IR Code 99अध्याय XIV · Miscellaneous
धारा 99 · उपयुक्त सरकार को नियम बनाने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
( 1) उपयुक्त सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, इस संहिता के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नियम बना सकती है:
बशर्ते कि यदि उपयुक्त सरकार संतुष्ट हो कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जो जनहित में ऐसा करना आवश्यक या उचित बनाती हैं, तो वह पूर्व प्रकाशन की शर्त को समाप्त कर सकती है या ऐसे पूर्व प्रकाशन पर आपत्तियाँ या सुझाव आमंत्रित करने के लिए आवश्यक समय अवधि को उस सीमा तक कम कर सकती है, जितना वह उचित समझे।
( 2) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विशेष रूप से, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:---
( क) नियोक्ता और श्रमिक के बीच धारा 2 के खंड ( 11) के तहत समझौता करने के लिए सुलह कार्यवाही के दौरान किए गए समझौते के अलावा किसी अन्य तरीके से किया गया लिखित समझौता;
( ख) धारा 3 के अंतर्गत प्रतिष्ठान में कार्यरत नियोक्ता और श्रमिकों के प्रतिनिधियों का कार्य समिति का गठन और चुनाव;
( ग) धारा 4 की उपधारा ( 2) के अधीन शिकायत निवारण समिति के लिए नियोक्ता और श्रमिकों में से सदस्यों का चयन करने का तरीका;
( घ) धारा 4 की उपधारा ( 5) के अंतर्गत किसी पीड़ित श्रमिक द्वारा शिकायत निवारण समिति के समक्ष किसी विवाद के संबंध में दायर किया जाने वाला आवेदन;
( ई) धारा 4 की उपधारा ( 8) के तहत सुलह अधिकारी को शिकायत निवारण समिति के निर्णय के विरुद्ध शिकायत के सुलह हेतु आवेदन दाखिल करने का तरीका;
( f) ट्रेड यूनियन के सदस्यों द्वारा सदस्यता शुल्क का भुगतान और धारा 7 के खंड ( f) के तहत ऐसे सदस्यों और अन्य लोगों से दान;
( जी) धारा 7 के खंड ( जे) के अधीन वार्षिक लेखापरीक्षा का तरीका;
( h) धारा 8 की उपधारा ( 1) के खंड ( क) के अधीन शपथपत्र द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारूप और उसे करने का तरीका;
( i) धारा 8 की उपधारा ( 2) के तहत तैयार किए गए ऐसे प्रपत्र में और ऐसे विवरणों सहित ट्रेड यूनियन की परिसंपत्तियों और देनदारियों का सामान्य विवरण;
( j) उपधारा ( 1) के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन का प्रपत्र, तथा धारा 9 की उपधारा ( 2) के तहत रजिस्ट्रार द्वारा आवेदक ट्रेड यूनियन को जारी किए जाने वाले पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने का प्रपत्र;
( k) धारा 9 की उपधारा ( 3) के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा इस संबंध में रखे गए रजिस्टर में ट्रेड यूनियन का नाम और अन्य विवरण दर्ज करने का प्रपत्र;
( एल) धारा 9 की उपधारा ( 5) के अधीन ट्रेड यूनियन के आवेदन का सत्यापन;
( m) वह अवधि जिसके भीतर ट्रेड यूनियन द्वारा धारा 10 की उपधारा ( 1) के तहत न्यायाधिकरण में अपील की जानी है;
( n) उपधारा ( 1) के तहत संचार और नोटिस भेजना तथा धारा 11 की उपधारा ( 3) के तहत रजिस्ट्रार को सूचित करने का तरीका;
( ओ) वे मामले जिन पर औद्योगिक प्रतिष्ठान में वार्ता संघ या वार्ता परिषद, जैसा भी मामला हो, उपधारा ( 1) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान के नियोक्ता के साथ बातचीत कर सकता है और धारा 14 की उपधारा ( 2) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा पालन किए जाने वाले मानदंड;
