LL Act 14अध्याय VI · Jurisdiction in Respect of Inquiry
धारा 14 · लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री, मंत्रीगण, संसद सदस्य, समूह ए, बी, सी और डी के अधिकारी और केंद्र सरकार के कर्मचारी शामिल होंगे।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, लोकपाल निम्नलिखित मामलों में भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप से संबंधित, उससे उत्पन्न होने वाले या उससे जुड़े किसी भी मामले की जांच करेगा या करवाएगा, अर्थात्:—
(क) कोई भी व्यक्ति जो प्रधानमंत्री है या रह चुका है:
बशर्ते कि लोकपाल प्रधानमंत्री के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप से संबंधित, उससे उत्पन्न होने वाले या उससे जुड़े किसी भी मामले की जांच नहीं करेगा,—
(i) जहां तक यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित है;
(ii) जब तक लोकपाल की पूर्ण पीठ, जिसमें उसके अध्यक्ष और सभी सदस्य शामिल हों, जांच शुरू करने पर विचार न करे और उसके कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसी जांच को मंजूरी न दें:
इसके अलावा, ऐसी कोई भी जांच गुप्त रूप से की जाएगी और यदि लोकपाल इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायत खारिज किए जाने योग्य है, तो जांच के रिकॉर्ड प्रकाशित नहीं किए जाएंगे या किसी को भी उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे;
(ख) कोई भी व्यक्ति जो संघ का मंत्री है या रह चुका है;
(ग) कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य है या रह चुका है;
(घ) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (ग) के उपखंड (i) और (ii) में परिभाषित लोक सेवकों में से कोई भी समूह 'ए' या समूह 'बी' अधिकारी या समकक्ष या उससे ऊपर का अधिकारी, संघ के मामलों के संबंध में सेवा करते समय या सेवा कर चुका हो;
(ई) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (सी) के उपखंड (आई) और (आईआई) में परिभाषित लोक सेवकों में से कोई समूह 'सी' या समूह 'डी' अधिकारी या समकक्ष, जब वह संघ के मामलों के संबंध में धारा 20 की उपधारा (1) के प्रावधान के अधीन सेवा कर रहा हो या कर चुका हो;
(f) कोई भी व्यक्ति जो संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) का अध्यक्ष या सदस्य या अधिकारी या कर्मचारी रहा हो या है, या केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः या आंशिक रूप से वित्तपोषित या उसके द्वारा नियंत्रित हो:
बशर्ते कि खंड (घ) में निर्दिष्ट ऐसे अधिकारियों के संबंध में, जिन्होंने संघ के मामलों के संबंध में या खंड (ङ) में निर्दिष्ट किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय में सेवा की हो, लेकिन राज्य के मामलों के संबंध में या राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित या राज्य सरकार द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित या उसके द्वारा नियंत्रित किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में कार्यरत हों, लोकपाल और उसके जांच विंग या अभियोजन विंग के अधिकारियों को ऐसे अधिकारियों के संबंध में इस अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र केवल संबंधित राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करने के बाद ही होगा;
(जी) कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य समाज या व्यक्तियों के संघ या ट्रस्ट (चाहे वह उस समय लागू किसी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं), चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, जो पूर्णतः या आंशिक रूप से सरकार द्वारा वित्तपोषित है और जिसकी वार्षिक आय केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट राशि से अधिक है, का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है;
(h) कोई भी व्यक्ति जो विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (42 ऑफ 2010) के तहत किसी विदेशी स्रोत से एक वर्ष में दस लाख रुपये से अधिक या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट ऐसी उच्च राशि का कोई भी दान प्राप्त करने वाले किसी अन्य समाज या व्यक्तियों के संघ या ट्रस्ट (चाहे वह उस समय लागू किसी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं) का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है।
स्पष्टीकरण. —धारा (f) और (g) के प्रयोजन के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई भी इकाई या संस्था, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, निगम, समाज, ट्रस्ट, व्यक्तियों का संघ, साझेदारी, एकल स्वामित्व, सीमित देयता साझेदारी (चाहे वह उस समय लागू किसी भी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं), उन धाराओं के अंतर्गत आने वाली इकाइयाँ होंगी।
बशर्ते कि इस खंड में निर्दिष्ट कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (सी) के तहत लोक सेवक माना जाएगा और उस अधिनियम के प्रावधान तदनुसार लागू होंगे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, लोकपाल संसद के किसी सदन के किसी सदस्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी आरोप से संबंधित, या उससे उत्पन्न होने वाले, या उससे जुड़े किसी मामले की जाँच नहीं करेगा, चाहे वह आरोप संसद में उसके द्वारा कहे गए किसी कथन या दिए गए किसी मत से संबंधित हो, या संविधान के अनुच्छेद 105 के खंड (2) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आता हो।
(3) लोकपाल उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के किसी कृत्य या आचरण की जाँच कर सकता है, यदि ऐसा व्यक्ति उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) के तहत भ्रष्टाचार के किसी आरोप से संबंधित उकसाने, रिश्वत देने या रिश्वत लेने या षड्यंत्र रचने के कृत्य में संलिप्त हो।
परंतु, किसी राज्य के मामलों से संबंधित कार्य में कार्यरत व्यक्ति के मामले में राज्य सरकार की सहमति के बिना इस धारा के अंतर्गत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
(4) कोई भी मामला जिसके संबंध में इस अधिनियम के तहत लोकपाल को शिकायत की गई है, उसे जांच आयोग अधिनियम, 1952 (60 ऑफ 1952) के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा।
