SEBI Act 11Cअध्याय IV · Powers and Functions of the Board
धारा 11C · जाँच पड़ताल।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 2 [11सी. जांच. -- (1) जहां बोर्ड के पास यह मानने का उचित आधार है कि---
(क) प्रतिभूतियों में लेन-देन इस प्रकार से किया जा रहा है जो निवेशकों या प्रतिभूति बाजार के लिए हानिकारक है; या
(ख) यदि किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के किसी प्रावधान या बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों या विनियमों या जारी किए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है,
यह किसी भी समय लिखित आदेश द्वारा, आदेश में निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति (जिसे इस खंड में आगे जांच प्राधिकारी कहा गया है) को प्रतिभूति बाजार से जुड़े ऐसे मध्यस्थ या व्यक्तियों के मामलों की जांच करने और उस पर बोर्ड को रिपोर्ट देने का निर्देश दे सकता है।
(2) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 235 से 241 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कंपनी के प्रत्येक प्रबंधक, प्रबंध निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी तथा धारा 12 में निर्दिष्ट प्रत्येक मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से संबद्ध प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वे कंपनी या मध्यस्थ या ऐसे व्यक्ति से संबंधित सभी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख, जो उनकी अभिरक्षा या अधिकार में हैं, को संरक्षित रखें और जांच प्राधिकरण या इस संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को प्रस्तुत करें।
(3) जांच प्राधिकारी किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी भी व्यक्ति से ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने या ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत करने की मांग कर सकता है, जिसे वह आवश्यक समझे, यदि ऐसी जानकारी प्रस्तुत करना या ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत करना उसकी जांच के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक या आवश्यक हो।
(4) जांच प्राधिकारी उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत प्रस्तुत की गई किसी भी पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख को छह महीने तक अपने पास रख सकता है और उसके बाद उसे किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति को लौटा देगा जिसके द्वारा या जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं।
बशर्ते कि यदि दोबारा आवश्यकता हो तो जांच प्राधिकारी किसी भी पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख को मंगवा सकता है:
इसके अलावा, यदि वह व्यक्ति जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं, जांच प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगता है, तो जांच प्राधिकारी ऐसे व्यक्ति को, जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए थे, ऐसी पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्रदान करेगा।
(5) उपधारा (1) के अधीन जांच करने के लिए निर्देशित कोई भी व्यक्ति, किसी मध्यस्थ के किसी प्रबंधक, प्रबंध निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी या प्रतिभूति बाजार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी व्यक्ति से उसके व्यवसाय के मामलों के संबंध में शपथ पर पूछताछ कर सकता है और तदनुसार शपथ दिला सकता है और उस उद्देश्य के लिए उन व्यक्तियों में से किसी को भी व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने के लिए कह सकता है।
(6) यदि कोई व्यक्ति उचित कारण के बिना विफल हो जाता है या इनकार कर देता है--
(क) जांच प्राधिकारी या इस संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को कोई पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत करना, जिसे उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य है; या
(ख) कोई भी ऐसी जानकारी प्रदान करना जो उपधारा (3) के अधीन उसका कर्तव्य है; या
(ग) उपधारा (5) के तहत आवश्यकता पड़ने पर जांच प्राधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना या उस उपधारा के अनुसरण में जांच प्राधिकारी द्वारा पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देना; या
(घ) उपधारा (7) में निर्दिष्ट किसी परीक्षा के नोटों पर हस्ताक्षर करना।
उसे एक वर्ष तक के कारावास, या एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा, और साथ ही पहले जुर्माने के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिस दौरान विफलता या इनकार जारी रहता है।
(7) उपधारा (5) के तहत किसी भी परीक्षा के नोट्स लिखित रूप में लिए जाएंगे और परीक्षार्थी को पढ़कर सुनाए जाएंगे, या उसके द्वारा पढ़े जाएंगे, और उसके द्वारा हस्ताक्षरित किए जाएंगे, और इसके बाद उसके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं।
(8) जहाँ जाँच के दौरान, जाँच प्राधिकारी को यह मानने का उचित आधार हो कि किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाज़ार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी व्यक्ति की पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज़ और अभिलेख नष्ट, विकृत, परिवर्तित, जाली या गुप्त किए जा सकते हैं, तो जाँच प्राधिकारी ऐसी पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेज़ों और अभिलेखों को जब्त करने के आदेश हेतु [मुंबई में ऐसे नामित न्यायालय के मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है] को आवेदन कर सकता है।
