CSS 133अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 133 · अंशदान आदि का भुगतान न करने पर जुर्माना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
यदि कोई व्यक्ति,—
(क) नियोक्ता होते हुए, वह किसी भी अंशदान का भुगतान करने में विफल रहता है जिसका भुगतान उसे इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के तहत करना अनिवार्य है; या
(ख) किसी कर्मचारी के वेतन से नियोक्ता के अंशदान का पूरा या कोई भाग काटता है या काटने का प्रयास करता है; या
(ग) इस संहिता के प्रावधानों के उल्लंघन में, किसी कर्मचारी के वेतन या किसी विशेषाधिकार या लाभ को कम करता है; या
(घ) अध्याय चतुर्थ या अध्याय 6 के प्रावधानों या इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के उल्लंघन में, जो ऐसे अध्यायों से संबंधित हैं, किसी महिला कर्मचारी को बर्खास्त करता है, पदमुक्त करता है, पदावनत करता है या अन्यथा दंडित करता है; या
(ई) इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम, विनियम या योजना के तहत अपेक्षित किसी भी रिटर्न, रिपोर्ट, विवरण या अन्य जानकारी को प्रस्तुत करने में विफल रहता है या इनकार करता है; या
(f) केंद्रीय बोर्ड या निगम या अन्य सामाजिक सुरक्षा संगठन या किसी सक्षम प्राधिकारी के किसी निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या अन्य अधिकारी या कर्मचारी को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालता है; या
(जी) किसी कर्मचारी को इस संहिता के तहत मिलने वाली किसी भी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करने में विफल रहता है; या
(h) इस संहिता के तहत किसी कर्मचारी को मिलने वाले मुआवजे की कोई राशि का भुगतान करने में विफल रहता है; या
(i) किसी महिला को इस संहिता के अंतर्गत प्राप्त होने वाले मातृत्व लाभ प्रदान करने में विफल रहता है; या
(j) अध्याय VII के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी को विवरण भेजने में विफल रहता है; या
(k) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा मांगे जाने पर इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के अनुसरण में उसके पास रखे गए किसी भी रजिस्टर या दस्तावेज को प्रस्तुत करने में विफल रहता है; या
(एल) वह भवन निर्माण श्रमिकों के लिए उपकर का भुगतान करने में विफल रहता है, जिसका भुगतान उसे इस संहिता के तहत करना अनिवार्य है; या
(m) इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों या योजनाओं की किसी भी आवश्यकता का उल्लंघन या अनुपालन न करने का दोषी है, जिसके संबंध में इस अध्याय में कोई विशेष दंड का प्रावधान नहीं है; या
(n) अध्याय XIII के अंतर्गत अपने कार्यों का निर्वहन करने में कार्यकारी अधिकारी को बाधा डालता है; या
(o) बेईमानी से झूठी रिपोर्ट, विवरण या सूचना प्रस्तुत करता है; या
(पी) धारा 143 के तहत छूट प्रदान की गई किसी भी शर्त का पालन करने में विफल रहता है या चूक करता है; या
(q) अध्याय III के अंतर्गत बनाई गई किसी भी योजना के तहत देय किसी भी प्रशासनिक या निरीक्षण शुल्क का भुगतान करने में विफल रहता है,
वह दंडनीय होगा,—
(i) यदि वह खंड (क) के अधीन कोई अपराध करता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा दी जाएगी, परन्तु—
(क) कर्मचारी के वेतन से काटी गई अंशदान राशि का भुगतान न करने की स्थिति में, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी, कर्मचारी एक लाख रुपये के जुर्माने का भी भागी होगा;
(ख) जो कि दो महीने से कम नहीं होगा, लेकिन किसी अन्य मामले में इसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है और इसके लिए पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बशर्ते कि न्यायालय, निर्णय में दर्ज किए जाने वाले किसी भी पर्याप्त और विशेष कारणों से, कम अवधि के कारावास की सजा सुना सकता है;
(ii) यदि वह खंड (जी) के अधीन कोई अपराध करता है, तो उसे एक वर्ष तक के कारावास या पचास हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(iii) यदि वह खंड (d), (f), (i), (k), (l) या (o) के अंतर्गत कोई अपराध करता है, तो उसे छह माह तक के कारावास या पचास हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(iv) जहाँ वह खंड (b), (c), (e), (h), (j), (m), (n), (p) या (q) के अंतर्गत कोई अपराध करता है, तो उस पर पचास हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
