Factories Act 93अध्याय X · Penalties and Procedure
धारा 93 · कतिपय परिस्थितियों में परिसर के स्वामी का दायित्व
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां किसी परिसर में पृथक्-पृथक् भवन विभिन्न अधिष्ठाताओं को, पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग के लिए पट्टे पर दिए गए हैं वहां पहुंच मार्गों, जल निकासों, जल प्रदाय, रोशनी और सेवाओं की व्यवस्था और अनुरक्षा करने के लिए परिसर का स्वामी उत्तरदायी होगा ।]
(2) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को, उपधारा (1) के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के सम्बन्ध में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(3) जहां किसी परिसर में स्वतंत्र या स्वतः पूर्ण मंजिलें या फ्लैट विभिन्न अधिष्ठाताओं को पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग किए जाने के लिए पट्टे पर दिए गए हैं वहां परिसर का स्वामी निम्नलिखित के सम्बन्ध में इस अधिनियम के उपबन्धों के किसी प्रकार के उल्लंघन के लिए ऐसे दायित्वाधीन होगा मानो वह कारखाने का अधिष्ठाता या प्रबंधक हो-
(i) शौचालय, मूत्रालय और धुलाई की सुविधाएं जहां तक उन प्रयोजनों के लिए जल के सामान्य प्रदाय का बनाए रखना संबंधित है;
(ii) ऐसी मशीनरी और संयंत्र पर बाड़ लगाना जो स्वामी का हो और अधिष्ठाता की अभिरक्षा या उसके प्रयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप से न्यस्त न किया गया हो;
(iii) मंजिलों या फ्लैटों तक पहुंचने के लिए निरापद साधन और सीढ़ियां और सामान्य मार्गों का बनाए रखना और सफाई;
(iv) आग लगने की दशा में पूर्वावधानियां;
(v) उत्तोलकों और उत्थापकों का अनुरक्षण; और
(vi) परिसर में उपलभ्य किन्हीं अन्य सामान्य सुविधाओं का अनुरक्षण ।
(4) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (3) के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(5) जहां किसी परिसर में सामान्य शौचालयों, मूत्रालयों और धुलाई की सुविधओं के सहित पृथक् कमरे विभिन्न अधिष्ठाताओं को, पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग के लिए पट्टे पर दिए गए हैं वहां स्वामी के दायित्व के बारे में उपधारा (3) के उपबन्ध लागू होंगे :
परन्तु स्वामी शौचालयों, मूत्रालयों और धुलाई की सुविधाओं की व्यवस्था और अनुरक्षा करने से सम्बद्ध अपेक्षाओं का अनुपालन करने के लिए भी उत्तरदायी होगा ।
(6) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (5) में निर्दिष्ट परिसर के स्वामी को धारा 46 या धारा 48 के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में आदेश देने की शक्ति होगी ।
(7) जहां किसी परिसर में किसी कमरे या शैड के भाग विभिन्न अधिष्ठाताओं को पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग के लिए पट्टे पर दिए जाते हैं, वहां परिसर का स्वामी निम्नलिखित के उपबन्धों के किसी प्रकार के उल्लंघन के लिए दायित्वाधीन होगा-
(i) धारा 14 और धारा 15 को छोड़कर अध्याय 3 ;
(ii) धारा 22, 23, 27, 34, 35 और 36 को छोड़कर अध्याय 4 :
परन्तु धारा 21, 24 और 32 के उपबन्धों के बारे में स्वामी का दायित्व वहीं तक होगा, जहां तक ऐसे उपबन्ध उसके नियंत्रणाधीन बातों से सम्बद्ध हैं :
परन्तु यह और कि अधिष्ठाता अपनी या अपने द्वारा प्रदत्त मशीनरी और संयंत्र के बारे में अध्याय 4 के उपबन्धों का अनुपालन करने के लिए उत्तरदायी होगा ;
(iii) धारा 42 ।
