ड और निगम को देय धनराशि, जैसा भी मामला हो, और इसमें इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी द्वारा या उसकी ओर से देय कोई भी राशि शामिल है;
(22) "निगम" से तात्पर्य धारा 5 के अधीन गठित कर्मचारी राज्य बीमा निगम से है;
(23) प्रसव का अर्थ है बच्चे का जन्म;
(24) "आश्रित" से तात्पर्य मृतक कर्मचारी के निम्नलिखित संबंधियों से है, अर्थात्:
(क) विधवा, नाबालिग वैध या दत्तक पुत्र, अविवाहित वैध या दत्तक पुत्री या विधवा माता:
बशर्ते कि अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, एक वैध दत्तक पुत्र, जिसने पच्चीस वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की है, मृतक कर्मचारी का आश्रित होगा;
(ख) यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय वह पूरी तरह से उसकी कमाई पर आश्रित हो, तो वह वैध या दत्तक पुत्र या पुत्री हो सकती है जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो और जो दुर्बल हो; अध्याय चतुर्थ के प्रयोजनों के लिए छोड़कर, जिसमें इस उपखंड में प्रयुक्त शब्द अठारह को शब्द पच्चीस से प्रतिस्थापित माना जाएगा;
(ग) यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय वह पूरी तरह या आंशिक रूप से उसकी कमाई पर निर्भर हो,
(i) एक विधुर;
(ii) विधवा माता के अलावा कोई अन्य अभिभावक;
(iii) एक नाबालिग नाजायज पुत्र, एक अविवाहित नाजायज पुत्री या वैध या नाजायज या गोद ली हुई पुत्री, यदि विवाहित और नाबालिग हो या यदि विधवा और नाबालिग हो;
(iv) नाबालिग भाई या अविवाहित बहन या विधवा बहन, यदि नाबालिग हो;
(v) विधवा बहू;
(vi) पूर्व-मृत पुत्र का नाबालिग बच्चा;
(vii) किसी पूर्व-मृत पुत्री का नाबालिग बच्चा, जहाँ बच्चे का कोई भी माता-पिता जीवित न हो, या;
(viii) यदि कर्मचारी का कोई माता-पिता जीवित नहीं है तो दादा-दादी।
स्पष्टीकरण.--- उप-खंड (ख) और उप-खंड (ग) के मद (छठी) और (सातवीं) के प्रयोजनों के लिए, पुत्र, पुत्री या बच्चे के संदर्भ में दत्तक पुत्र, पुत्री या बच्चा क्रमशः शामिल होगा;
(25) "डॉक वर्क" से तात्पर्य किसी बंदरगाह में या उसके आसपास माल की लोडिंग, अनलोडिंग, आवागमन या भंडारण से संबंधित, या उसके लिए आवश्यक, या उससे जुड़े किसी भी कार्य से है, जो जहाज या अन्य पोत, बंदरगाह, डॉक, भंडारण स्थान या लैंडिंग स्थान में या उससे माल की लोडिंग, अनलोडिंग, आवागमन या भंडारण से संबंधित हो, और इसमें शामिल है
(i) माल की प्राप्ति या निर्वहन के लिए जहाजों या अन्य जलयानों की तैयारी या बंदरगाह छोड़ने से संबंधित कार्य;
(ii) जहाज पर या गोदी में स्थित किसी भी भंडारण क्षेत्र, टैंक संरचना या उठाने वाली मशीनरी या किसी अन्य भंडारण क्षेत्र से संबंधित सभी मरम्मत और रखरखाव प्रक्रियाएं; और
(iii) जहाज पर या गोदी में स्थित किसी भी होल्ड, टैंक, संरचना या लिफ्टिंग मशीनरी या किसी अन्य भंडारण क्षेत्र की चिपिंग, पेंटिंग या सफाई करना;
(26) "कर्मचारी" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान द्वारा वेतन पर नियोजित किसी भी व्यक्ति (शिक्षु अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) के अधीन नियुक्त प्रशिक्षु के अलावा) से है, जो प्रत्यक्ष या ठेकेदार के माध्यम से किसी कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, परिचालन, पर्यवेक्षणीय, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी, लिपिकीय या किसी अन्य कार्य को करने के लिए नियोजित है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें उपयुक्त सरकार द्वारा कर्मचारी घोषित किया गया व्यक्ति भी शामिल है, लेकिन इसमें संघ के सशस्त्र बलों का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है:
बशर्ते कि अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और अध्याय IV को छोड़कर, कर्मचारी शब्द का अर्थ ऐसे कर्मचारी से होगा जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वेतन सीमा से कम या उसके बराबर वेतन प्राप्त करता हो, और इसमें ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग भी शामिल होगा जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा उन अध्यायों के प्रयोजनों के लिए कर्मचारी निर्दिष्ट कर सकती है।
