IR Code 30अध्याय IV · Standing Orders
धारा 30 · नियोक्ता द्वारा स्थायी आदेशों का मसौदा तैयार करना और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) नियोक्ता इस संहिता के प्रारंभ होने की तिथि से छह माह की अवधि के भीतर, धारा 29 में निर्दिष्ट आदर्श स्थायी आदेशों के आधार पर, प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट मामलों और अपने औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम में गतिविधि की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, ऐसे स्थायी आदेशों में आवश्यक प्रावधानों को शामिल करने के लिए उसके द्वारा आवश्यक समझे जाने वाले किसी अन्य मामले के संबंध में मसौदा स्थायी आदेश तैयार करेगा, बशर्ते कि ऐसा प्रावधान इस संहिता के किसी भी प्रावधान के साथ असंगत न हो और प्रथम अनुसूची में निर्धारित सभी मामलों को शामिल करता हो।
(2) नियोक्ता स्थायी आदेश के मसौदे के संबंध में औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित ट्रेड यूनियनों या मान्यता प्राप्त वार्ता संघ या वार्ता परिषद के सदस्यों से परामर्श करेगा, जैसा भी मामला हो, और उसके बाद स्थायी आदेश के मसौदे को इलेक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा प्रमाणन अधिकारी को प्रमाणीकरण के लिए अग्रेषित करेगा।
(3) यदि कोई नियोक्ता अपने औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित मामलों के संबंध में धारा 29 में निर्दिष्ट केंद्र सरकार के किसी आदर्श स्थायी आदेश को अपनाता है, तो ऐसे आदर्श स्थायी आदेश को इस धारा के प्रावधानों के तहत प्रमाणित माना जाएगा और नियोक्ता इस संबंध में संबंधित प्रमाणन अधिकारी को निर्धारित तरीके से सूचना अग्रेषित करेगा।
बशर्ते कि यदि प्रमाणन अधिकारी को कोई आपत्ति हो, तो वह ऐसे नियोक्ता को निर्धारित अवधि के भीतर अपनाए गए स्थायी आदेश में संशोधन करने का निर्देश दे सकता है।
(4) नियोक्ता, यदि आवश्यक हो, तो स्थायी आदेश में संशोधनों का मसौदा इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार तैयार करेगा और इस अध्याय के प्रावधान उसके औद्योगिक प्रतिष्ठान पर लागू होने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा प्रमाणन अधिकारी को उन संशोधनों के प्रमाणीकरण के लिए अग्रेषित करेगा।
(5) उपधारा ( 1 ) और उपधारा ( 4 ) में निर्दिष्ट मसौदे प्राप्त होने पर, प्रमाणन अधिकारी निम्नलिखित को सूचना जारी करेगा---
(i) औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम का ट्रेड यूनियन या वार्ता संघ, या वार्ता परिषद के सदस्य; या
(ii) जहां कोई ट्रेड यूनियन कार्यरत नहीं है, वहां औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम के श्रमिकों के ऐसे प्रतिनिधियों को, जिनका चयन निर्धारित तरीके से किया जाएगा,
इस मामले में उनकी टिप्पणियां प्राप्त करने के लिए और उनकी टिप्पणियां प्राप्त होने के बाद वार्ता संघ या वार्ता परिषद, या जैसा भी मामला हो, ट्रेड यूनियनों या श्रमिकों के प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के लिए और यह निर्णय लेने के लिए कि क्या मसौदा स्थायी आदेश को प्रमाणित करने योग्य बनाने के लिए उसमें कोई संशोधन या परिवर्धन आवश्यक है या नहीं, और इस संबंध में लिखित में आदेश जारी करने के लिए।
बशर्ते कि प्रमाणन अधिकारी उपधारा ( 4 ) और ( 5 ) में निर्दिष्ट प्रमाणन प्रक्रिया को निम्नलिखित के संबंध में पूरा करेगा---
(क) प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर प्राप्त स्थायी आदेश का मसौदा; और
(ख) स्थायी आदेश में संशोधनों का मसौदा, जो ऐसे संशोधनों की प्राप्ति की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर प्राप्त हुआ हो।
ऐसा न होने पर, उक्त अवधि की समाप्ति पर ऐसे मसौदा स्थायी आदेश या, जैसा भी मामला हो, स्थायी आदेश में किए गए संशोधन प्रमाणित माने जाएंगे।
(6) स्थायी आदेश इस संहिता के अंतर्गत प्रमाणित किए जा सकेंगे, यदि---
(क) इसमें प्रथम अनुसूची में उल्लिखित प्रत्येक मामले के लिए प्रावधान किया गया है जो औद्योगिक प्रतिष्ठान पर लागू होता है; और
