SEBI Act 10अध्याय III · Transfer of Assets, Liabilities, Etc., of the Existing Securities and Exchange Board to the Board
धारा 10 · मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की परिसंपत्तियों, देनदारियों आदि का बोर्ड को हस्तांतरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) बोर्ड की स्थापना की तिथि से,---
(क) इस अधिनियम के अतिरिक्त किसी अन्य कानून में या किसी अनुबंध या अन्य दस्तावेज में मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का कोई भी संदर्भ बोर्ड का संदर्भ माना जाएगा;
(ख) मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की या उससे संबंधित सभी चल एवं अचल संपत्तियां और परिसंपत्तियां बोर्ड में निहित हो जाएंगी;
(ग) मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के सभी अधिकार एवं दायित्व बोर्ड को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और वे बोर्ड के अधिकार एवं दायित्व होंगे;
(घ) खंड (ग) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए किए गए सभी ऋण, दायित्व और देनदारियां, किए गए सभी अनुबंध और उक्त मौजूदा बोर्ड के उद्देश्य के लिए या उसके संबंध में किए जाने वाले सभी मामले और चीजें बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए किए गए, किए गए या किए जाने के लिए प्रतिबद्ध माने जाएंगे;
(ई) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को देय सभी धनराशियाँ बोर्ड को देय मानी जाएंगी;
(f) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध शुरू किए गए या शुरू किए जा सकने वाले सभी मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकती हैं या शुरू की जा सकती हैं; और
(जी) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अधीन कोई भी पद धारण करने वाला प्रत्येक कर्मचारी, पारिश्रमिक, अवकाश, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति और अन्य अंतिम लाभों के संबंध में, उसी कार्यकाल और सेवा की समान शर्तों और नियमों पर बोर्ड में अपना पद धारण करेगा, जैसा कि वह बोर्ड की स्थापना न होने की स्थिति में करता, और वह बोर्ड के कर्मचारी के रूप में तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक कि उस तिथि से छह महीने की अवधि समाप्त न हो जाए, यदि ऐसा कर्मचारी उस अवधि के भीतर बोर्ड का कर्मचारी न रहने का विकल्प चुनता है।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) या उस समय लागू किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के तहत बोर्ड द्वारा किसी कर्मचारी को उसकी नियमित सेवा में शामिल करने से ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य कानून के तहत किसी मुआवजे का हकदार नहीं बनाया जाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अन्य द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
(क) इस अधिनियम के अतिरिक्त किसी अन्य कानून में या किसी अनुबंध या अन्य दस्तावेज में मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का कोई भी संदर्भ बोर्ड का संदर्भ माना जाएगा;
(ख) मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की या उससे संबंधित सभी चल एवं अचल संपत्तियां और परिसंपत्तियां बोर्ड में निहित हो जाएंगी;
(ग) मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के सभी अधिकार एवं दायित्व बोर्ड को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और वे बोर्ड के अधिकार एवं दायित्व होंगे;
(घ) खंड (ग) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए किए गए सभी ऋण, दायित्व और देनदारियां, किए गए सभी अनुबंध और उक्त मौजूदा बोर्ड के उद्देश्य के लिए या उसके संबंध में किए जाने वाले सभी मामले और चीजें बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए किए गए, किए गए या किए जाने के लिए प्रतिबद्ध माने जाएंगे;
(ई) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को देय सभी धनराशियाँ बोर्ड को देय मानी जाएंगी;
(f) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध शुरू किए गए या शुरू किए जा सकने वाले सभी मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकती हैं या शुरू की जा सकती हैं; और
(जी) उस तिथि से ठीक पहले मौजूदा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अधीन कोई भी पद धारण करने वाला प्रत्येक कर्मचारी, पारिश्रमिक, अवकाश, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति और अन्य अंतिम लाभों के संबंध में, उसी कार्यकाल और सेवा की समान शर्तों और नियमों पर बोर्ड में अपना पद धारण करेगा, जैसा कि वह बोर्ड की स्थापना न होने की स्थिति में करता, और वह बोर्ड के कर्मचारी के रूप में तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक कि उस तिथि से छह महीने की अवधि समाप्त न हो जाए, यदि ऐसा कर्मचारी उस अवधि के भीतर बोर्ड का कर्मचारी न रहने का विकल्प चुनता है।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) या उस समय लागू किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के तहत बोर्ड द्वारा किसी कर्मचारी को उसकी नियमित सेवा में शामिल करने से ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य कानून के तहत किसी मुआवजे का हकदार नहीं बनाया जाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अन्य द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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