Factories Act 89अध्याय IX · Special Provisions
धारा 89 · कतिपय रोगों की सूचना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां किसी कारखाने में किसी कर्मकार को, 4[तीसरी अनुसूची] में विनिर्दिष्ट कोई रोग लग जाए वहां कारखाने का प्रबन्धक उसकी सूचना ऐसे प्राधिकारियों को और ऐसे प्ररूप में और इतने समय के अन्दर भेजेगा जो विहित किया जाए ।
(2) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी किसी ऐसे व्यक्ति की चिकित्सा करता है, जो किसी कारखाने में नियोजित है या रहा है और जो [तीसरी अनुसूची] में विनिर्दिष्ट किसी रोग से पीड़ित है या जिसके बारे में चिकित्सा-व्यवसायी को विश्वास है कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है तो चिकित्सा व्यवसायी अविलम्ब एक लिखित रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक के कार्यालय को भेजेगा जिसमें-
(क) चिकित्साधीन व्यक्ति का नाम और डाक का पूरा पता दिया होगा,
(ख) वह रोग कथित होगा जिससे चिकित्साधीन व्यक्ति के पीड़ित होने का उसे विश्वास है, और
(ग) उस कारखाने का नाम और पता दिया होगा जिसमें चिकित्साधीन व्यक्ति नियोजित है या अन्तिम बार नियोजित था ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन रिपोर्ट की, प्रमाणकर्ता सर्जन के प्रमाणपत्र से या अन्यथा, मुख्य निरीक्षक की समाधानप्रद रूप में पुष्टि हो जाती है कि वह व्यक्ति अनुसूची में विनिर्दिष्ट रोग से पीड़ित है वहां वह चिकित्सा-व्यवसायी को ऐसी फीस संदत्त करेगा जैसी विहित की जाए और ऐसी संदत्त फीस उस कारखाने के अधिष्ठाता से, जिसमें उस व्यक्ति को रोग लगा था, भूराजस्व की बकाया के रूप में वसूलीय होगी ।
(4) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी उपधारा (2) के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल होगा तो वह जुर्माने से, जो [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
[(5) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तीसरी अनुसूची का परिवर्धन या परिवर्तन कर सकेगी और किसी ऐसे परिर्वधन या परिवर्तन का वही प्रभाव होगा मानो वह इस अधिनियम द्वारा किया गया है ।]
(2) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी किसी ऐसे व्यक्ति की चिकित्सा करता है, जो किसी कारखाने में नियोजित है या रहा है और जो [तीसरी अनुसूची] में विनिर्दिष्ट किसी रोग से पीड़ित है या जिसके बारे में चिकित्सा-व्यवसायी को विश्वास है कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है तो चिकित्सा व्यवसायी अविलम्ब एक लिखित रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक के कार्यालय को भेजेगा जिसमें-
(क) चिकित्साधीन व्यक्ति का नाम और डाक का पूरा पता दिया होगा,
(ख) वह रोग कथित होगा जिससे चिकित्साधीन व्यक्ति के पीड़ित होने का उसे विश्वास है, और
(ग) उस कारखाने का नाम और पता दिया होगा जिसमें चिकित्साधीन व्यक्ति नियोजित है या अन्तिम बार नियोजित था ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन रिपोर्ट की, प्रमाणकर्ता सर्जन के प्रमाणपत्र से या अन्यथा, मुख्य निरीक्षक की समाधानप्रद रूप में पुष्टि हो जाती है कि वह व्यक्ति अनुसूची में विनिर्दिष्ट रोग से पीड़ित है वहां वह चिकित्सा-व्यवसायी को ऐसी फीस संदत्त करेगा जैसी विहित की जाए और ऐसी संदत्त फीस उस कारखाने के अधिष्ठाता से, जिसमें उस व्यक्ति को रोग लगा था, भूराजस्व की बकाया के रूप में वसूलीय होगी ।
(4) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी उपधारा (2) के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल होगा तो वह जुर्माने से, जो [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
[(5) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तीसरी अनुसूची का परिवर्धन या परिवर्तन कर सकेगी और किसी ऐसे परिर्वधन या परिवर्तन का वही प्रभाव होगा मानो वह इस अधिनियम द्वारा किया गया है ।]
अपराध एक नज़र में
- जुर्माना
- ₹1,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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