NNMC Act 10अध्याय II · National Nursing and Midwifery Commission.
धारा 10 · राष्ट्रीय आयोग की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राष्ट्रीय आयोग शिक्षा के समन्वित एवं एकीकृत विकास को सुनिश्चित करने तथा सेवाओं के वितरण के मानकों को बनाए रखने के लिए वे सभी कदम उठाएगा जो वह उचित समझे, और समय-समय पर विनियमों द्वारा निर्दिष्ट संशोधन करेगा।
(2) राष्ट्रीय आयोग निम्नलिखित कार्यों के निष्पादन हेतु विनियम बना सकता है, अर्थात्:--
(क) नर्सिंग और दाईगिरी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के संचालन हेतु नीतियां बनाना और मानक विनियमित करना;
(ख) नर्सिंग और दाईगिरी संस्थानों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों और सहयोगियों को विनियमित करना;
(सी) नर्सिंग और दाई के पेशे की किसी अन्य श्रेणी की पहचान और विनियमन करना;
(घ) विभिन्न श्रेणियों के संबंध में शिक्षा के बुनियादी मानक, भौतिक और शिक्षण सुविधाएं, मूल्यांकन, परीक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, सतत व्यावसायिक शिक्षा और अधिकतम देय शिक्षण शुल्क प्रदान करना;
(ई) शिक्षण संस्थानों में नर्सिंग और दाईगिरी संकाय और नैदानिक सुविधा के लिए मानक प्रदान करना;
(f) विभिन्न स्तरों पर नर्सिंग और प्रसूति संस्थानों में प्रवेश के लिए एक समान तंत्र प्रदान करना।
स्पष्टीकरण.-- इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी अखिल भारतीय स्तर पर नर्सिंग एवं प्रसूति संस्थानों में एकसमान तरीके से प्रवेश करेगा तथा राज्य सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी राज्य स्तर पर नर्सिंग एवं प्रसूति संस्थानों में एकसमान तरीके से प्रवेश करेगा;
(जी) राष्ट्रीय रजिस्टर या राज्य रजिस्टर में नामांकन के लिए और नर्सिंग एवं दाई पेशेवर के रूप में अभ्यास करने का लाइसेंस प्रदान करने के लिए नर्सिंग एवं दाई पेशेवरों की पर्याप्त योग्यता सुनिश्चित करने हेतु, अंतिम वर्ष की स्नातक परीक्षा या अन्यथा के माध्यम से, एक तंत्र प्रदान करना;
(h) नर्सिंग और दाईगिरी के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और संकर शिक्षा के उपयोग हेतु उद्योग और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग करना;
(i) नर्सिंग और दाईगिरी योग्यताओं के पाठ्यक्रम में सॉफ्ट स्किल्स और वैकल्पिक पाठ्यक्रमों को एकीकृत करना तथा वैश्विक गतिशीलता को सुगम बनाने के लिए पंजीकृत पेशेवरों के कौशल और दक्षता को बढ़ाने के उपाय करना;
(j) स्वास्थ्य सेवा में नर्सिंग और दाईगीरी की आवश्यकताओं का आकलन करना, जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य सेवा सेटिंग्स के लिए मानव संसाधन शामिल हैं, सभी नर्सिंग और दाईगीरी से संबंधित कैडरों के लिए कैरियर विकास मार्ग के लिए तंत्र प्रदान करना, जिसमें उपयुक्त पार्श्व प्रवेश शामिल है, जैसा लागू हो, और केंद्र सरकार को इससे संबंधित मामलों पर सलाह देना;
(k) नर्सिंग और दाईगिरी पेशे में पेशेवर नैतिकता के पालन को सुनिश्चित करने और नर्सिंग और दाईगिरी पेशेवरों, जिनमें नर्सिंग सहयोगी और दाईगिरी सहयोगी शामिल हैं, द्वारा देखभाल प्रदान करने के दौरान नैतिक आचरण को बढ़ावा देने के लिए नीतियों और संहिताओं को सुनिश्चित करना;
(एल) राष्ट्रीय आयोग, स्वायत्त बोर्डों, सलाहकार परिषद और राज्य आयोगों के उचित कामकाज के लिए दिशा-निर्देशों को बढ़ावा देना, समन्वय करना और तैयार करना तथा नीतियां निर्धारित करना;