इसके अलावा, अध्याय III और अध्याय IV के अंतर्गत किसी प्रतिष्ठान के अंतर्गत कर्मचारियों की गणना करते समय, उन कर्मचारियों को भी ध्यान में रखा जाएगा जिनका वेतन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित वेतन सीमा से अधिक है।
इसके अलावा, अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए, कर्मचारी शब्द का अर्थ केवल ऐसे व्यक्ति होंगे जो द्वितीय अनुसूची में निर्दिष्ट हैं और ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग जिन्हें केंद्र सरकार, या जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार उक्त अनुसूची में अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के प्रयोजनों के लिए जोड़ सकती है;
(27) "नियोक्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो प्रत्यक्ष रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से, या उसकी ओर से, या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से, अपने प्रतिष्ठान में एक या अधिक कर्मचारियों को नियोजित करता है, और जहाँ प्रतिष्ठान केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग द्वारा संचालित होता है, वहाँ ऐसे विभाग के प्रमुख द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहाँ कोई प्राधिकारी निर्दिष्ट नहीं है, वहाँ विभाग का प्रमुख, और स्थानीय प्राधिकारी द्वारा संचालित प्रतिष्ठान के संबंध में, उस प्राधिकारी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और इसमें शामिल हैं,---
(क) किसी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में जो कारखाना है, कारखाने का अधिभोगी;
(ख) खान के संबंध में, खान का स्वामी या एजेंट या प्रबंधक, जिसके पास उस समय लागू कानून के तहत आवश्यक योग्यता हो और जिसे खान के स्वामी या एजेंट द्वारा इस रूप में नियुक्त किया गया हो;
(ग) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसे प्रतिष्ठान के मामलों पर अंतिम नियंत्रण प्राप्त है और जहां उक्त मामले किसी प्रबंधक या प्रबंध निदेशक को सौंपे गए हैं, तो ऐसा प्रबंधक या प्रबंध निदेशक;
(घ) ठेकेदार; और
(ई) मृतक नियोक्ता का कानूनी प्रतिनिधि;
(28) "रोजगार चोट" से तात्पर्य किसी कर्मचारी को दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हुई व्यक्तिगत चोट से है, जो उसके रोजगार के दौरान और उसके कारण उत्पन्न हुई हो,---
(i) अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, यदि कर्मचारी धारा 28 के अंतर्गत बीमित या बीमा योग्य कर्मचारी है, चाहे ऐसी दुर्घटना भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर घटित हो या व्यावसायिक रोग भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर हो; और
(ii) अध्याय VII के प्रयोजनों के लिए, चाहे ऐसी दुर्घटना भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर घटित हो या व्यावसायिक रोग भारत की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर हो;
(29) "संस्थान" से तात्पर्य है---
(क) ऐसा स्थान जहाँ कोई उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, विनिर्माण या पेशा चलाया जाता हो; या
(ख) कारखाना, मोटर परिवहन उपक्रम, समाचार पत्र प्रतिष्ठान, ऑडियोविजुअल उत्पादन, भवन एवं अन्य निर्माण कार्य या वृक्षारोपण; या
(ग) कोई खान, बंदरगाह या बंदरगाह के आसपास का क्षेत्र जहाँ गोदी का काम किया जाता है।
स्पष्टीकरण.--- अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, जहाँ किसी प्रतिष्ठान में विभिन्न विभाग हों या शाखाएँ हों, चाहे वे एक ही स्थान पर स्थित हों या अलग-अलग स्थानों पर, ऐसे सभी विभागों या शाखाओं को एक ही प्रतिष्ठान के भाग माना जाएगा;
(30) "कार्यकारी अधिकारी" से तात्पर्य उपयुक्त सरकार के ऐसे अधिकारी से है जिसे उस सरकार द्वारा अध्याय XIII के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित किया जा सकता है या ऐसे कार्यकारी अधिकारी द्वारा उस अध्याय के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए लिखित रूप में अधिकृत अधिकारी से है;