( p) औद्योगिक प्रतिष्ठान की हाज़िरी सूची में श्रमिकों के सत्यापन का तरीका, उपधारा ( 3) और ( 4) के तहत तथा धारा 14 की उपधारा ( 7) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा वार्ता संघ या वार्ता परिषद को प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ;
( q) धारा 15 की उपधारा ( 1) और उपधारा ( 2) के अधीन वस्तुएँ तथा उपधारा ( 4) के अधीन देय सदस्यता शुल्क;
( आर) धारा 22 की उपधारा ( 1) के अधीन न्यायाधिकरण के समक्ष निर्णय हेतु आवेदन करने का तरीका;
( एस) उपधारा ( 2) के अधीन समामेलन का तरीका तथा धारा 24 की उपधारा ( 3) के अधीन किसी अन्य राज्य के रजिस्ट्रार को हस्ताक्षरित समामेलन भेजने का तरीका;
( टी) धारा 25 की उपधारा ( 2) के तहत रजिस्ट्रार द्वारा विघटन पर ट्रेड यूनियन के निधियों का वितरण;
( u) वह तिथि जिसके पूर्व रजिस्ट्रार को प्रतिवर्ष सामान्य विवरण भेजा जाएगा, सामान्य विवरण में निहित विवरण और उसका प्रारूप, वह व्यक्ति जिसके द्वारा और जिस विधि से धारा 26 की उपधारा ( 1) के खंड ( क) के अंतर्गत ऐसे सामान्य विवरण का लेखापरीक्षा की जाएगी;
( v) राज्य सरकार द्वारा राज्य स्तर पर किसी ट्रेड यूनियन या ट्रेड यूनियनों के संघ को राज्य ट्रेड यूनियन के रूप में मान्यता देने का तरीका और उद्देश्य तथा धारा 27 की उपधारा ( 2) के अधीन विवाद का निर्णय करने का अधिकार और तरीका;
( w) धारा 30 की उपधारा ( 3) के तहत प्रमाणन अधिकारी को सूचना अग्रेषित करने का तरीका और वह अवधि जिसके भीतर प्रमाणन अधिकारी द्वारा उसके परंतुक के तहत स्थायी आदेश में संशोधन किया जाना है;
( x) औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम के श्रमिकों के प्रतिनिधियों को प्रमाणन अधिकारी द्वारा नोटिस जारी करने के लिए चुनने का तरीका, जहां कोई ट्रेड यूनियन कार्यरत नहीं है, उपधारा ( 5) के तहत तथा धारा 30 की उपधारा ( 8) के तहत प्रमाणित स्थायी आदेशों के प्रमाणीकरण का तरीका;
( y) धारा 30 की उपधारा ( 9) के तहत स्थायी आदेशों के मसौदे के साथ संलग्न किया जाने वाला विवरण;
( ज़) धारा 30 की उपधारा ( 10) के अंतर्गत समान प्रतिष्ठान में नियोक्ताओं के समूह द्वारा स्थायी आदेशों का मसौदा प्रस्तुत करने की शर्तें;
( za) धारा 32 के अधीन अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील के निपटान का तरीका;
( ज़ेडबी) उपधारा ( 1) के तहत अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की प्रतियां भेजने का तरीका और धारा 33 की उपधारा ( 2) के तहत स्थायी आदेश बनाए रखने की भाषा और तरीका;
( जेडसी) प्रमाणन अधिकारी द्वारा अंतिम रूप से प्रमाणित स्थायी आदेशों को दाखिल करने के लिए रजिस्टर का प्रपत्र और धारा 34 के तहत ऐसे आदेशों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के लिए शुल्क;
( ज़ेडडी) स्थायी आदेशों में संशोधन के लिए आवेदन धारा 35 की उपधारा ( 2) के तहत प्रमाणन अधिकारी के समक्ष किया जाएगा;
( ze) धारा 40 के खंड ( i) के अधीन किए जाने वाले परिवर्तन की प्रकृति की सूचना देने का तरीका;
( जेडएफ) मध्यस्थता समझौते का प्रारूप और धारा 42 की उपधारा ( 3) के तहत पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का तरीका;
( जी) धारा 42 की उपधारा ( 5) के तहत औद्योगिक विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने की स्थिति में अधिसूचना जारी करने का तरीका;
( zh) धारा 42 की उपधारा ( 5) के परंतुक के अधीन, जहाँ कोई ट्रेड यूनियन नहीं है, वहाँ श्रमिकों के प्रतिनिधियों को चुनने का तरीका;
