LL Act 23अध्याय VII · Procedure in Respect of Preliminary Inquiry and Investigation
धारा 23 · अभियोजन शुरू करने की मंजूरी देने का लोकपाल का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) की धारा 197 या दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 (25 ऑफ 1946) की धारा 6ए या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 19 में निहित किसी भी बात के बावजूद, लोकपाल को धारा 20 की उपधारा (7) के खंड (क) के तहत अभियोजन के लिए स्वीकृति देने का अधिकार होगा।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी लोक सेवक के विरुद्ध कोई अभियोग आरंभ नहीं किया जाएगा, जिस पर उसके द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में कार्य करते समय या कार्य करने का आशय रखते हुए किए गए किसी अपराध का आरोप हो, और कोई न्यायालय लोकपाल की पूर्व स्वीकृति के बिना ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।
(3) उपधारा (1) और (2) में निहित कोई भी बात संविधान के प्रावधानों के अनुसरण में पद धारण करने वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी, जिनके संबंध में ऐसे व्यक्ति को हटाने की प्रक्रिया उसमें निर्दिष्ट की गई है।
(4) उपधारा (1) , (2) और (3) में निहित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 311 और अनुच्छेद 320 के खंड (3) के उपखंड (सी) में निहित प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी लोक सेवक के विरुद्ध कोई अभियोग आरंभ नहीं किया जाएगा, जिस पर उसके द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में कार्य करते समय या कार्य करने का आशय रखते हुए किए गए किसी अपराध का आरोप हो, और कोई न्यायालय लोकपाल की पूर्व स्वीकृति के बिना ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।
(3) उपधारा (1) और (2) में निहित कोई भी बात संविधान के प्रावधानों के अनुसरण में पद धारण करने वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी, जिनके संबंध में ऐसे व्यक्ति को हटाने की प्रक्रिया उसमें निर्दिष्ट की गई है।
(4) उपधारा (1) , (2) और (3) में निहित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 311 और अनुच्छेद 320 के खंड (3) के उपखंड (सी) में निहित प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे।
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