SEBI Act 11अध्याय IV · Powers and Functions of the Board
धारा 11 · बोर्ड के कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों की रक्षा करे और प्रतिभूति बाजार के विकास को बढ़ावा दे तथा उसे विनियमित करे, ऐसे उपायों द्वारा जैसा वह उचित समझे।
(2) पूर्वोक्त प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उनमें निर्दिष्ट उपायों में निम्नलिखित प्रावधान हो सकते हैं--
(क) स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य प्रतिभूति बाजारों में कारोबार को विनियमित करना;
(ख) शेयर दलालों, उप-दलालों, शेयर हस्तांतरण एजेंटों, निर्गम के बैंकरों, न्यास विलेखों के न्यासियों, निर्गम के रजिस्ट्रारों, व्यापारी बैंकरों, अंडरराइटरों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, निवेश सलाहकारों और ऐसे अन्य मध्यस्थों के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना जो किसी भी तरह से प्रतिभूति बाजारों से जुड़े हो सकते हैं;
1 [(ख) प्रतिभूतियों के 2 [जमाकर्ताओं, प्रतिभागियों, संरक्षकों], विदेशी संस्थागत निवेशकों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और ऐसे अन्य मध्यस्थों के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना, जिन्हें बोर्ड अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है;]
(ग) म्यूचुअल फंड सहित 3 [वेंचर कैपिटल फंड और सामूहिक निवेश योजनाओं] के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना;
(घ) स्व-नियामक संगठनों को बढ़ावा देना और विनियमित करना;
(ई) निवेशकों की शिक्षा और प्रतिभूति बाजारों के मध्यस्थों के प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगाना;
(f) निवेशकों की शिक्षा को बढ़ावा देना और प्रतिभूति बाजारों के मध्यस्थों को प्रशिक्षण देना;
(जी) प्रतिभूतियों में अंतर्देशीय व्यापार पर रोक लगाना;
(h) शेयरों के पर्याप्त अधिग्रहण और कंपनियों के अधिग्रहण को विनियमित करना;
(i) प्रतिभूति बाजार में 4 [स्टॉक एक्सचेंज, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति बाजार से जुड़े अन्य व्यक्ति] मध्यस्थों और स्व-नियामक संगठनों से सूचना मांगना, निरीक्षण करना, पूछताछ करना और लेखापरीक्षा करना;
5 [(ia) किसी भी व्यक्ति से, जिसमें कोई बैंक या कोई अन्य प्राधिकरण या बोर्ड या निगम शामिल है, जो किसी केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके तहत स्थापित या गठित किया गया हो, सूचना और अभिलेख मंगवाना, जो बोर्ड की राय में, प्रतिभूतियों में किसी भी लेनदेन के संबंध में बोर्ड द्वारा किसी भी जांच या पूछताछ के लिए प्रासंगिक हो;]
6 [(ib) प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन की रोकथाम या पता लगाने से संबंधित मामलों में, भारत या भारत के बाहर स्थित अन्य अधिकारियों से, जिनके कार्य बोर्ड के कार्यों के समान हों, सूचना मांगना या उन्हें सूचना प्रदान करना, इस संबंध में उस समय लागू अन्य कानूनों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए:
बशर्ते कि बोर्ड, भारत के बाहर किसी प्राधिकरण को कोई सूचना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से ऐसे प्राधिकरण के साथ कोई व्यवस्था, समझौता या सहमति कर सकता है;]
(जे) प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के प्रावधानों के तहत ऐसे कार्यों का निष्पादन करना और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करना, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा इसे प्रत्यायोजित किया जा सकता है;
(k) इस धारा के प्रयोजनों की पूर्ति के लिए शुल्क या अन्य प्रभार लगाना;
(एल) उपरोक्त उद्देश्यों के लिए अनुसंधान करना;
8 [(ल) बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किसी भी ऐसी एजेंसी से ऐसी जानकारी मंगवाना या उसे प्रदान करना, जिसे वह अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए आवश्यक समझे;]
(m) ऐसे अन्य कार्य करना जो निर्धारित किए जा सकें।
9 [(2ए) उप-धारा (2) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 में निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) की किसी बही, रजिस्टर, या अन्य दस्तावेज या अभिलेख का निरीक्षण करने के लिए उपाय कर सकता है, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, जहां बोर्ड के पास यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसी कंपनी प्रतिभूति बाजार से संबंधित अंतर्मुख व्यापार या धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त रही है।]
10 [(3) किसी अन्य कानून में समय-समय पर लागू किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) के खंड (i) या खंड (ia) या उपधारा (2A) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते समय, बोर्ड को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी सिविल न्यायालय को किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय प्राप्त होती हैं, निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:---
