BVAT Act 70अध्याय XI · Refunds and Adjustments
धारा 70 · विलंबित धनार्जन पर ब्याज।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि निर्धारित प्राधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को प्रतिदेय राशि उसे प्रतिदेय नब्बे दिनों के भीतर प्रतिदेय न हो या प्रतिदेय राशि के लिए आवेदन अस्वीकृत न किया जाए, तो निर्धारित प्राधिकारी उक्त राशि पर नब्बे दिनों की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद की तिथि से प्रतिदेय राशि की प्रति वर्ष या उसके अंश छह प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करेगा।
बशर्ते कि यदि न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर राशि वापसी योग्य हो जाती है, तो इस धारा के प्रावधानों के तहत ब्याज न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्राप्ति की तिथि से नब्बे दिनों की अवधि की समाप्ति के तुरंत बाद की तिथि से वापसी की तिथि तक देय होगा। यह ब्याज उस अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाना चाहिए जिसका आदेश न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही का विषय है।
(2) यदि उपर्युक्त नब्बे दिनों की अवधि के भीतर धन वापसी प्रदान करने में देरी, चाहे पूर्णतः हो या आंशिकतः, उक्त व्यक्ति के कारण हुई हो, तो उसके कारण हुई देरी की अवधि को उस अवधि से बाहर रखा जाएगा जिसके लिए ब्याज देय है।
(3) यदि इस धारा के प्रावधानों के अधीन ब्याज की गणना के प्रयोजनों के लिए बहिष्कृत की जाने वाली अवधि के संबंध में कोई प्रश्न उठता है, तो ऐसे प्रश्न का निर्धारण आयुक्त द्वारा किया जाएगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा।
बशर्ते कि यदि न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर राशि वापसी योग्य हो जाती है, तो इस धारा के प्रावधानों के तहत ब्याज न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्राप्ति की तिथि से नब्बे दिनों की अवधि की समाप्ति के तुरंत बाद की तिथि से वापसी की तिथि तक देय होगा। यह ब्याज उस अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाना चाहिए जिसका आदेश न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही का विषय है।
(2) यदि उपर्युक्त नब्बे दिनों की अवधि के भीतर धन वापसी प्रदान करने में देरी, चाहे पूर्णतः हो या आंशिकतः, उक्त व्यक्ति के कारण हुई हो, तो उसके कारण हुई देरी की अवधि को उस अवधि से बाहर रखा जाएगा जिसके लिए ब्याज देय है।
(3) यदि इस धारा के प्रावधानों के अधीन ब्याज की गणना के प्रयोजनों के लिए बहिष्कृत की जाने वाली अवधि के संबंध में कोई प्रश्न उठता है, तो ऐसे प्रश्न का निर्धारण आयुक्त द्वारा किया जाएगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा।
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