LL Act 29अध्याय VIII · Powers of Lokpal
धारा 29 · संपत्तियों की अस्थायी कुर्की।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ लोकपाल या इस संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण हो, तो उसके पास मौजूद सामग्री के आधार पर ऐसे विश्वास का कारण लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा कि—
(क) कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार से प्राप्त किसी धन को अपने कब्जे में रखता है;
(ख) ऐसे व्यक्ति पर भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध करने का आरोप है; और
(ग) अपराध से प्राप्त ऐसी धनराशि को छुपाया, स्थानांतरित किया या किसी ऐसे तरीके से निपटाया जा सकता है जिससे अपराध से प्राप्त ऐसी धनराशि की जब्ती से संबंधित किसी भी कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
लोकपाल या अधिकृत अधिकारी, लिखित आदेश द्वारा, आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) की दूसरी अनुसूची में दिए गए तरीके से, आदेश की तिथि से नब्बे दिनों से अधिक की अवधि के लिए ऐसी संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकता है, और लोकपाल और अधिकारी को उस अनुसूची के नियम 1 के उप-नियम (ई) के अंतर्गत अधिकारी माना जाएगा।
(2) लोकपाल या इस संबंध में अधिकृत अधिकारी, उपधारा (1) के तहत कुर्की के तुरंत बाद, आदेश की एक प्रति, उस उपधारा में निर्दिष्ट सामग्री सहित, अपने कब्जे में मौजूद सामग्री के साथ, विशेष न्यायालय को सीलबंद लिफाफे में, निर्धारित तरीके से भेजेगा और ऐसा न्यायालय कुर्की के आदेश को बढ़ा सकता है और ऐसी सामग्री को ऐसे समय तक रख सकता है जैसा न्यायालय उचित समझे।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी किया गया प्रत्येक कुर्की आदेश उस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के बाद या उपधारा (2) के तहत विशेष न्यायालय द्वारा निर्देशित अवधि की समाप्ति के बाद प्रभावी नहीं रहेगा।
(4) इस धारा में कोई बात उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कुर्क की गई अचल संपत्ति के उपभोग में रुचि रखने वाले व्यक्ति को ऐसे उपभोग से नहीं रोकेगी।
स्पष्टीकरण. —इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी अचल संपत्ति के संबंध में "हितधारक व्यक्ति" में वे सभी व्यक्ति शामिल हैं जो संपत्ति में किसी हित का दावा करते हैं या दावा करने के हकदार हैं।
(क) कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार से प्राप्त किसी धन को अपने कब्जे में रखता है;
(ख) ऐसे व्यक्ति पर भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध करने का आरोप है; और
(ग) अपराध से प्राप्त ऐसी धनराशि को छुपाया, स्थानांतरित किया या किसी ऐसे तरीके से निपटाया जा सकता है जिससे अपराध से प्राप्त ऐसी धनराशि की जब्ती से संबंधित किसी भी कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
लोकपाल या अधिकृत अधिकारी, लिखित आदेश द्वारा, आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) की दूसरी अनुसूची में दिए गए तरीके से, आदेश की तिथि से नब्बे दिनों से अधिक की अवधि के लिए ऐसी संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकता है, और लोकपाल और अधिकारी को उस अनुसूची के नियम 1 के उप-नियम (ई) के अंतर्गत अधिकारी माना जाएगा।
(2) लोकपाल या इस संबंध में अधिकृत अधिकारी, उपधारा (1) के तहत कुर्की के तुरंत बाद, आदेश की एक प्रति, उस उपधारा में निर्दिष्ट सामग्री सहित, अपने कब्जे में मौजूद सामग्री के साथ, विशेष न्यायालय को सीलबंद लिफाफे में, निर्धारित तरीके से भेजेगा और ऐसा न्यायालय कुर्की के आदेश को बढ़ा सकता है और ऐसी सामग्री को ऐसे समय तक रख सकता है जैसा न्यायालय उचित समझे।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी किया गया प्रत्येक कुर्की आदेश उस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के बाद या उपधारा (2) के तहत विशेष न्यायालय द्वारा निर्देशित अवधि की समाप्ति के बाद प्रभावी नहीं रहेगा।
(4) इस धारा में कोई बात उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कुर्क की गई अचल संपत्ति के उपभोग में रुचि रखने वाले व्यक्ति को ऐसे उपभोग से नहीं रोकेगी।
स्पष्टीकरण. —इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी अचल संपत्ति के संबंध में "हितधारक व्यक्ति" में वे सभी व्यक्ति शामिल हैं जो संपत्ति में किसी हित का दावा करते हैं या दावा करने के हकदार हैं।
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