CSS 138अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 138 · अपराधों का समझौता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अध्याय के अंतर्गत दंडनीय कोई भी अपराध, जो पहली बार किया गया हो, एक अपराध हो---
(i) केवल जुर्माने से दंडनीय; या
(ii) एक वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास और जुर्माने से दंडनीय।
किसी अभियोग की शुरुआत से पहले या बाद में किए गए आवेदन पर, अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और इस संहिता के अंतर्गत इन अध्यायों से संबंधित बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा समझौता किया जा सकता है; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों और उनसे संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से, अपराधी द्वारा उपयुक्त सरकार को राशि का भुगतान करने पर समझौता किया जा सकता है।
(i) केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध के मामले में, उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने का आधा; और
(ii) ऐसे अपराध के मामले में, जिसके लिए एक वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है, उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने का तीन-चौथाई।
(2) उपधारा (1) में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति द्वारा तीन वर्ष की अवधि के भीतर दूसरी बार या उसके बाद किए गए अपराध पर लागू नहीं होगी---
(i) पहले से समझौता किए गए समान अपराध के कमीशन का; या
(ii) उसी प्रकार का अपराध करने का जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक अधिकारी अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन अपराध का समझौता करने की शक्तियों का प्रयोग करेगा; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों से संबंधित अपराधों और उनसे संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहेगा।
(4) किसी अपराध के समझौते के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे प्रपत्र और ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।
(5) जहाँ किसी अभियोग की शुरुआत से पहले किसी अपराध का समझौता हो जाता है, तो उस अपराध के संबंध में उस अपराधी के विरुद्ध कोई अभियोग नहीं चलाया जाएगा जिसके संबंध में अपराध का समझौता हुआ है।
(6) जहाँ किसी अभियोग के आरंभ के बाद किसी अपराध का समझौता किया जाता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा अभियोग लंबित न्यायालय को लिखित रूप में ऐसे समझौते की सूचना दी जाएगी, और न्यायालय को अपराध के समझौते की सूचना दिए जाने पर, जिसके विरुद्ध अपराध का समझौता किया गया है, उसे बरी कर दिया जाएगा।
(7) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश का पालन न करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसे जुर्माने के अतिरिक्त, अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने के बीस प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(i) केवल जुर्माने से दंडनीय; या
(ii) एक वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास और जुर्माने से दंडनीय।
किसी अभियोग की शुरुआत से पहले या बाद में किए गए आवेदन पर, अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और इस संहिता के अंतर्गत इन अध्यायों से संबंधित बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा समझौता किया जा सकता है; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों और उनसे संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से, अपराधी द्वारा उपयुक्त सरकार को राशि का भुगतान करने पर समझौता किया जा सकता है।
(i) केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध के मामले में, उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने का आधा; और
(ii) ऐसे अपराध के मामले में, जिसके लिए एक वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है, उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने का तीन-चौथाई।
(2) उपधारा (1) में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति द्वारा तीन वर्ष की अवधि के भीतर दूसरी बार या उसके बाद किए गए अपराध पर लागू नहीं होगी---
(i) पहले से समझौता किए गए समान अपराध के कमीशन का; या
(ii) उसी प्रकार का अपराध करने का जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक अधिकारी अध्याय III और अध्याय IV से संबंधित अपराधों और उन अध्यायों से संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन अपराध का समझौता करने की शक्तियों का प्रयोग करेगा; और इस संहिता के अन्य प्रावधानों से संबंधित अपराधों और उनसे संबंधित इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहेगा।
(4) किसी अपराध के समझौते के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे प्रपत्र और ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।
(5) जहाँ किसी अभियोग की शुरुआत से पहले किसी अपराध का समझौता हो जाता है, तो उस अपराध के संबंध में उस अपराधी के विरुद्ध कोई अभियोग नहीं चलाया जाएगा जिसके संबंध में अपराध का समझौता हुआ है।
(6) जहाँ किसी अभियोग के आरंभ के बाद किसी अपराध का समझौता किया जाता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा अभियोग लंबित न्यायालय को लिखित रूप में ऐसे समझौते की सूचना दी जाएगी, और न्यायालय को अपराध के समझौते की सूचना दिए जाने पर, जिसके विरुद्ध अपराध का समझौता किया गया है, उसे बरी कर दिया जाएगा।
(7) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश का पालन न करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसे जुर्माने के अतिरिक्त, अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने के बीस प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
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