4 [(8ए) अधिकृत अधिकारी उपधारा (8) में निर्दिष्ट सभी या किसी भी उद्देश्य के लिए अपनी सहायता हेतु किसी पुलिस अधिकारी या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी, या दोनों की सेवाओं की मांग कर सकता है, और ऐसे प्रत्येक अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी मांग का पालन करे।]
(9) आवेदन पर विचार करने और जांच प्राधिकारी की सुनवाई करने के बाद, यदि आवश्यक हो, तो [निर्दिष्ट न्यायालय का मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] आदेश द्वारा जांच प्राधिकारी को अधिकृत कर सकता है---
(क) ऐसी सहायता के साथ, जहाँ ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख रखे जाते हैं, उस स्थान या स्थानों में प्रवेश करना;
(ख) उस स्थान या उन स्थानों की तलाशी आदेश में निर्दिष्ट तरीके से लेना; और
(ग) जांच के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे जाने वाली पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को जब्त करना:
बशर्ते कि 5 [निर्दिष्ट न्यायालय का मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 के तहत निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) की पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की ज़ब्ती को अधिकृत नहीं करेगा, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, जब तक कि ऐसी कंपनी इनसाइडर ट्रेडिंग या बाजार में हेरफेर न करे।
(10) जांच प्राधिकारी इस धारा के तहत जब्त की गई पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को जांच की समाप्ति के बाद तक, जितनी अवधि वह आवश्यक समझे, अपने पास रखेगा और उसके बाद उन्हें कंपनी या अन्य निगमित निकाय को, या जैसा भी मामला हो, प्रबंध निदेशक या प्रबंधक या किसी अन्य व्यक्ति को, जिसकी हिरासत या अधिकार से उन्हें जब्त किया गया था, लौटा देगा और इस वापसी की सूचना [निर्दिष्ट न्यायालय के मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] को देगा।
बशर्ते कि जांच प्राधिकारी उपर्युक्त पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को लौटाने से पहले उन पर या उनके किसी भाग पर पहचान चिह्न लगा सकता है।
(11) इस धारा में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, इस धारा के अंतर्गत की गई प्रत्येक तलाशी या ज़ब्ती, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उन प्रावधानों के अनुसार की जाएगी जो उस संहिता के अंतर्गत की गई तलाशी या ज़ब्ती से संबंधित हैं।
(क) प्रतिभूतियों में लेन-देन इस प्रकार से किया जा रहा है जो निवेशकों या प्रतिभूति बाजार के लिए हानिकारक है; या
(ख) यदि किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के किसी प्रावधान या बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों या विनियमों या जारी किए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है,
यह किसी भी समय लिखित आदेश द्वारा, आदेश में निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति (जिसे इस खंड में आगे जांच प्राधिकारी कहा गया है) को प्रतिभूति बाजार से जुड़े ऐसे मध्यस्थ या व्यक्तियों के मामलों की जांच करने और उस पर बोर्ड को रिपोर्ट देने का निर्देश दे सकता है।
(2) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 235 से 241 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कंपनी के प्रत्येक प्रबंधक, प्रबंध निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी तथा धारा 12 में निर्दिष्ट प्रत्येक मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से संबद्ध प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वे कंपनी या मध्यस्थ या ऐसे व्यक्ति से संबंधित सभी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख, जो उनकी अभिरक्षा या अधिकार में हैं, को संरक्षित रखें और जांच प्राधिकरण या इस संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को प्रस्तुत करें।
(3) जांच प्राधिकारी किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी भी व्यक्ति से ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने या ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत करने की मांग कर सकता है, जिसे वह आवश्यक समझे, यदि ऐसी जानकारी प्रस्तुत करना या ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत करना उसकी जांच के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक या आवश्यक हो।
(4) जांच प्राधिकारी उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत प्रस्तुत की गई किसी भी पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख को छह महीने तक अपने पास रख सकता है और उसके बाद उसे किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति को लौटा देगा जिसके द्वारा या जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं।
बशर्ते कि यदि दोबारा आवश्यकता हो तो जांच प्राधिकारी किसी भी पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख को मंगवा सकता है:
