NNMC Act 23अध्याय IV · State Nursing and Midwifery Commissions
धारा 23 · राज्य नर्सिंग एवं दाईखाना आयोग का गठन एवं संरचना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर, अधिसूचना द्वारा, राज्य नर्सिंग एवं प्रसूति आयोग का गठन करेगी, जहाँ किसी राज्य विधि द्वारा उस राज्य में ऐसा कोई राज्य आयोग विद्यमान नहीं है, ताकि इस अधिनियम के अधीन निर्धारित शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन किया जा सके।
(2) राज्य नर्सिंग एवं प्रसूति आयोग उपर्युक्त नाम से निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी, और उसे चल एवं अचल दोनों प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और उसका निपटान करने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा वह उसी नाम से मुकदमा कर सकता है या उस पर मुकदमा किया जा सकता है।
(3) राज्य आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्:---
(क) असाधारण योग्यता, सिद्ध प्रशासनिक क्षमता और सत्यनिष्ठा वाला व्यक्ति, जिसके पास किसी भी विश्वविद्यालय से नर्सिंग और मिडवाइफरी में स्नातकोत्तर डिग्री हो और नर्सिंग एवं मिडवाइफरी के क्षेत्र में कम से कम बीस वर्ष का अनुभव हो, जिसमें से कम से कम दस वर्ष नर्सिंग एवं मिडवाइफरी लीडर के रूप में हो, जिसे राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा---अध्यक्ष;
(ख) राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग का प्रतिनिधित्व करने वाला एक निदेशक या अतिरिक्त निदेशक या संयुक्त निदेशक--- पदेन सदस्य:
बशर्ते कि यदि किसी राज्य में ऐसा कोई पद विद्यमान न हो, तो नर्सिंग शिक्षा एवं सेवाओं के प्रभारी को ऐसे सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा सकता है;
(ग) राज्य सरकार के किसी नर्सिंग या प्रसूति महाविद्यालय या संस्थान से डीन या विभागाध्यक्ष के पद से नीचे के दो व्यक्ति--- पदेन सदस्य;
(घ) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनमें से एक नर्सिंग पेशे से और एक प्रसूति पेशे से हो, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव हो---सदस्य;
(ई) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनमें से एक नर्सिंग से और एक प्रसूति सहायक से होगा, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव होगा---सदस्य;
(f) दो व्यक्ति, एक नर्सिंग से और एक प्रसूति विज्ञान से, जो नर्सिंग और प्रसूति विज्ञान से संबंधित शिक्षा या सेवाओं में लगे धर्मार्थ संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हों, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव हो, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा---सदस्य।
(4) उपधारा (3) के खंड (क), (घ), (ङ) और (च) में निर्दिष्ट राज्य आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, अपने पद ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम चार वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे, जैसा कि राज्य सरकार इस संबंध में अधिसूचित कर सकती है, और वे किसी भी विस्तार या पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे।
(2) राज्य नर्सिंग एवं प्रसूति आयोग उपर्युक्त नाम से निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी, और उसे चल एवं अचल दोनों प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और उसका निपटान करने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा वह उसी नाम से मुकदमा कर सकता है या उस पर मुकदमा किया जा सकता है।
(3) राज्य आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्:---
(क) असाधारण योग्यता, सिद्ध प्रशासनिक क्षमता और सत्यनिष्ठा वाला व्यक्ति, जिसके पास किसी भी विश्वविद्यालय से नर्सिंग और मिडवाइफरी में स्नातकोत्तर डिग्री हो और नर्सिंग एवं मिडवाइफरी के क्षेत्र में कम से कम बीस वर्ष का अनुभव हो, जिसमें से कम से कम दस वर्ष नर्सिंग एवं मिडवाइफरी लीडर के रूप में हो, जिसे राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा---अध्यक्ष;
(ख) राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग का प्रतिनिधित्व करने वाला एक निदेशक या अतिरिक्त निदेशक या संयुक्त निदेशक--- पदेन सदस्य:
बशर्ते कि यदि किसी राज्य में ऐसा कोई पद विद्यमान न हो, तो नर्सिंग शिक्षा एवं सेवाओं के प्रभारी को ऐसे सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा सकता है;
(ग) राज्य सरकार के किसी नर्सिंग या प्रसूति महाविद्यालय या संस्थान से डीन या विभागाध्यक्ष के पद से नीचे के दो व्यक्ति--- पदेन सदस्य;
(घ) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनमें से एक नर्सिंग पेशे से और एक प्रसूति पेशे से हो, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव हो---सदस्य;
(ई) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनमें से एक नर्सिंग से और एक प्रसूति सहायक से होगा, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव होगा---सदस्य;
(f) दो व्यक्ति, एक नर्सिंग से और एक प्रसूति विज्ञान से, जो नर्सिंग और प्रसूति विज्ञान से संबंधित शिक्षा या सेवाओं में लगे धर्मार्थ संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हों, जिनके पास राज्य सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव हो, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा---सदस्य।
(4) उपधारा (3) के खंड (क), (घ), (ङ) और (च) में निर्दिष्ट राज्य आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, अपने पद ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम चार वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे, जैसा कि राज्य सरकार इस संबंध में अधिसूचित कर सकती है, और वे किसी भी विस्तार या पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
