BVAT Act 10अध्याय III · Tribunal and Taxing Authorities
धारा 10 · कर प्राधिकरण और निरीक्षक।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निम्नलिखित प्रकार के प्राधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, अर्थात्:--
(क) वाणिज्यिक कर आयुक्त;
(ख) वाणिज्यिक करों के वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त;
(ग) वाणिज्यिक करों का संयुक्त आयुक्त;
(घ) वाणिज्यिक कर उप आयुक्त;
(ई) वाणिज्यिक करों के सहायक आयुक्त;
(f) वाणिज्यिक कर अधिकारी;
(जी) सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी, ऐसे क्षेत्रों में या ऐसे लेन-देन के संबंध में जो किसी क्षेत्र में आते हैं, जैसा कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त की जा सकती हैं और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन लगाए जा सकते हैं।
(3) आयुक्त उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी भी प्राधिकरण की सहायता के लिए आवश्यक संख्या में वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकता है, और इस प्रकार नियुक्त निरीक्षक उन क्षेत्रों में धारा 56 की उपधारा (1) और (2) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा उन क्षेत्रों में इस अधिनियम के निष्पादन में ऐसे अन्य कार्य करेंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं या जो आयुक्त सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उन्हें सौंप सकता है, और ऐसा कार्य सौंपना आदेश में निर्दिष्ट शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन होगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन नियुक्त सभी व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता, 1860 (45 ऑफ 1860) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक माना जाएगा।
(5) आयुक्त किसी भी स्तर पर किसी डीलर के संबंध में धारा 27 या धारा 28 या धारा 31 या धारा 32 या धारा 33 या धारा 72 के तहत कार्यवाही को निर्धारित प्राधिकारी से उपधारा (1) के तहत नियुक्त समान या उच्चतर रैंक के किसी अन्य प्राधिकारी को स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है, और जहां आयुक्त द्वारा ऐसा निर्देश दिया जाता है, तो जिस प्राधिकारी को कार्यवाही स्थानांतरित की जाती है, वह उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह कार्यवाही उक्त प्राधिकारी द्वारा ही शुरू की गई हो, चाहे उसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएं कुछ भी हों; ऐसे स्थानांतरण से स्थानांतरण से पहले जारी की गई किसी भी सूचना को पुनः जारी करना आवश्यक नहीं होगा और जिस प्राधिकारी को कार्यवाही स्थानांतरित की जाती है, वह अपने विवेक से, कार्यवाही को उस स्तर से जारी रख सकता है जहां से उसे स्थानांतरित किए गए प्राधिकारी ने छोड़ा था।
(6) कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए, किसी सर्कल के प्रभारी उपायुक्त या सहायक आयुक्त के लिए सर्कल में तैनात अधिकारियों के बीच कार्य और कार्यवाही आवंटित करना वैध होगा, जैसा भी मामला हो, और इसमें एक ही कार्यालय में तैनात और समवर्ती क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने वाले एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को कार्यवाही का स्थानांतरण शामिल हो सकता है।
(7) आयुक्त समय-समय पर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ऐसे आदेश, निर्देश और दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, जैसा वह उचित समझे, और ऐसे अधिकारी आयुक्त के ऐसे आदेशों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।
बशर्ते कि ऐसे कोई आदेश, निर्देश या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाएंगे--
(i) किसी प्राधिकारी को कोई विशेष आदेश पारित करने या किसी विशेष मामले का किसी विशेष तरीके से निपटारा करने के लिए बाध्य करना; या
(ii) किसी विशेष मामले में अपीलीय अधिकारियों के विवेकाधिकार में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से:
इसके अलावा, यदि आयुक्त की राय में ऐसा करना जनहित में आवश्यक है, तो वह ऐसे आदेशों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों को प्रकाशित करवाकर आम जनता की जानकारी के लिए प्रसारित करवा सकता है।
(क) वाणिज्यिक कर आयुक्त;
(ख) वाणिज्यिक करों के वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त;
(ग) वाणिज्यिक करों का संयुक्त आयुक्त;
(घ) वाणिज्यिक कर उप आयुक्त;
(ई) वाणिज्यिक करों के सहायक आयुक्त;
(f) वाणिज्यिक कर अधिकारी;
(जी) सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी, ऐसे क्षेत्रों में या ऐसे लेन-देन के संबंध में जो किसी क्षेत्र में आते हैं, जैसा कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त की जा सकती हैं और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन लगाए जा सकते हैं।
(3) आयुक्त उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी भी प्राधिकरण की सहायता के लिए आवश्यक संख्या में वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकता है, और इस प्रकार नियुक्त निरीक्षक उन क्षेत्रों में धारा 56 की उपधारा (1) और (2) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा उन क्षेत्रों में इस अधिनियम के निष्पादन में ऐसे अन्य कार्य करेंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं या जो आयुक्त सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उन्हें सौंप सकता है, और ऐसा कार्य सौंपना आदेश में निर्दिष्ट शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन होगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन नियुक्त सभी व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता, 1860 (45 ऑफ 1860) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक माना जाएगा।
(5) आयुक्त किसी भी स्तर पर किसी डीलर के संबंध में धारा 27 या धारा 28 या धारा 31 या धारा 32 या धारा 33 या धारा 72 के तहत कार्यवाही को निर्धारित प्राधिकारी से उपधारा (1) के तहत नियुक्त समान या उच्चतर रैंक के किसी अन्य प्राधिकारी को स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है, और जहां आयुक्त द्वारा ऐसा निर्देश दिया जाता है, तो जिस प्राधिकारी को कार्यवाही स्थानांतरित की जाती है, वह उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह कार्यवाही उक्त प्राधिकारी द्वारा ही शुरू की गई हो, चाहे उसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएं कुछ भी हों; ऐसे स्थानांतरण से स्थानांतरण से पहले जारी की गई किसी भी सूचना को पुनः जारी करना आवश्यक नहीं होगा और जिस प्राधिकारी को कार्यवाही स्थानांतरित की जाती है, वह अपने विवेक से, कार्यवाही को उस स्तर से जारी रख सकता है जहां से उसे स्थानांतरित किए गए प्राधिकारी ने छोड़ा था।
(6) कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए, किसी सर्कल के प्रभारी उपायुक्त या सहायक आयुक्त के लिए सर्कल में तैनात अधिकारियों के बीच कार्य और कार्यवाही आवंटित करना वैध होगा, जैसा भी मामला हो, और इसमें एक ही कार्यालय में तैनात और समवर्ती क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने वाले एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को कार्यवाही का स्थानांतरण शामिल हो सकता है।
(7) आयुक्त समय-समय पर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ऐसे आदेश, निर्देश और दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, जैसा वह उचित समझे, और ऐसे अधिकारी आयुक्त के ऐसे आदेशों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।
बशर्ते कि ऐसे कोई आदेश, निर्देश या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाएंगे--
(i) किसी प्राधिकारी को कोई विशेष आदेश पारित करने या किसी विशेष मामले का किसी विशेष तरीके से निपटारा करने के लिए बाध्य करना; या
(ii) किसी विशेष मामले में अपीलीय अधिकारियों के विवेकाधिकार में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से:
इसके अलावा, यदि आयुक्त की राय में ऐसा करना जनहित में आवश्यक है, तो वह ऐसे आदेशों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों को प्रकाशित करवाकर आम जनता की जानकारी के लिए प्रसारित करवा सकता है।
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