Factories Act 64अध्याय VI · Working Hours of Adults
धारा 64 · छूट देने वाले नियम बनाने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार उन व्यक्तियों को, जो किसी कारखाने में पर्यवेक्षण या प्रबंधक का पद धारण किए हैं या किसी गोपनीय पद पर नियोजित हैं, परिभाषित करने वाले नियम बना सकेगी [या मुख्य निरीक्षक को इस बात के लिए सशक्त करने वाले नियम बना सकेगी कि वह ऐसे नियमों द्वारा परिभाषित व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को कारखाने में पर्यवेक्षण या प्रबन्धक का पद धारण करने वाले या गोपनीय पद पर नियोजित व्यक्ति के रूप में उस दशा में घोषित कर सकता है जब मुख्य निरीक्षक की राय में वह व्यक्ति ऐसा पद धारण करता है या ऐसे नियोजित है] और धारा 66 की उपधारा (1) के खंड (ख) के और उस उपधारा के परन्तुक के उपबन्धों के सिवाय इस अध्याय के उपबन्ध इस प्रकार परिभाषित 1[या घोषित] किसी व्यक्ति को लागू नहीं होंगे :
1[परन्तु इस प्रकार परिभाषित या घोषित कोई व्यक्ति धारा 59 के अधीन अतिकाल काम की बाबत वहां अतिरिक्त मजदूरी का हकदार होगा जहां ऐसे व्यक्ति की मजदूरी की मामूली दर [समय-समय पर यथा संशोधित मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) की धारा 1 की उपधारा (6) में विनिर्दिष्ट मजदूरी सीमा से अधिक नहीं होती है ।]
(2) राज्य सरकार कारखानों में वयस्थ कर्मकारों के संबंध में उस विस्तार तक और ऐसी शर्तों के अध्यधीन जैसी विहित की जाएं निम्नलिखित छूट के लिए उपबन्ध करने वाले नियम बना सकेगी-
(क) अति-आवश्यक मरम्मतों में लगे हुए कर्मकारों को धारा 51, 52, 54, 55 और 56 के उपबंधों से;
(ख) उन कर्मकारों को, जो प्रारंभिक या पूरक प्रकार के ऐसे कामों में लगे हैं, जो कारखाने के साधारण कार्यचालन के लिए अधिकथित सीमाओं के बाहर भी अनिवार्यतः किए जाने हैं, धारा 51, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(ग) ऐसे काम में लगे कर्मकारों को, जो अनिवार्यतः ऐसा आन्तरायिक है कि वे अन्तराल, जिनके दौरान वे कर्तव्यारूढ़ होते हुए भी काम नहीं करते, धारा 55 के अधीन या द्वारा अपेक्षित विश्राम के लिए अन्तरालों से मामूली तौर पर अधिक हो जाते हैं, धारा 51, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(घ) किसी ऐसे काम में, जो तकनीकी कारणों से निरन्तर किया जाना चाहिए, लगे कर्मकारों को धारा 51, 52 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(ङ) प्राथमिक आवश्यकता की उन चीजों के, जिनका हर दिन निर्माण या प्रदाय होना चाहिए, निर्माण और प्रदाय में लगे कर्मकरों को [धारा 51 और धारा 52] के उपबन्धों से;
(च) ऐसी निर्माण प्रक्रिया में लगे कर्मकारों को, जो नियत मौसमों के सिवाय नहीं चलाई जा सकती है, 4[धारा 51, धारा 52 और धारा 54] के उपबन्धों से;
(छ) ऐसी विनिर्माण प्रक्रिया में, जो प्राकृतिक शक्तियों की अनियमित क्रिया पर निर्भर समयों के सिवाय नहीं चलाई जा सकती, लगे कर्मकारों को धारा 52 और 55 के उपबन्धों से;
(ज) इंजन-कक्षों या बायलर घरों में या शक्ति-संयंत्र या संचारण मशीनरी के काम में लगे कर्मकारों को 1[धारा 51 और धारा 52] के उपबन्धों से;
[(झ) समाचारपत्रों के मुद्रण में लगे हुए कर्मकारों को, जिनका काम मशीनरी के ठप्प हो जाने के कारण रुक जाता है, धारा 51, 54 औ 56 के उपबन्धों से ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में “समाचारपत्रों" पदावली का वही अर्थ है, जो उसे प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 (1867 का 25) में दिया गया है;
