IR Code 59अध्याय VII · Mechanism for Resolution of Industrial Disputes
धारा 59 · नियोक्ता से बकाया राशि की वसूली।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी नियोक्ता से किसी बंदोबस्ती या पुरस्कार के तहत या अध्याय IX या अध्याय X के प्रावधानों के तहत किसी श्रमिक को कोई धन देय हो, तो श्रमिक स्वयं या इस संबंध में उसके द्वारा लिखित रूप में अधिकृत कोई अन्य व्यक्ति, या श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में, उसका उत्तराधिकारी या वारिस, वसूली के किसी अन्य तरीके पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, देय धन की वसूली के लिए उपयुक्त सरकार को आवेदन कर सकता है, और यदि उपयुक्त सरकार संतुष्ट है कि कोई धन देय है, तो वह कलेक्टर को उस राशि के लिए एक प्रमाण पत्र जारी करेगी, जो भू-राजस्व के बकाया की वसूली के समान ही उस राशि की वसूली करेगा।
बशर्ते कि ऐसा प्रत्येक आवेदन उस तारीख से एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए जिस तारीख को नियोक्ता से श्रमिक को धन देय हुआ था:
इसके अलावा, यदि उपयुक्त सरकार इस बात से संतुष्ट है कि आवेदक के पास उक्त अवधि के भीतर आवेदन न करने का पर्याप्त कारण था, तो उक्त एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद भी ऐसे किसी आवेदन पर विचार किया जा सकता है।
(2) जहाँ कोई श्रमिक नियोक्ता से कोई धन या कोई लाभ प्राप्त करने का हकदार है, जिसकी गणना धन के रूप में की जा सकती है, और यदि देय धन की राशि या उस राशि के संबंध में कोई प्रश्न उठता है जिस पर ऐसे लाभ की गणना की जानी चाहिए, तो इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए किसी भी नियम के अधीन रहते हुए, उपयुक्त सरकार द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट न्यायाधिकरण द्वारा तीन माह से अधिक की अवधि के भीतर प्रश्न का निर्णय किया जा सकता है:
बशर्ते कि यदि न्यायाधिकरण ऐसा करना आवश्यक या उचित समझे, तो वह लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, ऐसी अवधि को उतनी अतिरिक्त अवधि तक बढ़ा सकता है जितनी वह उचित समझे।
(3) उपधारा ( 2 ) में निर्दिष्ट लाभ के मौद्रिक मूल्य की गणना के प्रयोजनों के लिए, यदि न्यायाधिकरण उचित समझे तो, एक आयुक्त नियुक्त कर सकता है, जो आवश्यक साक्ष्य लेने के बाद न्यायाधिकरण को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और न्यायाधिकरण आयुक्त की रिपोर्ट और मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद राशि निर्धारित करेगा।
(4) न्यायाधिकरण का निर्णय उसके द्वारा उपयुक्त सरकार को भेजा जाएगा और न्यायाधिकरण द्वारा देय पाई गई कोई भी राशि उपधारा ( 1 ) में दिए गए तरीके से वसूल की जा सकती है।
(5) जहाँ एक ही नियोक्ता के अधीन कार्यरत श्रमिक उससे कोई धन या कोई लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं, जिसकी गणना धन के रूप में की जा सकती है, तो इस संबंध में बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, देय राशि की वसूली के लिए एक ही आवेदन ऐसे किसी भी श्रमिक की ओर से या उसके संबंध में किया जा सकता है।
बशर्ते कि ऐसा प्रत्येक आवेदन उस तारीख से एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए जिस तारीख को नियोक्ता से श्रमिक को धन देय हुआ था:
इसके अलावा, यदि उपयुक्त सरकार इस बात से संतुष्ट है कि आवेदक के पास उक्त अवधि के भीतर आवेदन न करने का पर्याप्त कारण था, तो उक्त एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद भी ऐसे किसी आवेदन पर विचार किया जा सकता है।
(2) जहाँ कोई श्रमिक नियोक्ता से कोई धन या कोई लाभ प्राप्त करने का हकदार है, जिसकी गणना धन के रूप में की जा सकती है, और यदि देय धन की राशि या उस राशि के संबंध में कोई प्रश्न उठता है जिस पर ऐसे लाभ की गणना की जानी चाहिए, तो इस संहिता के अंतर्गत बनाए गए किसी भी नियम के अधीन रहते हुए, उपयुक्त सरकार द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट न्यायाधिकरण द्वारा तीन माह से अधिक की अवधि के भीतर प्रश्न का निर्णय किया जा सकता है:
बशर्ते कि यदि न्यायाधिकरण ऐसा करना आवश्यक या उचित समझे, तो वह लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, ऐसी अवधि को उतनी अतिरिक्त अवधि तक बढ़ा सकता है जितनी वह उचित समझे।
(3) उपधारा ( 2 ) में निर्दिष्ट लाभ के मौद्रिक मूल्य की गणना के प्रयोजनों के लिए, यदि न्यायाधिकरण उचित समझे तो, एक आयुक्त नियुक्त कर सकता है, जो आवश्यक साक्ष्य लेने के बाद न्यायाधिकरण को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और न्यायाधिकरण आयुक्त की रिपोर्ट और मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद राशि निर्धारित करेगा।
(4) न्यायाधिकरण का निर्णय उसके द्वारा उपयुक्त सरकार को भेजा जाएगा और न्यायाधिकरण द्वारा देय पाई गई कोई भी राशि उपधारा ( 1 ) में दिए गए तरीके से वसूल की जा सकती है।
(5) जहाँ एक ही नियोक्ता के अधीन कार्यरत श्रमिक उससे कोई धन या कोई लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं, जिसकी गणना धन के रूप में की जा सकती है, तो इस संबंध में बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, देय राशि की वसूली के लिए एक ही आवेदन ऐसे किसी भी श्रमिक की ओर से या उसके संबंध में किया जा सकता है।
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