SEBI Act 15Qअध्याय VIB · Establishment, Jurisdiction, Authority and Procedure of Appellate Tribunal
धारा 15Q · इस्तीफा और बर्खास्तगी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [15Q. त्यागपत्र एवं निष्कासन. -- 2 (1) [प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण का पीठासीन अधिकारी या कोई अन्य सदस्य, केंद्र सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर से लिखित नोटिस द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है:
बशर्ते कि 3 [अध्यक्ष अधिकारी या कोई अन्य सदस्य], जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उसके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उसके कार्यकाल की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, पद पर बना रहेगा।
4 [(2) केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई जांच के बाद, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य को हटा सकती है, यदि वह--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया जा चुका है;
(ख) पीठासीन अधिकारी, न्यायिक या तकनीकी सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो;
(ग) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो;
(घ) केंद्र सरकार की राय में, उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है; या
(ई) उसने ऐसा वित्तीय हित या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे पीठासीन अधिकारी या न्यायिक या तकनीकी सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है:
बशर्ते कि उसे खंड (घ) और (ङ) के तहत पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उसे इस मामले में सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।]
(3) केंद्र सरकार नियमों द्वारा पीठासीन अधिकारी या किसी अन्य सदस्य के दुर्व्यवहार या अक्षमता की जांच की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है।
बशर्ते कि 3 [अध्यक्ष अधिकारी या कोई अन्य सदस्य], जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उसके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उसके कार्यकाल की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, पद पर बना रहेगा।
4 [(2) केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई जांच के बाद, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य को हटा सकती है, यदि वह--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया जा चुका है;
(ख) पीठासीन अधिकारी, न्यायिक या तकनीकी सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो;
(ग) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो;
(घ) केंद्र सरकार की राय में, उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है; या
(ई) उसने ऐसा वित्तीय हित या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे पीठासीन अधिकारी या न्यायिक या तकनीकी सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है:
बशर्ते कि उसे खंड (घ) और (ङ) के तहत पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उसे इस मामले में सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।]
(3) केंद्र सरकार नियमों द्वारा पीठासीन अधिकारी या किसी अन्य सदस्य के दुर्व्यवहार या अक्षमता की जांच की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है।
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