( zi) धारा 44 की उपधारा ( 9) के अधीन रिक्ति को भरने का तरीका;
( ज़ेडजे) धारा 46 की उपधारा ( 6) के अधीन राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक एवं प्रशासनिक सदस्यों के चयन, वेतन एवं भत्ते तथा अन्य नियम एवं शर्तें;
( ज़क) ऐसे अन्य मामले जिनके संबंध में सुलह अधिकारी, न्यायाधिकरण और राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो धारा 49 की उपधारा ( 3) के तहत सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत सिविल न्यायालय को प्राप्त हैं;
( जेडएल) धारा 53 की उपधारा ( 1) के तहत सुलह कार्यवाही आयोजित करने का तरीका, उपधारा ( 4) के तहत पूर्ण रिपोर्ट का प्रारूप, और धारा 53 की उपधारा ( 6) के तहत आवेदन का प्रारूप और ऐसे आवेदन पर निर्णय लेने का तरीका;
( ज़ेडएम) उन व्यक्तियों की संख्या जिनके द्वारा हड़ताल की सूचना दी जाएगी, वह व्यक्ति या वे व्यक्ति जिन्हें ऐसी सूचना दी जाएगी, और धारा 62 की उपधारा ( 4) के तहत ऐसी सूचना देने का तरीका;
( जेडएन) धारा 62 की उपधारा ( 5) के तहत तालाबंदी की सूचना देने का तरीका और उपधारा ( 6) के तहत प्राधिकार;
( 10) किसी उद्योग में कार्यरत किसी श्रमिक की छंटनी से पहले नियोक्ता द्वारा उचित सरकार या ऐसे प्राधिकरण को नोटिस देने का तरीका, जिसे उचित सरकार धारा 70 के खंड ( सी) के तहत अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;
( जेडपी) नियोक्ता द्वारा छंटनी किए गए उन श्रमिकों को, जो भारत के नागरिक हैं, धारा 72 के तहत पुन: रोजगार के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करने का तरीका;
( ज़ेडक्यू) वह तरीका जिससे नियोक्ता धारा 74 की उपधारा ( 1) के तहत उपक्रम को बंद करने के इच्छित कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए उपयुक्त सरकार को नोटिस देगा;
( ज़ेडआर) नियोक्ता द्वारा प्रस्तावित छंटनी के कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 78 की उपधारा ( 2) के तहत श्रमिकों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( जेडएस) धारा 78 की उपधारा ( 3) के तहत नियोक्ता द्वारा छंटनी जारी रखने की अनुमति के लिए उपयुक्त सरकार को आवेदन करने का तरीका;
( zt) धारा 78 की उपधारा ( 7) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( ज़ु) नियोक्ता द्वारा प्रस्तावित छंटनी के कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 79 की उपधारा ( 2) के तहत श्रमिकों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( zv) धारा 79 की उपधारा ( 6 ) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( ज़्व) नियोक्ता द्वारा औद्योगिक प्रतिष्ठान के किसी उपक्रम को बंद करने के प्रस्तावित कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 80 की उपधारा ( 1) के तहत श्रमिकों के प्रतिनिधियों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( zx) धारा 80 की उपधारा ( 5) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( zy) धारा 83 की उपधारा ( 2) के खंड ( ख) के अधीन श्रमिक पुनर्कौशल निधि में ऐसे अन्य स्रोतों से किया जाने वाला अंशदान;
( ज़ेडजेड) धारा 83 की उपधारा ( 3) के अधीन निधि के उपयोग का तरीका;
( ज़्ज़ा) धारा 89 की उपधारा ( 1) के तहत निर्दिष्ट राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपराध के निपटान का तरीका;