(31) अध्याय III के प्रयोजनों के लिए "छूट प्राप्त कर्मचारी" से तात्पर्य ऐसे कर्मचारी से है जिस पर धारा 15 में निर्दिष्ट योजनाओं में से कोई भी योजना, इस संहिता के तहत दी गई छूट के कारण, लागू होती और अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, ऐसे कर्मचारी से तात्पर्य है, जिसका वेतन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना में निर्दिष्ट है और जो कर्मचारी अंशदान का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है;
(32) "कारखाना" से तात्पर्य किसी भी परिसर से है, जिसमें उसका परिसर भी शामिल है---
(क) जहाँ दस या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, या पिछले बारह महीनों के किसी भी दिन कार्यरत थे, और जिसके किसी भाग में विद्युत सहायता से विनिर्माण प्रक्रिया चल रही है, या सामान्यतः इसी प्रकार चलती है, या
(ख) जहाँ बीस या अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, या पिछले बारह महीनों के किसी भी दिन काम कर रहे थे, और जिसके किसी भी हिस्से में बिजली की सहायता के बिना विनिर्माण प्रक्रिया चल रही है, या सामान्यतः इसी तरह चलती है, लेकिन इसमें खान, या संघ के सशस्त्र बलों से संबंधित मोबाइल इकाई, रेलवे रनिंग शेड या होटल, रेस्तरां या भोजनालय शामिल नहीं है।
स्पष्टीकरण 1.--- इस खंड के प्रयोजनों के लिए कर्मचारियों की संख्या की गणना करने हेतु, एक दिन में (विभिन्न समूहों और रिले में) सभी कर्मचारियों को ध्यान में रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2. ---इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी परिसर या उसके किसी भाग में इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग यूनिट या कंप्यूटर यूनिट की स्थापना मात्र को कारखाना नहीं माना जाएगा, यदि ऐसे परिसर या उसके किसी भाग में कोई विनिर्माण प्रक्रिया नहीं चल रही हो;
(33) "परिवार" से तात्पर्य किसी कर्मचारी या असंगठित श्रमिक के निम्नलिखित सभी या कोई भी संबंधी हैं, जैसा भी मामला हो, अर्थात्:---
(क) पति/पत्नी;
(ख) कर्मचारी या असंगठित श्रमिक पर आश्रित कोई नाबालिग वैध या दत्तक बच्चा, जैसा भी मामला हो;
(ग) वह बच्चा जो कर्मचारी या असंगठित श्रमिक की कमाई पर पूरी तरह से निर्भर है, जैसा भी मामला हो, और जो---
(i) इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त करने तक शिक्षा प्राप्त करना; और
(ii) अविवाहित पुत्री;
(घ) कोई बच्चा जो किसी शारीरिक या मानसिक असामान्यता या चोट के कारण दुर्बल है और जब तक दुर्बलता बनी रहती है, तब तक वह कर्मचारी या असंगठित श्रमिक की कमाई पर पूरी तरह से निर्भर है;
(ई) आश्रित माता-पिता (महिला कर्मचारी के ससुर और सास सहित), जिनकी सभी स्रोतों से होने वाली आय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित आय से अधिक नहीं है;
(f) यदि कर्मचारी या असंगठित श्रमिक, जैसा भी मामला हो, अविवाहित है और उसके माता-पिता जीवित नहीं हैं, तो बीमित व्यक्ति की कमाई पर पूर्णतः आश्रित नाबालिग भाई या बहन;
(34) “निश्चित अवधि का रोजगार” से तात्पर्य किसी कर्मचारी को एक निश्चित अवधि के लिए लिखित रोजगार अनुबंध के आधार पर नियुक्त करना है:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) उसके काम के घंटे, वेतन, भत्ते और अन्य लाभ उसी काम या समान प्रकृति के काम करने वाले स्थायी कर्मचारी से कम नहीं होंगे; और
(ख) वह किसी भी लागू कानून के तहत स्थायी कर्मचारी को उपलब्ध सभी लाभों के लिए पात्र होगा, जो उसके द्वारा प्रदत्त सेवा अवधि के अनुसार आनुपातिक रूप से दिए जाते हैं, भले ही उसकी रोजगार अवधि आवश्यक अर्हता अवधि तक न हो;
(35) "गिग वर्कर" का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो काम करता है या किसी कार्य व्यवस्था में भाग लेता है और पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बाहर ऐसी गतिविधियों से कमाता है;
(36) "घर-आधारित कार्यकर्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो नियोक्ता के कार्यस्थल के अलावा अपने घर या अपनी पसंद के किसी अन्य परिसर में नियोक्ता के लिए माल या सेवाओं के उत्पादन में लगा हुआ है, पारिश्रमिक के लिए, चाहे नियोक्ता उपकरण, सामग्री या अन्य इनपुट प्रदान करता हो या नहीं;
(37) "निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता" से तात्पर्य धारा 122 के अधीन नियुक्त निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता से है;
