BVAT Act 54अध्याय VII · Books of Account and Furnishing of Information
धारा 54 · कुछ मामलों में खातों का ऑडिट किया जाना आवश्यक है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक डीलर जिसका सकल कारोबार चालीस लाख रुपये से अधिक है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अपने वार्षिक खातों का लेखापरीक्षा किसी लेखाकार द्वारा करवाएगा--
(i) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत गठित और पंजीकृत कंपनी के मामले में, अगले वर्ष के 30 नवंबर को; और
(ii) किसी अन्य मामले में, अगले वर्ष का 31वां दिन।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक डीलर उस उपधारा में निर्दिष्ट तिथि तक, ऐसे लेखाकार द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित और सत्यापित निर्धारित प्रपत्र में ऐसी लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त करेगा तथा उसमें निर्धारित विवरण शामिल होंगे तथा ऐसी रिपोर्ट की सत्य प्रतिलिपि ऐसे डीलर द्वारा नियत तिथि को या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
स्पष्टीकरण 1. --इस उपधारा में, "देय तिथि" से तात्पर्य है--
(क) जहां डीलर कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के अर्थ में एक कंपनी है, तो उस वर्ष के बाद के वर्ष का 30वां नवंबर, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है;
(ख) जहां डीलर कोई व्यक्ति हो, जो कंपनी न हो,--
(i) ऐसे मामले में जहां इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत डीलर के खातों का लेखापरीक्षा कराना आवश्यक हो या जहां इस धारा के तहत किसी लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक हो, उस वर्ष के बाद के वर्ष की 31 अक्टूबर की तिथि, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 जुलाई, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है।
स्पष्टीकरण 2.-- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लेखाकार" से तात्पर्य चार्टर्ड लेखाकार अधिनियम, 1949 (38 ऑफ 1949) के अर्थ में चार्टर्ड लेखाकार से है और इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 226 की उपधारा (2) के प्रावधानों के अनुसार किसी भी राज्य में पंजीकृत कंपनियों के लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त होने का हकदार है।
(3) यदि किसी पंजीकृत डीलर के खातों का उपधारा (1) के प्रावधानों के अनुसार लेखापरीक्षा कराना अनिवार्य नहीं है, तो ऐसा डीलर निर्धारित प्राधिकारी को धारा 52 की उपधारा (2) में उल्लिखित खाते एवं विवरण उस वर्ष के 31 जुलाई तक या उससे पहले प्रस्तुत करेगा, जिस वर्ष से ऐसे खाते एवं विवरण संबंधित हैं।
(4) यदि कोई डीलर उपधारा (2) या उपधारा (3) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो निर्धारित प्राधिकारी डीलर को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, उस पर देय कर के अतिरिक्त, धारा 36 के तहत उसके द्वारा देय कर के दो प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाएगा, प्रत्येक माह या उसके भाग के लिए।
(i) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत गठित और पंजीकृत कंपनी के मामले में, अगले वर्ष के 30 नवंबर को; और
(ii) किसी अन्य मामले में, अगले वर्ष का 31वां दिन।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक डीलर उस उपधारा में निर्दिष्ट तिथि तक, ऐसे लेखाकार द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित और सत्यापित निर्धारित प्रपत्र में ऐसी लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त करेगा तथा उसमें निर्धारित विवरण शामिल होंगे तथा ऐसी रिपोर्ट की सत्य प्रतिलिपि ऐसे डीलर द्वारा नियत तिथि को या उससे पहले निर्धारित प्राधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
स्पष्टीकरण 1. --इस उपधारा में, "देय तिथि" से तात्पर्य है--
(क) जहां डीलर कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के अर्थ में एक कंपनी है, तो उस वर्ष के बाद के वर्ष का 30वां नवंबर, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है;
(ख) जहां डीलर कोई व्यक्ति हो, जो कंपनी न हो,--
(i) ऐसे मामले में जहां इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत डीलर के खातों का लेखापरीक्षा कराना आवश्यक हो या जहां इस धारा के तहत किसी लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक हो, उस वर्ष के बाद के वर्ष की 31 अक्टूबर की तिथि, जिस वर्ष से ऐसा विवरण संबंधित है;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 जुलाई, जिससे ऐसा विवरण संबंधित है।
स्पष्टीकरण 2.-- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लेखाकार" से तात्पर्य चार्टर्ड लेखाकार अधिनियम, 1949 (38 ऑफ 1949) के अर्थ में चार्टर्ड लेखाकार से है और इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 226 की उपधारा (2) के प्रावधानों के अनुसार किसी भी राज्य में पंजीकृत कंपनियों के लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त होने का हकदार है।
(3) यदि किसी पंजीकृत डीलर के खातों का उपधारा (1) के प्रावधानों के अनुसार लेखापरीक्षा कराना अनिवार्य नहीं है, तो ऐसा डीलर निर्धारित प्राधिकारी को धारा 52 की उपधारा (2) में उल्लिखित खाते एवं विवरण उस वर्ष के 31 जुलाई तक या उससे पहले प्रस्तुत करेगा, जिस वर्ष से ऐसे खाते एवं विवरण संबंधित हैं।
(4) यदि कोई डीलर उपधारा (2) या उपधारा (3) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो निर्धारित प्राधिकारी डीलर को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, उस पर देय कर के अतिरिक्त, धारा 36 के तहत उसके द्वारा देय कर के दो प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाएगा, प्रत्येक माह या उसके भाग के लिए।
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