BVAT Act 24अध्याय VI · Returns, Assessment, Re-assessment and Payment of Tax
धारा 24 · रिटर्न, कर का भुगतान, ब्याज और जुर्माना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक व्यक्ति, होने के नाते--
(क) कोई डीलर, जो इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तरीके से नोटिस जारी करके;
(ख) एक पंजीकृत डीलर (धारा 15 के तहत उसे देय कर के बदले निश्चित दर पर कर का भुगतान करने की अनुमति प्राप्त डीलर के अलावा),
माल की बिक्री, खरीद, प्राप्ति और प्रेषण तथा प्रत्येक माह के लिए विशेष रूप से निर्धारित किसी भी अन्य लेन-देन से संबंधित अपने सभी लेन-देन के संबंध में सही और पूर्ण विवरण अगले माह के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से प्रस्तुत करेगा।
(2) उपधारा (1) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक व्यक्ति, जो कि --
(क) कोई डीलर, जो इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तरीके से नोटिस जारी करके;
(ख) एक पंजीकृत डीलर (धारा 15 के तहत उसे देय कर के बदले निश्चित दर पर कर का भुगतान करने की अनुमति प्राप्त डीलर के अलावा),
माल की बिक्री और खरीद से संबंधित अपने सभी लेन-देन के संबंध में और प्रत्येक पूर्ण तिमाही के लिए निर्धारित किए गए किसी भी विवरण को तिमाही की समाप्ति के बाद के महीने के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से प्रस्तुत करना होगा।
(3) प्रत्येक पंजीकृत डीलर निर्धारित प्राधिकारी को नियत तिथि से पहले या उस तिथि तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में निर्धारित प्रपत्र और तरीके से एक सही और पूर्ण विवरण प्रस्तुत करेगा।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा में, "देय तिथि" से तात्पर्य है--
(क) जहां डीलर कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के अर्थ में एक कंपनी है, तो उस वर्ष के बाद के वर्ष का 30वां नवंबर, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है;
(ख) जहां डीलर कोई व्यक्ति हो, जो कंपनी न हो,--
(i) ऐसे मामले में जहां इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत डीलर के खातों का लेखापरीक्षा कराना आवश्यक हो या जहां धारा 54 के तहत किसी लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक हो, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 अक्टूबर की तिथि, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष का 31वां दिन, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है।
(4) धारा 15 के तहत कर भुगतान करने की अनुमति प्राप्त प्रत्येक डीलर, प्रत्येक पूर्ण तिमाही के लिए तिमाही सार विवरण तिमाही की समाप्ति के बाद आने वाले महीने के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को ऐसे प्रपत्र और ऐसे तरीके से प्रस्तुत करेगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(5) यदि त्रैमासिक विवरण या मासिक रिटर्न या त्रैमासिक सारांश विवरण या वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के लिए निर्धारित नियत तिथि अवकाश का दिन हो, तो कार्यालय खुलने की अगली तिथि को नियत तिथि माना जाएगा।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, निर्धारित प्राधिकारी लिखित में दर्ज किए जाने वाले विशिष्ट कारणों से, ऐसे रिटर्न या त्रैमासिक विवरण, जैसा भी मामला हो, दाखिल करने की तिथि बढ़ा सकता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसा विस्तार केवल एक बार और नियत तिथि से तीस दिनों से अधिक की अवधि के लिए ही दिया जा सकता है; परन्तु आयुक्त लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से तीस दिनों से अधिक का विस्तार दे सकता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसा विस्तार केवल एक बार और वह भी तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए ही दिया जा सकता है।