(38) "बीमा निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अधीन स्थापित जमा-संबद्ध बीमा निधि से है;
(39) "बीमाकृत व्यक्ति" से तात्पर्य धारा 28 में निर्दिष्ट बीमाकृत व्यक्ति से है;
(40) "बीमा योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अधीन गठित जमा-संबद्ध बीमा योजना से है;
(41) "अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी प्रतिष्ठान में कार्यरत है और जो
(i) किसी राज्य में नियोक्ता द्वारा सीधे या ठेकेदार के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से भर्ती किया गया हो, और उसे दूसरे राज्य में स्थित ऐसे प्रतिष्ठान में रोजगार के लिए नियुक्त किया गया हो; या
(ii) किसी एक राज्य से स्वयं आकर दूसरे राज्य (जिसे इसके बाद गंतव्य राज्य कहा जाएगा) के किसी प्रतिष्ठान में रोजगार प्राप्त कर लिया हो या बाद में गंतव्य राज्य के भीतर किसी समझौते या अन्य व्यवस्था के तहत ऐसे रोजगार के लिए प्रतिष्ठान बदल लिया हो और प्रति माह अठारह हजार रुपये से अधिक वेतन या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाने वाली ऐसी उच्च राशि प्राप्त कर रहा हो;
(42) "विनिर्माण प्रक्रिया" से तात्पर्य किसी भी प्रक्रिया से है---
(i) किसी वस्तु या पदार्थ का उपयोग, बिक्री, परिवहन, वितरण या निपटान के उद्देश्य से उसका निर्माण, परिवर्तन, मरम्मत, अलंकरण, परिष्करण, तेल लगाना, धोना, साफ करना, तोड़ना, नष्ट करना, परिष्कृत करना, या अन्यथा उपचार करना या उसे अनुकूलित करना; या
(ii) तेल, पानी, मलजल या किसी अन्य पदार्थ को पंप करना; या
(iii) बिजली उत्पन्न करना, रूपांतरित करना या संचारित करना; या
(iv) रचना, ऑफसेट प्रिंटिंग, लेटर प्रेस द्वारा प्रिंटिंग, लिथोग्राफी, फोटोग्राव्योर स्क्रीन प्रिंटिंग, त्रि-आयामी या चार-आयामी प्रिंटिंग, प्रोटोटाइपिंग, फ्लेक्सोग्राफी या अन्य प्रकार की प्रिंटिंग प्रक्रिया या पुस्तक बाइंडिंग; या
(v) जहाजों या जलयानों का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण, परिष्करण या तोड़ना; या
(vi) किसी वस्तु को शीत भंडारण में संरक्षित करना या संग्रहित करना; या
(vii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली अन्य गतिविधियाँ;
(43) अध्याय VI के संदर्भ में "मातृत्व लाभ" से तात्पर्य धारा 60 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट भुगतान से है;
(44) "चिकित्सक" से तात्पर्य किसी भी कानून के तहत पंजीकृत व्यक्ति से है जो उस समय लागू हो, या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संहिता के प्रयोजनों के लिए चिकित्सक के रूप में योग्य घोषित किए गए किसी भी व्यक्ति से है:
बशर्ते कि विशिष्ट योग्यता रखने वाले चिकित्सा चिकित्सकों के विभिन्न वर्ग या वर्ग केंद्र सरकार द्वारा अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए तथा इस संहिता के अन्य अध्यायों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किए जा सकते हैं;
(45) "गर्भावस्था का चिकित्सकीय समापन" से तात्पर्य गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (34 ऑफ 1971) के प्रावधानों के तहत अनुमेय गर्भावस्था के समापन से है;
(46) "खान" का वही अर्थ होगा जो खान अधिनियम, 1952 (35 ऑफ 1952) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (जे) में दिया गया है;
(47) "नाबालिग" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की है;
(48) "गर्भपात" का अर्थ गर्भावस्था के छब्बीसवें सप्ताह से पहले या उसके दौरान किसी भी अवधि में गर्भवती गर्भाशय की सामग्री का निष्कासन है, लेकिन इसमें कोई भी गर्भपात शामिल नहीं है, जिसके कारण भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के तहत दंडनीय है;
(49) "राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड" से तात्पर्य धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन गठित असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड से है;
(50) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र या किसी राज्य के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, जैसा भी मामला हो, और "अधिसूचित करना" शब्द को उसके व्याकरणिक भेदों और संबंधित अभिव्यक्तियों के साथ तदनुसार समझा जाएगा;
