Factories Act 7Bअध्याय · The Inspecting Staff
धारा 7B · कारखानों में प्रयोग के लिए वस्तुओं और पदार्थों की बाबत विनिर्माताओं, आदि के साधारण कर्तव्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी कारखाने में प्रयोग के लिए किसी वस्तु का अभिकल्प करता है, उसे विनिर्मित करता है, उसका आयात करता है या उसका प्रदाय करता है,-
(क) जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, यह सुनिश्चित करेगा कि वह वस्तु इस प्रकार अभिकल्पित और सन्निर्मित की गई है कि समुचित रूप से प्रयोग किए जाने पर वह सुरक्षित है और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित है;
(ख) ऐसे परीक्षण और परीक्षाएं करेगा या उनके किए जाने की व्यवस्था करेगा, जो खंड (क) के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझी जाएं;
(ग) ऐसे उपाय करेगा, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों कि निम्नलिखित के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है,-
(i) कारखाने में उस वस्तु का प्रयोग;
(ii) वह प्रयोग, जिसके लिए वह वस्तु अभिकल्पित और परीक्षित की गई है; और
(iii) वे शर्तें, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि वह वस्तु, प्रयोग किए जाने पर, सुरक्षित होगी और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित होगी:
परंतु जहां वह वस्तु भारत के बाहर अभिकल्पित या विनिर्मित की गई है, वहां आयातकर्ता के लिए यह देखना बाध्यकर होगा कि,-
(क) यदि ऐसी वस्तु भारत में विनिर्मित की जाती है, तो वह वस्तु उन्हीं मानकों के अनुरूप है, अथवा
(ख) यदि ऐसी वस्तु के विनिर्माण के लिए किसी विदेश में अंगीकृत मानक, भारत में अंगीकृत मानकों से उच्चतर हैं, तो वह वस्तु ऐसे मानकों के अनुरूप है ।
(2) प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी कारखाने में प्रयोग के लिए किसी वस्तु का अभिकल्प या विनिर्माण करने का वचन देता है, ऐसे किसी जोखिम का, जो ऐसे अभिकल्प या वस्तु से कर्मकारों के स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए उद्भूत हो सकता है, अभिनिश्चयन करने की और, जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, उसे समाप्त करने या न्यूनतम करने की दृष्टि से ऐसा अनुसंधान कर सकेगा या उसके किए जाने की व्यवस्था कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) की कोई बात यह अपेक्षा करने वाली नहीं समझी जाएगी कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे परीक्षण, परीक्षा या अन्वेषण की पुनःपरीक्षा करे, जो उसके द्वारा या उसके कहने पर किए जाने से अन्यथा किया गया है, यदि उक्त उपधाराओं के प्रयोजनों के लिए उसके परिणामों पर विश्वास करना उसके लिए युक्तियुक्त है ।
(4) उपधारा (1) और उपधारा (2) द्वारा किसी व्यक्ति पर अधिरोपित कोई कर्तव्य, केवल उन बातों तक विस्तारित होगा, जो उसके कारबार के अनुक्रम में और उसके नियंत्रणाधीन विषयों के संबंध में की जाती हैं ।
[(5) जहां कोई व्यक्ति किसी वस्तु का अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय ऐसी वस्तु के उपभोक्ता को दिए गए इस लिखित वचनबंध के आधार पर करता है कि वह, जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, यह सुनिश्चित करने के लिए वचनबंध में विनिर्दिष्ट उपाय करेगा कि वह वस्तु, समुचित रूप से प्रयोग किए जाने पर, सुरक्षित होगी और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित होगी, वहां ऐसे वचनबंध का यह प्रभाव होगा कि वह उस वस्तु का अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय करने वाले व्यक्ति को उपधारा (1) के खंड (क) द्वारा अधिरोपित कर्तव्य से उस विस्तार तक उन्मोचित कर देगा, जहां तक वह उस वचनबंध के निबंधनों को ध्यान में रखते हुए युक्तियुक्त हो ।]
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी वस्तु के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह समुचित रूप से प्रयोग की गई है, यदि वह उसके प्रयोग से संबंधित ऐसी किसी जानकारी या सलाह को ध्यान में लिए बिना प्रयोग की जाती है, जो उस व्यक्ति द्वारा दी गई है, जिसने उसका अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय किया था ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “वस्तु” के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी है ।