(i) लेखा-पुस्तकों और अन्य दस्तावेजों की खोज एवं प्रस्तुति, ऐसे स्थान और ऐसे समय पर जैसा कि बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ii) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उनसे पूछताछ करना;
(iii) धारा 12 में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति की किसी भी पुस्तक, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का किसी भी स्थान पर निरीक्षण;
12 [(iv) उपधारा (2ए) में निर्दिष्ट कंपनी की किसी पुस्तक, या रजिस्टर, या अन्य दस्तावेज या अभिलेख का निरीक्षण;
(v) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना।]
12 [(4) उपधारा (1), (2), (2ए) और (3) तथा धारा 11बी में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, निवेशकों या प्रतिभूति बाजार के हित में, जांच या पूछताछ लंबित रहने के दौरान या ऐसी जांच या पूछताछ के पूर्ण होने पर, निम्नलिखित में से कोई भी उपाय कर सकता है, अर्थात्:---
(क) किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में किसी प्रतिभूति के व्यापार को निलंबित करना;
(ख) व्यक्तियों को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से रोकना तथा प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रतिभूतियों की खरीद, बिक्री या लेन-देन करने से प्रतिबंधित करना;
(ग) किसी स्टॉक एक्सचेंज या स्व-नियामक संगठन के किसी पदाधिकारी को ऐसे पद धारण करने से निलंबित करना;
(घ) किसी भी ऐसे लेन-देन से प्राप्त आय या प्रतिभूतियों को जब्त करना और अपने पास रखना जिसकी जांच चल रही हो;
13 [(ई) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान, या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में किसी भी प्रकार से शामिल किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति के बैंक खातों या अन्य संपत्ति को नब्बे दिनों से अधिक की अवधि के लिए अटैच करना:
बशर्ते कि बोर्ड उक्त कुर्की के नब्बे दिनों के भीतर धारा 26ए के तहत स्थापित विशेष न्यायालय से उक्त कुर्की की पुष्टि प्राप्त करेगा, जिसके पास अधिकार क्षेत्र है, और ऐसी पुष्टि होने पर, उक्त कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान ऐसी कुर्की जारी रहेगी और उक्त कार्यवाही के समापन पर, धारा 28ए के प्रावधान लागू होंगे।
इसके अलावा, केवल संपत्ति, बैंक खाता या खाते या उनमें किए गए किसी भी लेनदेन को ही कुर्क करने की अनुमति दी जाएगी, जहां तक वे इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान, या इसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में वास्तव में शामिल आय से संबंधित हों।
(f) किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से किसी भी तरह से जुड़े किसी व्यक्ति को किसी ऐसे लेनदेन के हिस्से के रूप में किसी परिसंपत्ति का निपटान या हस्तांतरण न करने का निर्देश देना, जिसकी जांच चल रही हो:
बशर्ते कि बोर्ड, उपधारा (2) या उपधारा (2ए) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 में निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) के संबंध में, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, खंड (घ) या खंड (ङ) या खंड (च) में निर्दिष्ट कोई भी उपाय कर सकता है, यदि बोर्ड के पास यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसी कंपनी प्रतिभूति बाजार से संबंधित अंतर्मुख व्यापार या धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त रही है।
इसके अलावा, बोर्ड ऐसे आदेश पारित करने से पहले या बाद में संबंधित मध्यस्थों या व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देगा।
14 [(4ए) उपधारा (1), (2), (2ए), (3) और (4), धारा 11बी और धारा 15-1 में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के साथ, एक आदेश द्वारा, निर्धारित तरीके से जांच करने के बाद धारा 15ए, 15बी, 15सी, 15डी, 15ई, 15ईए, 15ईबी, 15एफ, 15जी, 15एच, 15एचए और 15एचबी के तहत जुर्माना लगा सकता है।]
15 [(5) इस अधिनियम की धारा 11B या प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 12A या डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 19 के तहत जारी निर्देश के अनुसार, या प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 15JB या धारा 23JA या डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 19-IA के तहत किए गए निपटान के तहत, जैसा भी मामला हो, जारी निर्देश के अनुसार जब्त की गई राशि बोर्ड द्वारा स्थापित निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा की जाएगी और ऐसी राशि का उपयोग बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के तहत बनाए गए विनियमों के अनुसार किया जाएगा।]