(ख) ऐसे आदेश अन्यथा इस संहिता के प्रावधानों के अनुरूप हैं।
(7) धारा 32 में निर्दिष्ट प्रमाणन अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी का यह कार्य होगा कि वह धारा 29 में निर्दिष्ट आदर्श स्थायी आदेशों के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए किसी भी स्थायी आदेश के प्रावधानों की निष्पक्षता या तर्कसंगतता पर निर्णय करे।
(8) प्रमाणन अधिकारी उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट स्थायी आदेशों के मसौदे या स्थायी आदेशों में संशोधनों को प्रमाणित करेगा, और उसके बाद सात दिनों के भीतर प्रमाणित स्थायी आदेशों या स्थायी आदेशों में संशोधनों की प्रतियां, निर्धारित तरीके से प्रमाणित करके, नियोक्ता और वार्ता संघ या वार्ता परिषद या ट्रेड यूनियन या उपधारा ( 5 ) के खंड ( ii ) में निर्दिष्ट श्रमिकों के अन्य प्रतिनिधियों को भेजेगा।
(9) उपधारा ( 1 ) के तहत स्थायी आदेशों का मसौदा या उपधारा ( 5 ) के तहत स्थायी आदेशों में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा एक विवरण के साथ संलग्न किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत श्रमिकों, उनके संबंधित ट्रेड यूनियन और वार्ता संघ या वार्ता परिषद, यदि कोई हो, के बारे में ऐसे विवरण दिए जाएंगे, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(10) ऐसी शर्तों के अधीन, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, समान प्रतिष्ठानों में नियोक्ताओं का एक समूह इस धारा के तहत स्थायी आदेशों का एक संयुक्त मसौदा प्रस्तुत कर सकता है और उप-धारा ( 1 ), ( 5 ), ( 6 ), ( 8 ) और ( 9 ) में निर्दिष्ट कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "नियोक्ता", "ट्रेड यूनियन" और "वार्ता संघ या वार्ता परिषद" में क्रमशः ऐसे समान प्रतिष्ठानों के सभी नियोक्ता, ट्रेड यूनियन और वार्ता संघ या वार्ता परिषद शामिल होंगे, जैसा भी मामला हो।
(11) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस संहिता के संबंधित प्रावधानों के प्रारंभ होने की तिथि को विद्यमान औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित स्थायी आदेश, जहां तक इस संहिता या उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के साथ असंगत न हो, जारी रहेंगे और उपधारा ( 8 ) के तहत प्रमाणित स्थायी आदेश माने जाएंगे और तदनुसार इस अध्याय के प्रावधान उन पर लागू होंगे।
(2) नियोक्ता स्थायी आदेश के मसौदे के संबंध में औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित ट्रेड यूनियनों या मान्यता प्राप्त वार्ता संघ या वार्ता परिषद के सदस्यों से परामर्श करेगा, जैसा भी मामला हो, और उसके बाद स्थायी आदेश के मसौदे को इलेक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा प्रमाणन अधिकारी को प्रमाणीकरण के लिए अग्रेषित करेगा।
(3) यदि कोई नियोक्ता अपने औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित मामलों के संबंध में धारा 29 में निर्दिष्ट केंद्र सरकार के किसी आदर्श स्थायी आदेश को अपनाता है, तो ऐसे आदर्श स्थायी आदेश को इस धारा के प्रावधानों के तहत प्रमाणित माना जाएगा और नियोक्ता इस संबंध में संबंधित प्रमाणन अधिकारी को निर्धारित तरीके से सूचना अग्रेषित करेगा।
बशर्ते कि यदि प्रमाणन अधिकारी को कोई आपत्ति हो, तो वह ऐसे नियोक्ता को निर्धारित अवधि के भीतर अपनाए गए स्थायी आदेश में संशोधन करने का निर्देश दे सकता है।
(4) नियोक्ता, यदि आवश्यक हो, तो स्थायी आदेश में संशोधनों का मसौदा इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार तैयार करेगा और इस अध्याय के प्रावधान उसके औद्योगिक प्रतिष्ठान पर लागू होने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा प्रमाणन अधिकारी को उन संशोधनों के प्रमाणीकरण के लिए अग्रेषित करेगा।
(5) उपधारा ( 1 ) और उपधारा ( 4 ) में निर्दिष्ट मसौदे प्राप्त होने पर, प्रमाणन अधिकारी निम्नलिखित को सूचना जारी करेगा---