स्पष्टीकरण. —संदेहों को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत शिकायत केवल उस अवधि से संबंधित होगी जिसके दौरान लोक सेवक उस पद पर कार्यरत था या सेवा कर रहा था।
(क) कोई भी व्यक्ति जो प्रधानमंत्री है या रह चुका है:
बशर्ते कि लोकपाल प्रधानमंत्री के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप से संबंधित, उससे उत्पन्न होने वाले या उससे जुड़े किसी भी मामले की जांच नहीं करेगा,—
(i) जहां तक यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित है;
(ii) जब तक लोकपाल की पूर्ण पीठ, जिसमें उसके अध्यक्ष और सभी सदस्य शामिल हों, जांच शुरू करने पर विचार न करे और उसके कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसी जांच को मंजूरी न दें:
इसके अलावा, ऐसी कोई भी जांच गुप्त रूप से की जाएगी और यदि लोकपाल इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायत खारिज किए जाने योग्य है, तो जांच के रिकॉर्ड प्रकाशित नहीं किए जाएंगे या किसी को भी उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे;
(ख) कोई भी व्यक्ति जो संघ का मंत्री है या रह चुका है;
(ग) कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य है या रह चुका है;
(घ) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (ग) के उपखंड (i) और (ii) में परिभाषित लोक सेवकों में से कोई भी समूह 'ए' या समूह 'बी' अधिकारी या समकक्ष या उससे ऊपर का अधिकारी, संघ के मामलों के संबंध में सेवा करते समय या सेवा कर चुका हो;
(ई) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (सी) के उपखंड (आई) और (आईआई) में परिभाषित लोक सेवकों में से कोई समूह 'सी' या समूह 'डी' अधिकारी या समकक्ष, जब वह संघ के मामलों के संबंध में धारा 20 की उपधारा (1) के प्रावधान के अधीन सेवा कर रहा हो या कर चुका हो;
(f) कोई भी व्यक्ति जो संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) का अध्यक्ष या सदस्य या अधिकारी या कर्मचारी रहा हो या है, या केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः या आंशिक रूप से वित्तपोषित या उसके द्वारा नियंत्रित हो:
बशर्ते कि खंड (घ) में निर्दिष्ट ऐसे अधिकारियों के संबंध में, जिन्होंने संघ के मामलों के संबंध में या खंड (ङ) में निर्दिष्ट किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय में सेवा की हो, लेकिन राज्य के मामलों के संबंध में या राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित या राज्य सरकार द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित या उसके द्वारा नियंत्रित किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कंपनी या सोसायटी या ट्रस्ट या स्वायत्त निकाय (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में कार्यरत हों, लोकपाल और उसके जांच विंग या अभियोजन विंग के अधिकारियों को ऐसे अधिकारियों के संबंध में इस अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र केवल संबंधित राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करने के बाद ही होगा;
(जी) कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य समाज या व्यक्तियों के संघ या ट्रस्ट (चाहे वह उस समय लागू किसी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं), चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, जो पूर्णतः या आंशिक रूप से सरकार द्वारा वित्तपोषित है और जिसकी वार्षिक आय केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट राशि से अधिक है, का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है;
(h) कोई भी व्यक्ति जो विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (42 ऑफ 2010) के तहत किसी विदेशी स्रोत से एक वर्ष में दस लाख रुपये से अधिक या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट ऐसी उच्च राशि का कोई भी दान प्राप्त करने वाले किसी अन्य समाज या व्यक्तियों के संघ या ट्रस्ट (चाहे वह उस समय लागू किसी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं) का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है।
स्पष्टीकरण. —धारा (f) और (g) के प्रयोजन के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई भी इकाई या संस्था, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, निगम, समाज, ट्रस्ट, व्यक्तियों का संघ, साझेदारी, एकल स्वामित्व, सीमित देयता साझेदारी (चाहे वह उस समय लागू किसी भी कानून के तहत पंजीकृत हो या नहीं), उन धाराओं के अंतर्गत आने वाली इकाइयाँ होंगी।
बशर्ते कि इस खंड में निर्दिष्ट कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (सी) के तहत लोक सेवक माना जाएगा और उस अधिनियम के प्रावधान तदनुसार लागू होंगे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, लोकपाल संसद के किसी सदन के किसी सदस्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी आरोप से संबंधित, या उससे उत्पन्न होने वाले, या उससे जुड़े किसी मामले की जाँच नहीं करेगा, चाहे वह आरोप संसद में उसके द्वारा कहे गए किसी कथन या दिए गए किसी मत से संबंधित हो, या संविधान के अनुच्छेद 105 के खंड (2) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आता हो।
(3) लोकपाल उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के किसी कृत्य या आचरण की जाँच कर सकता है, यदि ऐसा व्यक्ति उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (49 ऑफ 1988) के तहत भ्रष्टाचार के किसी आरोप से संबंधित उकसाने, रिश्वत देने या रिश्वत लेने या षड्यंत्र रचने के कृत्य में संलिप्त हो।
परंतु, किसी राज्य के मामलों से संबंधित कार्य में कार्यरत व्यक्ति के मामले में राज्य सरकार की सहमति के बिना इस धारा के अंतर्गत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
(4) कोई भी मामला जिसके संबंध में इस अधिनियम के तहत लोकपाल को शिकायत की गई है, उसे जांच आयोग अधिनियम, 1952 (60 ऑफ 1952) के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा।
स्पष्टीकरण. —संदेहों को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत शिकायत केवल उस अवधि से संबंधित होगी जिसके दौरान लोक सेवक उस पद पर कार्यरत था या सेवा कर रहा था।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