(7) यदि कोई डीलर, उपधारा (1) के तहत मासिक विवरण या उपधारा (2) के तहत त्रैमासिक विवरण प्रस्तुत करने के बाद, उसमें कोई चूक या गलत विवरण पाता है, तो वह उपधारा (3) के अर्थ में नियत तिथि से पहले किसी भी समय निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से संशोधित विवरण या विवरण प्रस्तुत कर सकता है।
बशर्ते कि यदि सूचना के आधार पर या अन्यथा तथा लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से निर्धारित प्राधिकारी संतुष्ट हो जाता है कि मूल रूप से प्रस्तुत किया गया विवरण या बयान जानबूझकर झूठा था या राज्य सरकार को उसके राजस्व से धोखाधड़ी करने के इरादे से प्रस्तुत किया गया था, तो ऐसे किसी भी विवरण या बयान पर विचार नहीं किया जाएगा।
(8) यदि कोई डीलर उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर रिटर्न प्रस्तुत करने में या उपधारा (2) के अधीन त्रैमासिक विवरण प्रस्तुत करने में या उपधारा (4) के अधीन त्रैमासिक सारांश विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो निर्धारित प्राधिकारी, ऐसे डीलर को निर्धारित तरीके से सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसी विफलता के प्रत्येक दिन के लिए पच्चीस रुपये की दर से जुर्माना लगाएगा।
(9) (क) उपधारा (1) के अधीन रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक डीलर, निर्धारित तरीके से, रिटर्न के अनुसार देय कर जमा करेगा और निर्धारित प्रपत्र एवं तरीके से रिटर्न के साथ भुगतान का प्रमाण संलग्न करेगा।
(ख) धारा 15 के तहत कर का भुगतान करने के लिए अनुमत प्रत्येक डीलर, धारा 15 के तहत जारी अधिसूचना में निर्दिष्ट दर को अपने तिमाही कारोबार पर लागू करने के बाद प्राप्त कर को उस तिमाही के बाद वाले महीने के पंद्रहवें दिन या उससे पहले जमा करेगा जिससे वह संबंधित है और उपधारा (4) के तहत प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण के साथ निर्धारित प्रपत्र और तरीके से भुगतान का प्रमाण संलग्न करेगा।
(ग) उपधारा (10) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि कोई पंजीकृत डीलर उपधारा (7) के अधीन संशोधित रिटर्न प्रस्तुत करता है और यदि संशोधित रिटर्न के अनुसार ऐसे डीलर से देय कर की राशि मूल रिटर्न के अनुसार देय राशि से अधिक है, तो ऐसे संशोधित रिटर्न के साथ खंड (क) में दिए गए तरीके से कर की अतिरिक्त राशि के भुगतान को दर्शाने वाली रसीद संलग्न की जाएगी।
(10) यदि कोई डीलर, जिसे उपधारा (1) के तहत रिटर्न या उपधारा (4) के तहत विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है, उपधारा (9) के प्रावधानों के अनुसार देय कर की राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो ऐसा डीलर ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(क) उपधारा (9) के अधीन देय कर के संबंध में, उसके द्वारा रिटर्न या त्रैमासिक सारांश विवरण या संशोधित रिटर्न के अनुसार, जैसा भी मामला हो; या
(ख) उस अवधि के लिए देय कर के संबंध में जिसके लिए वह उपधारा (1) के तहत रिटर्न या उपधारा (4) के तहत त्रैमासिक सार विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहा है, देय राशि पर डेढ़ प्रतिशत प्रति माह की दर से, उस तिथि से जब देय कर देय हो गया था, उसके भुगतान की तिथि तक।
स्पष्टीकरण। इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए--
(i) जहां कर के भुगतान में चूक की अवधि एक महीने से कम है, तो उस अवधि के लिए ऐसे कर पर देय ब्याज की गणना आनुपातिक रूप से की जाएगी;
(ii) “माह” का अर्थ तीस दिन होगा।
(11) इस धारा के अधीन लगाया गया कोई भी ब्याज या जुर्माना धारा 81 के अधीन की जाने वाली किसी भी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(12) उपधारा (1) के तहत प्रस्तुत किए गए रिटर्न में देय कर की राशि पर आधा प्रतिशत की दर से छूट, एक वर्ष में अधिकतम पचास हजार रुपये तक, पंजीकृत डीलर को दी जाएगी, जिसने इस धारा के तहत निर्दिष्ट नियत तिथियों के भीतर रिटर्न प्रस्तुत किया है और इस धारा के तहत कर के भुगतान के लिए निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले पूरी राशि का भुगतान किया है।