( ज़ेडबी) धारा 89 की उपधारा ( 4) के तहत निर्दिष्ट अपराध के समझौते के लिए आवेदन करने का तरीका;
( जेडजेडसी) धारा 91 के तहत पीड़ित कर्मचारी द्वारा शिकायत करने का तरीका;
( ज़ेडडी) धारा 94 की उपधारा ( 1) के तहत किसी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने के लिए कार्यकर्ता को अधिकृत करने का तरीका;
( ज़्ज़े) धारा 94 की उपधारा ( 2) के तहत किसी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने के लिए नियोक्ता को अधिकृत करने का तरीका;
( ज़ेडएफ) कोई अन्य मामला जिसे इस संहिता के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया जाना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
( 3) केंद्र सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बनाएगी---
( क) केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय स्तर पर किसी ट्रेड यूनियन या ट्रेड यूनियनों के संघ को केंद्रीय ट्रेड यूनियन के रूप में मान्यता देने का तरीका और धारा 27 की उपधारा ( 1) के तहत विवाद का निर्णय करने का अधिकार और तरीका; और
( ख) धारा 85 की उपधारा ( 1) के तहत जांच आयोजित करने का तरीका।
( 4) राज्य सरकार द्वारा इस धारा के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाएंगे।
( 5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और धारा 2 के खंड ( पी) के अधीन केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखी जाएगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम या अधिसूचना में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम या अधिसूचना नहीं बनाई जानी चाहिए, तो नियम या अधिसूचना इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगी या अप्रभावी होगी, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम या अधिसूचना के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
बशर्ते कि यदि उपयुक्त सरकार संतुष्ट हो कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जो जनहित में ऐसा करना आवश्यक या उचित बनाती हैं, तो वह पूर्व प्रकाशन की शर्त को समाप्त कर सकती है या ऐसे पूर्व प्रकाशन पर आपत्तियाँ या सुझाव आमंत्रित करने के लिए आवश्यक समय अवधि को उस सीमा तक कम कर सकती है, जितना वह उचित समझे।
( 2) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विशेष रूप से, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:---
( क) नियोक्ता और श्रमिक के बीच धारा 2 के खंड ( 11) के तहत समझौता करने के लिए सुलह कार्यवाही के दौरान किए गए समझौते के अलावा किसी अन्य तरीके से किया गया लिखित समझौता;
( ख) धारा 3 के अंतर्गत प्रतिष्ठान में कार्यरत नियोक्ता और श्रमिकों के प्रतिनिधियों का कार्य समिति का गठन और चुनाव;
( ग) धारा 4 की उपधारा ( 2) के अधीन शिकायत निवारण समिति के लिए नियोक्ता और श्रमिकों में से सदस्यों का चयन करने का तरीका;
( घ) धारा 4 की उपधारा ( 5) के अंतर्गत किसी पीड़ित श्रमिक द्वारा शिकायत निवारण समिति के समक्ष किसी विवाद के संबंध में दायर किया जाने वाला आवेदन;
( ई) धारा 4 की उपधारा ( 8) के तहत सुलह अधिकारी को शिकायत निवारण समिति के निर्णय के विरुद्ध शिकायत के सुलह हेतु आवेदन दाखिल करने का तरीका;
( f) ट्रेड यूनियन के सदस्यों द्वारा सदस्यता शुल्क का भुगतान और धारा 7 के खंड ( f) के तहत ऐसे सदस्यों और अन्य लोगों से दान;
( जी) धारा 7 के खंड ( जे) के अधीन वार्षिक लेखापरीक्षा का तरीका;
