BVAT Act 96अध्याय XV · Miscellaneous
धारा 96 · अस्थायी प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां इस अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट वस्तुओं के अतिरिक्त, कोई भी वस्तु, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को किसी पंजीकृत व्यापारी के पास स्टॉक में रखी हो, ऐसी वस्तु हो जिस पर बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981), जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, के अर्थ में बिक्री के पहले बिंदु पर कर लग चुका हो, और वह वस्तु इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उसके बाद उसके द्वारा बेची जाती है या अन्य वस्तुओं के निर्माण में उपयोग की जाती है, तो वह इस अधिनियम की धारा 16 और 17 के अधीन इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करेगा और उसे निर्धारित तरीके से इसकी अनुमति दी जाएगी।
(2) जहां इस अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट वस्तुओं के अतिरिक्त, कोई भी वस्तु, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को किसी पंजीकृत व्यापारी के पास स्टॉक में रखी हो, ऐसी वस्तु हो जिस पर बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981), जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, के अर्थ में बिक्री के पहले बिंदु पर कर लगाया जा चुका हो, और जिसका उपयोग या उपभोग वह बिहार राज्य के भीतर बिक्री हेतु वस्तुओं के निर्माण के लिए या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (74 ऑफ 1956) की धारा 3 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार एवं वाणिज्य के दौरान या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 की धारा 5 के अर्थ में निर्यात के दौरान इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उसके बाद करता हो, तो वह इस अधिनियम की धारा 16 और 17 के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करेगा और उसे निर्धारित तरीके से इसकी अनुमति दी जाएगी।
(3) जहाँ--
(क) यदि किसी डीलर को बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) की धारा 23ए के तहत देय कर के स्थगन की सुविधा दी गई है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, और जिसने इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर पूर्ण पात्रता का लाभ नहीं उठाया है, तो उसे इस अधिनियम के तहत देय कर को निर्धारित तरीके से और निर्धारित सीमा तक स्थगित करने की अनुमति दी जाएगी;
(ख) यदि किसी डीलर को बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) की धारा 7 की उपधारा (3) के खंड (ख) के तहत कर भुगतान से छूट की सुविधा प्रदान की गई है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, और जिसने इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर पूर्ण लाभ नहीं उठाया है, तो उसे इस अधिनियम के तहत अपने कर दायित्व को निर्धारित तरीके से और निर्धारित सीमा तक स्थगित करने का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाएगी।
(4) जहाँ--
(क) यदि बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले कर एकत्र किया गया है, लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले उसे जमा नहीं किया गया है, तो उक्त अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा एकत्र किया गया कर उक्त अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार जमा किया जाएगा, मानो यह अधिनियम लागू नहीं हुआ है और उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ है;
(ख) यदि बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत, धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले, कोई रिटर्न या विवरण दाखिल करना आवश्यक है, लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उसे दाखिल नहीं किया गया था, तो ऐसा रिटर्न या विवरण, जैसा भी मामला हो, उपर्युक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार और ऐसे रिटर्न या विवरण दाखिल करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा दाखिल किया जाएगा;
(ग) यदि किसी डीलर द्वारा धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत किसी वर्ष के लिए रिटर्न दाखिल किया गया है और इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उस वर्ष के संबंध में कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है, तो उस डीलर के उस वर्ष के मूल्यांकन की कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी या जारी रखी जाएगी मानो यह अधिनियम लागू नहीं हुआ हो और उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ हो और ऐसा मूल्यांकन इस अधिनियम के तहत निर्धारित प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा;
(घ) यदि कोई व्यक्ति बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत लिए गए किसी निर्णय या पारित आदेश से व्यथित हुआ है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले लागू था, और उसने कोई अपील या समीक्षा या पुनरीक्षण के लिए आवेदन दायर नहीं किया है, तो ऐसा व्यक्ति उक्त अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार, ऐसी अपील या आवेदन के निपटान के लिए निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष अपील या पुनरीक्षण या समीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है;
(ई) यदि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत किसी डीलर की कर भुगतान करने की कोई देयता प्रभावित हुई थी, और ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले उक्त अधिनियम की धारा 48 के तहत उच्च न्यायालय के समक्ष संदर्भ देने का हकदार था, तो ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो महीने के भीतर एक संदर्भ तैयार कर सकता है (यदि पहले से ऐसा संदर्भ नहीं दिया गया है) और उक्त धारा 48 के प्रावधानों के अनुसार इसे उच्च न्यायालय को संदर्भित कर सकता है, मानो उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ हो।