(51) "व्यावसायिक रोग" से तात्पर्य तीसरी अनुसूची में कर्मचारी के रोजगार से संबंधित विशिष्ट रोग के रूप में निर्दिष्ट रोग से है;
(52) "कारखाने के संबंध में अधिभोगी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसका कारखाने के मामलों पर अंतिम नियंत्रण होता है:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) किसी फर्म या व्यक्तियों के अन्य संघ के मामले में, उसके व्यक्तिगत साझेदारों या सदस्यों में से कोई एक;
(ख) किसी कंपनी के मामले में, कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 149 की उपधारा (6) के अर्थ में किसी स्वतंत्र निदेशक को छोड़कर, कोई भी निदेशक;
(ग) केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण के स्वामित्व या नियंत्रण वाले कारखाने के मामले में, केंद्र सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा कारखाने के मामलों का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त व्यक्ति या व्यक्तियों को।
उसे कब्जेदार माना जाएगा:
इसके अलावा, यदि कोई जहाज किराए पर उपलब्ध ड्राई डॉक में मरम्मत या रखरखाव कार्य के लिए रखा गया है, तो डॉक के मालिक को सभी प्रयोजनों के लिए अधिभोगी माना जाएगा, सिवाय उन मामलों के जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं और जो जहाज की स्थिति से सीधे संबंधित हैं, जिनके लिए जहाज के मालिक को अधिभोगी माना जाएगा;
(53) "तेलक्षेत्र" का वही अर्थ होगा जो तेलक्षेत्र (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 1948 (1948 का 53) की धारा 3 के खंड (ई) में दिया गया है;
(54) "संगठित क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है जो असंगठित क्षेत्र नहीं है;
(55) "स्थायी आंशिक विकलांगता" से तात्पर्य ऐसी विकलांगता से है, जहाँ विकलांगता स्थायी प्रकृति की हो, जिससे किसी कर्मचारी की कमाई की क्षमता उन सभी रोजगारों में कम हो जाती है जिन्हें वह विकलांगता उत्पन्न करने वाली दुर्घटना के समय करने में सक्षम था।
बशर्ते कि चौथी अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट प्रत्येक चोट को स्थायी आंशिक विकलांगता का परिणाम माना जाएगा;
(56) "स्थायी पूर्ण विकलांगता" से तात्पर्य ऐसी स्थायी विकलांगता से है जो किसी कर्मचारी को उस सभी कार्य के लिए अक्षम कर देती है जिसे वह ऐसी विकलांगता उत्पन्न करने वाली दुर्घटना के समय करने में सक्षम था:
बशर्ते कि स्थायी पूर्ण विकलांगता चौथी अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट प्रत्येक चोट या उसके भाग II में निर्दिष्ट चोटों के किसी भी संयोजन से उत्पन्न मानी जाएगी, जहाँ उक्त भाग II में निर्दिष्ट चोटों के विरुद्ध अर्जित क्षमता की हानि का कुल प्रतिशत सौ प्रतिशत हो।
(57) "पेंशन निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन स्थापित पेंशन निधि से है;
(58) "पेंशन योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन गठित कर्मचारी पेंशन योजना से है;
(59) वृक्षारोपण का अर्थ है---
(क) कोई भी भूमि जिसका उपयोग किया जाता है या जिसका उपयोग करने का इरादा है
(i) चाय, कॉफी, रबर, सिंकोना या इलायची की खेती जो पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में की जाती हो;
(ii) कोई अन्य संयंत्र उगाना, जिसका क्षेत्रफल पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक हो और जिसमें दस या अधिक व्यक्ति कार्यरत हों या पिछले बारह महीनों में किसी भी दिन कार्यरत रहे हों, यदि केंद्र सरकार की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसा निर्देश देती है।
स्पष्टीकरण.--- जहाँ इस उपखंड में निर्दिष्ट किसी पौधे को उगाने के लिए उपयोग की जाने वाली कोई भूमि पाँच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल की हो और किसी अन्य भूमि से सटी हुई हो जिसका इस प्रकार उपयोग नहीं किया जा रहा हो, परन्तु जिसका इस प्रकार उपयोग किया जा सकता हो, और ऐसी दोनों भूमियाँ एक ही नियोक्ता के प्रबंधन में हों, तो इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, पहले उल्लिखित भूमि को वृक्षारोपण माना जाएगा, यदि ऐसी दोनों भूमियों का कुल क्षेत्रफल पाँच हेक्टेयर या उससे अधिक हो;
