LLP Act 60अध्याय XII · Compromise, Arrangement or Reconstruction of Limited Liability Partnerships
धारा 60 · समझौता, या सीमित देयता साझेदारी की व्यवस्था।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां कोई समझौता या व्यवस्था प्रस्तावित की जाती है--
(क) एक सीमित देयता साझेदारी और उसके लेनदारों के बीच; या
(ख) एक सीमित देयता साझेदारी और उसके साझेदारों के बीच,
ट्रिब्यूनल, सीमित देयता साझेदारी या सीमित देयता साझेदारी के किसी लेनदार या साझेदार के आवेदन पर, या परिसमापन की प्रक्रिया में सीमित देयता साझेदारी के मामले में, परिसमापक के आवेदन पर, लेनदारों या साझेदारों की बैठक बुलाने, आयोजित करने और संचालित करने का आदेश दे सकता है, जैसा भी मामला हो, उस तरीके से जैसा निर्धारित किया जाए या जैसा ट्रिब्यूनल निर्देश दे।
(2) यदि बैठक में लेनदारों या साझेदारों (जैसा भी मामला हो) के मूल्य के तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करने वाला बहुमत किसी समझौते या व्यवस्था पर सहमत हो जाता है, तो न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकृत होने पर वह समझौता या व्यवस्था आदेश द्वारा सभी लेनदारों या सभी साझेदारों (जैसा भी मामला हो) और साथ ही सीमित देयता साझेदारी पर, या परिसमापन की जा रही सीमित देयता साझेदारी के मामले में, परिसमापक और सीमित देयता साझेदारी के अंशदाताओं पर बाध्यकारी होगी।
बशर्ते कि न्यायाधिकरण द्वारा किसी भी समझौते या व्यवस्था को मंजूरी देने वाला कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि न्यायाधिकरण संतुष्ट न हो जाए कि सीमित देयता भागीदारी या कोई अन्य व्यक्ति जिसके द्वारा उप-धारा (1) के तहत आवेदन किया गया है, ने न्यायाधिकरण को हलफनामे या अन्यथा के माध्यम से सीमित देयता भागीदारी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया है, जिसमें सीमित देयता भागीदारी की नवीनतम वित्तीय स्थिति और सीमित देयता भागीदारी के संबंध में किसी भी जांच कार्यवाही का लंबित होना शामिल है।
(3) उपधारा (2) के तहत न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश को सीमित देयता साझेदारी द्वारा ऐसे आदेश पारित करने के तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाएगा और यह आदेश दाखिल होने के बाद ही प्रभावी होगा।
1 [(4) यदि उपधारा (3) के प्रावधानों का पालन करने में चूक की जाती है, तो सीमित देयता साझेदारी और उसका प्रत्येक नामित साझेदार दस हजार रुपये के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा, और निरंतर चूक की स्थिति में, पहली चूक के बाद प्रत्येक दिन के लिए सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी चूक जारी रहती है, सीमित देयता साझेदारी के लिए अधिकतम एक लाख रुपये और प्रत्येक नामित साझेदार के लिए पचास हजार रुपये तक।]
(5) इस धारा के अंतर्गत न्यायाधिकरण को आवेदन प्राप्त होने के बाद, वह किसी भी समय सीमित देयता भागीदारी के विरुद्ध किसी भी मुकदमे या कार्यवाही के प्रारंभ या निरंतरता को, न्यायाधिकरण द्वारा उचित समझे जाने वाली शर्तों पर, आवेदन का अंतिम निपटारा होने तक स्थगित कर सकता है।
(क) एक सीमित देयता साझेदारी और उसके लेनदारों के बीच; या
(ख) एक सीमित देयता साझेदारी और उसके साझेदारों के बीच,
ट्रिब्यूनल, सीमित देयता साझेदारी या सीमित देयता साझेदारी के किसी लेनदार या साझेदार के आवेदन पर, या परिसमापन की प्रक्रिया में सीमित देयता साझेदारी के मामले में, परिसमापक के आवेदन पर, लेनदारों या साझेदारों की बैठक बुलाने, आयोजित करने और संचालित करने का आदेश दे सकता है, जैसा भी मामला हो, उस तरीके से जैसा निर्धारित किया जाए या जैसा ट्रिब्यूनल निर्देश दे।
(2) यदि बैठक में लेनदारों या साझेदारों (जैसा भी मामला हो) के मूल्य के तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करने वाला बहुमत किसी समझौते या व्यवस्था पर सहमत हो जाता है, तो न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकृत होने पर वह समझौता या व्यवस्था आदेश द्वारा सभी लेनदारों या सभी साझेदारों (जैसा भी मामला हो) और साथ ही सीमित देयता साझेदारी पर, या परिसमापन की जा रही सीमित देयता साझेदारी के मामले में, परिसमापक और सीमित देयता साझेदारी के अंशदाताओं पर बाध्यकारी होगी।
बशर्ते कि न्यायाधिकरण द्वारा किसी भी समझौते या व्यवस्था को मंजूरी देने वाला कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि न्यायाधिकरण संतुष्ट न हो जाए कि सीमित देयता भागीदारी या कोई अन्य व्यक्ति जिसके द्वारा उप-धारा (1) के तहत आवेदन किया गया है, ने न्यायाधिकरण को हलफनामे या अन्यथा के माध्यम से सीमित देयता भागीदारी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया है, जिसमें सीमित देयता भागीदारी की नवीनतम वित्तीय स्थिति और सीमित देयता भागीदारी के संबंध में किसी भी जांच कार्यवाही का लंबित होना शामिल है।
(3) उपधारा (2) के तहत न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश को सीमित देयता साझेदारी द्वारा ऐसे आदेश पारित करने के तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाएगा और यह आदेश दाखिल होने के बाद ही प्रभावी होगा।
1 [(4) यदि उपधारा (3) के प्रावधानों का पालन करने में चूक की जाती है, तो सीमित देयता साझेदारी और उसका प्रत्येक नामित साझेदार दस हजार रुपये के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा, और निरंतर चूक की स्थिति में, पहली चूक के बाद प्रत्येक दिन के लिए सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी चूक जारी रहती है, सीमित देयता साझेदारी के लिए अधिकतम एक लाख रुपये और प्रत्येक नामित साझेदार के लिए पचास हजार रुपये तक।]
(5) इस धारा के अंतर्गत न्यायाधिकरण को आवेदन प्राप्त होने के बाद, वह किसी भी समय सीमित देयता भागीदारी के विरुद्ध किसी भी मुकदमे या कार्यवाही के प्रारंभ या निरंतरता को, न्यायाधिकरण द्वारा उचित समझे जाने वाली शर्तों पर, आवेदन का अंतिम निपटारा होने तक स्थगित कर सकता है।
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