BVAT Act 3अध्याय II · Incidence of Tax
धारा 3 · कर का प्रभार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) बिहार वित्त अधिनियम, 1981 (बिहार अधिनियम 5 ऑफ 1981) के तहत पंजीकृत प्रत्येक डीलर, जैसा कि धारा 94 द्वारा निरस्त किए जाने से पहले था, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद या उसके द्वारा की गई बिक्री या खरीद पर इस अधिनियम के तहत कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(2) प्रत्येक डीलर, जिस पर उपधारा (1) लागू नहीं होती, बिक्री या खरीद पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, जैसा भी मामला हो, उस तारीख से जिस दिन बारह माह से अधिक की अवधि के दौरान उसका सकल कारोबार पहली बार पाँच लाख रुपये से अधिक हो गया हो।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, परन्तु इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यापारी,--
(क) आयातक या निर्माता होने के नाते; या
(ख) जिसे आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के तहत रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है; या
(ग) जो विस्फोटक अधिनियम, 1884 (1884 का अधिनियम 4), या बिहार उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1915 (बिहार और उड़ीसा अधिनियम 1915 का अधिनियम 2), या औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 (1940 का अधिनियम 23), या आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का अधिनियम 10), या खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (1957 का अधिनियम 67) के तहत कोई लाइसेंस रखता हो; या
(घ) किसी भी लागू कानून के तहत गठित निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत निगमित कंपनी, या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (74 ऑफ 1956) के तहत पंजीकृत कंपनी; या
(ई) जिसका व्यवसाय स्थल बिहार कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1960 (बिहार अधिनियम 16 ऑफ 1960) के तहत स्थापित बाजार यार्ड के भीतर स्थित है; या
(f) जो निम्नलिखित दो शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्:--
(i) अपने कार्यस्थल पर टेलीफोन का उपयोग करता है या उसके पास मोबाइल टेलीफोन है; और
(ii) जिनके व्यवसाय की प्राप्तियाँ या भुगतान, पूर्णतः या आंशिक रूप से, किसी बैंक के माध्यम से किए जाते हैं,
कर योग्य वस्तुओं की पहली बिक्री की तारीख से, बिक्री या खरीद पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(4) प्रत्येक व्यापारी जो उपधारा (1), (2) और (3) के अधीन कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हो गया है, उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उस तारीख से बारह लगातार महीनों की समाप्ति के बाद इस प्रकार उत्तरदायी नहीं रहेगा, जिस तारीख को वह या तो अपना व्यवसाय बंद कर देता है या बंद कर देता है या अपना व्यवसाय पूरी तरह से किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित कर देता है।
(5) एक पंजीकृत व्यापारी को बारह लगातार महीनों की अवधि के भीतर, उस माल के भंडार पर कर का भुगतान करना होगा जो उस तिथि को उसके पास शेष रहता है जिस तिथि से वह अपना व्यवसाय बंद या समाप्त करता है:
बशर्ते कि आयुक्त, कारणों को दर्ज करने के बाद, बारह लगातार महीनों की अवधि को बढ़ा सकता है यदि माल व्यापारी के नियंत्रण से परे कारणों से उक्त बारह महीनों की अवधि से अधिक समय तक स्टॉक में रखा जाता है।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति, जो छह माह से कम समय पहले तक किसी साझेदारी फर्म, संस्था या हिंदू अविभाजित परिवार का सदस्य रहा हो, जो छह माह से कम समय पहले तक कर देने के लिए उत्तरदायी हो, कोई नया व्यवसाय अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से शुरू करता है, या किसी अन्य व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था में शामिल होता है, तो उक्त कर, उस व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था से की गई बिक्री और खरीद पर, उस तारीख से देय होगा जिस तारीख से वह व्यक्ति उसे शुरू करता है या उसमें शामिल होता है, जब तक कि उक्त उपधाराओं के तहत ऐसे व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था के संबंध में देयता पहले की तारीख से उत्पन्न न हुई हो।
(7) प्रत्येक वर्ष या उसके किसी भाग के लिए कर, आयुक्त की पूर्व स्वीकृति से, निर्धारित तरीके से, वर्ष के दौरान, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किश्तों में अग्रिम रूप से अनुमानित और एकत्र किया जा सकता है।
