IR Code 4अध्याय II · Bi - Partite Forums
धारा 4 · शिकायत निवारण समिति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) बीस या अधिक श्रमिकों को नियोजित करने वाले प्रत्येक औद्योगिक प्रतिष्ठान में व्यक्तिगत शिकायतों से उत्पन्न विवादों के समाधान के लिए एक या एक से अधिक शिकायत निवारण समितियाँ होंगी।
(2) शिकायत निवारण समिति में नियोक्ता और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की समान संख्या होगी, जिनका चुनाव निर्धारित तरीके से किया जाएगा।
(3) शिकायत निवारण समिति के अध्यक्ष का चयन नियोक्ता और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों में से बारी-बारी से प्रत्येक वर्ष रोटेशन के आधार पर किया जाएगा।
(4) शिकायत निवारण समिति के सदस्यों की कुल संख्या दस से अधिक नहीं होगी: बशर्ते कि शिकायत निवारण समिति में महिला श्रमिकों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो और ऐसा प्रतिनिधित्व औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत कुल श्रमिकों के अनुपात से कम न हो।
(5) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी विवाद के संबंध में कोई आवेदन किसी पीड़ित श्रमिक द्वारा शिकायत निवारण समिति के समक्ष ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है जैसा कि ऐसे विवाद के कारण उत्पन्न होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर निर्धारित किया जा सके।
(6) शिकायत निवारण समिति उपधारा ( 5 ) के तहत आवेदन प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपनी कार्यवाही पूरी कर सकती है।
(7) उपधारा ( 5 ) के तहत दायर किसी भी आवेदन पर शिकायत निवारण समिति का निर्णय समिति के बहुमत मत के आधार पर लिया जाएगा, बशर्ते श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले आधे से अधिक सदस्यों ने ऐसे निर्णय पर सहमति व्यक्त की हो, अन्यथा यह माना जाएगा कि समिति द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
(8) शिकायत निवारण समिति के निर्णय से असंतुष्ट श्रमिक, या जिसकी शिकायत उक्त समिति में उपधारा ( 6 ) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर हल नहीं होती है, शिकायत निवारण समिति के निर्णय की तिथि से या उपधारा ( 6 ) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति की तिथि से, जैसा भी मामला हो, साठ दिनों की अवधि के भीतर, अपने सदस्य ट्रेड यूनियन के माध्यम से, ऐसी शिकायत के सुलह के लिए सुलह अधिकारी को आवेदन कर सकता है, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(9) जहाँ कोई नियोक्ता किसी व्यक्तिगत श्रमिक की सेवा समाप्त करता है, बर्खास्त करता है, छंटनी करता है या अन्यथा समाप्त करता है, तो उस श्रमिक और उसके नियोक्ता के बीच ऐसी सेवा समाप्ति, बर्खास्तगी, छंटनी या समाप्ति से संबंधित या उससे उत्पन्न कोई भी विवाद या मतभेद औद्योगिक विवाद माना जाएगा, भले ही कोई अन्य श्रमिक या कोई ट्रेड यूनियन विवाद में पक्षकार न हो।
(10) इस धारा या धारा 53 में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट कोई भी श्रमिक, उपयुक्त सरकार के सुलह अधिकारी को विवाद के सुलह हेतु आवेदन करने की तिथि से पैंतालीस दिन बीत जाने के बाद, उसमें निर्दिष्ट विवाद के निपटारे के लिए सीधे न्यायाधिकरण को आवेदन कर सकता है, और ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर न्यायाधिकरण को विवाद पर निर्णय करने की वही शक्तियाँ और अधिकार प्राप्त होंगे, जो धारा 53 की उपधारा ( 6 ) के अंतर्गत दायर आवेदन के संबंध में न्यायाधिकरण को प्राप्त हैं।
