The Railways Act, 1989 20Fअध्याय IVA · Land Acquisition for a Special Railway Project
धारा 20F · मुआवजे के रूप में देय राशि का निर्धारण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [20F. मुआवजे के रूप में देय राशि का निर्धारण। -- (1) जहां इस अधिनियम के तहत कोई भूमि अधिग्रहित की जाती है, वहां एक राशि का भुगतान किया जाएगा जो सक्षम प्राधिकारी के आदेश द्वारा निर्धारित की जाएगी।
(2) सक्षम प्राधिकारी घोषणा के प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर इस धारा के अंतर्गत निर्णय देगा और यदि उस अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं दिया जाता है, तो भूमि अधिग्रहण की संपूर्ण कार्यवाही समाप्त हो जाएगी:
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी, परिसीमा अवधि की समाप्ति के बाद, यदि वह संतुष्ट है कि विलंब अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण हुआ है, और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, वह छह महीने की विस्तारित अवधि के भीतर निर्णय दे सकता है:
इसके अलावा, यदि विस्तारित अवधि के भीतर कोई पुरस्कार दिया जाता है, तो न्याय के हित में, पात्र व्यक्ति को पुरस्कार देने में हुई देरी के लिए, विस्तारित अवधि के दौरान प्रत्येक माह, पुरस्कार के मूल्य के पांच प्रतिशत से कम की दर से, अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा।
(3) यदि इस अधिनियम के अधीन किसी भूमि पर उपयोग का अधिकार या सुखाधिकार के स्वरूप का कोई अधिकार अधिग्रहित किया जाता है, तो उस भूमि के स्वामी तथा किसी अन्य व्यक्ति को, जिसका उस भूमि में उपभोग का अधिकार ऐसे अधिग्रहण के कारण किसी भी प्रकार से प्रभावित हुआ हो, उपधारा (1) के अधीन उस भूमि के लिए निर्धारित राशि का दस प्रतिशत की दर से राशि का भुगतान किया जाएगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन राशि निर्धारित करने से पहले, सक्षम प्राधिकारी दो स्थानीय समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करेगा, जिनमें से एक स्थानीय भाषा में होगा, जिसमें अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों से दावे आमंत्रित किए जाएंगे।
(5) ऐसे नोटिस में भूमि का विवरण दिया जाएगा तथा ऐसी भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों को धारा 20डी की उपधारा (2) में निर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी के समक्ष किसी समय और स्थान पर स्वयं या किसी एजेंट या किसी विधिक व्यवसायी के माध्यम से उपस्थित होने तथा ऐसी भूमि में अपने-अपने हित की प्रकृति बताने के लिए कहा जाएगा।
(6) यदि उपधारा (1) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (3) के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित राशि किसी भी पक्ष को स्वीकार्य नहीं है, तो किसी भी पक्ष द्वारा आवेदन किए जाने पर, केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा निर्धारित तरीके से राशि निर्धारित की जाएगी।
(7) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के प्रावधान इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक मध्यस्थता पर लागू होंगे।
(8) सक्षम प्राधिकारी या मध्यस्थ उपधारा (1) या उपधारा (6) के अधीन मुआवजे की राशि निर्धारित करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगा--
(क) धारा 20ए के तहत अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि पर भूमि का बाजार मूल्य;
(ख) यदि किसी हितधारक को भूमि पर कब्जा लेने के समय, ऐसी भूमि को अन्य भूमि से अलग करने के कारण कोई क्षति हुई हो;
(ग) यदि भूमि पर कब्जा लेने के समय संबंधित व्यक्ति को अधिग्रहण के कारण उसकी अन्य अचल संपत्ति या उसकी आय पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से कोई क्षति हुई हो;
(घ) यदि भूमि के अधिग्रहण के परिणामस्वरूप, संबंधित व्यक्ति को अपना निवास स्थान या व्यवसाय का स्थान बदलने के लिए विवश होना पड़ता है, तो ऐसे परिवर्तन से संबंधित उचित व्यय, यदि कोई हो।