इसके अलावा, यदि वह व्यक्ति जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं, जांच प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगता है, तो जांच प्राधिकारी ऐसे व्यक्ति को, जिसकी ओर से पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए गए थे, ऐसी पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्रदान करेगा।
(5) उपधारा (1) के अधीन जांच करने के लिए निर्देशित कोई भी व्यक्ति, किसी मध्यस्थ के किसी प्रबंधक, प्रबंध निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी या प्रतिभूति बाजार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी व्यक्ति से उसके व्यवसाय के मामलों के संबंध में शपथ पर पूछताछ कर सकता है और तदनुसार शपथ दिला सकता है और उस उद्देश्य के लिए उन व्यक्तियों में से किसी को भी व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने के लिए कह सकता है।
(6) यदि कोई व्यक्ति उचित कारण के बिना विफल हो जाता है या इनकार कर देता है--
(क) जांच प्राधिकारी या इस संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को कोई पुस्तक, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत करना, जिसे उपधारा (2) या उपधारा (3) के तहत प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य है; या
(ख) कोई भी ऐसी जानकारी प्रदान करना जो उपधारा (3) के अधीन उसका कर्तव्य है; या
(ग) उपधारा (5) के तहत आवश्यकता पड़ने पर जांच प्राधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना या उस उपधारा के अनुसरण में जांच प्राधिकारी द्वारा पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देना; या
(घ) उपधारा (7) में निर्दिष्ट किसी परीक्षा के नोटों पर हस्ताक्षर करना।
उसे एक वर्ष तक के कारावास, या एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा, और साथ ही पहले जुर्माने के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिस दौरान विफलता या इनकार जारी रहता है।
(7) उपधारा (5) के तहत किसी भी परीक्षा के नोट्स लिखित रूप में लिए जाएंगे और परीक्षार्थी को पढ़कर सुनाए जाएंगे, या उसके द्वारा पढ़े जाएंगे, और उसके द्वारा हस्ताक्षरित किए जाएंगे, और इसके बाद उसके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं।
(8) जहाँ जाँच के दौरान, जाँच प्राधिकारी को यह मानने का उचित आधार हो कि किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाज़ार से किसी भी प्रकार से जुड़े किसी व्यक्ति की पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज़ और अभिलेख नष्ट, विकृत, परिवर्तित, जाली या गुप्त किए जा सकते हैं, तो जाँच प्राधिकारी ऐसी पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेज़ों और अभिलेखों को जब्त करने के आदेश हेतु [मुंबई में ऐसे नामित न्यायालय के मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है] को आवेदन कर सकता है।
4 [(8ए) अधिकृत अधिकारी उपधारा (8) में निर्दिष्ट सभी या किसी भी उद्देश्य के लिए अपनी सहायता हेतु किसी पुलिस अधिकारी या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी, या दोनों की सेवाओं की मांग कर सकता है, और ऐसे प्रत्येक अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी मांग का पालन करे।]
(9) आवेदन पर विचार करने और जांच प्राधिकारी की सुनवाई करने के बाद, यदि आवश्यक हो, तो [निर्दिष्ट न्यायालय का मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] आदेश द्वारा जांच प्राधिकारी को अधिकृत कर सकता है---
(क) ऐसी सहायता के साथ, जहाँ ऐसी पुस्तकें, रजिस्टर, अन्य दस्तावेज और अभिलेख रखे जाते हैं, उस स्थान या स्थानों में प्रवेश करना;
(ख) उस स्थान या उन स्थानों की तलाशी आदेश में निर्दिष्ट तरीके से लेना; और
(ग) जांच के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे जाने वाली पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को जब्त करना:
बशर्ते कि 5 [निर्दिष्ट न्यायालय का मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 के तहत निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) की पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों की ज़ब्ती को अधिकृत नहीं करेगा, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, जब तक कि ऐसी कंपनी इनसाइडर ट्रेडिंग या बाजार में हेरफेर न करे।
(10) जांच प्राधिकारी इस धारा के तहत जब्त की गई पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को जांच की समाप्ति के बाद तक, जितनी अवधि वह आवश्यक समझे, अपने पास रखेगा और उसके बाद उन्हें कंपनी या अन्य निगमित निकाय को, या जैसा भी मामला हो, प्रबंध निदेशक या प्रबंधक या किसी अन्य व्यक्ति को, जिसकी हिरासत या अधिकार से उन्हें जब्त किया गया था, लौटा देगा और इस वापसी की सूचना [निर्दिष्ट न्यायालय के मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश] को देगा।
बशर्ते कि जांच प्राधिकारी उपर्युक्त पुस्तकों, रजिस्टरों, अन्य दस्तावेजों और अभिलेखों को लौटाने से पहले उन पर या उनके किसी भाग पर पहचान चिह्न लगा सकता है।
(11) इस धारा में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, इस धारा के अंतर्गत की गई प्रत्येक तलाशी या ज़ब्ती, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उन प्रावधानों के अनुसार की जाएगी जो उस संहिता के अंतर्गत की गई तलाशी या ज़ब्ती से संबंधित हैं।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- ₹1,00,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