(ख) कोई भी भूमि जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा घोषित करे और जिसका उपयोग उप-खंड (क) में निर्दिष्ट किसी पौधे को उगाने के लिए किया जाता हो या किया जाना अभिप्रेत हो, भले ही उसका क्षेत्रफल पांच हेक्टेयर से कम हो:
बशर्ते कि इस संहिता के प्रारंभ होने से ठीक पहले पाँच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाली किसी भी भूमि के संबंध में ऐसी कोई घोषणा नहीं की जाएगी; और
(ग) कार्यालय, अस्पताल, औषधालयाँ, विद्यालय और उप-खंड (क) और उप-खंड (ख) के अर्थ में किसी भी वृक्षारोपण से संबंधित किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले कोई अन्य परिसर; लेकिन परिसर में स्थित कारखाना इसमें शामिल नहीं है;
(60) "प्लेटफ़ॉर्म कार्य" से तात्पर्य पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर की कार्य व्यवस्था से है जिसमें संगठन या व्यक्ति विशिष्ट समस्याओं को हल करने या विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली ऐसी अन्य गतिविधियों के लिए भुगतान के बदले में अन्य संगठनों या व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते हैं;
(61) "प्लेटफ़ॉर्म कार्यकर्ता" से तात्पर्य प्लेटफ़ॉर्म कार्य में लगे या प्लेटफ़ॉर्म कार्य करने वाले व्यक्ति से है; (62) "बंदरगाह" का वही अर्थ होगा जो भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 (15 ऑफ 1908) की धारा 3 के खंड (4) में दिया गया है;
(63) "भविष्य निधि" से तात्पर्य धारा 16 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन स्थापित कर्मचारी भविष्य निधि से है;
(64) "भविष्य निधि योजना" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन गठित कर्मचारी भविष्य निधि योजना से है;
(65) "निर्धारित" से तात्पर्य इस संहिता के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(66) "रेलवे" का वही अर्थ होगा जो रेल अधिनियम, 1989 (24 ऑफ 1989) की धारा 2 के खंड (31) में दिया गया है;
(67) "रेलवे कंपनी" में निगमित या गैर-निगमित कोई भी व्यक्ति शामिल है, जो रेलवे के मालिक या पट्टेदार हैं या रेलवे के संचालन के लिए किसी समझौते के पक्षकार हैं;
(68) "वसूली अधिकारी" से तात्पर्य केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्रीय बोर्ड या निगम के किसी भी अधिकारी से है, जिसे केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना द्वारा इस संहिता के अंतर्गत वसूली अधिकारी के कार्यों का निर्वहन करने और शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया जा सकता है;
(69) "विनियम" से तात्पर्य इस संहिता के अंतर्गत निगम द्वारा बनाए गए विनियमों से है;
(70) "सेवानिवृत्ति" से तात्पर्य किसी कर्मचारी की सेवा की समाप्ति से है, जो कि अधिवर्षिता के अलावा किसी अन्य कारण से हो;
(71) "बिक्री संवर्धन कर्मचारी" से तात्पर्य बिक्री संवर्धन कर्मचारी अधिनियम, 1976 (11 ऑफ 1976) की धारा 2 के खंड (घ) में परिभाषित बिक्री संवर्धन कर्मचारियों से है;
(72) "अनुसूची" से तात्पर्य इस संहिता की अनुसूची से है;
(73) "नाविक" से तात्पर्य किसी जहाज के चालक दल का हिस्सा बनने वाले किसी भी व्यक्ति से है, लेकिन इसमें जहाज का स्वामी शामिल नहीं है;
(74) "मौसमी कारखाना" से तात्पर्य ऐसे कारखाने से है जो विशेष रूप से निम्नलिखित विनिर्माण प्रक्रियाओं में से एक या अधिक में लगा हुआ है, अर्थात् कपास की ओटाई, कपास या जूट की पेराई, मूंगफली का छिलका उतारना, नील, लाख, चीनी (गुड़ सहित) का निर्माण या कोई भी विनिर्माण प्रक्रिया जो उपरोक्त प्रक्रियाओं में से किसी से संबंधित या उससे जुड़ी हुई है और इसमें ऐसा कारखाना भी शामिल है जो एक वर्ष में सात महीने से अधिक की अवधि के लिए ऐसी विनिर्माण प्रक्रिया में लगा हुआ है जिसे केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;
(75) "स्व-नियोजित श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे किसी व्यक्ति से है जो किसी नियोक्ता द्वारा नियोजित नहीं है, परन्तु असंगठित क्षेत्र में किसी व्यवसाय में संलग्न है, जिसकी मासिक आय केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि के अधीन है, या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सीमा के अधीन कृषि योग्य भूमि धारण करता है;