(8) उपधारा (7) के प्रयोजनों के लिए, निर्धारित प्राधिकारी डीलर से उस वर्ष या उसके किसी भाग के लिए उसके कर योग्य कारोबार का अग्रिम अनुमान प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकता है और उस वर्ष या उसके किसी भाग के लिए डीलर द्वारा देय कर की राशि का अनंतिम निर्धारण कर सकता है और इसके बाद डीलर उस प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तिथि तक निर्धारित राशि का भुगतान करेगा।
(2) प्रत्येक डीलर, जिस पर उपधारा (1) लागू नहीं होती, बिक्री या खरीद पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, जैसा भी मामला हो, उस तारीख से जिस दिन बारह माह से अधिक की अवधि के दौरान उसका सकल कारोबार पहली बार पाँच लाख रुपये से अधिक हो गया हो।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, परन्तु इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यापारी,--
(क) आयातक या निर्माता होने के नाते; या
(ख) जिसे आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के तहत रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है; या
(ग) जो विस्फोटक अधिनियम, 1884 (1884 का अधिनियम 4), या बिहार उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1915 (बिहार और उड़ीसा अधिनियम 1915 का अधिनियम 2), या औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 (1940 का अधिनियम 23), या आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का अधिनियम 10), या खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (1957 का अधिनियम 67) के तहत कोई लाइसेंस रखता हो; या
(घ) किसी भी लागू कानून के तहत गठित निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत निगमित कंपनी, या केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (74 ऑफ 1956) के तहत पंजीकृत कंपनी; या
(ई) जिसका व्यवसाय स्थल बिहार कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1960 (बिहार अधिनियम 16 ऑफ 1960) के तहत स्थापित बाजार यार्ड के भीतर स्थित है; या
(f) जो निम्नलिखित दो शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्:--
(i) अपने कार्यस्थल पर टेलीफोन का उपयोग करता है या उसके पास मोबाइल टेलीफोन है; और
(ii) जिनके व्यवसाय की प्राप्तियाँ या भुगतान, पूर्णतः या आंशिक रूप से, किसी बैंक के माध्यम से किए जाते हैं,
कर योग्य वस्तुओं की पहली बिक्री की तारीख से, बिक्री या खरीद पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(4) प्रत्येक व्यापारी जो उपधारा (1), (2) और (3) के अधीन कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हो गया है, उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उस तारीख से बारह लगातार महीनों की समाप्ति के बाद इस प्रकार उत्तरदायी नहीं रहेगा, जिस तारीख को वह या तो अपना व्यवसाय बंद कर देता है या बंद कर देता है या अपना व्यवसाय पूरी तरह से किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित कर देता है।
(5) एक पंजीकृत व्यापारी को बारह लगातार महीनों की अवधि के भीतर, उस माल के भंडार पर कर का भुगतान करना होगा जो उस तिथि को उसके पास शेष रहता है जिस तिथि से वह अपना व्यवसाय बंद या समाप्त करता है:
बशर्ते कि आयुक्त, कारणों को दर्ज करने के बाद, बारह लगातार महीनों की अवधि को बढ़ा सकता है यदि माल व्यापारी के नियंत्रण से परे कारणों से उक्त बारह महीनों की अवधि से अधिक समय तक स्टॉक में रखा जाता है।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति, जो छह माह से कम समय पहले तक किसी साझेदारी फर्म, संस्था या हिंदू अविभाजित परिवार का सदस्य रहा हो, जो छह माह से कम समय पहले तक कर देने के लिए उत्तरदायी हो, कोई नया व्यवसाय अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से शुरू करता है, या किसी अन्य व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था में शामिल होता है, तो उक्त कर, उस व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था से की गई बिक्री और खरीद पर, उस तारीख से देय होगा जिस तारीख से वह व्यक्ति उसे शुरू करता है या उसमें शामिल होता है, जब तक कि उक्त उपधाराओं के तहत ऐसे व्यवसाय, साझेदारी फर्म या संस्था के संबंध में देयता पहले की तारीख से उत्पन्न न हुई हो।
(7) प्रत्येक वर्ष या उसके किसी भाग के लिए कर, आयुक्त की पूर्व स्वीकृति से, निर्धारित तरीके से, वर्ष के दौरान, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किश्तों में अग्रिम रूप से अनुमानित और एकत्र किया जा सकता है।
(8) उपधारा (7) के प्रयोजनों के लिए, निर्धारित प्राधिकारी डीलर से उस वर्ष या उसके किसी भाग के लिए उसके कर योग्य कारोबार का अग्रिम अनुमान प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकता है और उस वर्ष या उसके किसी भाग के लिए डीलर द्वारा देय कर की राशि का अनंतिम निर्धारण कर सकता है और इसके बाद डीलर उस प्राधिकारी द्वारा निर्धारित तिथि तक निर्धारित राशि का भुगतान करेगा।
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