LL Act 16अध्याय VI · Jurisdiction in Respect of Inquiry
धारा 16 · लोकपाल पीठों का गठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए,—
(क) लोकपाल के अधिकार क्षेत्र का प्रयोग उसकी पीठों द्वारा किया जा सकता है;
(ख) अध्यक्ष द्वारा दो या दो से अधिक सदस्यों वाली पीठ का गठन किया जा सकता है, जैसा कि अध्यक्ष उचित समझे;
(ग) प्रत्येक पीठ में सामान्यतः कम से कम एक न्यायिक सदस्य होगा;
(घ) जहां किसी पीठ में अध्यक्ष शामिल हो, वहां ऐसी पीठ की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाएगी;
(ई) जहां किसी पीठ में न्यायिक सदस्य और गैर-न्यायिक सदस्य हों, जो अध्यक्ष न हों, तो ऐसी पीठ की अध्यक्षता न्यायिक सदस्य द्वारा की जाएगी;
(f) लोकपाल की पीठें सामान्यतः नई दिल्ली में तथा ऐसे अन्य स्थानों पर बैठेंगी जिन्हें लोकपाल विनियमों द्वारा निर्दिष्ट करे।
(2) लोकपाल उन क्षेत्रों को अधिसूचित करेगा जिनके संबंध में लोकपाल की प्रत्येक पीठ क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकती है।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष को समय-समय पर पीठों का गठन या पुनर्गठन करने का अधिकार होगा।
(4) यदि किसी मामले या विषय की सुनवाई के किसी भी चरण में अध्यक्ष या किसी सदस्य को यह प्रतीत हो कि मामला या विषय इस प्रकार का है कि इसकी सुनवाई तीन या दो से अधिक सदस्यों वाली पीठ द्वारा की जानी चाहिए, तो अध्यक्ष द्वारा मामले या विषय को ऐसे पीठ को स्थानांतरित किया जा सकता है जिसे अध्यक्ष उचित समझे, या जैसा भी मामला हो, उसे स्थानांतरण के लिए संदर्भित किया जा सकता है।
(क) लोकपाल के अधिकार क्षेत्र का प्रयोग उसकी पीठों द्वारा किया जा सकता है;
(ख) अध्यक्ष द्वारा दो या दो से अधिक सदस्यों वाली पीठ का गठन किया जा सकता है, जैसा कि अध्यक्ष उचित समझे;
(ग) प्रत्येक पीठ में सामान्यतः कम से कम एक न्यायिक सदस्य होगा;
(घ) जहां किसी पीठ में अध्यक्ष शामिल हो, वहां ऐसी पीठ की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाएगी;
(ई) जहां किसी पीठ में न्यायिक सदस्य और गैर-न्यायिक सदस्य हों, जो अध्यक्ष न हों, तो ऐसी पीठ की अध्यक्षता न्यायिक सदस्य द्वारा की जाएगी;
(f) लोकपाल की पीठें सामान्यतः नई दिल्ली में तथा ऐसे अन्य स्थानों पर बैठेंगी जिन्हें लोकपाल विनियमों द्वारा निर्दिष्ट करे।
(2) लोकपाल उन क्षेत्रों को अधिसूचित करेगा जिनके संबंध में लोकपाल की प्रत्येक पीठ क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकती है।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष को समय-समय पर पीठों का गठन या पुनर्गठन करने का अधिकार होगा।
(4) यदि किसी मामले या विषय की सुनवाई के किसी भी चरण में अध्यक्ष या किसी सदस्य को यह प्रतीत हो कि मामला या विषय इस प्रकार का है कि इसकी सुनवाई तीन या दो से अधिक सदस्यों वाली पीठ द्वारा की जानी चाहिए, तो अध्यक्ष द्वारा मामले या विषय को ऐसे पीठ को स्थानांतरित किया जा सकता है जिसे अध्यक्ष उचित समझे, या जैसा भी मामला हो, उसे स्थानांतरण के लिए संदर्भित किया जा सकता है।
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