( h) धारा 8 की उपधारा ( 1) के खंड ( क) के अधीन शपथपत्र द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारूप और उसे करने का तरीका;
( i) धारा 8 की उपधारा ( 2) के तहत तैयार किए गए ऐसे प्रपत्र में और ऐसे विवरणों सहित ट्रेड यूनियन की परिसंपत्तियों और देनदारियों का सामान्य विवरण;
( j) उपधारा ( 1) के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन का प्रपत्र, तथा धारा 9 की उपधारा ( 2) के तहत रजिस्ट्रार द्वारा आवेदक ट्रेड यूनियन को जारी किए जाने वाले पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने का प्रपत्र;
( k) धारा 9 की उपधारा ( 3) के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा इस संबंध में रखे गए रजिस्टर में ट्रेड यूनियन का नाम और अन्य विवरण दर्ज करने का प्रपत्र;
( एल) धारा 9 की उपधारा ( 5) के अधीन ट्रेड यूनियन के आवेदन का सत्यापन;
( m) वह अवधि जिसके भीतर ट्रेड यूनियन द्वारा धारा 10 की उपधारा ( 1) के तहत न्यायाधिकरण में अपील की जानी है;
( n) उपधारा ( 1) के तहत संचार और नोटिस भेजना तथा धारा 11 की उपधारा ( 3) के तहत रजिस्ट्रार को सूचित करने का तरीका;
( ओ) वे मामले जिन पर औद्योगिक प्रतिष्ठान में वार्ता संघ या वार्ता परिषद, जैसा भी मामला हो, उपधारा ( 1) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान के नियोक्ता के साथ बातचीत कर सकता है और धारा 14 की उपधारा ( 2) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा पालन किए जाने वाले मानदंड;
( p) औद्योगिक प्रतिष्ठान की हाज़िरी सूची में श्रमिकों के सत्यापन का तरीका, उपधारा ( 3) और ( 4) के तहत तथा धारा 14 की उपधारा ( 7) के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा वार्ता संघ या वार्ता परिषद को प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ;
( q) धारा 15 की उपधारा ( 1) और उपधारा ( 2) के अधीन वस्तुएँ तथा उपधारा ( 4) के अधीन देय सदस्यता शुल्क;
( आर) धारा 22 की उपधारा ( 1) के अधीन न्यायाधिकरण के समक्ष निर्णय हेतु आवेदन करने का तरीका;
( एस) उपधारा ( 2) के अधीन समामेलन का तरीका तथा धारा 24 की उपधारा ( 3) के अधीन किसी अन्य राज्य के रजिस्ट्रार को हस्ताक्षरित समामेलन भेजने का तरीका;
( टी) धारा 25 की उपधारा ( 2) के तहत रजिस्ट्रार द्वारा विघटन पर ट्रेड यूनियन के निधियों का वितरण;
( u) वह तिथि जिसके पूर्व रजिस्ट्रार को प्रतिवर्ष सामान्य विवरण भेजा जाएगा, सामान्य विवरण में निहित विवरण और उसका प्रारूप, वह व्यक्ति जिसके द्वारा और जिस विधि से धारा 26 की उपधारा ( 1) के खंड ( क) के अंतर्गत ऐसे सामान्य विवरण का लेखापरीक्षा की जाएगी;
( v) राज्य सरकार द्वारा राज्य स्तर पर किसी ट्रेड यूनियन या ट्रेड यूनियनों के संघ को राज्य ट्रेड यूनियन के रूप में मान्यता देने का तरीका और उद्देश्य तथा धारा 27 की उपधारा ( 2) के अधीन विवाद का निर्णय करने का अधिकार और तरीका;
( w) धारा 30 की उपधारा ( 3) के तहत प्रमाणन अधिकारी को सूचना अग्रेषित करने का तरीका और वह अवधि जिसके भीतर प्रमाणन अधिकारी द्वारा उसके परंतुक के तहत स्थायी आदेश में संशोधन किया जाना है;
( x) औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम के श्रमिकों के प्रतिनिधियों को प्रमाणन अधिकारी द्वारा नोटिस जारी करने के लिए चुनने का तरीका, जहां कोई ट्रेड यूनियन कार्यरत नहीं है, उपधारा ( 5) के तहत तथा धारा 30 की उपधारा ( 8) के तहत प्रमाणित स्थायी आदेशों के प्रमाणीकरण का तरीका;