(ञ) रेल के माल डिब्बों 1[या लारियों या ट्रकों] को भरने या खाली करने में लगे हुए कर्मकारों को धारा 51, 52, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;]
1[(ट) राज्य सरकार जिस काम को शासकीय राजपत्र में राष्ट्रीय महत्व का काम अधिसूचित कर देती है उस काम में लगे हुए कर्मकरों को धारा 51, धारा 52, धारा 54, धारा 55 और धारा 56 के उपबन्धों से ।]
(3) उपधारा (2) के अधीन बनाए गए नियम, जो किसी छूट का उपबन्ध करते हैं, धारा 61 के उपबन्धों से ऐसी किसी पारिणामिक छूट के लिए भी, जिसे राज्य सरकार समीचीन समझती है, ऐसी शर्तों के अध्यधीन उपबन्ध कर सकेंगे जैसी वह विहित करे ।
[(4) इस धारा के अधीन नियम बनाने में राज्य सरकार, उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन छूट में के सिवाय, अतिकाल सहित काम की निम्नलिखित परिसीमाओं से आगे नहीं जाएगी :-
(i) किसी दिन काम के घंटों की कुल संख्या दस से अधिक नहीं होंगी;
(ii) विश्राम के लिए अन्तरालों के सहित विस्तृति किसी एक दिन में बारह घंटों से अधिक नहीं होगी :
परन्तु राज्य सरकार, उपधारा (2) के खंड (घ) में निर्दिष्ट कर्मकारों के सब प्रवर्गों या उनमें से किसी के बारे में ऐसे नियम बना सकेगी जिनमें ऐसी परिस्थितियां और ऐसी शर्तें विहित होंगी जिनमें और जिनके अध्यधीन रहते हुए वे निर्बन्धन जो खंड (i) और खंड (ii) द्वारा अधिरोपित हैं इसलिए लागू नहीं होंगे कि कोई पारी-कर्मकार सम्पूर्ण उत्तरवर्ती पारी या उसके किसी भाग में किसी कर्मकार की अनुपस्थिति में, जो काम पर हाजिर होने में असफल रहा हो, काम कर सके;
[(iii) किसी सप्ताह काम के घण्टों की कुल संख्या, जिसके अन्तर्गत अतिकाल भी है, साठ से अधिक नहीं होगी;]
[(iv) अतिकाल के घंटों की कुल संख्या किसी एक तिमाही के लिए पचास से अधिक नहीं होगी ।
स्पष्टीकरण-“तिमाही" से लगातार तीन मास की वह कालावधि अभिप्रेत है जो पहली जनवरी, पहली अप्रैल, पहली जुलाई या पहली अक्तूबर को आंरभ हो ।]
(5) इस धारा के अधीन बनाए गए नियम [पांच वर्ष] से अनधिक के लिए प्रवृत्त रहेंगे ।
1[परन्तु इस प्रकार परिभाषित या घोषित कोई व्यक्ति धारा 59 के अधीन अतिकाल काम की बाबत वहां अतिरिक्त मजदूरी का हकदार होगा जहां ऐसे व्यक्ति की मजदूरी की मामूली दर [समय-समय पर यथा संशोधित मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) की धारा 1 की उपधारा (6) में विनिर्दिष्ट मजदूरी सीमा से अधिक नहीं होती है ।]
(2) राज्य सरकार कारखानों में वयस्थ कर्मकारों के संबंध में उस विस्तार तक और ऐसी शर्तों के अध्यधीन जैसी विहित की जाएं निम्नलिखित छूट के लिए उपबन्ध करने वाले नियम बना सकेगी-
(क) अति-आवश्यक मरम्मतों में लगे हुए कर्मकारों को धारा 51, 52, 54, 55 और 56 के उपबंधों से;
(ख) उन कर्मकारों को, जो प्रारंभिक या पूरक प्रकार के ऐसे कामों में लगे हैं, जो कारखाने के साधारण कार्यचालन के लिए अधिकथित सीमाओं के बाहर भी अनिवार्यतः किए जाने हैं, धारा 51, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(ग) ऐसे काम में लगे कर्मकारों को, जो अनिवार्यतः ऐसा आन्तरायिक है कि वे अन्तराल, जिनके दौरान वे कर्तव्यारूढ़ होते हुए भी काम नहीं करते, धारा 55 के अधीन या द्वारा अपेक्षित विश्राम के लिए अन्तरालों से मामूली तौर पर अधिक हो जाते हैं, धारा 51, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(घ) किसी ऐसे काम में, जो तकनीकी कारणों से निरन्तर किया जाना चाहिए, लगे कर्मकारों को धारा 51, 52 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;