(i) औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम का ट्रेड यूनियन या वार्ता संघ, या वार्ता परिषद के सदस्य; या
(ii) जहां कोई ट्रेड यूनियन कार्यरत नहीं है, वहां औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम के श्रमिकों के ऐसे प्रतिनिधियों को, जिनका चयन निर्धारित तरीके से किया जाएगा,
इस मामले में उनकी टिप्पणियां प्राप्त करने के लिए और उनकी टिप्पणियां प्राप्त होने के बाद वार्ता संघ या वार्ता परिषद, या जैसा भी मामला हो, ट्रेड यूनियनों या श्रमिकों के प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के लिए और यह निर्णय लेने के लिए कि क्या मसौदा स्थायी आदेश को प्रमाणित करने योग्य बनाने के लिए उसमें कोई संशोधन या परिवर्धन आवश्यक है या नहीं, और इस संबंध में लिखित में आदेश जारी करने के लिए।
बशर्ते कि प्रमाणन अधिकारी उपधारा ( 4 ) और ( 5 ) में निर्दिष्ट प्रमाणन प्रक्रिया को निम्नलिखित के संबंध में पूरा करेगा---
(क) प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर प्राप्त स्थायी आदेश का मसौदा; और
(ख) स्थायी आदेश में संशोधनों का मसौदा, जो ऐसे संशोधनों की प्राप्ति की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर प्राप्त हुआ हो।
ऐसा न होने पर, उक्त अवधि की समाप्ति पर ऐसे मसौदा स्थायी आदेश या, जैसा भी मामला हो, स्थायी आदेश में किए गए संशोधन प्रमाणित माने जाएंगे।
(6) स्थायी आदेश इस संहिता के अंतर्गत प्रमाणित किए जा सकेंगे, यदि---
(क) इसमें प्रथम अनुसूची में उल्लिखित प्रत्येक मामले के लिए प्रावधान किया गया है जो औद्योगिक प्रतिष्ठान पर लागू होता है; और
(ख) ऐसे आदेश अन्यथा इस संहिता के प्रावधानों के अनुरूप हैं।
(7) धारा 32 में निर्दिष्ट प्रमाणन अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी का यह कार्य होगा कि वह धारा 29 में निर्दिष्ट आदर्श स्थायी आदेशों के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए किसी भी स्थायी आदेश के प्रावधानों की निष्पक्षता या तर्कसंगतता पर निर्णय करे।
(8) प्रमाणन अधिकारी उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट स्थायी आदेशों के मसौदे या स्थायी आदेशों में संशोधनों को प्रमाणित करेगा, और उसके बाद सात दिनों के भीतर प्रमाणित स्थायी आदेशों या स्थायी आदेशों में संशोधनों की प्रतियां, निर्धारित तरीके से प्रमाणित करके, नियोक्ता और वार्ता संघ या वार्ता परिषद या ट्रेड यूनियन या उपधारा ( 5 ) के खंड ( ii ) में निर्दिष्ट श्रमिकों के अन्य प्रतिनिधियों को भेजेगा।
(9) उपधारा ( 1 ) के तहत स्थायी आदेशों का मसौदा या उपधारा ( 5 ) के तहत स्थायी आदेशों में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा एक विवरण के साथ संलग्न किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत श्रमिकों, उनके संबंधित ट्रेड यूनियन और वार्ता संघ या वार्ता परिषद, यदि कोई हो, के बारे में ऐसे विवरण दिए जाएंगे, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(10) ऐसी शर्तों के अधीन, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, समान प्रतिष्ठानों में नियोक्ताओं का एक समूह इस धारा के तहत स्थायी आदेशों का एक संयुक्त मसौदा प्रस्तुत कर सकता है और उप-धारा ( 1 ), ( 5 ), ( 6 ), ( 8 ) और ( 9 ) में निर्दिष्ट कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "नियोक्ता", "ट्रेड यूनियन" और "वार्ता संघ या वार्ता परिषद" में क्रमशः ऐसे समान प्रतिष्ठानों के सभी नियोक्ता, ट्रेड यूनियन और वार्ता संघ या वार्ता परिषद शामिल होंगे, जैसा भी मामला हो।
(11) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस संहिता के संबंधित प्रावधानों के प्रारंभ होने की तिथि को विद्यमान औद्योगिक प्रतिष्ठान या उपक्रम से संबंधित स्थायी आदेश, जहां तक इस संहिता या उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के साथ असंगत न हो, जारी रहेंगे और उपधारा ( 8 ) के तहत प्रमाणित स्थायी आदेश माने जाएंगे और तदनुसार इस अध्याय के प्रावधान उन पर लागू होंगे।
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