(क) कोई डीलर, जो इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तरीके से नोटिस जारी करके;
(ख) एक पंजीकृत डीलर (धारा 15 के तहत उसे देय कर के बदले निश्चित दर पर कर का भुगतान करने की अनुमति प्राप्त डीलर के अलावा),
माल की बिक्री, खरीद, प्राप्ति और प्रेषण तथा प्रत्येक माह के लिए विशेष रूप से निर्धारित किसी भी अन्य लेन-देन से संबंधित अपने सभी लेन-देन के संबंध में सही और पूर्ण विवरण अगले माह के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से प्रस्तुत करेगा।
(2) उपधारा (1) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक व्यक्ति, जो कि --
(क) कोई डीलर, जो इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तरीके से नोटिस जारी करके;
(ख) एक पंजीकृत डीलर (धारा 15 के तहत उसे देय कर के बदले निश्चित दर पर कर का भुगतान करने की अनुमति प्राप्त डीलर के अलावा),
माल की बिक्री और खरीद से संबंधित अपने सभी लेन-देन के संबंध में और प्रत्येक पूर्ण तिमाही के लिए निर्धारित किए गए किसी भी विवरण को तिमाही की समाप्ति के बाद के महीने के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से प्रस्तुत करना होगा।
(3) प्रत्येक पंजीकृत डीलर निर्धारित प्राधिकारी को नियत तिथि से पहले या उस तिथि तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में निर्धारित प्रपत्र और तरीके से एक सही और पूर्ण विवरण प्रस्तुत करेगा।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा में, "देय तिथि" से तात्पर्य है--
(क) जहां डीलर कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के अर्थ में एक कंपनी है, तो उस वर्ष के बाद के वर्ष का 30वां नवंबर, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है;
(ख) जहां डीलर कोई व्यक्ति हो, जो कंपनी न हो,--
(i) ऐसे मामले में जहां इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत डीलर के खातों का लेखापरीक्षा कराना आवश्यक हो या जहां धारा 54 के तहत किसी लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक हो, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 अक्टूबर की तिथि, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष का 31वां दिन, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है।
(4) धारा 15 के तहत कर भुगतान करने की अनुमति प्राप्त प्रत्येक डीलर, प्रत्येक पूर्ण तिमाही के लिए तिमाही सार विवरण तिमाही की समाप्ति के बाद आने वाले महीने के अंत तक या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को ऐसे प्रपत्र और ऐसे तरीके से प्रस्तुत करेगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(5) यदि त्रैमासिक विवरण या मासिक रिटर्न या त्रैमासिक सारांश विवरण या वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के लिए निर्धारित नियत तिथि अवकाश का दिन हो, तो कार्यालय खुलने की अगली तिथि को नियत तिथि माना जाएगा।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, निर्धारित प्राधिकारी लिखित में दर्ज किए जाने वाले विशिष्ट कारणों से, ऐसे रिटर्न या त्रैमासिक विवरण, जैसा भी मामला हो, दाखिल करने की तिथि बढ़ा सकता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसा विस्तार केवल एक बार और नियत तिथि से तीस दिनों से अधिक की अवधि के लिए ही दिया जा सकता है; परन्तु आयुक्त लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से तीस दिनों से अधिक का विस्तार दे सकता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसा विस्तार केवल एक बार और वह भी तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए ही दिया जा सकता है।
(7) यदि कोई डीलर, उपधारा (1) के तहत मासिक विवरण या उपधारा (2) के तहत त्रैमासिक विवरण प्रस्तुत करने के बाद, उसमें कोई चूक या गलत विवरण पाता है, तो वह उपधारा (3) के अर्थ में नियत तिथि से पहले किसी भी समय निर्धारित प्राधिकारी को निर्धारित प्रपत्र और तरीके से संशोधित विवरण या विवरण प्रस्तुत कर सकता है।