(76) किसी राज्य के संबंध में "दुकान" का अर्थ उस राज्य में दुकान से संबंधित किसी भी कानून में परिभाषित दुकान है;
(77) "बीमारी" से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है जिसके लिए चिकित्सा उपचार और देखभाल की आवश्यकता होती है और जिसके लिए चिकित्सा कारणों से काम से परहेज करना आवश्यक होता है;
(78) "सामाजिक सुरक्षा" से तात्पर्य कर्मचारियों, असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करने और आय सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से है, विशेष रूप से वृद्धावस्था, बेरोजगारी, बीमारी, विकलांगता, कार्य चोट, मातृत्व या परिवार के मुखिया की मृत्यु के मामलों में, इस संहिता के तहत उन्हें प्रदत्त अधिकारों और बनाई गई योजनाओं के माध्यम से;
(79) "सामाजिक सुरक्षा संगठन" से तात्पर्य इस संहिता के अधीन स्थापित निम्नलिखित संगठनों से है, अर्थात्:---
(क) धारा 4 के तहत गठित कर्मचारी भविष्य निधि का केंद्रीय न्यासी बोर्ड;
(ख) धारा 5 के अधीन गठित कर्मचारी राज्य बीमा निगम;
(ग) धारा 6 के अधीन गठित असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड;
(घ) धारा 6 के अधीन गठित राज्य असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड;
(ई) धारा 7 के अधीन गठित राज्य भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड; एवं
(f) केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा संगठन घोषित किया गया कोई अन्य संगठन या विशेष प्रयोजन वाहन;
(80) "राज्य सरकार" में शामिल है---
(क) विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, केंद्र शासित प्रदेश की सरकार; और
(ख) विधानमंडलविहीन केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त प्रशासक को उसका प्रशासक नियुक्त किया जाएगा;
(81) "राज्य असंगठित श्रमिक बोर्ड" से तात्पर्य धारा 6 की उपधारा (9) के अधीन गठित राज्य असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड से है;
(82) किसी कर्मचारी के संबंध में "सेवानिवृत्ति" का अर्थ है कर्मचारी द्वारा ऐसी आयु प्राप्त करना जो सेवा अनुबंध या शर्तों में निर्धारित की गई हो, जिस आयु को प्राप्त करने पर कर्मचारी को रोजगार छोड़ना होगा।
बशर्ते कि अध्याय III के प्रयोजनों के लिए, सेवानिवृत्ति की आयु अट्ठावन वर्ष होगी;
(83) "अस्थायी अक्षमता" का अर्थ रोजगार चोट के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली ऐसी स्थिति है जिसके लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है और जो किसी कर्मचारी को, ऐसी चोट के परिणामस्वरूप, उस काम को करने में अस्थायी रूप से असमर्थ बना देती है जो वह चोट से पहले या चोट के समय कर रहा था;
(84) "ट्रिब्यूनल" से तात्पर्य औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 7ए के तहत उपयुक्त सरकार द्वारा गठित औद्योगिक ट्रिब्यूनल से है;
(85) "असंगठित" क्षेत्र का अर्थ है व्यक्तियों या स्व-नियोजित श्रमिकों के स्वामित्व वाला कोई उद्यम तथा किसी भी प्रकार के माल के उत्पादन या बिक्री तथा सेवा प्रदान करने में संलग्न उद्यम तथा जहां उद्यम श्रमिकों को नियोजित करता है, वहां ऐसे श्रमिकों की संख्या दस से कम होती है;
(86) "असंगठित श्रमिक" से तात्पर्य असंगठित क्षेत्र में घर पर काम करने वाले श्रमिक, स्व-नियोजित श्रमिक या दिहाड़ी श्रमिक से है तथा इसमें संगठित क्षेत्र का वह श्रमिक भी शामिल है जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 या इस संहिता के अध्याय III से VII के अंतर्गत नहीं आता है;
(87) अध्याय XIII के प्रयोजनों के लिए, "रिक्ति" का अर्थ किसी व्यक्ति को नियोजित करने और पारिश्रमिक प्रदान करने के उद्देश्य से किसी कैडर या व्यवसाय में रिक्त पद (जिसमें नवनिर्मित पद, प्रशिक्षु का पद, प्रशिक्षु के माध्यम से भरा जाने वाला पद या किसी अन्य माध्यम से किसी प्रतिष्ठान में सृजित कोई रिक्त पद शामिल है) है;
(88) "मजदूरी" से तात्पर्य सभी पारिश्रमिक से है, चाहे वह वेतन, भत्ते या किसी अन्य रूप में हो, जो धन के रूप में व्यक्त किया गया हो या इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता हो, जो रोजगार की शर्तों (स्पष्ट या निहित) के पूरा होने पर, किसी नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार या ऐसे रोजगार में किए गए कार्य के संबंध में देय होगा, और इसमें शामिल है,---