(9) उपर्युक्त प्रावधान के अनुसार भूमि के बाजार मूल्य के अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकारी या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, अधिग्रहण की अनिवार्य प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक मामले में ऐसे बाजार मूल्य पर साठ प्रतिशत राशि प्रदान करेगा।]
(2) सक्षम प्राधिकारी घोषणा के प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर इस धारा के अंतर्गत निर्णय देगा और यदि उस अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं दिया जाता है, तो भूमि अधिग्रहण की संपूर्ण कार्यवाही समाप्त हो जाएगी:
बशर्ते कि सक्षम प्राधिकारी, परिसीमा अवधि की समाप्ति के बाद, यदि वह संतुष्ट है कि विलंब अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण हुआ है, और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, वह छह महीने की विस्तारित अवधि के भीतर निर्णय दे सकता है:
इसके अलावा, यदि विस्तारित अवधि के भीतर कोई पुरस्कार दिया जाता है, तो न्याय के हित में, पात्र व्यक्ति को पुरस्कार देने में हुई देरी के लिए, विस्तारित अवधि के दौरान प्रत्येक माह, पुरस्कार के मूल्य के पांच प्रतिशत से कम की दर से, अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा।
(3) यदि इस अधिनियम के अधीन किसी भूमि पर उपयोग का अधिकार या सुखाधिकार के स्वरूप का कोई अधिकार अधिग्रहित किया जाता है, तो उस भूमि के स्वामी तथा किसी अन्य व्यक्ति को, जिसका उस भूमि में उपभोग का अधिकार ऐसे अधिग्रहण के कारण किसी भी प्रकार से प्रभावित हुआ हो, उपधारा (1) के अधीन उस भूमि के लिए निर्धारित राशि का दस प्रतिशत की दर से राशि का भुगतान किया जाएगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन राशि निर्धारित करने से पहले, सक्षम प्राधिकारी दो स्थानीय समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करेगा, जिनमें से एक स्थानीय भाषा में होगा, जिसमें अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों से दावे आमंत्रित किए जाएंगे।
(5) ऐसे नोटिस में भूमि का विवरण दिया जाएगा तथा ऐसी भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों को धारा 20डी की उपधारा (2) में निर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी के समक्ष किसी समय और स्थान पर स्वयं या किसी एजेंट या किसी विधिक व्यवसायी के माध्यम से उपस्थित होने तथा ऐसी भूमि में अपने-अपने हित की प्रकृति बताने के लिए कहा जाएगा।
(6) यदि उपधारा (1) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (3) के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित राशि किसी भी पक्ष को स्वीकार्य नहीं है, तो किसी भी पक्ष द्वारा आवेदन किए जाने पर, केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा निर्धारित तरीके से राशि निर्धारित की जाएगी।
(7) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के प्रावधान इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक मध्यस्थता पर लागू होंगे।
(8) सक्षम प्राधिकारी या मध्यस्थ उपधारा (1) या उपधारा (6) के अधीन मुआवजे की राशि निर्धारित करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगा--
(क) धारा 20ए के तहत अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि पर भूमि का बाजार मूल्य;
(ख) यदि किसी हितधारक को भूमि पर कब्जा लेने के समय, ऐसी भूमि को अन्य भूमि से अलग करने के कारण कोई क्षति हुई हो;
(ग) यदि भूमि पर कब्जा लेने के समय संबंधित व्यक्ति को अधिग्रहण के कारण उसकी अन्य अचल संपत्ति या उसकी आय पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से कोई क्षति हुई हो;
(घ) यदि भूमि के अधिग्रहण के परिणामस्वरूप, संबंधित व्यक्ति को अपना निवास स्थान या व्यवसाय का स्थान बदलने के लिए विवश होना पड़ता है, तो ऐसे परिवर्तन से संबंधित उचित व्यय, यदि कोई हो।
(9) उपर्युक्त प्रावधान के अनुसार भूमि के बाजार मूल्य के अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकारी या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, अधिग्रहण की अनिवार्य प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक मामले में ऐसे बाजार मूल्य पर साठ प्रतिशत राशि प्रदान करेगा।]
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