( y) धारा 30 की उपधारा ( 9) के तहत स्थायी आदेशों के मसौदे के साथ संलग्न किया जाने वाला विवरण;
( ज़) धारा 30 की उपधारा ( 10) के अंतर्गत समान प्रतिष्ठान में नियोक्ताओं के समूह द्वारा स्थायी आदेशों का मसौदा प्रस्तुत करने की शर्तें;
( za) धारा 32 के अधीन अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील के निपटान का तरीका;
( ज़ेडबी) उपधारा ( 1) के तहत अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की प्रतियां भेजने का तरीका और धारा 33 की उपधारा ( 2) के तहत स्थायी आदेश बनाए रखने की भाषा और तरीका;
( जेडसी) प्रमाणन अधिकारी द्वारा अंतिम रूप से प्रमाणित स्थायी आदेशों को दाखिल करने के लिए रजिस्टर का प्रपत्र और धारा 34 के तहत ऐसे आदेशों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के लिए शुल्क;
( ज़ेडडी) स्थायी आदेशों में संशोधन के लिए आवेदन धारा 35 की उपधारा ( 2) के तहत प्रमाणन अधिकारी के समक्ष किया जाएगा;
( ze) धारा 40 के खंड ( i) के अधीन किए जाने वाले परिवर्तन की प्रकृति की सूचना देने का तरीका;
( जेडएफ) मध्यस्थता समझौते का प्रारूप और धारा 42 की उपधारा ( 3) के तहत पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का तरीका;
( जी) धारा 42 की उपधारा ( 5) के तहत औद्योगिक विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने की स्थिति में अधिसूचना जारी करने का तरीका;
( zh) धारा 42 की उपधारा ( 5) के परंतुक के अधीन, जहाँ कोई ट्रेड यूनियन नहीं है, वहाँ श्रमिकों के प्रतिनिधियों को चुनने का तरीका;
( zi) धारा 44 की उपधारा ( 9) के अधीन रिक्ति को भरने का तरीका;
( ज़ेडजे) धारा 46 की उपधारा ( 6) के अधीन राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक एवं प्रशासनिक सदस्यों के चयन, वेतन एवं भत्ते तथा अन्य नियम एवं शर्तें;
( ज़क) ऐसे अन्य मामले जिनके संबंध में सुलह अधिकारी, न्यायाधिकरण और राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो धारा 49 की उपधारा ( 3) के तहत सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत सिविल न्यायालय को प्राप्त हैं;
( जेडएल) धारा 53 की उपधारा ( 1) के तहत सुलह कार्यवाही आयोजित करने का तरीका, उपधारा ( 4) के तहत पूर्ण रिपोर्ट का प्रारूप, और धारा 53 की उपधारा ( 6) के तहत आवेदन का प्रारूप और ऐसे आवेदन पर निर्णय लेने का तरीका;
( ज़ेडएम) उन व्यक्तियों की संख्या जिनके द्वारा हड़ताल की सूचना दी जाएगी, वह व्यक्ति या वे व्यक्ति जिन्हें ऐसी सूचना दी जाएगी, और धारा 62 की उपधारा ( 4) के तहत ऐसी सूचना देने का तरीका;
( जेडएन) धारा 62 की उपधारा ( 5) के तहत तालाबंदी की सूचना देने का तरीका और उपधारा ( 6) के तहत प्राधिकार;
( 10) किसी उद्योग में कार्यरत किसी श्रमिक की छंटनी से पहले नियोक्ता द्वारा उचित सरकार या ऐसे प्राधिकरण को नोटिस देने का तरीका, जिसे उचित सरकार धारा 70 के खंड ( सी) के तहत अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;
( जेडपी) नियोक्ता द्वारा छंटनी किए गए उन श्रमिकों को, जो भारत के नागरिक हैं, धारा 72 के तहत पुन: रोजगार के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करने का तरीका;
( ज़ेडक्यू) वह तरीका जिससे नियोक्ता धारा 74 की उपधारा ( 1) के तहत उपक्रम को बंद करने के इच्छित कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए उपयुक्त सरकार को नोटिस देगा;
