LL Act 59अध्याय XV · Miscellaneous
धारा 59 · नियम बनाने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ई) में निर्दिष्ट शिकायत का प्रपत्र;
(ख) खोज समिति का कार्यकाल, उसके सदस्यों को देय शुल्क और भत्ते तथा धारा 4 की उपधारा (5) के अंतर्गत नामों के पैनल के चयन का तरीका;
(ग) वह पद या वे पद जिनके संबंध में धारा 10 की उपधारा (3) के परंतुक के अधीन संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श के बाद नियुक्ति की जाएगी;
(घ) अन्य मामले जिनके लिए लोकपाल को धारा 27 की उपधारा (1) के खंड (छठी) के अधीन दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी;
(ई) धारा 29 की उपधारा (2) के अंतर्गत विशेष न्यायालय को सामग्री सहित कुर्की का आदेश भेजने का तरीका;
(f) धारा 36 की उपधारा (2) के तहत अनुरोध पत्र भेजने का तरीका;
(जी) प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट तैयार करने का प्रारूप और समय, जिसमें धारा 40 के अंतर्गत लोकपाल की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय को दर्शाया गया हो;
(h) खातों और अन्य संबंधित अभिलेखों को बनाए रखने का प्रपत्र तथा धारा 42 की उपधारा (1) के अधीन खातों के वार्षिक विवरण का प्रपत्र;
(i) धारा 43 के अंतर्गत विवरण सहित रिटर्न और विवरण तैयार करने का प्रपत्र, तरीका और समय;
(j) धारा 44 की उपधारा (5) के अधीन पूर्व वर्ष के दौरान अपनी गतिविधियों का सारांश प्रस्तुत करने वाला वार्षिक विवरण तैयार करने का प्रपत्र और समय;
1 [(के) धारा 44 के अधीन लोक सेवकों द्वारा परिसंपत्तियों और देनदारियों की घोषणा का प्रपत्र और तरीका:
बशर्ते कि इस खंड के अंतर्गत नियम इस अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की तिथि से पूर्वव्यापी रूप से लागू किए जा सकते हैं;]
(एल) वह न्यूनतम मूल्य जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी धारा 45 के परंतुक के अंतर्गत परिसंपत्तियों के संबंध में सूचना प्रस्तुत करने से किसी लोक सेवक को क्षमा या छूट दे सकता है;
(m) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जाना है या निर्धारित किया जा सकता है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ई) में निर्दिष्ट शिकायत का प्रपत्र;
(ख) खोज समिति का कार्यकाल, उसके सदस्यों को देय शुल्क और भत्ते तथा धारा 4 की उपधारा (5) के अंतर्गत नामों के पैनल के चयन का तरीका;
(ग) वह पद या वे पद जिनके संबंध में धारा 10 की उपधारा (3) के परंतुक के अधीन संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श के बाद नियुक्ति की जाएगी;
(घ) अन्य मामले जिनके लिए लोकपाल को धारा 27 की उपधारा (1) के खंड (छठी) के अधीन दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी;
(ई) धारा 29 की उपधारा (2) के अंतर्गत विशेष न्यायालय को सामग्री सहित कुर्की का आदेश भेजने का तरीका;
(f) धारा 36 की उपधारा (2) के तहत अनुरोध पत्र भेजने का तरीका;
(जी) प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट तैयार करने का प्रारूप और समय, जिसमें धारा 40 के अंतर्गत लोकपाल की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय को दर्शाया गया हो;
(h) खातों और अन्य संबंधित अभिलेखों को बनाए रखने का प्रपत्र तथा धारा 42 की उपधारा (1) के अधीन खातों के वार्षिक विवरण का प्रपत्र;
(i) धारा 43 के अंतर्गत विवरण सहित रिटर्न और विवरण तैयार करने का प्रपत्र, तरीका और समय;
(j) धारा 44 की उपधारा (5) के अधीन पूर्व वर्ष के दौरान अपनी गतिविधियों का सारांश प्रस्तुत करने वाला वार्षिक विवरण तैयार करने का प्रपत्र और समय;
1 [(के) धारा 44 के अधीन लोक सेवकों द्वारा परिसंपत्तियों और देनदारियों की घोषणा का प्रपत्र और तरीका:
बशर्ते कि इस खंड के अंतर्गत नियम इस अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की तिथि से पूर्वव्यापी रूप से लागू किए जा सकते हैं;]
(एल) वह न्यूनतम मूल्य जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी धारा 45 के परंतुक के अंतर्गत परिसंपत्तियों के संबंध में सूचना प्रस्तुत करने से किसी लोक सेवक को क्षमा या छूट दे सकता है;
(m) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जाना है या निर्धारित किया जा सकता है।
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