(2) पूर्वोक्त प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उनमें निर्दिष्ट उपायों में निम्नलिखित प्रावधान हो सकते हैं--
(क) स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य प्रतिभूति बाजारों में कारोबार को विनियमित करना;
(ख) शेयर दलालों, उप-दलालों, शेयर हस्तांतरण एजेंटों, निर्गम के बैंकरों, न्यास विलेखों के न्यासियों, निर्गम के रजिस्ट्रारों, व्यापारी बैंकरों, अंडरराइटरों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, निवेश सलाहकारों और ऐसे अन्य मध्यस्थों के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना जो किसी भी तरह से प्रतिभूति बाजारों से जुड़े हो सकते हैं;
1 [(ख) प्रतिभूतियों के 2 [जमाकर्ताओं, प्रतिभागियों, संरक्षकों], विदेशी संस्थागत निवेशकों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और ऐसे अन्य मध्यस्थों के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना, जिन्हें बोर्ड अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है;]
(ग) म्यूचुअल फंड सहित 3 [वेंचर कैपिटल फंड और सामूहिक निवेश योजनाओं] के कामकाज का पंजीकरण और विनियमन करना;
(घ) स्व-नियामक संगठनों को बढ़ावा देना और विनियमित करना;
(ई) निवेशकों की शिक्षा और प्रतिभूति बाजारों के मध्यस्थों के प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगाना;
(f) निवेशकों की शिक्षा को बढ़ावा देना और प्रतिभूति बाजारों के मध्यस्थों को प्रशिक्षण देना;
(जी) प्रतिभूतियों में अंतर्देशीय व्यापार पर रोक लगाना;
(h) शेयरों के पर्याप्त अधिग्रहण और कंपनियों के अधिग्रहण को विनियमित करना;
(i) प्रतिभूति बाजार में 4 [स्टॉक एक्सचेंज, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति बाजार से जुड़े अन्य व्यक्ति] मध्यस्थों और स्व-नियामक संगठनों से सूचना मांगना, निरीक्षण करना, पूछताछ करना और लेखापरीक्षा करना;
5 [(ia) किसी भी व्यक्ति से, जिसमें कोई बैंक या कोई अन्य प्राधिकरण या बोर्ड या निगम शामिल है, जो किसी केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके तहत स्थापित या गठित किया गया हो, सूचना और अभिलेख मंगवाना, जो बोर्ड की राय में, प्रतिभूतियों में किसी भी लेनदेन के संबंध में बोर्ड द्वारा किसी भी जांच या पूछताछ के लिए प्रासंगिक हो;]
6 [(ib) प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन की रोकथाम या पता लगाने से संबंधित मामलों में, भारत या भारत के बाहर स्थित अन्य अधिकारियों से, जिनके कार्य बोर्ड के कार्यों के समान हों, सूचना मांगना या उन्हें सूचना प्रदान करना, इस संबंध में उस समय लागू अन्य कानूनों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए:
बशर्ते कि बोर्ड, भारत के बाहर किसी प्राधिकरण को कोई सूचना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से ऐसे प्राधिकरण के साथ कोई व्यवस्था, समझौता या सहमति कर सकता है;]
(जे) प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के प्रावधानों के तहत ऐसे कार्यों का निष्पादन करना और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करना, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा इसे प्रत्यायोजित किया जा सकता है;
(k) इस धारा के प्रयोजनों की पूर्ति के लिए शुल्क या अन्य प्रभार लगाना;
(एल) उपरोक्त उद्देश्यों के लिए अनुसंधान करना;
8 [(ल) बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किसी भी ऐसी एजेंसी से ऐसी जानकारी मंगवाना या उसे प्रदान करना, जिसे वह अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए आवश्यक समझे;]
(m) ऐसे अन्य कार्य करना जो निर्धारित किए जा सकें।
9 [(2ए) उप-धारा (2) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 में निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) की किसी बही, रजिस्टर, या अन्य दस्तावेज या अभिलेख का निरीक्षण करने के लिए उपाय कर सकता है, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, जहां बोर्ड के पास यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसी कंपनी प्रतिभूति बाजार से संबंधित अंतर्मुख व्यापार या धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त रही है।]
10 [(3) किसी अन्य कानून में समय-समय पर लागू किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) के खंड (i) या खंड (ia) या उपधारा (2A) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते समय, बोर्ड को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी सिविल न्यायालय को किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय प्राप्त होती हैं, निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:---