(क) मूल वेतन;
(ख) महंगाई भत्ता; और
(सी) यदि कोई हो तो प्रतिधारण भत्ता,
लेकिन इसमें शामिल नहीं है---
(क) किसी भी कानून के तहत देय कोई बोनस, जो रोजगार की शर्तों के तहत देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं है;
(ख) किसी आवास का मूल्य, या प्रकाश, पानी, चिकित्सा सेवा या अन्य सुविधा की आपूर्ति का मूल्य, या किसी ऐसी सेवा का मूल्य जिसे उपयुक्त सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा मजदूरी की गणना से बाहर रखा गया हो;
(ग) नियोक्ता द्वारा किसी पेंशन या भविष्य निधि में भुगतान किया गया कोई अंशदान और उस पर अर्जित ब्याज;
(घ) कोई परिवहन भत्ता या किसी यात्रा रियायत का मूल्य;
(ई) नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार की प्रकृति के कारण उस पर लगने वाले विशेष खर्चों को पूरा करने के लिए भुगतान की गई कोई भी राशि;
(f) मकान किराया भत्ता;
(जी) पक्षों के बीच किसी पुरस्कार या समझौते या न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश के तहत देय पारिश्रमिक;
(h) कोई भी ओवरटाइम भत्ता;
(i) कर्मचारी को देय कोई कमीशन;
(j) रोजगार की समाप्ति पर देय कोई भी ग्रेच्युटी;
(k) किसी भी कानून के तहत कर्मचारी को देय कोई छंटनी मुआवजा या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ या रोजगार की समाप्ति पर उसे किया गया कोई अनुग्रह भुगतान:
इस खंड के अंतर्गत मजदूरी की गणना करते समय, यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपखंड (क) से (i) के अंतर्गत किया गया भुगतान, इस खंड के अंतर्गत परिकलित कुल पारिश्रमिक के आधे या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य प्रतिशत से अधिक हो, तो ऐसे आधे या अधिसूचित प्रतिशत से अधिक की राशि को पारिश्रमिक माना जाएगा और तदनुसार इस खंड के अंतर्गत मजदूरी में जोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा, सभी लिंगों को समान वेतन देने के उद्देश्य से और वेतन भुगतान के उद्देश्य से, उप-खंड (घ), (च), (छ) और (ह) में निर्दिष्ट पारिश्रमिकों को वेतन की गणना के लिए लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.--- जहाँ किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा देय संपूर्ण या आंशिक वेतन के बदले में कोई वस्तुगत पारिश्रमिक दिया जाता है, तो ऐसे वस्तुगत पारिश्रमिक का वह मूल्य जो उसे देय कुल वेतन के पंद्रह प्रतिशत से अधिक न हो, उस कर्मचारी के वेतन का हिस्सा माना जाएगा;
(89) "मजदूरी सीमा" से तात्पर्य मजदूरी की ऐसी राशि से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अध्याय III और अध्याय IV के अंतर्गत सदस्य बनने के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित किया जा सकता है;
(90) "मजदूर" से तात्पर्य असंगठित क्षेत्र में पारिश्रमिक के लिए नियोजित व्यक्ति से है, जो सीधे नियोक्ता द्वारा या किसी ठेकेदार के माध्यम से, कार्यस्थल की परवाह किए बिना, चाहे वह विशेष रूप से एक नियोक्ता के लिए हो या एक या अधिक नियोक्ताओं के लिए, चाहे नकद में हो या वस्तु के रूप में, चाहे वह घर-आधारित श्रमिक हो, या अस्थायी या आकस्मिक श्रमिक हो, या प्रवासी श्रमिक हो, या घरेलू कामगारों सहित घरों द्वारा नियोजित श्रमिक हों, जिनका मासिक वेतन केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित राशि के बराबर हो, जैसा भी मामला हो;
(91) "महिला" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान में मजदूरी के लिए प्रत्यक्ष रूप से या किसी ठेकेदार के माध्यम से नियोजित महिला से है:
बशर्ते कि अध्याय IV के प्रयोजनों के लिए, वह महिला जो कर्मचारी है या थी, जिसके संबंध में उक्त अध्याय के अंतर्गत अंशदान देय है या था, और जो इसके कारण उक्त अध्याय के अंतर्गत प्रदान किए गए किसी भी लाभ की हकदार है, उसे बीमित महिला कहा जाएगा और इसमें निम्नलिखित शामिल होंगे:
(i) एक ऐसी गर्भवती माँ जो जैविक माँ के रूप में बच्चा चाहती है और किसी अन्य महिला में भ्रूण प्रत्यारोपण करवाना पसंद करती है;
(ii) वह महिला जो तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेती है।
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