(m) स्वायत्त बोर्डों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना;
(n) राज्य आयोगों के प्रभावी कामकाज के लिए इस अधिनियम के अंतर्गत तैयार किए गए दिशा-निर्देशों और विनियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु ऐसे उपाय करना, जो आवश्यक हों;
(ओ) स्वायत्त बोर्डों के निर्णयों के संबंध में अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना; और (पी) ऐसे अन्य कार्यों का निष्पादन करना जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(3) राष्ट्रीय आयोग अपने नियमों को बनाने की शक्ति को छोड़कर, ऐसे कार्यों को स्वायत्त बोर्डों को सौंप सकता है, जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) राष्ट्रीय आयोग, वर्ष में कम से कम एक बार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय आयोग, या उक्त व्यवसायों को विनियमित करने के लिए संबंधित राष्ट्रीय नियामक के साथ, उनके द्वारा पारस्परिक रूप से नियुक्त समय और स्थान पर बैठक आयोजित करेगा, ताकि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में विभिन्न कार्यबल श्रेणियों के बीच समन्वय को बढ़ाया जा सके, मुद्दों पर आम सहमति विकसित की जा सके और स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए टीम आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा सके।
(5) राष्ट्रीय आयोग के प्रत्येक आदेश एवं निर्णय पर उसके सचिव के हस्ताक्षर होंगे।
(6) राष्ट्रीय आयोग प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों से संबंधित अपनी ऐसी शक्तियों को, जैसा वह उचित समझे, अपने सचिव को प्रत्यायोजित कर सकता है।
(7) राष्ट्रीय आयोग उप-समितियों का गठन कर सकता है और ऐसी उप-समितियों को अपनी ऐसी शक्तियाँ सौंप सकता है जो उन्हें विशिष्ट कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
(2) राष्ट्रीय आयोग निम्नलिखित कार्यों के निष्पादन हेतु विनियम बना सकता है, अर्थात्:--
(क) नर्सिंग और दाईगिरी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के संचालन हेतु नीतियां बनाना और मानक विनियमित करना;
(ख) नर्सिंग और दाईगिरी संस्थानों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों और सहयोगियों को विनियमित करना;
(सी) नर्सिंग और दाई के पेशे की किसी अन्य श्रेणी की पहचान और विनियमन करना;
(घ) विभिन्न श्रेणियों के संबंध में शिक्षा के बुनियादी मानक, भौतिक और शिक्षण सुविधाएं, मूल्यांकन, परीक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, सतत व्यावसायिक शिक्षा और अधिकतम देय शिक्षण शुल्क प्रदान करना;
(ई) शिक्षण संस्थानों में नर्सिंग और दाईगिरी संकाय और नैदानिक सुविधा के लिए मानक प्रदान करना;
(f) विभिन्न स्तरों पर नर्सिंग और प्रसूति संस्थानों में प्रवेश के लिए एक समान तंत्र प्रदान करना।
स्पष्टीकरण.-- इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी अखिल भारतीय स्तर पर नर्सिंग एवं प्रसूति संस्थानों में एकसमान तरीके से प्रवेश करेगा तथा राज्य सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी राज्य स्तर पर नर्सिंग एवं प्रसूति संस्थानों में एकसमान तरीके से प्रवेश करेगा;
(जी) राष्ट्रीय रजिस्टर या राज्य रजिस्टर में नामांकन के लिए और नर्सिंग एवं दाई पेशेवर के रूप में अभ्यास करने का लाइसेंस प्रदान करने के लिए नर्सिंग एवं दाई पेशेवरों की पर्याप्त योग्यता सुनिश्चित करने हेतु, अंतिम वर्ष की स्नातक परीक्षा या अन्यथा के माध्यम से, एक तंत्र प्रदान करना;