(क) नियोक्ता होते हुए, वह किसी भी अंशदान का भुगतान करने में विफल रहता है जिसका भुगतान उसे इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के तहत करना अनिवार्य है; या
(ख) किसी कर्मचारी के वेतन से नियोक्ता के अंशदान का पूरा या कोई भाग काटता है या काटने का प्रयास करता है; या
(ग) इस संहिता के प्रावधानों के उल्लंघन में, किसी कर्मचारी के वेतन या किसी विशेषाधिकार या लाभ को कम करता है; या
(घ) अध्याय चतुर्थ या अध्याय 6 के प्रावधानों या इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के उल्लंघन में, जो ऐसे अध्यायों से संबंधित हैं, किसी महिला कर्मचारी को बर्खास्त करता है, पदमुक्त करता है, पदावनत करता है या अन्यथा दंडित करता है; या
(ई) इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम, विनियम या योजना के तहत अपेक्षित किसी भी रिटर्न, रिपोर्ट, विवरण या अन्य जानकारी को प्रस्तुत करने में विफल रहता है या इनकार करता है; या
(f) केंद्रीय बोर्ड या निगम या अन्य सामाजिक सुरक्षा संगठन या किसी सक्षम प्राधिकारी के किसी निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या अन्य अधिकारी या कर्मचारी को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालता है; या
(जी) किसी कर्मचारी को इस संहिता के तहत मिलने वाली किसी भी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करने में विफल रहता है; या
(h) इस संहिता के तहत किसी कर्मचारी को मिलने वाले मुआवजे की कोई राशि का भुगतान करने में विफल रहता है; या
(i) किसी महिला को इस संहिता के अंतर्गत प्राप्त होने वाले मातृत्व लाभ प्रदान करने में विफल रहता है; या
(j) अध्याय VII के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी को विवरण भेजने में विफल रहता है; या
(k) निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा मांगे जाने पर इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या योजनाओं के अनुसरण में उसके पास रखे गए किसी भी रजिस्टर या दस्तावेज को प्रस्तुत करने में विफल रहता है; या
(एल) वह भवन निर्माण श्रमिकों के लिए उपकर का भुगतान करने में विफल रहता है, जिसका भुगतान उसे इस संहिता के तहत करना अनिवार्य है; या
(m) इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों या योजनाओं की किसी भी आवश्यकता का उल्लंघन या अनुपालन न करने का दोषी है, जिसके संबंध में इस अध्याय में कोई विशेष दंड का प्रावधान नहीं है; या
(n) अध्याय XIII के अंतर्गत अपने कार्यों का निर्वहन करने में कार्यकारी अधिकारी को बाधा डालता है; या
(o) बेईमानी से झूठी रिपोर्ट, विवरण या सूचना प्रस्तुत करता है; या
(पी) धारा 143 के तहत छूट प्रदान की गई किसी भी शर्त का पालन करने में विफल रहता है या चूक करता है; या
(q) अध्याय III के अंतर्गत बनाई गई किसी भी योजना के तहत देय किसी भी प्रशासनिक या निरीक्षण शुल्क का भुगतान करने में विफल रहता है,
वह दंडनीय होगा,—
(i) यदि वह खंड (क) के अधीन कोई अपराध करता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा दी जाएगी, परन्तु—
(क) कर्मचारी के वेतन से काटी गई अंशदान राशि का भुगतान न करने की स्थिति में, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी, कर्मचारी एक लाख रुपये के जुर्माने का भी भागी होगा;
(ख) जो कि दो महीने से कम नहीं होगा, लेकिन किसी अन्य मामले में इसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है और इसके लिए पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बशर्ते कि न्यायालय, निर्णय में दर्ज किए जाने वाले किसी भी पर्याप्त और विशेष कारणों से, कम अवधि के कारावास की सजा सुना सकता है;
(ii) यदि वह खंड (जी) के अधीन कोई अपराध करता है, तो उसे एक वर्ष तक के कारावास या पचास हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(iii) यदि वह खंड (d), (f), (i), (k), (l) या (o) के अंतर्गत कोई अपराध करता है, तो उसे छह माह तक के कारावास या पचास हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(iv) जहाँ वह खंड (b), (c), (e), (h), (j), (m), (n), (p) या (q) के अंतर्गत कोई अपराध करता है, तो उस पर पचास हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 2 माह
- जुर्माना
- ₹1,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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