(i) लेखा-पुस्तकों और अन्य दस्तावेजों की खोज एवं प्रस्तुति, ऐसे स्थान और ऐसे समय पर जैसा कि बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ii) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उनसे पूछताछ करना;
(iii) धारा 12 में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति की किसी भी पुस्तक, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का किसी भी स्थान पर निरीक्षण;
12 [(iv) उपधारा (2ए) में निर्दिष्ट कंपनी की किसी पुस्तक, या रजिस्टर, या अन्य दस्तावेज या अभिलेख का निरीक्षण;
(v) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना।]
12 [(4) उपधारा (1), (2), (2ए) और (3) तथा धारा 11बी में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, निवेशकों या प्रतिभूति बाजार के हित में, जांच या पूछताछ लंबित रहने के दौरान या ऐसी जांच या पूछताछ के पूर्ण होने पर, निम्नलिखित में से कोई भी उपाय कर सकता है, अर्थात्:---
(क) किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में किसी प्रतिभूति के व्यापार को निलंबित करना;
(ख) व्यक्तियों को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से रोकना तथा प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रतिभूतियों की खरीद, बिक्री या लेन-देन करने से प्रतिबंधित करना;
(ग) किसी स्टॉक एक्सचेंज या स्व-नियामक संगठन के किसी पदाधिकारी को ऐसे पद धारण करने से निलंबित करना;
(घ) किसी भी ऐसे लेन-देन से प्राप्त आय या प्रतिभूतियों को जब्त करना और अपने पास रखना जिसकी जांच चल रही हो;
13 [(ई) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान, या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में किसी भी प्रकार से शामिल किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी व्यक्ति के बैंक खातों या अन्य संपत्ति को नब्बे दिनों से अधिक की अवधि के लिए अटैच करना:
बशर्ते कि बोर्ड उक्त कुर्की के नब्बे दिनों के भीतर धारा 26ए के तहत स्थापित विशेष न्यायालय से उक्त कुर्की की पुष्टि प्राप्त करेगा, जिसके पास अधिकार क्षेत्र है, और ऐसी पुष्टि होने पर, उक्त कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान ऐसी कुर्की जारी रहेगी और उक्त कार्यवाही के समापन पर, धारा 28ए के प्रावधान लागू होंगे।
इसके अलावा, केवल संपत्ति, बैंक खाता या खाते या उनमें किए गए किसी भी लेनदेन को ही कुर्क करने की अनुमति दी जाएगी, जहां तक वे इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान, या इसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में वास्तव में शामिल आय से संबंधित हों।
(f) किसी मध्यस्थ या प्रतिभूति बाजार से किसी भी तरह से जुड़े किसी व्यक्ति को किसी ऐसे लेनदेन के हिस्से के रूप में किसी परिसंपत्ति का निपटान या हस्तांतरण न करने का निर्देश देना, जिसकी जांच चल रही हो:
बशर्ते कि बोर्ड, उपधारा (2) या उपधारा (2ए) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी सार्वजनिक कंपनी (धारा 12 में निर्दिष्ट मध्यस्थों को छोड़कर) के संबंध में, जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करवाना चाहती है, खंड (घ) या खंड (ङ) या खंड (च) में निर्दिष्ट कोई भी उपाय कर सकता है, यदि बोर्ड के पास यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसी कंपनी प्रतिभूति बाजार से संबंधित अंतर्मुख व्यापार या धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त रही है।
इसके अलावा, बोर्ड ऐसे आदेश पारित करने से पहले या बाद में संबंधित मध्यस्थों या व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देगा।
14 [(4ए) उपधारा (1), (2), (2ए), (3) और (4), धारा 11बी और धारा 15-1 में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के साथ, एक आदेश द्वारा, निर्धारित तरीके से जांच करने के बाद धारा 15ए, 15बी, 15सी, 15डी, 15ई, 15ईए, 15ईबी, 15एफ, 15जी, 15एच, 15एचए और 15एचबी के तहत जुर्माना लगा सकता है।]
15 [(5) इस अधिनियम की धारा 11B या प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 12A या डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 19 के तहत जारी निर्देश के अनुसार, या प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 15JB या धारा 23JA या डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 19-IA के तहत किए गए निपटान के तहत, जैसा भी मामला हो, जारी निर्देश के अनुसार जब्त की गई राशि बोर्ड द्वारा स्थापित निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा की जाएगी और ऐसी राशि का उपयोग बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के तहत बनाए गए विनियमों के अनुसार किया जाएगा।]
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