( ज़ेडआर) नियोक्ता द्वारा प्रस्तावित छंटनी के कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 78 की उपधारा ( 2) के तहत श्रमिकों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( जेडएस) धारा 78 की उपधारा ( 3) के तहत नियोक्ता द्वारा छंटनी जारी रखने की अनुमति के लिए उपयुक्त सरकार को आवेदन करने का तरीका;
( zt) धारा 78 की उपधारा ( 7) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( ज़ु) नियोक्ता द्वारा प्रस्तावित छंटनी के कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 79 की उपधारा ( 2) के तहत श्रमिकों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( zv) धारा 79 की उपधारा ( 6 ) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( ज़्व) नियोक्ता द्वारा औद्योगिक प्रतिष्ठान के किसी उपक्रम को बंद करने के प्रस्तावित कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए आवेदन करने का तरीका और धारा 80 की उपधारा ( 1) के तहत श्रमिकों के प्रतिनिधियों को ऐसे आवेदन की प्रति देने का तरीका;
( zx) धारा 80 की उपधारा ( 5) के तहत समीक्षा के लिए समय सीमा;
( zy) धारा 83 की उपधारा ( 2) के खंड ( ख) के अधीन श्रमिक पुनर्कौशल निधि में ऐसे अन्य स्रोतों से किया जाने वाला अंशदान;
( ज़ेडजेड) धारा 83 की उपधारा ( 3) के अधीन निधि के उपयोग का तरीका;
( ज़्ज़ा) धारा 89 की उपधारा ( 1) के तहत निर्दिष्ट राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपराध के निपटान का तरीका;
( ज़ेडबी) धारा 89 की उपधारा ( 4) के तहत निर्दिष्ट अपराध के समझौते के लिए आवेदन करने का तरीका;
( जेडजेडसी) धारा 91 के तहत पीड़ित कर्मचारी द्वारा शिकायत करने का तरीका;
( ज़ेडडी) धारा 94 की उपधारा ( 1) के तहत किसी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने के लिए कार्यकर्ता को अधिकृत करने का तरीका;
( ज़्ज़े) धारा 94 की उपधारा ( 2) के तहत किसी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने के लिए नियोक्ता को अधिकृत करने का तरीका;
( ज़ेडएफ) कोई अन्य मामला जिसे इस संहिता के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया जाना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
( 3) केंद्र सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बनाएगी---
( क) केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय स्तर पर किसी ट्रेड यूनियन या ट्रेड यूनियनों के संघ को केंद्रीय ट्रेड यूनियन के रूप में मान्यता देने का तरीका और धारा 27 की उपधारा ( 1) के तहत विवाद का निर्णय करने का अधिकार और तरीका; और
( ख) धारा 85 की उपधारा ( 1) के तहत जांच आयोजित करने का तरीका।
( 4) राज्य सरकार द्वारा इस धारा के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाएंगे।
( 5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और धारा 2 के खंड ( पी) के अधीन केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखी जाएगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम या अधिसूचना में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम या अधिसूचना नहीं बनाई जानी चाहिए, तो नियम या अधिसूचना इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगी या अप्रभावी होगी, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम या अधिसूचना के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
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