बशर्ते कि यदि सूचना के आधार पर या अन्यथा तथा लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से निर्धारित प्राधिकारी संतुष्ट हो जाता है कि मूल रूप से प्रस्तुत किया गया विवरण या बयान जानबूझकर झूठा था या राज्य सरकार को उसके राजस्व से धोखाधड़ी करने के इरादे से प्रस्तुत किया गया था, तो ऐसे किसी भी विवरण या बयान पर विचार नहीं किया जाएगा।
(8) यदि कोई डीलर उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर रिटर्न प्रस्तुत करने में या उपधारा (2) के अधीन त्रैमासिक विवरण प्रस्तुत करने में या उपधारा (4) के अधीन त्रैमासिक सारांश विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो निर्धारित प्राधिकारी, ऐसे डीलर को निर्धारित तरीके से सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसी विफलता के प्रत्येक दिन के लिए पच्चीस रुपये की दर से जुर्माना लगाएगा।
(9) (क) उपधारा (1) के अधीन रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक डीलर, निर्धारित तरीके से, रिटर्न के अनुसार देय कर जमा करेगा और निर्धारित प्रपत्र एवं तरीके से रिटर्न के साथ भुगतान का प्रमाण संलग्न करेगा।
(ख) धारा 15 के तहत कर का भुगतान करने के लिए अनुमत प्रत्येक डीलर, धारा 15 के तहत जारी अधिसूचना में निर्दिष्ट दर को अपने तिमाही कारोबार पर लागू करने के बाद प्राप्त कर को उस तिमाही के बाद वाले महीने के पंद्रहवें दिन या उससे पहले जमा करेगा जिससे वह संबंधित है और उपधारा (4) के तहत प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण के साथ निर्धारित प्रपत्र और तरीके से भुगतान का प्रमाण संलग्न करेगा।
(ग) उपधारा (10) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि कोई पंजीकृत डीलर उपधारा (7) के अधीन संशोधित रिटर्न प्रस्तुत करता है और यदि संशोधित रिटर्न के अनुसार ऐसे डीलर से देय कर की राशि मूल रिटर्न के अनुसार देय राशि से अधिक है, तो ऐसे संशोधित रिटर्न के साथ खंड (क) में दिए गए तरीके से कर की अतिरिक्त राशि के भुगतान को दर्शाने वाली रसीद संलग्न की जाएगी।
(10) यदि कोई डीलर, जिसे उपधारा (1) के तहत रिटर्न या उपधारा (4) के तहत विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है, उपधारा (9) के प्रावधानों के अनुसार देय कर की राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो ऐसा डीलर ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(क) उपधारा (9) के अधीन देय कर के संबंध में, उसके द्वारा रिटर्न या त्रैमासिक सारांश विवरण या संशोधित रिटर्न के अनुसार, जैसा भी मामला हो; या
(ख) उस अवधि के लिए देय कर के संबंध में जिसके लिए वह उपधारा (1) के तहत रिटर्न या उपधारा (4) के तहत त्रैमासिक सार विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहा है, देय राशि पर डेढ़ प्रतिशत प्रति माह की दर से, उस तिथि से जब देय कर देय हो गया था, उसके भुगतान की तिथि तक।
स्पष्टीकरण। इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए--
(i) जहां कर के भुगतान में चूक की अवधि एक महीने से कम है, तो उस अवधि के लिए ऐसे कर पर देय ब्याज की गणना आनुपातिक रूप से की जाएगी;
(ii) “माह” का अर्थ तीस दिन होगा।
(11) इस धारा के अधीन लगाया गया कोई भी ब्याज या जुर्माना धारा 81 के अधीन की जाने वाली किसी भी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(12) उपधारा (1) के तहत प्रस्तुत किए गए रिटर्न में देय कर की राशि पर आधा प्रतिशत की दर से छूट, एक वर्ष में अधिकतम पचास हजार रुपये तक, पंजीकृत डीलर को दी जाएगी, जिसने इस धारा के तहत निर्दिष्ट नियत तिथियों के भीतर रिटर्न प्रस्तुत किया है और इस धारा के तहत कर के भुगतान के लिए निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले पूरी राशि का भुगतान किया है।
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