LL Act 37अध्याय X · Complaints Against Chairperson, Members and Officials of Lokpal
धारा 37 · लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों को पद से हटाना और निलंबित करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) लोकपाल अध्यक्ष या किसी सदस्य के विरुद्ध की गई किसी शिकायत की जाँच नहीं करेगा।
(2) उपधारा (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा दुर्व्यवहार के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, यदि सर्वोच्च न्यायालय ने, संसद के कम से कम सौ सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका पर राष्ट्रपति द्वारा उसे संदर्भित किए जाने पर, इस संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई जांच के बाद यह रिपोर्ट दी हो कि अध्यक्ष या ऐसा सदस्य, जैसा भी मामला हो, को ऐसे आधार पर हटाया जाना चाहिए।
(3) राष्ट्रपति, उपधारा (2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए संदर्भ के संबंध में अध्यक्ष या किसी सदस्य को, इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई सिफारिश या अंतरिम आदेश प्राप्त होने पर, तब तक पद से निलंबित कर सकते हैं जब तक कि राष्ट्रपति ऐसे संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर आदेश पारित न कर दें।
(4) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष आदेश द्वारा अध्यक्ष या किसी सदस्य को, जैसा भी मामला हो, पद से हटा सकता है,—
(क) दिवालिया घोषित किया गया हो; या
(ख) अपने कार्यकाल के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से इतर किसी भी सवैतनिक रोजगार में संलग्न होता है; या
(ग) राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक दुर्बलता के कारण पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है।
(5) यदि अध्यक्ष या कोई सदस्य भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी अनुबंध या समझौते में किसी भी तरह से संबंधित या हितधारक हो जाता है, या निगमित कंपनी के सदस्य के रूप में और अन्य सदस्यों के साथ सामान्य रूप से भाग लेने के अलावा, उसके लाभ में या उससे उत्पन्न होने वाले किसी लाभ या पारिश्रमिक में किसी भी तरह से भाग लेता है, तो उप-धारा (2) के प्रयोजनों के लिए, उसे कदाचार का दोषी माना जाएगा।
(2) उपधारा (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा दुर्व्यवहार के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, यदि सर्वोच्च न्यायालय ने, संसद के कम से कम सौ सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका पर राष्ट्रपति द्वारा उसे संदर्भित किए जाने पर, इस संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई जांच के बाद यह रिपोर्ट दी हो कि अध्यक्ष या ऐसा सदस्य, जैसा भी मामला हो, को ऐसे आधार पर हटाया जाना चाहिए।
(3) राष्ट्रपति, उपधारा (2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए संदर्भ के संबंध में अध्यक्ष या किसी सदस्य को, इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई सिफारिश या अंतरिम आदेश प्राप्त होने पर, तब तक पद से निलंबित कर सकते हैं जब तक कि राष्ट्रपति ऐसे संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर आदेश पारित न कर दें।
(4) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष आदेश द्वारा अध्यक्ष या किसी सदस्य को, जैसा भी मामला हो, पद से हटा सकता है,—
(क) दिवालिया घोषित किया गया हो; या
(ख) अपने कार्यकाल के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से इतर किसी भी सवैतनिक रोजगार में संलग्न होता है; या
(ग) राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक दुर्बलता के कारण पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है।
(5) यदि अध्यक्ष या कोई सदस्य भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से किए गए किसी अनुबंध या समझौते में किसी भी तरह से संबंधित या हितधारक हो जाता है, या निगमित कंपनी के सदस्य के रूप में और अन्य सदस्यों के साथ सामान्य रूप से भाग लेने के अलावा, उसके लाभ में या उससे उत्पन्न होने वाले किसी लाभ या पारिश्रमिक में किसी भी तरह से भाग लेता है, तो उप-धारा (2) के प्रयोजनों के लिए, उसे कदाचार का दोषी माना जाएगा।
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