SEBI Act 15-Iअध्याय VIA · Penalties and Adjudication
धारा 15-I · निर्णय करने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [15-I. निर्णय करने की शक्ति. -- (1) धारा 15A, 15B, 15C, 15D, 15E, 2 [15EA, 15EB,] 15F, 15G, 3 [15H, 15HA और 15HB] के तहत निर्णय करने के उद्देश्य से बोर्ड 4 [किसी भी अधिकारी को, जो संभाग प्रमुख के पद से नीचे का न हो, किसी भी संबंधित व्यक्ति को उचित सुनवाई का अवसर देने के बाद, किसी भी दंड लगाने के उद्देश्य से निर्धारित तरीके से जांच करने के लिए निर्णय अधिकारी नियुक्त कर सकता है।
(2) जाँच करते समय, निर्णय अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई ऐसा दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए बुलाने और उसकी उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार होगा, जो निर्णय अधिकारी की राय में जाँच के विषय से संबंधित या उसके लिए उपयोगी हो। यदि ऐसी जाँच के बाद वह संतुष्ट हो जाता है कि उस व्यक्ति ने उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी भी धारा के प्रावधानों का पालन नहीं किया है, तो वह उन धाराओं के प्रावधानों के अनुसार उचित दंड लगा सकता है।
5 [(3) बोर्ड इस धारा के तहत किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जांच कर सकता है और यदि वह यह मानता है कि निर्णय अधिकारी द्वारा पारित आदेश प्रतिभूति बाजार के हित में नहीं है, तो वह ऐसी जांच करने या करवाने के बाद, जैसा वह आवश्यक समझे, दंड की मात्रा बढ़ाने का आदेश पारित कर सकता है, यदि मामले की परिस्थितियां ऐसा उचित ठहराती हैं:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को मामले में सुनवाई का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, इस उपधारा में निहित कोई भी बात निर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश की तिथि या धारा 15T के तहत अपील के निपटारे की तिथि से तीन महीने की अवधि समाप्त होने के बाद लागू नहीं होगी, जो भी पहले हो।
(2) जाँच करते समय, निर्णय अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई ऐसा दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए बुलाने और उसकी उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार होगा, जो निर्णय अधिकारी की राय में जाँच के विषय से संबंधित या उसके लिए उपयोगी हो। यदि ऐसी जाँच के बाद वह संतुष्ट हो जाता है कि उस व्यक्ति ने उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी भी धारा के प्रावधानों का पालन नहीं किया है, तो वह उन धाराओं के प्रावधानों के अनुसार उचित दंड लगा सकता है।
5 [(3) बोर्ड इस धारा के तहत किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जांच कर सकता है और यदि वह यह मानता है कि निर्णय अधिकारी द्वारा पारित आदेश प्रतिभूति बाजार के हित में नहीं है, तो वह ऐसी जांच करने या करवाने के बाद, जैसा वह आवश्यक समझे, दंड की मात्रा बढ़ाने का आदेश पारित कर सकता है, यदि मामले की परिस्थितियां ऐसा उचित ठहराती हैं:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को मामले में सुनवाई का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, इस उपधारा में निहित कोई भी बात निर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश की तिथि या धारा 15T के तहत अपील के निपटारे की तिथि से तीन महीने की अवधि समाप्त होने के बाद लागू नहीं होगी, जो भी पहले हो।
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