(h) नर्सिंग और दाईगिरी के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और संकर शिक्षा के उपयोग हेतु उद्योग और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग करना;
(i) नर्सिंग और दाईगिरी योग्यताओं के पाठ्यक्रम में सॉफ्ट स्किल्स और वैकल्पिक पाठ्यक्रमों को एकीकृत करना तथा वैश्विक गतिशीलता को सुगम बनाने के लिए पंजीकृत पेशेवरों के कौशल और दक्षता को बढ़ाने के उपाय करना;
(j) स्वास्थ्य सेवा में नर्सिंग और दाईगीरी की आवश्यकताओं का आकलन करना, जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य सेवा सेटिंग्स के लिए मानव संसाधन शामिल हैं, सभी नर्सिंग और दाईगीरी से संबंधित कैडरों के लिए कैरियर विकास मार्ग के लिए तंत्र प्रदान करना, जिसमें उपयुक्त पार्श्व प्रवेश शामिल है, जैसा लागू हो, और केंद्र सरकार को इससे संबंधित मामलों पर सलाह देना;
(k) नर्सिंग और दाईगिरी पेशे में पेशेवर नैतिकता के पालन को सुनिश्चित करने और नर्सिंग और दाईगिरी पेशेवरों, जिनमें नर्सिंग सहयोगी और दाईगिरी सहयोगी शामिल हैं, द्वारा देखभाल प्रदान करने के दौरान नैतिक आचरण को बढ़ावा देने के लिए नीतियों और संहिताओं को सुनिश्चित करना;
(एल) राष्ट्रीय आयोग, स्वायत्त बोर्डों, सलाहकार परिषद और राज्य आयोगों के उचित कामकाज के लिए दिशा-निर्देशों को बढ़ावा देना, समन्वय करना और तैयार करना तथा नीतियां निर्धारित करना;
(m) स्वायत्त बोर्डों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना;
(n) राज्य आयोगों के प्रभावी कामकाज के लिए इस अधिनियम के अंतर्गत तैयार किए गए दिशा-निर्देशों और विनियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु ऐसे उपाय करना, जो आवश्यक हों;
(ओ) स्वायत्त बोर्डों के निर्णयों के संबंध में अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना; और (पी) ऐसे अन्य कार्यों का निष्पादन करना जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(3) राष्ट्रीय आयोग अपने नियमों को बनाने की शक्ति को छोड़कर, ऐसे कार्यों को स्वायत्त बोर्डों को सौंप सकता है, जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) राष्ट्रीय आयोग, वर्ष में कम से कम एक बार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय आयोग, या उक्त व्यवसायों को विनियमित करने के लिए संबंधित राष्ट्रीय नियामक के साथ, उनके द्वारा पारस्परिक रूप से नियुक्त समय और स्थान पर बैठक आयोजित करेगा, ताकि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में विभिन्न कार्यबल श्रेणियों के बीच समन्वय को बढ़ाया जा सके, मुद्दों पर आम सहमति विकसित की जा सके और स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए टीम आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा सके।
(5) राष्ट्रीय आयोग के प्रत्येक आदेश एवं निर्णय पर उसके सचिव के हस्ताक्षर होंगे।
(6) राष्ट्रीय आयोग प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों से संबंधित अपनी ऐसी शक्तियों को, जैसा वह उचित समझे, अपने सचिव को प्रत्यायोजित कर सकता है।
(7) राष्ट्रीय आयोग उप-समितियों का गठन कर सकता है और ऐसी उप-समितियों को अपनी ऐसी शक्तियाँ सौंप सकता है जो उन्हें विशिष्ट कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
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