Factories Act 8अध्याय · The Inspecting Staff
धारा 8 · निरीक्षक
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों को, जिनके पास विहित अर्हताएं हों, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी और उन्हें ऐसी स्थानीय सीमाएं सौंप सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।
(2) राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी व्यक्ति को मुख्य निरीक्षण नियुक्त कर सकेगी, जो इस अधिनियम के अधीन मुख्य निरीक्षक को प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त राज्य भर में निरीक्षक की शक्तियों का भी प्रयोग करेगा ।
[(2क) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उतने अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक और उतने अन्य अधिकारी नियुक्त कर सकेगी जितने वह मुख्य निरीक्षक की सहायता करने और मुख्य निरीक्षक की ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए ठीक समझे, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं ।
(2ख) उपधारा (2क) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक और प्रत्येक अन्य अधिकारी, ऐसी अधिसूचना में, जिससे उसकी नियुक्ति की जाती है, विनिर्दिष्ट मुख्य निरीक्षक की शक्तियों के साथ-साथ निरीक्षक की शक्तियों का भी प्रयोग राज्य भर में करेगा ।]
(3) कोई व्यक्ति जो किसी कारखाने में या उसमें चलाई जाने वाली किसी प्रक्रिया या कारबार में या उससे संबंधित किसी पेटेंट या मशीनरी में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हितबद्ध है या हो जाता है वह उपधारा (1), उपधारा (2) 1[, उपधारा (2क)] या उपधारा (5) के अधीन नियुक्त नहीं किया जाएगा अथवा वैसे नियुक्त हो चुकने पर पद पर बना नहीं रहेगा ।
(4) प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट अपने जिले का निरीक्षक होगा ।
(5) राज्य सरकार, यथापूर्वोक्त अधिसूचना द्वारा, ऐसे लोक अधिकारियों को जैसे वह ठीक समझे, इस अधिनियम के सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए ऐसी स्थानीय सीमाओं के अन्दर, जैसी वह उन्हें क्रमशः सौंपे, अपर निरीक्षक भी नियुक्त कर सकेगी ।
(6) ऐसे किसी क्षेत्र में जहां एक से अधिक निरीक्षक हैं राज्य सरकार, यथापूर्वोक्त अधिसूचना द्वारा, वे शक्तियां जिन्हें ऐसे निरीक्षक क्रमशः प्रयुक्त करेंगे और वह निरीक्षक जिसको विहित सूचनाएं भेजी जानी हैं, घोषित कर सकेगी ।
(7) [इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक मुख्य निरीक्षक, अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक, निरीक्षक और प्रत्येक अन्य अधिकारी] भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा, और पदीय रूप से ऐसे प्राधिकारी के अधीनस्थ होगा जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।
(2) राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी व्यक्ति को मुख्य निरीक्षण नियुक्त कर सकेगी, जो इस अधिनियम के अधीन मुख्य निरीक्षक को प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त राज्य भर में निरीक्षक की शक्तियों का भी प्रयोग करेगा ।
[(2क) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उतने अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक और उतने अन्य अधिकारी नियुक्त कर सकेगी जितने वह मुख्य निरीक्षक की सहायता करने और मुख्य निरीक्षक की ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए ठीक समझे, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं ।
(2ख) उपधारा (2क) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक और प्रत्येक अन्य अधिकारी, ऐसी अधिसूचना में, जिससे उसकी नियुक्ति की जाती है, विनिर्दिष्ट मुख्य निरीक्षक की शक्तियों के साथ-साथ निरीक्षक की शक्तियों का भी प्रयोग राज्य भर में करेगा ।]
(3) कोई व्यक्ति जो किसी कारखाने में या उसमें चलाई जाने वाली किसी प्रक्रिया या कारबार में या उससे संबंधित किसी पेटेंट या मशीनरी में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हितबद्ध है या हो जाता है वह उपधारा (1), उपधारा (2) 1[, उपधारा (2क)] या उपधारा (5) के अधीन नियुक्त नहीं किया जाएगा अथवा वैसे नियुक्त हो चुकने पर पद पर बना नहीं रहेगा ।
(4) प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट अपने जिले का निरीक्षक होगा ।
(5) राज्य सरकार, यथापूर्वोक्त अधिसूचना द्वारा, ऐसे लोक अधिकारियों को जैसे वह ठीक समझे, इस अधिनियम के सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए ऐसी स्थानीय सीमाओं के अन्दर, जैसी वह उन्हें क्रमशः सौंपे, अपर निरीक्षक भी नियुक्त कर सकेगी ।
(6) ऐसे किसी क्षेत्र में जहां एक से अधिक निरीक्षक हैं राज्य सरकार, यथापूर्वोक्त अधिसूचना द्वारा, वे शक्तियां जिन्हें ऐसे निरीक्षक क्रमशः प्रयुक्त करेंगे और वह निरीक्षक जिसको विहित सूचनाएं भेजी जानी हैं, घोषित कर सकेगी ।
(7) [इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक मुख्य निरीक्षक, अपर मुख्य निरीक्षक, संयुक्त मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षक, निरीक्षक और प्रत्येक अन्य अधिकारी] भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा, और पदीय रूप से ऐसे प्राधिकारी के अधीनस्थ होगा जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।
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