NNMC Act 28अध्याय VI · Recognition of Nursing and Midwifery Qualifications
धारा 28 · भारत में विश्वविद्यालयों या नर्सिंग एवं दाईगिरी संस्थानों द्वारा प्रदान की गई नर्सिंग एवं दाईगिरी योग्यताओं की मान्यता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारत में किसी भी विश्वविद्यालय या नर्सिंग एवं दाई संस्था द्वारा प्रदान की गई प्रत्येक नर्सिंग एवं दाई योग्यता को नर्सिंग एवं दाई स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड द्वारा विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध एवं अनुरक्षित किया जाएगा, और ऐसी नर्सिंग एवं दाई योग्यता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त नर्सिंग एवं दाई योग्यता होगी।
(2) भारत में प्रत्येक विश्वविद्यालय या नर्सिंग एवं मिडवाइफरी संस्थान जो नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता के लिए कोई पाठ्यक्रम संचालित करता है, जो नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में शामिल नहीं है, ऐसी योग्यता को मान्यता प्रदान करने के लिए उस बोर्ड को आवेदन कर सकता है।
(3) नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड, नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता की सभी विशिष्टताओं में स्नातक या स्नातकोत्तर या विशेषता या नैदानिक नर्स विशेषता या नर्स प्रैक्टिशनर पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान करने हेतु आवेदन की जांच छह महीने की अवधि के भीतर, विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से करेगा।
(4) जहां नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड किसी नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता को मान्यता देने का निर्णय लेता है, तो वह ऐसी योग्यता को अपने द्वारा रखी गई सूची में शामिल करेगा और ऐसी मान्यता के प्रभावी होने की तिथि भी निर्दिष्ट करेगा।
(5) उपधारा (3) के तहत लिए गए निर्णय से पीड़ित कोई संस्था या विश्वविद्यालय, ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के साठ दिनों के भीतर राष्ट्रीय आयोग के समक्ष अपील कर सकता है और राष्ट्रीय आयोग, ऐसी अपील दाखिल करने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर, सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसे आदेश पारित करेगा जैसा वह उचित समझे।
(6) यदि राष्ट्रीय आयोग नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है या निर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो संबंधित विश्वविद्यालय या नर्सिंग एवं मिडवाइफरी संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर या निर्दिष्ट अवधि समाप्त होने के बाद, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार के समक्ष दूसरी अपील कर सकता है।
(7) इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यताएं, जो भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 (48 ऑफ 1947) की अनुसूची के भाग I और भाग II में शामिल हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यताएं होंगी, और नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड द्वारा विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध एवं अनुरक्षित की जाएंगी।
(8) यदि किसी राज्य के भीतर कोई प्राधिकरण, जिसे राज्य सरकार द्वारा राज्य आयोग या किसी स्वायत्त निकाय (यदि कोई हो) के परामर्श से किसी योग्यता प्रदान करने के उद्देश्य से मान्यता प्राप्त हो, ऐसी योग्यता प्रदान करता है जिसे राष्ट्रीय आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, तो ऐसा प्राधिकरण राष्ट्रीय आयोग से ऐसी योग्यता को मान्यता दिलाने के लिए आवेदन कर सकता है, और राष्ट्रीय आयोग यह घोषित कर सकता है कि ऐसी योग्यता, या ऐसी योग्यता केवल तभी जब किसी निर्दिष्ट तिथि के बाद प्रदान की गई हो, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त योग्यता होगी।
(9) प्रत्येक राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य नर्सिंग और प्रसूति अभ्यास को संबोधित करने या बढ़ावा देने के उद्देश्य से नर्सिंग और प्रसूति पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय कर सकती है।
(2) भारत में प्रत्येक विश्वविद्यालय या नर्सिंग एवं मिडवाइफरी संस्थान जो नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता के लिए कोई पाठ्यक्रम संचालित करता है, जो नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में शामिल नहीं है, ऐसी योग्यता को मान्यता प्रदान करने के लिए उस बोर्ड को आवेदन कर सकता है।
(3) नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड, नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता की सभी विशिष्टताओं में स्नातक या स्नातकोत्तर या विशेषता या नैदानिक नर्स विशेषता या नर्स प्रैक्टिशनर पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान करने हेतु आवेदन की जांच छह महीने की अवधि के भीतर, विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से करेगा।
(4) जहां नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड किसी नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता को मान्यता देने का निर्णय लेता है, तो वह ऐसी योग्यता को अपने द्वारा रखी गई सूची में शामिल करेगा और ऐसी मान्यता के प्रभावी होने की तिथि भी निर्दिष्ट करेगा।
(5) उपधारा (3) के तहत लिए गए निर्णय से पीड़ित कोई संस्था या विश्वविद्यालय, ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के साठ दिनों के भीतर राष्ट्रीय आयोग के समक्ष अपील कर सकता है और राष्ट्रीय आयोग, ऐसी अपील दाखिल करने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर, सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसे आदेश पारित करेगा जैसा वह उचित समझे।
(6) यदि राष्ट्रीय आयोग नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है या निर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो संबंधित विश्वविद्यालय या नर्सिंग एवं मिडवाइफरी संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर या निर्दिष्ट अवधि समाप्त होने के बाद, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार के समक्ष दूसरी अपील कर सकता है।
(7) इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पहले मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यताएं, जो भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 (48 ऑफ 1947) की अनुसूची के भाग I और भाग II में शामिल हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त नर्सिंग एवं मिडवाइफरी योग्यताएं होंगी, और नर्सिंग एवं मिडवाइफरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा बोर्ड द्वारा विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध एवं अनुरक्षित की जाएंगी।
(8) यदि किसी राज्य के भीतर कोई प्राधिकरण, जिसे राज्य सरकार द्वारा राज्य आयोग या किसी स्वायत्त निकाय (यदि कोई हो) के परामर्श से किसी योग्यता प्रदान करने के उद्देश्य से मान्यता प्राप्त हो, ऐसी योग्यता प्रदान करता है जिसे राष्ट्रीय आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, तो ऐसा प्राधिकरण राष्ट्रीय आयोग से ऐसी योग्यता को मान्यता दिलाने के लिए आवेदन कर सकता है, और राष्ट्रीय आयोग यह घोषित कर सकता है कि ऐसी योग्यता, या ऐसी योग्यता केवल तभी जब किसी निर्दिष्ट तिथि के बाद प्रदान की गई हो, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त योग्यता होगी।
(9) प्रत्येक राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य नर्सिंग और प्रसूति अभ्यास को संबोधित करने या बढ़ावा देने के उद्देश्य से नर्सिंग और प्रसूति पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय कर सकती है।
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