(ङ) प्राथमिक आवश्यकता की उन चीजों के, जिनका हर दिन निर्माण या प्रदाय होना चाहिए, निर्माण और प्रदाय में लगे कर्मकरों को [धारा 51 और धारा 52] के उपबन्धों से;
(च) ऐसी निर्माण प्रक्रिया में लगे कर्मकारों को, जो नियत मौसमों के सिवाय नहीं चलाई जा सकती है, 4[धारा 51, धारा 52 और धारा 54] के उपबन्धों से;
(छ) ऐसी विनिर्माण प्रक्रिया में, जो प्राकृतिक शक्तियों की अनियमित क्रिया पर निर्भर समयों के सिवाय नहीं चलाई जा सकती, लगे कर्मकारों को धारा 52 और 55 के उपबन्धों से;
(ज) इंजन-कक्षों या बायलर घरों में या शक्ति-संयंत्र या संचारण मशीनरी के काम में लगे कर्मकारों को 1[धारा 51 और धारा 52] के उपबन्धों से;
[(झ) समाचारपत्रों के मुद्रण में लगे हुए कर्मकारों को, जिनका काम मशीनरी के ठप्प हो जाने के कारण रुक जाता है, धारा 51, 54 औ 56 के उपबन्धों से ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में “समाचारपत्रों" पदावली का वही अर्थ है, जो उसे प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 (1867 का 25) में दिया गया है;
(ञ) रेल के माल डिब्बों 1[या लारियों या ट्रकों] को भरने या खाली करने में लगे हुए कर्मकारों को धारा 51, 52, 54, 55 और 56 के उपबन्धों से;]
1[(ट) राज्य सरकार जिस काम को शासकीय राजपत्र में राष्ट्रीय महत्व का काम अधिसूचित कर देती है उस काम में लगे हुए कर्मकरों को धारा 51, धारा 52, धारा 54, धारा 55 और धारा 56 के उपबन्धों से ।]
(3) उपधारा (2) के अधीन बनाए गए नियम, जो किसी छूट का उपबन्ध करते हैं, धारा 61 के उपबन्धों से ऐसी किसी पारिणामिक छूट के लिए भी, जिसे राज्य सरकार समीचीन समझती है, ऐसी शर्तों के अध्यधीन उपबन्ध कर सकेंगे जैसी वह विहित करे ।
[(4) इस धारा के अधीन नियम बनाने में राज्य सरकार, उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन छूट में के सिवाय, अतिकाल सहित काम की निम्नलिखित परिसीमाओं से आगे नहीं जाएगी :-
(i) किसी दिन काम के घंटों की कुल संख्या दस से अधिक नहीं होंगी;
(ii) विश्राम के लिए अन्तरालों के सहित विस्तृति किसी एक दिन में बारह घंटों से अधिक नहीं होगी :
परन्तु राज्य सरकार, उपधारा (2) के खंड (घ) में निर्दिष्ट कर्मकारों के सब प्रवर्गों या उनमें से किसी के बारे में ऐसे नियम बना सकेगी जिनमें ऐसी परिस्थितियां और ऐसी शर्तें विहित होंगी जिनमें और जिनके अध्यधीन रहते हुए वे निर्बन्धन जो खंड (i) और खंड (ii) द्वारा अधिरोपित हैं इसलिए लागू नहीं होंगे कि कोई पारी-कर्मकार सम्पूर्ण उत्तरवर्ती पारी या उसके किसी भाग में किसी कर्मकार की अनुपस्थिति में, जो काम पर हाजिर होने में असफल रहा हो, काम कर सके;
[(iii) किसी सप्ताह काम के घण्टों की कुल संख्या, जिसके अन्तर्गत अतिकाल भी है, साठ से अधिक नहीं होगी;]
[(iv) अतिकाल के घंटों की कुल संख्या किसी एक तिमाही के लिए पचास से अधिक नहीं होगी ।
स्पष्टीकरण-“तिमाही" से लगातार तीन मास की वह कालावधि अभिप्रेत है जो पहली जनवरी, पहली अप्रैल, पहली जुलाई या पहली अक्तूबर को आंरभ हो ।]
(5) इस धारा के अधीन बनाए गए नियम [पांच वर्ष] से अनधिक के लिए प्रवृत्त रहेंगे ।
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