BVAT Act 79अध्याय XII · Appeal, Revision and Review
धारा 79 · उच्च न्यायालय के समक्ष अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) न्यायाधिकरण द्वारा पारित प्रत्येक आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी, यदि उच्च न्यायालय संतुष्ट है कि मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है।
(2) न्यायाधिकरण द्वारा पारित किसी आदेश से पीड़ित आयुक्त या डीलर,
(i) बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उसके बाद लागू था; या
(ii) इस अधिनियम के अंतर्गत,
उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, और इस धारा के तहत ऐसी अपील डीलर या आयुक्त को ऐसे आदेश से उत्पन्न किसी भी विधि के प्रश्न पर संचार की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर दायर की जाएगी।/hr (3) जहां उच्च न्यायालय संतुष्ट है कि किसी मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है, तो वह प्रश्न तैयार करेगा।
(4) अपील की सुनवाई केवल इस प्रकार तैयार किए गए प्रश्न पर ही की जाएगी और अपील की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को यह तर्क देने की अनुमति दी जाएगी कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल नहीं है:
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी उच्च न्यायालय की उस शक्ति को छीनने या कम करने वाला नहीं माना जाएगा जिसके तहत वह, दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, किसी अन्य महत्वपूर्ण विधि प्रश्न पर अपील की सुनवाई कर सकता है जिसे उसने स्वयं तैयार नहीं किया है, यदि वह संतुष्ट है कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल है।
(5) (क) उच्च न्यायालय इस प्रकार तैयार किए गए या शामिल किए गए विधि के महत्वपूर्ण प्रश्न का निर्णय करेगा और उस पर ऐसा निर्णय देगा जिसमें ऐसे निर्णय के आधार शामिल होंगे और वह उचित समझे जाने वाले ऐसे खर्च प्रदान कर सकता है।
(ख) उच्च न्यायालय किसी भी ऐसे मुद्दे का निर्धारण कर सकता है जो--
(i) न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है, या
(ii) न्यायाधिकरण द्वारा विधि के ऐसे प्रश्न पर निर्णय के कारण गलत तरीके से निर्धारित किया गया है जैसा कि उपधारा (1) में संदर्भित है।
(6) इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उच्च न्यायालय में अपील से संबंधित प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस धारा के अंतर्गत अपील के मामले में लागू होंगे।
(2) न्यायाधिकरण द्वारा पारित किसी आदेश से पीड़ित आयुक्त या डीलर,
(i) बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उसके बाद लागू था; या
(ii) इस अधिनियम के अंतर्गत,
उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, और इस धारा के तहत ऐसी अपील डीलर या आयुक्त को ऐसे आदेश से उत्पन्न किसी भी विधि के प्रश्न पर संचार की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर दायर की जाएगी।/hr (3) जहां उच्च न्यायालय संतुष्ट है कि किसी मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है, तो वह प्रश्न तैयार करेगा।
(4) अपील की सुनवाई केवल इस प्रकार तैयार किए गए प्रश्न पर ही की जाएगी और अपील की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को यह तर्क देने की अनुमति दी जाएगी कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल नहीं है:
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी उच्च न्यायालय की उस शक्ति को छीनने या कम करने वाला नहीं माना जाएगा जिसके तहत वह, दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, किसी अन्य महत्वपूर्ण विधि प्रश्न पर अपील की सुनवाई कर सकता है जिसे उसने स्वयं तैयार नहीं किया है, यदि वह संतुष्ट है कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल है।
(5) (क) उच्च न्यायालय इस प्रकार तैयार किए गए या शामिल किए गए विधि के महत्वपूर्ण प्रश्न का निर्णय करेगा और उस पर ऐसा निर्णय देगा जिसमें ऐसे निर्णय के आधार शामिल होंगे और वह उचित समझे जाने वाले ऐसे खर्च प्रदान कर सकता है।
(ख) उच्च न्यायालय किसी भी ऐसे मुद्दे का निर्धारण कर सकता है जो--
(i) न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है, या
(ii) न्यायाधिकरण द्वारा विधि के ऐसे प्रश्न पर निर्णय के कारण गलत तरीके से निर्धारित किया गया है जैसा कि उपधारा (1) में संदर्भित है।
(6) इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उच्च न्यायालय में अपील से संबंधित प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस धारा के अंतर्गत अपील के मामले में लागू होंगे।
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