(8) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (1) के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(9) उपधारा (5) और (7) के सम्बन्ध में नियोजित कर्मकारों की कुल संख्या इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के प्रयोजन के लिए संगणित करते समय पूरे परिसर को एक ही कारखाना समझा जाएगा ।
(2) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को, उपधारा (1) के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के सम्बन्ध में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(3) जहां किसी परिसर में स्वतंत्र या स्वतः पूर्ण मंजिलें या फ्लैट विभिन्न अधिष्ठाताओं को पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग किए जाने के लिए पट्टे पर दिए गए हैं वहां परिसर का स्वामी निम्नलिखित के सम्बन्ध में इस अधिनियम के उपबन्धों के किसी प्रकार के उल्लंघन के लिए ऐसे दायित्वाधीन होगा मानो वह कारखाने का अधिष्ठाता या प्रबंधक हो-
(i) शौचालय, मूत्रालय और धुलाई की सुविधाएं जहां तक उन प्रयोजनों के लिए जल के सामान्य प्रदाय का बनाए रखना संबंधित है;
(ii) ऐसी मशीनरी और संयंत्र पर बाड़ लगाना जो स्वामी का हो और अधिष्ठाता की अभिरक्षा या उसके प्रयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप से न्यस्त न किया गया हो;
(iii) मंजिलों या फ्लैटों तक पहुंचने के लिए निरापद साधन और सीढ़ियां और सामान्य मार्गों का बनाए रखना और सफाई;
(iv) आग लगने की दशा में पूर्वावधानियां;
(v) उत्तोलकों और उत्थापकों का अनुरक्षण; और
(vi) परिसर में उपलभ्य किन्हीं अन्य सामान्य सुविधाओं का अनुरक्षण ।
(4) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (3) के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(5) जहां किसी परिसर में सामान्य शौचालयों, मूत्रालयों और धुलाई की सुविधओं के सहित पृथक् कमरे विभिन्न अधिष्ठाताओं को, पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग के लिए पट्टे पर दिए गए हैं वहां स्वामी के दायित्व के बारे में उपधारा (3) के उपबन्ध लागू होंगे :
परन्तु स्वामी शौचालयों, मूत्रालयों और धुलाई की सुविधाओं की व्यवस्था और अनुरक्षा करने से सम्बद्ध अपेक्षाओं का अनुपालन करने के लिए भी उत्तरदायी होगा ।
(6) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (5) में निर्दिष्ट परिसर के स्वामी को धारा 46 या धारा 48 के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में आदेश देने की शक्ति होगी ।
(7) जहां किसी परिसर में किसी कमरे या शैड के भाग विभिन्न अधिष्ठाताओं को पृथक् कारखानों के रूप में प्रयोग के लिए पट्टे पर दिए जाते हैं, वहां परिसर का स्वामी निम्नलिखित के उपबन्धों के किसी प्रकार के उल्लंघन के लिए दायित्वाधीन होगा-
(i) धारा 14 और धारा 15 को छोड़कर अध्याय 3 ;
(ii) धारा 22, 23, 27, 34, 35 और 36 को छोड़कर अध्याय 4 :
परन्तु धारा 21, 24 और 32 के उपबन्धों के बारे में स्वामी का दायित्व वहीं तक होगा, जहां तक ऐसे उपबन्ध उसके नियंत्रणाधीन बातों से सम्बद्ध हैं :
परन्तु यह और कि अधिष्ठाता अपनी या अपने द्वारा प्रदत्त मशीनरी और संयंत्र के बारे में अध्याय 4 के उपबन्धों का अनुपालन करने के लिए उत्तरदायी होगा ;
(iii) धारा 42 ।
(8) राज्य सरकार के नियंत्रण के अध्यधीन मुख्य निरीक्षक को उपधारा (1) के उपबन्धों के कार्यान्वयन के बारे में परिसर के स्वामी को आदेश देने की शक्ति होगी ।
(9) उपधारा (5) और (7) के सम्बन्ध में नियोजित कर्मकारों की कुल संख्या इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के प्रयोजन के लिए संगणित करते समय पूरे परिसर को एक ही कारखाना समझा जाएगा ।
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