(11) उपधारा ( 10 ) में निर्दिष्ट आवेदन उपधारा ( 9 ) में निर्दिष्ट सेवामुक्ति, बर्खास्तगी, छंटनी या अन्यथा सेवा समाप्ति की तिथि से दो वर्ष की समाप्ति से पहले न्यायाधिकरण को किया जाएगा।
(2) शिकायत निवारण समिति में नियोक्ता और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की समान संख्या होगी, जिनका चुनाव निर्धारित तरीके से किया जाएगा।
(3) शिकायत निवारण समिति के अध्यक्ष का चयन नियोक्ता और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों में से बारी-बारी से प्रत्येक वर्ष रोटेशन के आधार पर किया जाएगा।
(4) शिकायत निवारण समिति के सदस्यों की कुल संख्या दस से अधिक नहीं होगी: बशर्ते कि शिकायत निवारण समिति में महिला श्रमिकों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो और ऐसा प्रतिनिधित्व औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत कुल श्रमिकों के अनुपात से कम न हो।
(5) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी विवाद के संबंध में कोई आवेदन किसी पीड़ित श्रमिक द्वारा शिकायत निवारण समिति के समक्ष ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है जैसा कि ऐसे विवाद के कारण उत्पन्न होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर निर्धारित किया जा सके।
(6) शिकायत निवारण समिति उपधारा ( 5 ) के तहत आवेदन प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपनी कार्यवाही पूरी कर सकती है।
(7) उपधारा ( 5 ) के तहत दायर किसी भी आवेदन पर शिकायत निवारण समिति का निर्णय समिति के बहुमत मत के आधार पर लिया जाएगा, बशर्ते श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले आधे से अधिक सदस्यों ने ऐसे निर्णय पर सहमति व्यक्त की हो, अन्यथा यह माना जाएगा कि समिति द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
(8) शिकायत निवारण समिति के निर्णय से असंतुष्ट श्रमिक, या जिसकी शिकायत उक्त समिति में उपधारा ( 6 ) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर हल नहीं होती है, शिकायत निवारण समिति के निर्णय की तिथि से या उपधारा ( 6 ) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति की तिथि से, जैसा भी मामला हो, साठ दिनों की अवधि के भीतर, अपने सदस्य ट्रेड यूनियन के माध्यम से, ऐसी शिकायत के सुलह के लिए सुलह अधिकारी को आवेदन कर सकता है, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(9) जहाँ कोई नियोक्ता किसी व्यक्तिगत श्रमिक की सेवा समाप्त करता है, बर्खास्त करता है, छंटनी करता है या अन्यथा समाप्त करता है, तो उस श्रमिक और उसके नियोक्ता के बीच ऐसी सेवा समाप्ति, बर्खास्तगी, छंटनी या समाप्ति से संबंधित या उससे उत्पन्न कोई भी विवाद या मतभेद औद्योगिक विवाद माना जाएगा, भले ही कोई अन्य श्रमिक या कोई ट्रेड यूनियन विवाद में पक्षकार न हो।
(10) इस धारा या धारा 53 में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट कोई भी श्रमिक, उपयुक्त सरकार के सुलह अधिकारी को विवाद के सुलह हेतु आवेदन करने की तिथि से पैंतालीस दिन बीत जाने के बाद, उसमें निर्दिष्ट विवाद के निपटारे के लिए सीधे न्यायाधिकरण को आवेदन कर सकता है, और ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर न्यायाधिकरण को विवाद पर निर्णय करने की वही शक्तियाँ और अधिकार प्राप्त होंगे, जो धारा 53 की उपधारा ( 6 ) के अंतर्गत दायर आवेदन के संबंध में न्यायाधिकरण को प्राप्त हैं।
(11) उपधारा ( 10 ) में निर्दिष्ट आवेदन उपधारा ( 9 ) में निर्दिष्ट सेवामुक्ति, बर्खास्तगी, छंटनी या अन्यथा सेवा समाप्ति की तिथि से दो वर्ष की समाप्ति से पहले न्यायाधिकरण को किया जाएगा।
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