(5) इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से पहले वाले दिन तक की अवधि के दौरान, 18 अप्रैल, 2005 से शुरू होने वाली अवधि में, इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए किसी भी अपराध के लिए कोई ब्याज या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा और न ही कोई अभियोग शुरू किया जाएगा।
(2) जहां इस अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट वस्तुओं के अतिरिक्त, कोई भी वस्तु, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को किसी पंजीकृत व्यापारी के पास स्टॉक में रखी हो, ऐसी वस्तु हो जिस पर बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981), जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, के अर्थ में बिक्री के पहले बिंदु पर कर लगाया जा चुका हो, और जिसका उपयोग या उपभोग वह बिहार राज्य के भीतर बिक्री हेतु वस्तुओं के निर्माण के लिए या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (74 ऑफ 1956) की धारा 3 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार एवं वाणिज्य के दौरान या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 की धारा 5 के अर्थ में निर्यात के दौरान इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उसके बाद करता हो, तो वह इस अधिनियम की धारा 16 और 17 के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करेगा और उसे निर्धारित तरीके से इसकी अनुमति दी जाएगी।
(3) जहाँ--
(क) यदि किसी डीलर को बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) की धारा 23ए के तहत देय कर के स्थगन की सुविधा दी गई है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, और जिसने इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर पूर्ण पात्रता का लाभ नहीं उठाया है, तो उसे इस अधिनियम के तहत देय कर को निर्धारित तरीके से और निर्धारित सीमा तक स्थगित करने की अनुमति दी जाएगी;
(ख) यदि किसी डीलर को बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) की धारा 7 की उपधारा (3) के खंड (ख) के तहत कर भुगतान से छूट की सुविधा प्रदान की गई है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, और जिसने इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर पूर्ण लाभ नहीं उठाया है, तो उसे इस अधिनियम के तहत अपने कर दायित्व को निर्धारित तरीके से और निर्धारित सीमा तक स्थगित करने का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाएगी।
(4) जहाँ--
(क) यदि बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले कर एकत्र किया गया है, लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले उसे जमा नहीं किया गया है, तो उक्त अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा एकत्र किया गया कर उक्त अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार जमा किया जाएगा, मानो यह अधिनियम लागू नहीं हुआ है और उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ है;
(ख) यदि बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत, धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले, कोई रिटर्न या विवरण दाखिल करना आवश्यक है, लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उसे दाखिल नहीं किया गया था, तो ऐसा रिटर्न या विवरण, जैसा भी मामला हो, उपर्युक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार और ऐसे रिटर्न या विवरण दाखिल करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा दाखिल किया जाएगा;
(ग) यदि किसी डीलर द्वारा धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत किसी वर्ष के लिए रिटर्न दाखिल किया गया है और इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले उस वर्ष के संबंध में कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है, तो उस डीलर के उस वर्ष के मूल्यांकन की कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी या जारी रखी जाएगी मानो यह अधिनियम लागू नहीं हुआ हो और उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ हो और ऐसा मूल्यांकन इस अधिनियम के तहत निर्धारित प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा;
(घ) यदि कोई व्यक्ति बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत लिए गए किसी निर्णय या पारित आदेश से व्यथित हुआ है, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले लागू था, और उसने कोई अपील या समीक्षा या पुनरीक्षण के लिए आवेदन दायर नहीं किया है, तो ऐसा व्यक्ति उक्त अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार, ऐसी अपील या आवेदन के निपटान के लिए निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष अपील या पुनरीक्षण या समीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है;
(ई) यदि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत किसी डीलर की कर भुगतान करने की कोई देयता प्रभावित हुई थी, और ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले उक्त अधिनियम की धारा 48 के तहत उच्च न्यायालय के समक्ष संदर्भ देने का हकदार था, तो ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो महीने के भीतर एक संदर्भ तैयार कर सकता है (यदि पहले से ऐसा संदर्भ नहीं दिया गया है) और उक्त धारा 48 के प्रावधानों के अनुसार इसे उच्च न्यायालय को संदर्भित कर सकता है, मानो उक्त अधिनियम निरस्त नहीं हुआ हो।
(5) इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से पहले वाले दिन तक की अवधि के दौरान, 18 अप्रैल, 2005 से शुरू होने वाली अवधि में, इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए किसी भी अपराध के लिए कोई ब्याज या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा और न ही कोई अभियोग शुरू किया जाएगा।
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