(क) जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, यह सुनिश्चित करेगा कि वह वस्तु इस प्रकार अभिकल्पित और सन्निर्मित की गई है कि समुचित रूप से प्रयोग किए जाने पर वह सुरक्षित है और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित है;
(ख) ऐसे परीक्षण और परीक्षाएं करेगा या उनके किए जाने की व्यवस्था करेगा, जो खंड (क) के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझी जाएं;
(ग) ऐसे उपाय करेगा, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों कि निम्नलिखित के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है,-
(i) कारखाने में उस वस्तु का प्रयोग;
(ii) वह प्रयोग, जिसके लिए वह वस्तु अभिकल्पित और परीक्षित की गई है; और
(iii) वे शर्तें, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि वह वस्तु, प्रयोग किए जाने पर, सुरक्षित होगी और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित होगी:
परंतु जहां वह वस्तु भारत के बाहर अभिकल्पित या विनिर्मित की गई है, वहां आयातकर्ता के लिए यह देखना बाध्यकर होगा कि,-
(क) यदि ऐसी वस्तु भारत में विनिर्मित की जाती है, तो वह वस्तु उन्हीं मानकों के अनुरूप है, अथवा
(ख) यदि ऐसी वस्तु के विनिर्माण के लिए किसी विदेश में अंगीकृत मानक, भारत में अंगीकृत मानकों से उच्चतर हैं, तो वह वस्तु ऐसे मानकों के अनुरूप है ।
(2) प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी कारखाने में प्रयोग के लिए किसी वस्तु का अभिकल्प या विनिर्माण करने का वचन देता है, ऐसे किसी जोखिम का, जो ऐसे अभिकल्प या वस्तु से कर्मकारों के स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए उद्भूत हो सकता है, अभिनिश्चयन करने की और, जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, उसे समाप्त करने या न्यूनतम करने की दृष्टि से ऐसा अनुसंधान कर सकेगा या उसके किए जाने की व्यवस्था कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) की कोई बात यह अपेक्षा करने वाली नहीं समझी जाएगी कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे परीक्षण, परीक्षा या अन्वेषण की पुनःपरीक्षा करे, जो उसके द्वारा या उसके कहने पर किए जाने से अन्यथा किया गया है, यदि उक्त उपधाराओं के प्रयोजनों के लिए उसके परिणामों पर विश्वास करना उसके लिए युक्तियुक्त है ।
(4) उपधारा (1) और उपधारा (2) द्वारा किसी व्यक्ति पर अधिरोपित कोई कर्तव्य, केवल उन बातों तक विस्तारित होगा, जो उसके कारबार के अनुक्रम में और उसके नियंत्रणाधीन विषयों के संबंध में की जाती हैं ।
[(5) जहां कोई व्यक्ति किसी वस्तु का अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय ऐसी वस्तु के उपभोक्ता को दिए गए इस लिखित वचनबंध के आधार पर करता है कि वह, जहां तक युक्तियुक्त रूप से साध्य हो, यह सुनिश्चित करने के लिए वचनबंध में विनिर्दिष्ट उपाय करेगा कि वह वस्तु, समुचित रूप से प्रयोग किए जाने पर, सुरक्षित होगी और कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम से रहित होगी, वहां ऐसे वचनबंध का यह प्रभाव होगा कि वह उस वस्तु का अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय करने वाले व्यक्ति को उपधारा (1) के खंड (क) द्वारा अधिरोपित कर्तव्य से उस विस्तार तक उन्मोचित कर देगा, जहां तक वह उस वचनबंध के निबंधनों को ध्यान में रखते हुए युक्तियुक्त हो ।]
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी वस्तु के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह समुचित रूप से प्रयोग की गई है, यदि वह उसके प्रयोग से संबंधित ऐसी किसी जानकारी या सलाह को ध्यान में लिए बिना प्रयोग की जाती है, जो उस व्यक्ति द्वारा दी गई है, जिसने उसका अभिकल्प, विनिर्माण, आयात या प्रदाय किया था ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “वस्तु” के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी है ।
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