Factories Act 101अध्याय X · Penalties and Procedure
धारा 101 · कतिपय दशाओं में अधिष्ठाता या प्रबंधक को दायित्व से छूट
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जहां कारखाने के अधिष्ठाता या प्रबन्धक पर इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध आरोपित है वहां वह अपने द्वारा सम्यक् रूप से किए गए परिवाद पर और अपने ऐसा करने के आशय की अभियोजक को अन्यून तीन पूर्ण दिन की लिखित सूचना देने पर इस बात के लिए हकदार होगा कि वह ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिस पर वह वास्तविक अपराधी होने का आरोप लगाता है, न्यायालय के समक्ष आरोप की सुनवाई के लिए नियत समय पर पेश करवाए और यदि अपराध का किया जाना साबित हो जाने के पश्चात्, यथास्थिति, कारखाने का अधिष्ठाता या प्रबन्धक न्यायालय को समाधानप्रद रूप में साबित कर देता है-
(क) कि इस अधिनियम का निष्पादन प्रवर्तित कराने के लिए उसने सम्यक् तत्परता बरती है; और
(ख) कि उक्त अन्य व्यक्ति ने प्रश्नगत अपराध उसके ज्ञान, सम्मति या मौनानुकूलता के बिना किया है,
तो वह अन्य व्यक्ति अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाएगा और ऐसे दण्डनीय होगा मानो वह कारखाने का अधिष्ठाता या प्रबन्धक हो और, यथास्थिति, अधिष्ठाता या प्रबंधक ऐसे अपराध के लिए इस अधिनियम के अधीन किसी दायित्व से उन्मोचित कर दिया जाएगा :
परन्तु यथापूर्वोक्त साबित करने के प्रयास में, यथास्थिति, कारखाने के अधिष्ठाता या प्रबन्धक की शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी और उसका और ऐसे किसी साक्षी का साक्ष्य, जिसे अपने समर्थन में वह पेश करता है, उस व्यक्ति की ओर से, जिसे वह वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित करता है, और अभियोजक द्वारा प्रतिपरीक्षा के अध्यधीन होगा :
परन्तु यह और कि यदि अधिष्ठाता या प्रबन्धक द्वारा वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति न्यायालय के समक्ष आरोप की सुनवाई के लिए नियत समय पर नहीं लाया जा सकता तो न्यायालय इतनी कालावधि तक, जो तीन मास से अनधिक होगी, समय-समय पर सुनवाई को स्थगित करेगा और यदि उक्त कालावधि का अन्त होने तक भी वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता तो न्यायालय अधिष्ठाता या प्रबन्धक के खिलाफ आरोप की सुनवाई के लिए अग्रसर होगा और यदि अपराध साबित हो जाए तो अधिष्ठाता या प्रबन्धक को सिद्धदोष ठहराएगा ।
(क) कि इस अधिनियम का निष्पादन प्रवर्तित कराने के लिए उसने सम्यक् तत्परता बरती है; और
(ख) कि उक्त अन्य व्यक्ति ने प्रश्नगत अपराध उसके ज्ञान, सम्मति या मौनानुकूलता के बिना किया है,
तो वह अन्य व्यक्ति अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाएगा और ऐसे दण्डनीय होगा मानो वह कारखाने का अधिष्ठाता या प्रबन्धक हो और, यथास्थिति, अधिष्ठाता या प्रबंधक ऐसे अपराध के लिए इस अधिनियम के अधीन किसी दायित्व से उन्मोचित कर दिया जाएगा :
परन्तु यथापूर्वोक्त साबित करने के प्रयास में, यथास्थिति, कारखाने के अधिष्ठाता या प्रबन्धक की शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी और उसका और ऐसे किसी साक्षी का साक्ष्य, जिसे अपने समर्थन में वह पेश करता है, उस व्यक्ति की ओर से, जिसे वह वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित करता है, और अभियोजक द्वारा प्रतिपरीक्षा के अध्यधीन होगा :
परन्तु यह और कि यदि अधिष्ठाता या प्रबन्धक द्वारा वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति न्यायालय के समक्ष आरोप की सुनवाई के लिए नियत समय पर नहीं लाया जा सकता तो न्यायालय इतनी कालावधि तक, जो तीन मास से अनधिक होगी, समय-समय पर सुनवाई को स्थगित करेगा और यदि उक्त कालावधि का अन्त होने तक भी वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता तो न्यायालय अधिष्ठाता या प्रबन्धक के खिलाफ आरोप की सुनवाई के लिए अग्रसर होगा और यदि अपराध साबित हो जाए तो अधिष्ठाता या प्रबन्धक को सिद्धदोष ठहराएगा ।
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